MP Board Class 10 Hindi Model Paper Set A
विद्यार्थियों के लिए परीक्षा की बेहतरीन तैयारी का अवसर है। यह मॉडल पेपर नवीनतम परीक्षा पैटर्न एवं ब्लूप्रिंट पर आधारित है, जिससे छात्र वास्तविक परीक्षा का अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।
🔹 मुख्य बिंदु (Highlights)
📚 विषय: हिन्दी
🏫 कक्षा: 10वीं (MP Board)
📝 पेपर सेट: Set A
⏳ समय अवधि: 3 घंटे
📊 पूर्णांक: 75 अंक
इस मॉडल पेपर की विशेषताएँ
- नवीनतम सिलेबस पर आधारित
- बोर्ड परीक्षा पैटर्न के अनुसार प्रश्न
- महत्वपूर्ण प्रश्नों का समावेश
- लेखन कौशल (पत्र, निबंध, संवाद, सूचना लेखन) का अभ्यास
- पुनरावृत्ति (Revision) के लिए उपयोगी
छात्रों के लिए लाभ
- परीक्षा से पहले आत्ममूल्यांकन
- समय प्रबंधन का अभ्यास
- संभावित प्रश्नों की समझ
- आत्मविश्वास में वृद्धि
Class 10th Hindi Model Paper Set A
कक्षा 10वीं - हिन्दी
Created by : D. Septa | पूर्णांक: 75 | समय: 3 घंटे
(ii) मानवीय क्रियाओं का आरोप -> (ख) अव्ययीभाव समास
(iii) प्रतिदिन -> (ग) जयशंकर प्रसाद
(iv) नौबतखाने में इबादत -> (घ) मानवीकरण अलंकार
(v) एक ही शब्द की आवृत्ति -> (ङ) महाकाव्य
(vi) रामचरितमानस -> (च) पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार
1. कामायनी → (ग) जयशंकर प्रसाद (महाकाव्य)
2. मानवीय क्रियाओं का आरोप → (घ) मानवीकरण अलंकार (प्रकृति पर मानव सुलभ क्रियाओं का आरोप)
3. प्रतिदिन → (ख) अव्ययीभाव समास (दिन-दिन)
4. नौबतखाने में इबादत → (क) यतीन्द्र मिश्र (बिस्मिल्ला खाँ पर व्यक्तिचित्र)
5. एक ही शब्द की आवृत्ति → (च) पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार (जैसे- धीरे-धीरे)
6. रामचरितमानस → (ङ) महाकाव्य (तुलसीदास रचित)
(अथवा) उत्तर: लक्ष्मण ने तर्क दिया कि यह धनुष बहुत पुराना और कमजोर था। राम के छूते ही यह टूट गया। बचपन में हमने ऐसे कई धनुष तोड़े हैं, तब तो आपने कभी क्रोध नहीं किया।
(अथवा) उत्तर: बच्चे की दंतुरित मुसकान देखकर कवि का मन प्रसन्न हो उठता है। उसे लगता है कि यह मुस्कान मृतक में भी जान डाल सकती है और धूल से सना बच्चा कमल के फूल जैसा लगता है।
2. महाकाव्य में 8 या अधिक सर्ग होते हैं, खंडकाव्य में एक ही सर्ग होता है।
(अथवा) उत्तर: किसी की विचित्र वेशभूषा, वाणी या चेष्टा को देखकर मन में जो विनोद (हंसी) का भाव उत्पन्न होता है, वहाँ हास्य रस होता है।
उदाहरण: "बंदर ने कहा बंदरिया से, चलो नहाने गंगा।"
(अथवा) उत्तर: जहाँ जड़ प्रकृति (निर्जीव वस्तुओं) पर मानवीय भावनाओं या क्रियाओं का आरोप किया जाता है, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है। जैसे - "फूल हँसे, कलियाँ मुसकाईं।"
(अथवा) उत्तर: बेटे की मृत्यु पर भगत ने रोने के बजाय उत्सव मनाने को कहा। उन्होंने शव को फूल-मालाओं से सजाया और कबीर के पद गाते हुए कहा कि आत्मा परमात्मा से मिल गई है, यह आनंद का क्षण है।
