MP Board Class 12 Hindi – Set B Model Paper 2025–26
Class 12th Hindi Model Paper Set B
MP Board कक्षा 12वीं हिंदी मॉडल पेपर (Set B)
MP Board कक्षा 12वीं हिंदी (Set B) मॉडल प्रश्न पत्र नवीनतम सिलेबस और बोर्ड परीक्षा पैटर्न के अनुसार तैयार किया गया है। यह Set B उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है जो Set A का अभ्यास करने के बाद अब भिन्न प्रकार के प्रश्नों के माध्यम से अपनी तैयारी को और मजबूत करना चाहते हैं।
🔹 हिंदी Model Paper Set B की मुख्य विशेषताएँ
✔️ नवीनतम MP Board पाठ्यक्रम पर आधारित
✔️ Set B के अनुसार प्रश्नों का अलग संयोजन
✔️ गद्य, पद्य, व्याकरण एवं लेखन से जुड़े प्रश्न
✔️ वस्तुनिष्ठ, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों का संतुलन
✔️ उत्तर लेखन शैली और समय प्रबंधन में सहायक
✔️ वार्षिक परीक्षा 2025–26 के लिए अत्यंत उपयोगी
विवरण
- कक्षा: 12वीं
- विषय: हिंदी
- मॉडल पेपर: Set B
- बोर्ड: MP Board
इस हिंदी Set B मॉडल पेपर के नियमित अभ्यास से विद्यार्थी अपठित गद्यांश, काव्यांश, निबंध, पत्र-लेखन एवं व्याकरण जैसे महत्वपूर्ण भागों पर बेहतर पकड़ बना सकते हैं, जिससे बोर्ड परीक्षा में आत्मविश्वास के साथ अच्छे अंक प्राप्त किए जा सकें।
कक्षा 12वीं - हिन्दी
Created by: D Septa | पूर्णांक: 80 | समय: 3 घंटे
(ii) काले मेघा पानी दे -> (ख) रघुवीर सहाय
(iii) अतीत में दबे पाँव -> (ग) ओम थानवी
(iv) हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग -> (घ) धर्मवीर भारती
(v) विरोधाभास -> (ङ) भक्ति काल
(vi) रचनात्मक लेखन -> (च) फीचर
(vii) कवित्त -> (छ) वर्णिक छंद
1. कैमरे में बंद अपाहिज → (ख) रघुवीर सहाय
2. काले मेघा पानी दे → (घ) धर्मवीर भारती
3. अतीत में दबे पाँव → (ग) ओम थानवी
4. हिंदी साहित्य का स्वर्ण युग → (ङ) भक्ति काल
5. विरोधाभास → (क) अलंकार
6. रचनात्मक लेखन → (च) फीचर
7. कवित्त → (छ) वर्णिक छंद
1. व्यक्तिवाद की प्रधानता: कवि अपने सुख-दुख और निजी अनुभूतियों को व्यक्त करता है।
2. प्रकृति का मानवीकरण: प्रकृति को सजीव मानकर उस पर मानवीय भावनाओं का आरोपण किया जाता है।
कवि हरिवंश राय बच्चन का स्वभाव कोमल और वाणी मृदु (शीतल) है, लेकिन उनके हृदय में प्रेम की तीव्रता और वियोग की वेदना की आग जल रही है। वे अपनी विनम्र वाणी में भी दुनिया के प्रति असंतोष और विद्रोह का भाव रखते हैं।
जिस प्रकार एक अवधूत (सन्यासी) सुख-दुख, गर्मी-सर्दी में समान रहता है, उसी प्रकार शिरीष का वृक्ष भी भीषण गर्मी, लू और उमस में अविचल खड़ा रहता है और फूलों से लदा रहता है। उसकी यह समदर्शिता उसे अवधूत बनाती है।
