कक्षा 12वीं भौतिकी प्रैक्टिस पेपर – Set D
MP Board कक्षा 12वीं भौतिकी की वार्षिक परीक्षा को ध्यान में रखते हुए Practice Paper – Set D विद्यार्थियों के अंतिम अभ्यास के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह प्रश्नपत्र परीक्षा से ठीक पहले स्वयं की तैयारी परखने में सहायक है।
Set D उन छात्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो सभी अध्यायों का रिवीजन कर चुके हैं और अब वास्तविक परीक्षा जैसा अभ्यास करना चाहते हैं।
📝 Practice Paper Set D की मुख्य विशेषताएँ
- नवीन MP Board पाठ्यक्रम एवं परीक्षा पैटर्न पर आधारित
- पूरे सिलेबस से संतुलित प्रश्न चयन
- वस्तुनिष्ठ, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों का समावेश
- समय प्रबंधन और उत्तर प्रस्तुति का अभ्यास
- Final Revision के लिए अत्यंत उपयोगी
🎯 Practice Paper Set D किसके लिए उपयोगी है?
- कक्षा 12वीं MP Board के नियमित एवं स्वाध्यायी विद्यार्थी
- परीक्षा से पहले Full Syllabus टेस्ट देना चाहने वाले छात्र
- स्कूल प्री-बोर्ड एवं मॉडल टेस्ट की तैयारी करने वाले विद्यार्थी
- उच्च अंक लक्ष्य रखने वाले छात्र
ध्यान दें:
यह Practice Paper केवल अभ्यास हेतु तैयार किया गया है।
वास्तविक बोर्ड परीक्षा प्रश्नपत्र में प्रश्नों का क्रम अथवा स्वरूप भिन्न हो सकता है।
⬇️ Practice Paper Set D
नीचे दिए गए लिंक से आप कक्षा 12वीं भौतिकी Practice Paper – Set D देख सकते हैं।
कक्षा 12वीं - भौतिक शास्त्र (मॉडल पेपर: सेट-D)
Created by: D Septa | पूर्णांक: 70 | समय: 3 घंटे
खण्ड अ: वस्तुनिष्ठ प्रश्न (28 अंक)
प्र.1. सही विकल्प चुनकर लिखिए: (1×6 = 6 अंक)
(i) निर्वात की विद्युतशीलता (ε0) का मान होता है:
👉 (ब) 8.854 × 10-12 C2N-1m-2
(ii) धारिता का मात्रक है:
👉 (स) फैरड (Farad)
(iii) विशिष्ट प्रतिरोध (प्रतिरोधकता) का मात्रक है:
👉 (ब) ओम-मीटर (Ω-m)
(iv) यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने वाली युक्ति है:
👉 (ब) AC डायनेमो (जनित्र)
(v) ओजोन परत अवशोषित करती है:
👉 (द) पराबैंगनी किरणें (UV Rays)
(vi) P-N संधि डायोड में अवक्षय पर्त (Depletion Layer) की मोटाई होती है:
👉 (ब) 10-6 m (माइक्रोन कोटि)
प्र.2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए: (1×6 = 6 अंक)
(i) वैद्युत द्विध्रुव पर नेट आवेश ________ होता है।
शून्य (Zero)
(ii) शंट को सदैव ________ क्रम में जोड़ा जाता है।
समांतर (Parallel)
(iii) शुद्ध प्रेरकत्व युक्त AC परिपथ में धारा और वोल्टेज के बीच ________ का कलांतर होता है।
90° या π/2
(iv) आकाश का नीला दिखाई देना प्रकाश के ________ के कारण होता है।
प्रकीर्णन (Scattering)
(v) इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) ________ का मात्रक है।
ऊर्जा
(vi) NAND गेट, AND गेट और ________ गेट के संयोजन से बनता है।
NOT
प्र.3. सत्य/असत्य लिखिए: (1×5 = 5 अंक)
(i) विद्युत आवेश एक अदिश राशि है।
सत्य
(ii) धारा घनत्व एक अदिश राशि है।
असत्य (यह सदिश राशि है)
(iii) प्रतिचुंबकीय पदार्थ प्रबल चुंबकीय क्षेत्र से दुर्बल चुंबकीय क्षेत्र की ओर गति करते हैं।
सत्य
(iv) प्रकाश तंतु अपवर्तन के सिद्धांत पर कार्य करता है।
असत्य (पूर्ण आंतरिक परावर्तन पर)
