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MP Board कक्षा 12वीं हिंदी मॉडल पेपर (Set A)

MP Board Class 12 Hindi – Set A Model Paper 2025–26

MP Board Class 12 Hindi – Set A Model Paper 2025–26

Class 12th Hindi Model Paper Set A

MP Board कक्षा 12वीं हिंदी मॉडल पेपर (Set A)

MP Board कक्षा 12वीं हिंदी (Set A) मॉडल प्रश्न पत्र नवीनतम पाठ्यक्रम और बोर्ड परीक्षा पैटर्न के अनुसार तैयार किया गया है। यह Set A विद्यार्थियों को हिंदी विषय की मूल अवधारणाओं की स्पष्ट समझ और बोर्ड परीक्षा स्तर के प्रश्नों का सही अभ्यास कराने में सहायक है।

🔹 हिंदी Model Paper Set A की विशेषताएँ

✔️ नवीनतम MP Board सिलेबस पर आधारित
✔️ गद्य, पद्य, व्याकरण एवं लेखन से जुड़े प्रश्न शामिल
✔️ वस्तुनिष्ठ, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों का संतुलन
✔️ उत्तर लेखन शैली सुधारने में सहायक
✔️ वार्षिक परीक्षा 2025–26 के लिए अत्यंत उपयोगी

विवरण

  • कक्षा: 12वीं
  • विषय: हिंदी
  • मॉडल पेपर: Set A
  • बोर्ड: MP Board

इस हिंदी Set A मॉडल पेपर के नियमित अभ्यास से विद्यार्थी अपठित गद्यांश, काव्यांश, निबंध, पत्र-लेखन एवं व्याकरण जैसे महत्वपूर्ण भागों पर मजबूत पकड़ बना सकते हैं, जिससे बोर्ड परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

Hindi Model Paper 12th (Set-A) - Sandipani Vidyalaya

कक्षा 12वीं - हिन्दी

(मॉडल पेपर: सेट-A)

Created by : D Septa | पूर्णांक: 80 | समय: 3 घंटे

खण्ड अ: वस्तुनिष्ठ प्रश्न (32 अंक)
प्र.1. सही विकल्प चुनकर लिखिए: (1×6 = 6 अंक)
(i) 'आत्मपरिचय' कविता के रचयिता हैं:
(अ) जयशंकर प्रसाद (ब) हरिवंश राय बच्चन (स) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (द) महादेवी वर्मा
👉 (ब) हरिवंश राय बच्चन
विवरण: यह कविता उनके काव्य संग्रह 'निशा निमंत्रण' से संबंधित गीतों की श्रृंखला का हिस्सा है।

(ii) 'भक्तिन' कहाँ की रहने वाली थी?
(अ) झाँसी (ब) झुंझुनू (स) झूसी (द) झालावाड़
👉 (स) झूसी
विवरण: महादेवी वर्मा के संस्मरण के अनुसार, भक्तिन ऐतिहासिक गाँव 'झूसी' की रहने वाली थी।

(iii) 'यशोधर बाबू' के आदर्श कौन थे?
(अ) भूषण (ब) किशनदा (स) यशोधर के पिता (द) चड्ढा
👉 (ब) किशनदा
विवरण: 'सिल्वर वैडिंग' कहानी में यशोधर बाबू अपने मेंटर किशनदा (कृष्णानंद पांडेय) के सिद्धांतों पर चलते थे।

(iv) रेडियो समाचार की भाषा कैसी होनी चाहिए? अभिव्यक्ति और माध्यम
(अ) कठिन और तत्सम प्रधान (ब) मुहावरेदार (स) आम बोलचाल की सरल भाषा (द) बिंबात्मक
👉 (स) आम बोलचाल की सरल भाषा
विवरण: रेडियो एक श्रव्य माध्यम है, इसलिए भाषा ऐसी होनी चाहिए जो सुनते ही समझ में आ जाए।

(v) 'करुण रस' का स्थायी भाव क्या है?
(अ) रति (ब) शोक (स) हास (द) भय
👉 (ब) शोक
विवरण: प्रिय वस्तु या व्यक्ति के नाश से उत्पन्न दुख 'शोक' कहलाता है, जो करुण रस का स्थायी भाव है।