लुट्टन का कोई गुरु नहीं था। उसने ढोल की आवाज से ही कुश्ती के दांव-पेच सीखे थे। ढोल की थाप उसे उत्साह देती थी और उसे बताती थी कि कब और कैसे वार करना है। इसलिए उसने ढोल को ही अपना गुरु माना।
1. परंपरावादी: वे पुराने मूल्यों और संस्कारों से जुड़े हुए हैं और आधुनिक बदलावों को सहजता से नहीं अपना पाते।
2. सिद्धांतवादी: वे अपने मेंटर किशनदा के आदर्शों पर चलते हैं और 'सादा जीवन उच्च विचार' में विश्वास रखते हैं।
1. फीचर का उद्देश्य पाठकों को सूचना देने के साथ-साथ उनका मनोरंजन करना भी होता है।
2. फीचर में लेखक के निजी विचार, भावनाएँ और दृष्टिकोण का समावेश होता है।
विभाव: स्थायी भाव को जाग्रत करने वाले कारण (वस्तु या परिस्थिति) विभाव कहलाते हैं।
अनुभाव: भाव जाग्रत होने के बाद आश्रय की शारीरिक चेष्टाएँ (जैसे कांपना, पसीना आना) अनुभाव कहलाती हैं।
वे शब्द जो किसी विशेष ज्ञान-विज्ञान, शास्त्र या व्यवसाय (जैसे- विज्ञान, कानून, प्रशासन) में विशिष्ट अर्थ में प्रयुक्त होते हैं, तकनीकी शब्द कहलाते हैं।
उदाहरण: गुरुत्वाकर्षण, याचिका, निविदा, प्रतिभूति।
संदेह: इसमें समानता के कारण अनिश्चय की स्थिति बनी रहती है, अंत तक पता नहीं चलता कि वस्तु क्या है (सारी है या नारी है)।
भ्रांतिमान: इसमें समानता के कारण एक वस्तु को दूसरी वस्तु मान लिया जाता है (भ्रम पक्का हो जाता है)।
1. सड़कें समकोण पर काटती थीं (ग्रिड पद्धति)।
2. उत्तम जल निकासी व्यवस्था (ढकी हुई नालियाँ) थी।
(i) दो रचनाएँ (ii) भावपक्ष-कलापक्ष (iii) साहित्य में स्थान
(i) रचनाएँ: सीढ़ियों पर धूप में, आत्महत्या के विरुद्ध, हँसो हँसो जल्दी हँसो।
(ii) भावपक्ष: वे समकालीन हिंदी कविता के संवेदनशील कवि हैं। उन्होंने सड़क, चौराहा, दफ्तर और अखबार की दुनिया को कविता का विषय बनाया। कलापक्ष: उनकी भाषा बोलचाल की खुरदरी भाषा है, जिसमें अनावश्यक शब्दों का प्रयोग नहीं है। वे मुक्त छंद के कवि हैं।
(iii) स्थान: 'दूसरा सप्तक' के महत्वपूर्ण कवि और पत्रकारिता साहित्य में उनका विशिष्ट स्थान है।
(i) दो रचनाएँ (ii) भाषा-शैली (iii) साहित्य में स्थान
(i) रचनाएँ: मैला आंचल (उपन्यास), ठुमरी, अग्निखोर (कहानी संग्रह)।
(ii) भाषा-शैली: रेणु जी आंचलिक कथाकार हैं। उनकी भाषा में लोक-जीवन के शब्द, मुहावरे और लोकोक्तियों का सुंदर प्रयोग है। उनकी शैली वर्णनात्मक और चित्रात्मक है, जो पाठक के सामने ग्रामीण दृश्य खड़ा कर देती है।
(iii) स्थान: हिंदी साहित्य में 'आंचलिक उपन्यास' के प्रवर्तक के रूप में उनका नाम अमर है।
भाव पल्लवन: निरंतर अभ्यास से मूर्ख व्यक्ति भी विद्वान बन सकता है। जिस प्रकार कुएं की जगत पर बार-बार रस्सी की रगड़ लगने से कठोर पत्थर पर भी निशान पड़ जाते हैं, उसी प्रकार बार-बार प्रयत्न करने से कठिन कार्य भी सरल हो जाता है। सफलता का मूल मंत्र प्रतिभा नहीं, बल्कि सतत अभ्यास और परिश्रम है। असफलता से निराश होने के बजाय अभ्यास करते रहना चाहिए।