(v) ज़ेनर डायोड का उपयोग वोल्टेज नियंत्रक के रूप में किया जाता है।
सत्य
प्र.4. सही जोड़ी बनाइए: (1×6 = 6 अंक)
(क) -> (ख)
(i) चुंबकीय आघूर्ण -> (क) ML2T-1
(ii) आंतरिक प्रतिरोध -> (ख) NIA
(iii) स्नेल का नियम -> (ग) Δm
(iv) प्लांक नियतांक -> (घ) q(\vec{v} \times \vec{B})
(v) द्रव्यमान क्षति -> (ङ) r = R(E/V - 1)
(vi) लॉरेंज बल -> (च) μ = sin i / sin r
(i) चुंबकीय आघूर्ण -> (क) ML2T-1
(ii) आंतरिक प्रतिरोध -> (ख) NIA
(iii) स्नेल का नियम -> (ग) Δm
(iv) प्लांक नियतांक -> (घ) q(\vec{v} \times \vec{B})
(v) द्रव्यमान क्षति -> (ङ) r = R(E/V - 1)
(vi) लॉरेंज बल -> (च) μ = sin i / sin r
सही मिलान:
(i) चुंबकीय आघूर्ण → (ख) NIA
(ii) आंतरिक प्रतिरोध → (ङ) r = R(E/V - 1)
(iii) स्नेल का नियम → (च) μ = sin i / sin r
(iv) प्लांक नियतांक → (क) ML2T-1
(v) द्रव्यमान क्षति → (ग) Δm
(vi) लॉरेंज बल → (घ) q(\vec{v} \times \vec{B})
(i) चुंबकीय आघूर्ण → (ख) NIA
(ii) आंतरिक प्रतिरोध → (ङ) r = R(E/V - 1)
(iii) स्नेल का नियम → (च) μ = sin i / sin r
(iv) प्लांक नियतांक → (क) ML2T-1
(v) द्रव्यमान क्षति → (ग) Δm
(vi) लॉरेंज बल → (घ) q(\vec{v} \times \vec{B})
प्र.5. एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए: (1×5 = 5 अंक)
(i) आवेश के क्वाण्टीकरण का कारण क्या है?
इलेक्ट्रॉनों का पूर्ण संख्या में स्थानांतरण।
(ii) लेंज का नियम किस संरक्षण नियम पर आधारित है?
ऊर्जा संरक्षण।
(iii) भारत में घरों में प्रयुक्त प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति कितनी होती है?
50 Hz
(iv) सबसे अधिक वेधन क्षमता किन किरणों की होती है?
गामा किरणें (γ-rays)
(v) निरोधी विभव किसे कहते हैं?
वह न्यूनतम ऋणात्मक विभव जिस पर प्रकाश-विद्युत धारा शून्य हो जाती है।
खण्ड ब: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
प्र.6. विद्युत क्षेत्र रेखाओं के कोई दो गुण लिखिए।
अथवा
समविभव पृष्ठ की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: 1. विद्युत क्षेत्र रेखाएँ धनावेश से प्रारंभ होकर ऋणावेश पर समाप्त होती हैं।
2. दो विद्युत क्षेत्र रेखाएँ कभी भी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करतीं।
2. दो विद्युत क्षेत्र रेखाएँ कभी भी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करतीं।
उत्तर: 1. समविभव पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर विभव समान होता है।
2. विद्युत क्षेत्र रेखाएँ समविभव पृष्ठ के सदैव लंबवत होती हैं।
2. विद्युत क्षेत्र रेखाएँ समविभव पृष्ठ के सदैव लंबवत होती हैं।
प्र.7. ओम का नियम लिखिए।
अथवा
अनुगमन वेग (Drift Velocity) को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: यदि किसी चालक की भौतिक अवस्था (जैसे ताप, लंबाई) में परिवर्तन न हो, तो उसके सिरों पर लगाया गया विभवांतर (V) उसमें प्रवाहित धारा (I) के अनुक्रमानुपाती होता है। (V = IR)।
उत्तर: किसी चालक के सिरों पर विभवांतर लगाने पर, इलेक्ट्रॉन जिस नियत औसत वेग से निम्न विभव से उच्च विभव (धन सिरे) की ओर गति करते हैं, उसे अनुगमन वेग कहते हैं।
प्र.8. स्वप्रेरण (Self Induction) किसे कहते हैं?
अथवा
भंवर धाराएं (Eddy Currents) क्या हैं?