(अथवा) उत्तर: शहनाई का प्रयोग शुभ कार्यों (विवाह, उत्सव) में किया जाता है और बिस्मिल्ला खाँ शहनाई वादन में सर्वश्रेष्ठ थे। वे 80 वर्षों तक सुर की इबादत करते रहे, इसलिए उन्हें मंगलध्वनि का नायक कहा गया है।
रामवृक्ष बेनीपुरी: माटी की मूरतें, गेहूँ और गुलाब।
यशपाल: झूठा सच, ज्ञानदान।
(अथवा) उत्तर:
1. नाटक में कई अंक होते हैं, एकांकी में एक ही अंक होता है।
2. नाटक में कथा विस्तार होता है और पात्र अधिक होते हैं, एकांकी में कथा संक्षिप्त और पात्र कम होते हैं।
(अथवा) उत्तर: लेखिका ने बताया कि प्रदूषण के कारण स्नोफॉल (बर्फबारी) कम हो गई है। हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता नष्ट हो रही है और मानसिक शांति भंग हो रही है।
1. संधि में वर्णों का मेल होता है, समास में शब्दों का मेल होता है।
2. संधि में विकार (परिवर्तन) होता है, समास में विभक्ति या शब्दों का लोप होता है।
(अथवा) उत्तर:
मुहावरा वाक्यांश होता है और वाक्य में प्रयोग होने पर ही अर्थ देता है (जैसे - 'आँख का तारा')। लोकोक्ति एक पूर्ण वाक्य होती है और स्वतंत्र रूप से प्रयोग की जा सकती है (जैसे - 'अधजल गगरी छलकत जाय')।
1. राम स्कूल जाता है। (निषेधवाचक)
2. क्या वह पढ़ रहा है? (विधानवाचक)
(क) भाग जाना - पुलिस को देखकर चोर नौ दो ग्यारह हो गया।
(ख) बहुत प्यारा - श्रवण कुमार अपने माता-पिता की आँखों के तारे थे।
(अथवा) उत्तर:
1. राम स्कूल नहीं जाता है।
2. वह पढ़ रहा है।
(अथवा) उत्तर: जब लेखक ने हिरोशिमा में एक पत्थर पर मनुष्य की काली छाया देखी, जो विस्फोट की गर्मी से भाप बनकर उड़ गया था, तब उन्हें उस त्रासदी की भयानकता की अनुभूति (प्रत्यक्ष अनुभव) हुई और वे खुद को उसका भोक्ता महसूस करने लगे।
(अथवा) उत्तर: अकर्मक क्रिया में कर्म की आवश्यकता नहीं होती (जैसे- राम सोता है)। सकर्मक क्रिया में कर्म होता है और क्रिया का फल कर्म पर पड़ता है (जैसे- राम आम खाता है)।
"ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी।
अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी।"
"मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,
मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।"
संदर्भ: यह पद पाठ्यपुस्तक 'क्षितिज भाग-2' के 'पद' पाठ से है। कवि 'सूरदास' हैं।
प्रसंग: गोपियां उद्धव पर व्यंग्य करते हुए उनकी प्रेमहीनता को उजागर कर रही हैं।
व्याख्या: गोपियां कहती हैं - हे उद्धव! तुम बड़े भाग्यवान हो जो कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम के धागे में नहीं बंधे। तुम्हारा मन उनके अनुराग में नहीं डूबा। तुम उस कमल के पत्ते के समान हो जो पानी में रहकर भी पानी से अछूता रहता है।
(अथवा) उत्तर (भावार्थ):
संदर्भ: 'आत्मकथ्य' कविता, कवि 'जयशंकर प्रसाद' द्वारा रचित।