(vi) 'अंगारों पर लोटना' मुहावरे का अर्थ है:
(अ) आग से खेलना (ब) ईर्ष्या से जलना (स) बहुत प्रसन्न होना (द) दुखी होना
👉 (ब) ईर्ष्या से जलना
विवरण: यह मुहावरा तीव्र जलन या ईर्ष्या व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त होता है।
प्र.2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए: (1×6 = 6 अंक)
(i) 'पतंग' कविता के कवि ________ हैं। (आलोक धन्वा / कुंवर नारायण)
आलोक धन्वा
विवरण: यह उनकी एकमात्र संग्रह 'दुनिया रोज बनती है' से ली गई है।

(ii) 'बाजार दर्शन' पाठ का केंद्रीय भाव ________ है। (बाजारवाद / उपभोक्तावाद)
बाजारवाद
विवरण: जैनेन्द्र कुमार ने बाजार के जादू और उसकी सार्थकता पर विचार किया है।

(iii) 'जूझ' कहानी के लेखक ________ हैं। (आनंद यादव / मनोहर श्याम जोशी)
आनंद यादव
विवरण: यह उनके आत्मकथात्मक उपन्यास का एक अंश है।

(iv) वह शब्द जो किसी शब्द के बाद लगकर उसके अर्थ में विशेष बल देता है, ________ कहलाता है। (निपात / उपसर्ग)
निपात
विवरण: जैसे- ही, भी, तो, तक।

(v) 'सवैया' छन्द में ________ वर्ण होते हैं। (22 से 26 / 16 से 20)
22 से 26
विवरण: सवैया एक वर्णिक छंद है।

(vi) 'सीरीज के फूल' को संस्कृत साहित्य में ________ कहा गया है। (कोमल / कठोर)
कोमल
विवरण: हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के अनुसार कालिदास ने इसे अत्यंत कोमल माना है।
प्र.3. सत्य/असत्य का चयन कीजिए: (1×6 = 6 अंक)
(i) 'दिन जल्दी-जल्दी ढलता है' गीत 'निशा निमंत्रण' से लिया गया है।
सत्य
विवरण: हरिवंश राय बच्चन की यह प्रसिद्ध रचना 'निशा निमंत्रण' का ही एक गीत है।

(ii) भक्तिन का वास्तविक नाम 'लक्ष्मी' था।
सत्य
विवरण: वह अपना समृद्धि सूचक नाम 'लक्ष्मी' किसी को नहीं बताती थी।

(iii) 'कहानी' का नाट्य रूपांतरण असंभव है।
असत्य
विवरण: कहानी को नाटक में बदला जा सकता है, यह एक सृजनात्मक प्रक्रिया है।

(iv) 'माधुर्य गुण' में कठोर वर्णों का प्रयोग होता है।
असत्य
विवरण: माधुर्य गुण में कोमल और मधुर वर्णों का प्रयोग होता है, कठोर वर्ण 'ओज गुण' में होते हैं।

(v) यशोधर बाबू आधुनिक विचारों के समर्थक थे।
असत्य
विवरण: यशोधर बाबू पुरानी परंपराओं और मूल्यों (किशनदा के सिद्धांतों) से जुड़े व्यक्ति थे।