उत्तर: जब किसी कुंडली में प्रवाहित धारा के मान में परिवर्तन किया जाता है, तो उसी कुंडली में प्रेरित धारा उत्पन्न होने की घटना को स्वप्रेरण कहते हैं।
उत्तर: जब किसी चालक से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो चालक के संपूर्ण आयतन में जल में भंवर के समान प्रेरित धाराएं उत्पन्न हो जाती हैं, जिन्हें भंवर धाराएं कहते हैं।
प्र.9. लेंस की क्षमता और फोकस दूरी में संबंध लिखिए।
अथवा
प्रकाश के वर्ण विक्षेपण (Dispersion) को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: लेंस की क्षमता (P), उसकी फोकस दूरी (f) के व्युत्क्रम के बराबर होती है, जब फोकस दूरी मीटर में मापी गई हो।
P = 1/f (m). मात्रक: डायोप्टर (D)।
P = 1/f (m). मात्रक: डायोप्टर (D)।
उत्तर: जब श्वेत प्रकाश किसी प्रिज्म से गुजरता है, तो वह अपने अवयवी सात रंगों में विभक्त हो जाता है। इस घटना को वर्ण विक्षेपण कहते हैं।
प्र.10. कार्यफलन (Work Function) किसे कहते हैं?
अथवा
तापायनिक उत्सर्जन (Thermionic Emission) क्या है?
उत्तर: वह न्यूनतम ऊर्जा जो किसी धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक होती है, उस धातु का कार्यफलन कहलाती है। इसे φ0 या W से दर्शाते हैं।
उत्तर: जब किसी धातु को गर्म किया जाता है, तो उसे ऊष्मीय ऊर्जा मिलने के कारण उसकी सतह से मुक्त इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होने लगते हैं। इसे तापायनिक उत्सर्जन कहते हैं।
प्र.11. नाभिकीय बल के दो गुण लिखिए।
अथवा
समभारिक (Isobars) किसे कहते हैं?
उत्तर: 1. यह प्रकृति का सबसे प्रबल बल है।
2. यह अत्यंत लघु परास (Short Range) वाला बल है (10-15 m)।
3. यह आवेश पर निर्भर नहीं करता।
2. यह अत्यंत लघु परास (Short Range) वाला बल है (10-15 m)।
3. यह आवेश पर निर्भर नहीं करता।
उत्तर: वे नाभिक जिनकी द्रव्यमान संख्या (A) समान होती है, लेकिन परमाणु क्रमांक (Z) भिन्न होता है, समभारिक कहलाते हैं। उदाहरण: 18Ar40 और 20Ca40.
प्र.12. मोटर और डायनेमो (जनित्र) में मुख्य अंतर क्या है?
अथवा
धारामापी की सुग्राहिता कैसे बढ़ाई जा सकती है?
उत्तर: मोटर: विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है।
डायनेमो: यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
डायनेमो: यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
उत्तर: 1. कुंडली में फेरों की संख्या (N) बढ़ाकर।
2. शक्तिशाली चुंबक का प्रयोग करके (B बढ़ाकर)।
3. निलंबन पत्ती को पतला और लंबा लेकर (C कम करके)।
2. शक्तिशाली चुंबक का प्रयोग करके (B बढ़ाकर)।
3. निलंबन पत्ती को पतला और लंबा लेकर (C कम करके)।
खण्ड स: लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक)
प्र.13. सेल के आंतरिक प्रतिरोध के लिए व्यंजक r = R(E/V - 1) निगमित कीजिए।
अथवा
किरचॉफ के नियमों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: माना सेल का EMF = E, आंतरिक प्रतिरोध = r, बाह्य प्रतिरोध = R।
कुल प्रतिरोध = R + r, धारा I = E / (R+r)
टर्मिनल विभवांतर V = IR
अतः E/I = R + r ⇒ r = E/I - R
I = V/R रखने पर: r = E/(V/R) - R = R(E/V - 1).
कुल प्रतिरोध = R + r, धारा I = E / (R+r)
टर्मिनल विभवांतर V = IR
अतः E/I = R + r ⇒ r = E/I - R
I = V/R रखने पर: r = E/(V/R) - R = R(E/V - 1).
उत्तर: 1. प्रथम नियम (संधि नियम): किसी विद्युत परिपथ की किसी संधि पर मिलने वाली समस्त धाराओं का बीजीय योग शून्य होता है (ΣI = 0)।
2. द्वितीय नियम (लूप नियम): किसी बंद परिपथ में प्रतिरोधों और सेलों के विभवांतरों का कुल बीजीय योग शून्य होता है (ΣV = ΣIR + ΣE = 0)।
2. द्वितीय नियम (लूप नियम): किसी बंद परिपथ में प्रतिरोधों और सेलों के विभवांतरों का कुल बीजीय योग शून्य होता है (ΣV = ΣIR + ΣE = 0)।
प्र.14. एक लंबी परिनालिका के स्वप्रेरकत्व का व्यंजक ज्ञात कीजिए।
अथवा
एक समान चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान आवेश पर लगने वाले लॉरेंज बल का व्यंजक लिखिए। यह बल कब अधिकतम और कब न्यूनतम होता है?