भावार्थ: कवि कहते हैं कि मेरा मन रूपी भौंरा गुनगुना कर अपनी कौन सी दुखभरी कहानी सुनाए? देखो, जीवन रूपी वृक्ष से खुशियों की पत्तियां मुरझा कर गिर रही हैं। अर्थात, जीवन दुखों और अभावों से भरा है, इसमें कोई ऐसी महानता नहीं है जिसे आत्मकथा के रूप में लिखा जाए।
"बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-जिंदगी सब कुछ होम देने वालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है।"
"बालगोबिन भगत की संगीत साधना का चरम उत्कर्ष उस दिन देखा गया जिस दिन उनका बेटा मरा। इकलौता बेटा था वह।"
संदर्भ: पाठ 'नेताजी का चश्मा', लेखक 'स्वयं प्रकाश'।
प्रसंग: हालदार साहब कैप्टन की मृत्यु और पानवाले की संवेदनहीनता पर दुखी होकर सोचते हैं।
व्याख्या: हालदार साहब सोचते हैं कि उस देश का क्या भविष्य होगा जो देशभक्तों का मजाक उड़ाता है। कैप्टन जैसे लोग देश के लिए सब कुछ न्योछावर कर देते हैं, फिर भी लोग उन पर हंसते हैं। दूसरी तरफ, लोग स्वार्थ के लिए अपना ईमान बेचने को तैयार हैं। यह पतनशील समाज की निशानी है।
(अथवा) उत्तर:
संदर्भ: पाठ 'बालगोबिन भगत', लेखक 'रामवृक्ष बेनीपुरी' ।
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि भगत जी कबीर के भक्त थे। उनकी भक्ति की असली परीक्षा उस दिन हुई जब उनका इकलौता बेटा मरा। आम लोग ऐसे समय रोते हैं, लेकिन भगत जी ने इसे आत्मा का परमात्मा से मिलन माना और उत्सव की तरह गीत गाए। यह उनके मोह-मुक्त व्यक्तित्व की पराकाष्ठा थी।
वृक्ष हमारे जीवन का आधार हैं। वे हमें प्राणवायु (ऑक्सीजन) देते हैं और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखते हैं। 'वृक्षारोपण' का अर्थ है नए पेड़ लगाना। आज प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के खतरे के कारण वृक्षारोपण अत्यंत आवश्यक है। पेड़ मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, वर्षा कराते हैं और हमें फल-फूल देते हैं। एक पेड़ सौ पुत्रों के समान होता है। हमें अपने जन्मदिन पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए।
(अथवा) उत्तर (संवाद):
रोहन: अरे सोहन! कैसी चल रही है तुम्हारी परीक्षा की तैयारी?
सोहन: ठीक चल रही है मित्र। मैंने गणित और विज्ञान का रिवीजन पूरा कर लिया है।
रोहन: अरे वाह! मुझे तो हिंदी के व्याकरण में थोड़ी दिक्कत आ रही है।
सोहन: चिंता मत करो, हम शाम को मिलकर व्याकरण पढ़ लेंगे। मैंने कुछ नोट्स बनाए हैं।
रोहन: धन्यवाद यार! इससे मुझे बहुत मदद मिलेगी।
"अनुशासन जीवन की आधारशिला है। अनुशासन के बिना मनुष्य का जीवन उस नाव के समान है जिसका कोई खेवनहार नहीं। विद्यार्थी जीवन में तो अनुशासन का विशेष महत्व है..."
(क) उपयुक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।
(ख) अनुशासन को जीवन की आधारशिला क्यों कहा गया है?
(ग) 'आधारशिला' शब्द का अर्थ लिखिए।
(घ) गद्यांश का सारांश लिखिए।
"खड़ा हिमालय बता रहा है, डरो न आंधी पानी में।
खड़े रहो अपने पथ पर तुम, अविचल होकर हर संकट में..."
(क) शीर्षक लिखिए।
(ख) हिमालय हमें क्या संदेश दे रहा है?