(vi) मुहावरा एक पूर्ण वाक्य होता है।
असत्य
विवरण: मुहावरा 'वाक्यांश' (Phrase) होता है, जबकि लोकोक्ति पूर्ण वाक्य होती है।
प्र.4. सही जोड़ी मिलाइए: (1×7 = 7 अंक)
(i) आत्मपरिचय   -> (क) 8 प्रकार
(ii) महादेवी वर्मा   -> (ख) हरिवंश राय बच्चन
(iii) अतीत में दबे पाँव   -> (ग) छायावाद/भक्तिन
(iv) समाचार लेखन   -> (घ) ओम थानवी
(v) काव्य की शोभा   -> (ङ) अलंकार
(vi) अर्थ के आधार पर वाक्य   -> (च) उल्टा पिरामिड शैली
(vii) तुलसीदास   -> (छ) रामचरितमानस
सही मिलान:
1. आत्मपरिचय → (ख) हरिवंश राय बच्चन
2. महादेवी वर्मा → (ग) छायावाद/भक्तिन (लेखिका)
3. अतीत में दबे पाँव → (घ) ओम थानवी (यात्रा वृत्तांत)
4. समाचार लेखन → (च) उल्टा पिरामिड शैली (सबसे महत्वपूर्ण पहले)
5. काव्य की शोभा → (ङ) अलंकार (बढ़ाने वाले तत्व)
6. अर्थ के आधार पर वाक्य → (क) 8 प्रकार
7. तुलसीदास → (छ) रामचरितमानस (महाकाव्य)
प्र.5. एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए: (1×7 = 7 अंक)
(i) कवि किसका भार लिए फिरता है? (आत्मपरिचय)
जग-जीवन का

(ii) भक्तिन लेखिका को भोजन में क्या देती थी?
देहाती भोजन (मोटी रोटी, दाल आदि)