1. कहानी श्रव्य/पठनीय है, नाटक दृश्य-श्रव्य (मंचन योग्य) है।
2. कहानी में लेखक सब कुछ वर्णन कर सकता है, नाटक में पात्रों के संवादों और अभिनय से कथा आगे बढ़ती है।
3. कहानी का आकार छोटा या बड़ा हो सकता है, नाटक का आकार समय सीमा (मंचन समय) से बंधा होता है।
(i) उसके पास केवल मात्र पचास रुपये हैं।
(ii) कृपया मेरे घर आने की कृपा करें।
(iii) बंदूक एक उपयोगी शस्त्र है।
1. समाचार का मुख्य उद्देश्य सूचना देना है, फीचर का उद्देश्य सूचना के साथ मनोरंजन और शिक्षित करना है।
2. समाचार 'उल्टा पिरामिड' शैली में लिखा जाता है, फीचर की कोई निश्चित शैली नहीं होती (अक्सर कथात्मक)।
3. समाचार में लेखक अपने विचार नहीं डाल सकता, फीचर में लेखक की राय और दृष्टिकोण महत्वपूर्ण होता है।
(i) उसके पास मात्र पचास रुपये हैं। (या 'केवल पचास रुपये')
(ii) कृपया मेरे घर आएं। (दो बार कृपा नहीं आएगा)
(iii) बंदूक एक उपयोगी अस्त्र है। ('शस्त्र' हाथ में रखकर चलाया जाता है, 'अस्त्र' फेंककर या दूर से - नोट: हिंदी व्याकरण में अक्सर बंदूक को अस्त्र माना जाता है, पर कुछ जगह शस्त्र। MP बोर्ड की कुंजी के अनुसार इसे शस्त्र से अस्त्र या सिर्फ 'हथियार' में बदलें। सही: "बंदूक एक उपयोगी हथियार है।")
"अट्टालिका नहीं है रे
आतंक-भवन
सदा पंक पर ही होता है
जल-विप्लव-प्लावन"
"घिर रहे थे घुंघराले बाल,
अंस अवलंबित मुख के पास,
नील घन-शावक से सुकुमार,
सुधा भरने को विधु के पास।"
संदर्भ: 'आरोह भाग-2', कविता 'बादल राग', कवि 'सूर्यकांत त्रिपाठी निराला' ।
प्रसंग: कवि बादलों के विनाशकारी रूप और क्रांति का चित्रण कर रहे हैं, जो शोषकों को भयभीत करता है।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि पूंजीपतियों के ऊँचे-ऊँचे महल केवल भवन नहीं हैं, बल्कि गरीबों के लिए 'आतंक के भवन' हैं। लेकिन जब क्रांति (बाढ़) आती है, तो वह सबसे पहले कीचड़ (पंक) को ही डुबोती है। अर्थात्, क्रांति का सबसे गहरा असर आम आदमी पर नहीं, बल्कि शोषक वर्ग पर पड़ता है। बाढ़ का विनाशकारी प्रभाव सदा कीचड़ (बुराइयों/शोषण) पर ही होता है।
संदर्भ: 'कामायनी' (श्रद्धा-मनु प्रसंग), कवि 'जयशंकर प्रसाद' ।
व्याख्या: कवि श्रद्धा के सौंदर्य का वर्णन करते हुए कहते हैं कि उसके घुंघराले बाल उसके कंधों (अंस) पर लटके हुए हैं और मुख के पास ऐसे शोभा दे रहे हैं, मानो नीले बादलों के छोटे बच्चे (घन-शावक) चंद्रमा (विधु/मुख) के पास अमृत (सुधा) पीने के लिए आए हों।
"मैं तो सोचता हूँ कि पुराने की यह अधिकार-लिप्सा क्यों नहीं समय रहते सावधान हो जाती? जरा और मृत्यु, ये दोनों ही जगत के अतिपरिचित और अतिप्रमाणिक सत्य हैं..."