(ग) 'अविचल' का विलोम शब्द लिखिए।
(घ) काव्यांश का भावार्थ लिखिए।
(क) शीर्षक: विद्यार्थी जीवन और अनुशासन।
(ख) उत्तर: क्योंकि अनुशासन के बिना जीवन लक्ष्यहीन हो जाता है। यह सफलता की नींव है।
(ग) अर्थ: नींव या बुनियाद।
(घ) सारांश: अनुशासन मनुष्य, विशेषकर विद्यार्थियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह जीवन को सही दिशा देता है। अनुशासनहीन व्यक्ति कभी सफल नहीं हो सकता।
(अथवा) उत्तर (काव्यांश):
(क) शीर्षक: दृढ़ निश्चय / हिमालय की सीख।
(ख) संदेश: जीवन में मुसीबतों (आंधी-पानी) से डरना नहीं चाहिए और लक्ष्य पर अटल रहना चाहिए।
(ग) विलोम: विचलित / अस्थिर।
(घ) भावार्थ: कवि कहते हैं कि सफलता उन्हीं को मिलती है जो हिमालय की तरह हर संकट में निडर होकर अपने कर्तव्य पथ पर डटे रहते हैं।
सेवा में,
श्रीमान प्राचार्य महोदय,
सांदीपनि विद्यालय, तलवाड़ा बुजुर्ग।
विषय: शुल्क मुक्ति हेतु आवेदन पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय का कक्षा 10वीं का छात्र हूँ। मेरे पिताजी एक छोटे किसान हैं और उनकी आय अत्यंत सीमित है। इस कारण वे मेरी विद्यालय की फीस भरने में असमर्थ हैं। मैं पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहा हूँ। अतः आपसे प्रार्थना है कि मेरी आर्थिक स्थिति को देखते हुए मेरा शिक्षण शुल्क माफ़ करने की कृपा करें।
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
नाम: (क.ख.ग)
कक्षा: 10वीं
दिनांक: XX/XX/2025
(अथवा) उत्तर (अनौपचारिक पत्र):
तलवाड़ा बुजुर्ग,
दिनांक: XX/XX/2025
प्रिय मित्र अमित,
सप्रेम नमस्ते।
आज तुम्हारा परीक्षा परिणाम देखा। यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि तुमने हाईस्कूल परीक्षा में प्रथम श्रेणी प्राप्त की है। यह तुम्हारी कड़ी मेहनत का फल है। मेरी ओर से तुम्हें बहुत-बहुत बधाई। भविष्य में भी तुम इसी प्रकार सफल रहो।
तुम्हारा मित्र,
सुमित
(क) विज्ञान के चमत्कार
(ख) पर्यावरण प्रदूषण: समस्या और निदान
(ग) विद्यार्थी और अनुशासन
(घ) खेलों का महत्व
रूपरेखा: 1. प्रस्तावना 2. चिकित्सा क्षेत्र 3. संचार और यातायात 4. बिजली और मशीनें 5. हानियां 6. उपसंहार।
1. प्रस्तावना: आज का युग विज्ञान का युग है। सुई से लेकर हवाई जहाज तक सब विज्ञान की देन है।
2. संचार और यातायात: मोबाइल, इंटरनेट ने दुनिया को मुट्ठी में कर लिया है। हम घर बैठे दुनिया की खबर ले सकते हैं। ट्रेन और हवाई जहाज ने महीनों का सफर घंटों में बदल दिया है।
3. चिकित्सा: विज्ञान ने अंधी को आंखें और बहरे को कान दिए हैं। लाइलाज बीमारियों का इलाज संभव हुआ है।
4. हानियां: परमाणु बम और मिसाइलों ने युद्ध का खतरा बढ़ा दिया है। मशीनों से बेरोजगारी और प्रदूषण बढ़ा है।
5. उपसंहार: विज्ञान एक अच्छा सेवक है लेकिन बुरा स्वामी। यदि हम इसका सही उपयोग करें तो यह पृथ्वी को स्वर्ग बना सकता है।
⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer)
इस पोस्ट में दिए गए प्रश्न एवं उत्तर केवल अभ्यास और शैक्षणिक उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। ये प्रश्न संभावित (Model) स्वरूप के हैं तथा बोर्ड परीक्षा में इन्हीं प्रश्नों के आने की कोई गारंटी नहीं है।
उत्तर संदर्भ सामग्री एवं पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किए गए हैं। छात्र अंतिम एवं प्रमाणिक जानकारी के लिए संबंधित पाठ्यपुस्तक, अधिकृत सिलेबस एवं बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का ही अनुसरण करें।
इस सामग्री का उद्देश्य विद्यार्थियों की तैयारी में सहयोग करना है, न कि किसी आधिकारिक प्रश्नपत्र का प्रतिनिधित्व करना।
MP Education Gyan Deep किसी भी प्रकार की त्रुटि या परिवर्तन के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।
✍️ MP Education Gyan Deep विद्यार्थियों के लिए लगातार महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराता है। नियमित अपडेट के लिए वेबसाइट विजिट करते रहें।
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