(iii) किशनदा का पूरा नाम क्या था?
कृष्णानंद पांडेय

(iv) 'रसराज' किस रस को कहा जाता है?
शृंगार रस

(v) भारत की 'राजभाषा' क्या है?
हिन्दी

(vi) "कविता के पंख लगा उड़ने" का क्या अर्थ है?
कल्पना की उड़ान भरना

(vii) भारत का पहला समाचार पत्र कौन सा था?
बंगाल गजट (1780, जेम्स ऑगस्टस हिक्की)
खण्ड ब: लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
प्र.6. 'प्रगतिवाद' की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
अथवा
संसार में कष्टों को सहते हुए भी कवि 'खुशी और मस्ती' का माहौल कैसे बनाए रखता है?
उत्तर (मुख्य):
1. शोषकों के प्रति विद्रोह: प्रगतिवादी कवि पूंजीपतियों और शोषक वर्ग का विरोध करते हैं।
2. शोषितों के प्रति सहानुभूति: इसमें मजदूरों, किसानों और दलितों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई है।
उत्तर (अथवा):
कवि हरिवंश राय बच्चन कहते हैं कि यद्यपि जीवन में अनेक कष्ट और जिम्मेदारियाँ (जग-जीवन का भार) हैं, फिर भी वे प्रेम की मस्ती में डूबे रहते हैं। वे सांसों के तारों को प्रेम से बजाते हैं, जिससे उनका जीवन संगीत और उल्लास से भर जाता है।
प्र.7. भाषा को 'सहूलियत' से बरतने का क्या अभिप्राय है?
अथवा
छायावाद के किन्हीं दो कवियों के नाम और उनकी एक-एक रचना लिखिए।
उत्तर (मुख्य):
कुंवर नारायण के अनुसार, भाषा को सहूलियत से बरतने का अर्थ है - बात को सीधे, सरल और सहज शब्दों में कहना। अनावश्यक क्लिष्ट शब्दों या घुमावदार वाक्यों का प्रयोग न करके, अपनी बात को स्पष्टता से संप्रेषित करना।
उत्तर (अथवा):
1. जयशंकर प्रसाद: कामायनी।
2. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला': परिमल (या कुकुरमुत्ता)।
प्र.8. भक्तिन के आ जाने से महादेवी अधिक देहाती कैसे हो गईं?
अथवा
बाजार का जादू चढ़ने और उतरने पर मनुष्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर (मुख्य):
भक्तिन शहर के तौर-तरीके सीखने के बजाय महादेवी को ही अपने देहाती रंग में रंग लेती थी। उसने महादेवी को मकई का दलिया, बाजरे की रोटी और ज्वार के भुट्टे खाना सिखा दिया। भक्तिन की जीवनशैली को अपनाकर महादेवी भी देहाती बन गईं।
उत्तर (अथवा):
जादू चढ़ने पर: मनुष्य बाजार की चकाचौंध में फंसकर अनावश्यक वस्तुएं खरीद लेता है। उसे लगता है कि ये चीजें उसे सुख देंगी।
जादू उतरने पर: उसे पता चलता है कि उन फैंसी चीजों ने उसके आराम में खलल ही डाला है, कोई वास्तविक सुख नहीं दिया।
प्र.9. 'काले मेघा पानी दे' पाठ के आधार पर पानी और बुवाई का क्या संबंध है?
अथवा
लुट्टन पहलवान ने ऐसा क्यों कहा होगा कि "मेरा गुरु कोई पहलवान नहीं, यह ढोल है"?
उत्तर (मुख्य):
भारत कृषि प्रधान देश है। यहाँ की खेती मानसून (वर्षा) पर निर्भर है। आषाढ़ के महीने में खेतों की बुवाई के लिए पानी की अत्यंत आवश्यकता होती है। यदि समय पर वर्षा (काले मेघा) नहीं होती, तो बुवाई नहीं हो पाती और अकाल की स्थिति बन जाती है।
उत्तर (अथवा):
लुट्टन ने किसी उस्ताद से कुश्ती नहीं सीखी थी। उसने ढोल की आवाज से ही प्रेरणा और दांव-पेच सीखे थे। ढोल की 'धाक-धिना' उसे आगे बढ़ने और दांव मारने का संकेत देती थी। इसलिए उसने ढोल को ही अपना गुरु माना।
प्र.10. यशोधर बाबू की पत्नी समय के साथ ढल सकने में सफल होती है लेकिन यशोधर बाबू असफल रहते हैं। ऐसा क्यों?
अथवा
'जूझ' कहानी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर (मुख्य):
यशोधर बाबू की पत्नी बच्चों के साथ आधुनिकता को अपना लेती है (रहन-सहन, खान-पान)। वह लचीली है। लेकिन यशोधर बाबू किशनदा के पुराने मूल्यों और परंपराओं से चिपके रहते हैं। वे बदलाव को 'समहाउ इम्प्रॉपर' मानते हैं और समझौता नहीं कर पाते।
उत्तर (अथवा):
इस कहानी का उद्देश्य यह दर्शाना है कि लगन, परिश्रम और दृढ़ इच्छाशक्ति से विपरीत परिस्थितियों में भी सफलता पाई जा सकती है। लेखक ने अपने संघर्ष से यह सिद्ध किया कि शिक्षा मनुष्य का जीवन बदल सकती है।
प्र.11. इंटरनेट पत्रकारिता क्या है? इसके दो लाभ लिखिए।
अथवा
फीचर (Feature) किसे कहते हैं?
उत्तर (मुख्य):
इंटरनेट पर समाचारों का प्रकाशन या आदान-प्रदान इंटरनेट पत्रकारिता (Cyber Journalism) कहलाता है।
लाभ: 1. खबरें तुरंत अपडेट होती हैं। 2. दुनिया भर की खबरें एक क्लिक पर उपलब्ध।
उत्तर (अथवा):
फीचर एक सुव्यवस्थित, सृजनात्मक और आत्मनिष्ठ लेखन है, जिसका उद्देश्य पाठकों को सूचना देने के साथ-साथ शिक्षित करना और उनका मनोरंजन करना होता है। इसमें लेखक के निजी विचार भी शामिल होते हैं।
प्र.12. महाकाव्य और खंडकाव्य में दो अंतर लिखिए।
अथवा
रस की परिभाषा और उसके अंगों के नाम लिखिए।
उत्तर (मुख्य):
1. कथावस्तु: महाकाव्य में जीवन का समग्र चित्रण होता है, खंडकाव्य में जीवन के किसी एक पक्ष का।
2. सर्ग: महाकाव्य में 8 या उससे अधिक सर्ग होते हैं, खंडकाव्य में एक ही सर्ग (या कम) होता है।
उत्तर (अथवा):
परिभाषा: काव्य को पढ़ने, सुनने या देखने से जो आनंद प्राप्त होता है, उसे रस कहते हैं।
अंग (4): स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव, संचारी भाव।