"जीजी बोलीं - देख, बिना त्याग के दान नहीं होता। अगर तेरे पास लाखों-करोड़ों रुपये हैं और उसमें से तूने दो-चार रुपये किसी को दे दिए, तो यह क्या त्याग हुआ?"
संदर्भ: पाठ 'शिरीष के फूल', लेखक 'हजारी प्रसाद द्विवेदी' ।
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि बुढ़ापा और मृत्यु अटल सत्य हैं। फिर भी लोग अपनी कुर्सी (अधिकार) से चिपके रहना चाहते हैं। वे समय रहते नई पीढ़ी को जगह क्यों नहीं देते? शिरीष का फूल भी झड़ता नहीं जब तक नया फूल उसे धकेल न दे। समाज में भी बुजुर्गों को समय रहते अपना स्थान त्याग देना चाहिए, अन्यथा काल उन्हें जबरदस्ती हटा देगा।
संदर्भ: पाठ 'काले मेघा पानी दे', लेखक 'धर्मवीर भारती' ।
व्याख्या: जीजी लेखक को त्याग का महत्व समझा रही हैं। वे कहती हैं कि फालतू पड़ी चीज को देना दान नहीं है। असली त्याग वह है जब आप उस चीज को दें जिसकी आपको स्वयं बहुत जरूरत है। कष्ट सहकर दूसरों की भलाई के लिए दिया गया दान ही फलित होता है।
प्रति,
जिलाधीश महोदय,
जिला - बड़वानी (म.प्र.)
विषय: परीक्षाओं के दौरान ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर रोक लगाने बाबत।
मान्यवर,
सविनय निवेदन है कि माध्यमिक शिक्षा मंडल की बोर्ड परीक्षाएँ निकट हैं। हम सभी छात्र अपनी तैयारी में व्यस्त हैं। परंतु नगर में जगह-जगह देर रात तक तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजते रहते हैं, जिससे हमारे अध्ययन में बाधा उत्पन्न होती है और एकाग्रता भंग होती है।
अतः आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि छात्रहित को ध्यान में रखते हुए परीक्षा काल तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों के प्रयोग पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाने का आदेश प्रदान करें।
प्रार्थी,
समस्त छात्रगण,
सांदीपनि विद्यालय, तलवाड़ा बुजुर्ग।
दिनांक: XX/XX/2026
प्रिय मित्र राहुल,
स्नेह।
मुझे यह जानकर अत्यंत हर्ष हुआ कि तुमने राज्य स्तरीय अंतर-विद्यालयीन वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया है। तुम्हारी तर्कशक्ति और वक्तृत्व कला हमेशा से प्रशंसनीय रही है। यह न केवल तुम्हारे लिए बल्कि हमारे विद्यालय और परिवार के लिए भी गौरव की बात है।
मेरी ओर से तुम्हें इस शानदार उपलब्धि पर हार्दिक बधाई। आशा है भविष्य में तुम और भी ऊँचाइयों को छुओगे।
तुम्हारा अभिन्न मित्र,
समीर
1. नारी सशक्तिकरण
रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. नारी की वर्तमान स्थिति, 3. सशक्तिकरण की आवश्यकता, 4. सरकार के प्रयास, 5. उपसंहार।
प्रस्तावना: "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता।" नारी समाज की धुरी है। नारी सशक्तिकरण का अर्थ है महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से इतना सक्षम बनाना कि वे अपने निर्णय स्वयं ले सकें।