प्र.13. भ्रांतिमान अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
अथवा
शब्द गुण 'माधुर्य' की परिभाषा लिखिए।
उत्तर (मुख्य):
जहाँ समानता के कारण एक वस्तु में दूसरी वस्तु का भ्रम हो जाए और उसी भ्रम के अनुसार कार्य भी कर लिया जाए, वहाँ भ्रांतिमान अलंकार होता है।
उदाहरण: "नाक का मोती अधर की कांति से, बीज दाड़िम का समझकर भ्रांति से...।"
उत्तर (अथवा):
काव्य का वह गुण जो चित्त (मन) को पिघलाकर आनंद और उल्लास से भर दे, माधुर्य गुण कहलाता है। इसमें कोमल वर्णों (क, ख, ग...) का प्रयोग होता है और यह शृंगार, शांत व करुण रस में पाया जाता है।
प्र.14. निपात शब्द किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
अथवा
मुहावरे और लोकोक्ति में दो अंतर लिखिए।
उत्तर (मुख्य):
वे अव्यय शब्द जो किसी शब्द या पद के बाद लगकर उसके अर्थ में विशेष बल ला देते हैं, निपात कहलाते हैं।
उदाहरण: "राम ही जाएगा।" (यहाँ 'ही' निपात है)।
उत्तर (अथवा):
1. स्वरूप: मुहावरा वाक्यांश होता है, लोकोक्ति पूर्ण वाक्य होती है।
2. परिवर्तन: मुहावरा वाक्य में प्रयोग करते समय लिंग/वचन के अनुसार बदल सकता है, लोकोक्ति ज्यों की त्यों रहती है।
प्र.15. मोहन-जोदड़ो के घरों की दो विशेषताएँ लिखिए। (अतीत में दबे पाँव)
अथवा
रेडियो नाटक की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर (मुख्य):
1. घर पक्की ईंटों के बने थे और योजनाबद्ध तरीके से बसाए गए थे।
2. घरों के दरवाजे मुख्य सड़क पर न खुलकर पीछे की गलियों में खुलते थे। हर घर में स्नानघर होता था।
उत्तर (अथवा):
1. यह एक श्रव्य माध्यम है, इसमें ध्वनि और संवादों का महत्व होता है।
2. इसमें दृश्य नहीं होते, इसलिए कल्पना तत्व की प्रधानता होती है।
खण्ड स: लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक)
प्र.16. 'हरिवंश राय बच्चन' अथवा 'तुलसीदास' का साहित्यिक परिचय निम्न बिंदुओं पर लिखिए:
(i) दो रचनाएँ (ii) भावपक्ष-कलापक्ष (iii) साहित्य में स्थान
(हरिवंश राय बच्चन):
(i) रचनाएँ: मधुशाला, मधुबाला, निशा निमंत्रण।
(ii) भावपक्ष: प्रेम और सौंदर्य के कवि, हालावाद के प्रवर्तक। रहस्यवाद की झलक। कलापक्ष: सहज, सरल खड़ी बोली, गेयता का गुण, प्रतीकों का सुंदर प्रयोग।
(iii) स्थान: हिंदी साहित्य में हालावाद के प्रवर्तक और एक लोकप्रिय गीतकार के रूप में अद्वितीय स्थान है।
प्र.17. 'महादेवी वर्मा' अथवा 'हजारी प्रसाद द्विवेदी' का साहित्यिक परिचय निम्न बिंदुओं पर लिखिए:
(i) दो रचनाएँ (ii) भाषा-शैली (iii) साहित्य में स्थान
(महादेवी वर्मा):
(i) रचनाएँ: स्मृति की रेखाएँ, अतीत के चलचित्र (गद्य); यामा, नीरजा (काव्य)।
(ii) भाषा-शैली: तत्सम प्रधान शुद्ध खड़ी बोली। उनकी शैली चित्रात्मक, भावात्मक और व्यंग्यात्मक है। संस्मरणों में वे पात्रों का सजीव चित्र खींचती हैं।
(iii) स्थान: उन्हें 'आधुनिक मीरा' कहा जाता है। छायावाद के चार स्तंभों में प्रमुख और एक सशक्त गद्य लेखिका।
प्र.18. भाव पल्लवन कीजिए: "परहित सरिस धर्म नहिं भाई।"
अथवा
सार संक्षेपण (Summary) की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर (मुख्य):
भाव पल्लवन: गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि दूसरों की भलाई (परोपकार) के समान कोई दूसरा धर्म नहीं है। प्रकृति भी हमें परोपकार सिखाती है—नदियाँ अपना जल स्वयं नहीं पीतीं, वृक्ष अपने फल नहीं खाते। मनुष्य का जन्म केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के कल्याण के लिए हुआ है। परोपकार से ही आत्मिक शांति और समाज में प्रतिष्ठा मिलती है।
उत्तर (अथवा):
1. संक्षेपण मूल अवतरण का लगभग एक-तिहाई (1/3) होना चाहिए।
2. इसमें मूल विचारों और भावों को सुरक्षित रखना चाहिए, अनावश्यक विस्तार को हटा देना चाहिए।
3. इसकी भाषा सरल और स्पष्ट होनी चाहिए।
प्र.19. 'कहानी' और 'नाटक' में तीन अंतर लिखिए।
अथवा
रेडियो नाटक में 'ध्वनि प्रभाव' (Sound Effects) का क्या महत्व है?
उत्तर (मुख्य):
1. कहानी श्रव्य/पठनीय विधा है, नाटक दृश्य-श्रव्य विधा है।
2. कहानी में वर्णन प्रधान होता है, नाटक में संवाद और अभिनय प्रधान होता है।
3. कहानी का आनंद अकेले पढ़कर लिया जा सकता है, नाटक का आनंद रंगमंच पर देखकर सामूहिक रूप से लिया जाता है।
उत्तर (अथवा):
रेडियो नाटक में दृश्य नहीं होते, इसलिए वातावरण बनाने के लिए ध्वनि प्रभावों का उपयोग किया जाता है। जैसे—बारिश की आवाज़, कदमों की आहट, या गाड़ी का हॉर्न। ये ध्वनियाँ श्रोता के मन में दृश्य का चित्र खड़ा कर देती हैं और कहानी को सजीव बनाती हैं।
खण्ड द: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
प्र.20. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:
"मैं जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ,
फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ;
कर दिया किसी ने झंकृत जिनको छूकर
मैं साँसों के दो तार लिए फिरता हूँ।"
अथवा
पद्यांश की व्याख्या:
"धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूत कहौ, जोलहा कहौ कोऊ।
काहू की बेटी सों बेटा न ब्याहब, काहू की जाति बिगार न सोऊ।"
उत्तर (मुख्य):

संदर्भ: 'आरोह भाग-2', कविता 'आत्मपरिचय', कवि 'हरिवंश राय बच्चन' ।

प्रसंग: कवि अपने जीवन के अंतर्विरोधों और प्रेममयी व्यक्तित्व का वर्णन कर रहे हैं।

व्याख्या: कवि कहते हैं कि मुझ पर सांसारिक जिम्मेदारियों का बहुत बोझ है, फिर भी मेरा हृदय प्रेम से भरा है। मेरे जीवन में किसी प्रियजन (पत्नी/प्रेमिका) के स्पर्श ने मेरे हृदय रूपी वीणा को झंकृत कर दिया है। मैं उन्हीं यादों और प्रेम के सहारे अपना जीवन जी रहा हूँ।

उत्तर (अथवा):

संदर्भ: 'कवितावली', कवि 'तुलसीदास' ।

व्याख्या: तुलसीदास जी समाज के कटाक्षों की परवाह नहीं करते। वे कहते हैं, चाहे कोई मुझे धूर्त कहे, सन्यासी कहे, राजपूत कहे या जुलाहा, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मुझे किसी की बेटी से अपने बेटे की शादी नहीं करनी है, जिससे किसी की जाति बिगड़ जाए। मैं तो केवल श्री राम का गुलाम हूँ और उन्हीं की भक्ति में मस्त रहता हूँ।

प्र.21. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:
"भक्तिन और मेरे बीच में सेवक-स्वामी का संबंध है, यह कहना कठिन है, क्योंकि ऐसा कोई स्वामी नहीं हो सकता, जो इच्छा होने पर भी सेवक को अपनी सेवा से हटा न सके..."
अथवा
गद्यांश की व्याख्या:
"बाजार में एक जादू है। वह जादू आँख की राह काम करता है। वह रूप का जादू है। पर जैसे चुंबक का जादू लोहे पर ही चलता है, वैसे ही इस जादू की भी मर्यादा है।"
उत्तर (मुख्य):