आवश्यकता: देश के विकास के लिए आधी आबादी का विकास जरूरी है। शिक्षा और रोजगार में महिलाओं की भागीदारी से ही समाज उन्नत होगा।
उपसंहार: आज नारी हर क्षेत्र (सेना, अंतरिक्ष, राजनीति) में परचम लहरा रही है। हमें उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना होगा।
2. कंप्यूटर: आज की आवश्यकता
रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. कंप्यूटर की उपयोगिता, 3. विभिन्न क्षेत्रों में महत्व, 4. दुष्परिणाम, 5. उपसंहार।
प्रस्तावना: कंप्यूटर आधुनिक विज्ञान का अद्भुत आविष्कार है। इसने मानव जीवन को तीव्र और त्रुटिहीन बना दिया है। आज इसे 'इलेक्ट्रॉनिक मस्तिष्क' कहा जाता है।
उपयोगिता: शिक्षा, बैंकिंग, रेलवे, चिकित्सा और संचार के क्षेत्र में कंप्यूटर अनिवार्य हो गया है। इंटरनेट ने इसे और शक्तिशाली बना दिया है।
उपसंहार: कंप्यूटर आज विलासिता नहीं, आवश्यकता है। हमें इसका सदुपयोग कर देश को डिजिटल युग में आगे ले जाना चाहिए।
3. स्वच्छ भारत अभियान
रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. अभियान का उद्देश्य, 3. स्वच्छता का महत्व, 4. जनभागीदारी, 5. उपसंहार।
प्रस्तावना: "स्वच्छता भक्ति से भी बढ़कर है।" (गांधीजी)। इसी सपने को पूरा करने के लिए 2 अक्टूबर 2014 को प्रधानमंत्री मोदी जी ने 'स्वच्छ भारत अभियान' शुरू किया।
महत्व: गंदगी बीमारियों की जड़ है। स्वच्छ वातावरण से स्वास्थ्य सुधरता है और कार्यक्षमता बढ़ती है।
उपसंहार: यह केवल सरकार का नहीं, हर नागरिक का कर्तव्य है। हमें 'न गंदगी करेंगे, न करने देंगे' का संकल्प लेना चाहिए।
4. विद्यार्थी और राजनीति
रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. राजनीति का अर्थ, 3. विद्यार्थियों के लिए लाभ-हानि, 4. सही दृष्टिकोण, 5. उपसंहार।
प्रस्तावना: विद्यार्थी देश का भविष्य हैं। राजनीति देश चलाने की व्यवस्था है। क्या दोनों का मिलन होना चाहिए? यह एक विवादित प्रश्न है।
दृष्टिकोण: विद्यार्थियों को राजनीति का ज्ञान होना चाहिए, जागरूक होना चाहिए, लेकिन सक्रिय दलीय राजनीति और गुंडागर्दी से दूर रहना चाहिए। उनका प्राथमिक कर्तव्य अध्ययन है।
उपसंहार: स्वस्थ राजनीति छात्र जीवन में नेतृत्व गुण विकसित करती है, लेकिन गंदी राजनीति उनका भविष्य बर्बाद कर सकती है।
⚠️ डिस्क्लेमर (प्रश्न–उत्तर सम्बन्धी):
इस मॉडल प्रश्न पत्र में दिए गए सभी प्रश्न एवं उत्तर
केवल शैक्षणिक अभ्यास और परीक्षा तैयारी के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।
ये प्रश्न–उत्तर MP Board की आधिकारिक प्रश्न पत्र या उत्तर कुंजी नहीं हैं।
वास्तविक परीक्षा में प्रश्नों की संख्या, क्रम एवं शब्दों में परिवर्तन संभव है।
छात्र परीक्षा में केवल इन प्रश्न–उत्तर पर निर्भर न रहें, बल्कि
आधिकारिक पाठ्यक्रम एवं पुस्तकों का अध्ययन अवश्य करें।
© MP EDUCATION GYAN DEEP
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