संदर्भ: पाठ 'भक्तिन', लेखिका 'महादेवी वर्मा' ।

व्याख्या: महादेवी जी कहती हैं कि भक्तिन केवल एक नौकरानी नहीं है। उसका और लेखिका का रिश्ता मालिक-नौकर से ऊपर है। भक्तिन घर की मालकिन की तरह व्यवहार करती है। लेखिका चाहकर भी उसे काम से नहीं हटा सकतीं और भक्तिन भी जाने को तैयार नहीं है। यह एक आत्मीय और बराबरी का रिश्ता बन गया है।

उत्तर (अथवा):

संदर्भ: पाठ 'बाजार दर्शन', लेखक 'जैनेन्द्र कुमार' ।

व्याख्या: लेखक बाजार के आकर्षण को 'जादू' कहते हैं। यह जादू आँखों के रास्ते असर करता है। सजी-धजी दुकानें ग्राहक को लुभाती हैं। लेकिन यह जादू तभी असर करता है जब जेब भरी हो और मन खाली हो (यानी पता न हो कि क्या खरीदना है)। ऐसे में व्यक्ति अनावश्यक चीजें खरीद लेता है।

प्र.22. अपने नगर के नगरपालिका अध्यक्ष को जल-संकट के निवारण हेतु एक शिकायती पत्र लिखिए।
अथवा
अपने मित्र को बोर्ड परीक्षा में शानदार सफलता प्राप्त करने पर बधाई पत्र लिखिए।
उत्तर (औपचारिक पत्र):

सेवा में,
अध्यक्ष महोदय,
नगर पालिका परिषद, बड़वानी।
विषय: नगर में व्याप्त जल-संकट के संबंध में।

महोदय,
मैं आपका ध्यान हमारे क्षेत्र (गांधी नगर) में पिछले 15 दिनों से चल रही पानी की गंभीर समस्या की ओर दिलाना चाहता हूँ। नलों में पानी बहुत कम समय के लिए और बहुत कम दबाव से आ रहा है। कभी-कभी गंदा पानी भी आता है। गर्मी में इससे निवासियों का जीना दूभर हो गया है।
अतः आपसे निवेदन है कि इस समस्या का शीघ्र समाधान करें और नियमित टैंकर भिजवाने की व्यवस्था करें।

भवदीय,
क.ख.ग.,
दिनांक: XX/XX/2026

उत्तर (अनौपचारिक पत्र):

प्रिय मित्र अमन,
सप्रेम नमस्ते।

आज सुबह समाचार पत्र में तुम्हारा परीक्षा परिणाम देखा। यह जानकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई कि तुमने कक्षा 12वीं में पूरे जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह तुम्हारी कड़ी मेहनत और लगन का ही फल है। मेरी और मेरे परिवार की ओर से तुम्हें इस शानदार सफलता पर बहुत-बहुत बधाई।
मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि तुम भविष्य में भी इसी तरह सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ते रहो।

तुम्हारा मित्र,
सुमित

प्र.23. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर सारगर्भित निबंध लिखिए: (4 अंक)

1. विज्ञान: वरदान या अभिशाप

रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. विज्ञान के वरदान (विभिन्न क्षेत्रों में), 3. विज्ञान: एक अभिशाप (विनाशकारी रूप), 4. उपसंहार।

1. प्रस्तावना: आज का युग विज्ञान का युग है। मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विज्ञान का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। सुबह जागने से लेकर रात को सोने तक हम जिन वस्तुओं का उपयोग करते हैं, वे सब विज्ञान की ही देन हैं।

2. विज्ञान के वरदान:

  • परिवहन: हवाई जहाज और ट्रेनों ने यात्रा को सुगम बना दिया है।
  • संचार: मोबाइल और इंटरनेट ने दुनिया को मुट्ठी में कर लिया है।
  • चिकित्सा: असाध्य रोगों का इलाज संभव हुआ है।

3. विज्ञान: एक अभिशाप: यदि विज्ञान का दुरुपयोग हो तो यह विनाशकारी है। परमाणु बम और मिसाइलें मानवता को नष्ट कर सकती हैं। प्रदूषण और बेरोजगारी भी विज्ञान के दुष्परिणाम हैं।

4. उपसंहार: विज्ञान एक शक्ति है। यदि हम इसका सदुपयोग करें तो यह वरदान है, और दुरुपयोग करें तो अभिशाप। अतः हमें इसका प्रयोग मानव कल्याण के लिए करना चाहिए।

2. पर्यावरण प्रदूषण: समस्या और निदान

रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. प्रदूषण के प्रकार, 3. प्रदूषण के कारण, 4. प्रदूषण के दुष्परिणाम, 5. सुधार के उपाय, 6. उपसंहार।

1. प्रस्तावना: आज मानव जाति के सामने सबसे गंभीर समस्या 'पर्यावरण प्रदूषण' की है। वायु, जल और मिट्टी में हानिकारक तत्वों का मिलना प्रदूषण कहलाता है।

2. प्रदूषण के प्रकार: वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण।

3. कारण: औद्योगीकरण, वाहनों का धुआँ, वनों की कटाई और प्लास्टिक का उपयोग।

4. दुष्परिणाम: श्वास रोग, ग्लोबल वार्मिंग, ओजोन परत में छिद्र और मौसम चक्र का बिगड़ना।

5. उपाय: अधिक वृक्षारोपण, प्लास्टिक पर प्रतिबंध और स्वच्छता अभियान।

6. उपसंहार: हमें 'प्रकृति की रक्षा, अपनी सुरक्षा' के मंत्र को अपनाना होगा।

3. साहित्य और समाज

रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. साहित्य का समाज पर प्रभाव, 3. समाज का साहित्य पर प्रभाव, 4. साहित्यकार का दायित्व, 5. उपसंहार।

1. प्रस्तावना: "साहित्य समाज का दर्पण है।" साहित्य और समाज का गहरा संबंध है।

2. प्रभाव: साहित्य समाज को दिशा देता है। प्रेमचंद और निराला जैसे साहित्यकारों ने समाज में जागृति फैलाई।

3. साहित्यकार का दायित्व: साहित्यकार को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को सही राह दिखानी चाहिए और कुरीतियों पर प्रहार करना चाहिए।

4. उपसंहार: उन्नत समाज से ही महान साहित्य का सृजन होता है और महान साहित्य समाज को उन्नत बनाता है।

4. विद्यार्थी जीवन और अनुशासन

रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. अनुशासन का अर्थ, 3. विद्यार्थी जीवन में महत्व, 4. अनुशासनहीनता के कारण, 5. उपसंहार।

1. प्रस्तावना: विद्यार्थी देश का भविष्य हैं। उनका जीवन अनुशासित होना अत्यंत आवश्यक है।

2. अर्थ: नियमों का पालन करना और बड़ों का आदर करना अनुशासन है।

3. महत्व: अनुशासन से समय का सदुपयोग होता है, एकाग्रता बढ़ती है और चरित्र निर्माण होता है।

4. कारण: नैतिक शिक्षा का अभाव और सिनेमा/मोबाइल का दुष्प्रभाव अनुशासनहीनता का कारण है।

5. उपसंहार: अनुशासन सफलता की कुंजी है। इसे अपनाकर ही विद्यार्थी अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।

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⚠️ डिस्क्लेमर (प्रश्न–उत्तर सम्बन्धी):
इस मॉडल प्रश्न पत्र में दिए गए सभी प्रश्न एवं उत्तर केवल शैक्षणिक अभ्यास और परीक्षा तैयारी के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। ये प्रश्न–उत्तर MP Board की आधिकारिक प्रश्न पत्र या उत्तर कुंजी नहीं हैं। वास्तविक परीक्षा में प्रश्नों की संख्या, क्रम एवं शब्दों में परिवर्तन संभव है। छात्र परीक्षा में केवल इन प्रश्न–उत्तर पर निर्भर न रहें, बल्कि आधिकारिक पाठ्यक्रम एवं पुस्तकों का अध्ययन अवश्य करें।

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