उत्तर: परिनालिका के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र B = μ0NI/l.
कुल फ्लक्स φ = NBA = N(μ0NI/l)A = μ0N2IA/l.
स्वप्रेरकत्व L = φ/I = μ0N2A/l.
(जहाँ N = कुल फेरे, A = क्षेत्रफल, l = लंबाई)।
कुल फ्लक्स φ = NBA = N(μ0NI/l)A = μ0N2IA/l.
स्वप्रेरकत्व L = φ/I = μ0N2A/l.
(जहाँ N = कुल फेरे, A = क्षेत्रफल, l = लंबाई)।
उत्तर: F = qvB sinθ.
अधिकतम: जब θ = 90° (आवेश लंबवत गति करे), F = qvB.
न्यूनतम: जब θ = 0° या 180° (समांतर गति करे), F = 0.
अधिकतम: जब θ = 90° (आवेश लंबवत गति करे), F = qvB.
न्यूनतम: जब θ = 0° या 180° (समांतर गति करे), F = 0.
प्र.15. पूर्ण आंतरिक परावर्तन क्या है? इसकी शर्तें लिखिए। सिद्ध कीजिए μ = 1/sin C.
अथवा
प्रिज्म से अपवर्तन को चित्र सहित समझाइए और विचलन कोण का अर्थ बताइए।
उत्तर: जब प्रकाश सघन से विरल माध्यम में क्रांतिक कोण से अधिक आपतन कोण पर जाता है, तो वह उसी माध्यम में लौट आता है।
स्नेल नियम से: μ = sin r / sin i. क्रांतिक कोण पर i=C और r=90°.
विरल के सापेक्ष सघन का अपवर्तनांक aμg = 1/sin C.
स्नेल नियम से: μ = sin r / sin i. क्रांतिक कोण पर i=C और r=90°.
विरल के सापेक्ष सघन का अपवर्तनांक aμg = 1/sin C.
उत्तर: (छात्र को प्रिज्म का चित्र बनाना होगा जिसमें आपतित किरण, अपवर्तित किरण और निर्गत किरण दिखाई गई हों)।
विचलन कोण (δ): आपतित किरण को आगे बढ़ाने पर और निर्गत किरण को पीछे बढ़ाने पर उनके बीच जो कोण बनता है, उसे विचलन कोण कहते हैं।
विचलन कोण (δ): आपतित किरण को आगे बढ़ाने पर और निर्गत किरण को पीछे बढ़ाने पर उनके बीच जो कोण बनता है, उसे विचलन कोण कहते हैं।
प्र.16. डी-ब्रोग्ली समीकरण λ = h/mv की स्थापना कीजिए।
अथवा
आइंस्टीन का प्रकाश विद्युत समीकरण स्थापित कीजिए।
उत्तर: प्लांक के अनुसार, फोटॉन की ऊर्जा E = hν.
आइंस्टीन के अनुसार, E = mc2.
अतः mc2 = hν = h(c/λ).
mc = h/λ ⇒ p = h/λ.
कण के लिए p = mv, अतः λ = h/mv.
आइंस्टीन के अनुसार, E = mc2.
अतः mc2 = hν = h(c/λ).
mc = h/λ ⇒ p = h/λ.
कण के लिए p = mv, अतः λ = h/mv.
उत्तर: आइंस्टीन के अनुसार, आपतित फोटॉन की ऊर्जा (hν) दो कार्यों में व्यय होती है:
1. कार्यफलन (φ0) के रूप में।
2. उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा (Kmax) के रूप में।
अतः hν = φ0 + Kmax.
या Kmax = hν - hν0 = h(ν - ν0).
1. कार्यफलन (φ0) के रूप में।
2. उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा (Kmax) के रूप में।
अतः hν = φ0 + Kmax.
या Kmax = hν - hν0 = h(ν - ν0).
खण्ड द: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
प्र.17. गाउस की प्रमेय का उपयोग करके एक समान आवेशित गोलीय खोल (Spherical Shell) के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए: (i) खोल के बाहर, (ii) पृष्ठ पर, (iii) खोल के अंदर।
अथवा
समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता के लिए व्यंजक C = Kε0A/d स्थापित कीजिए।
उत्तर: (i) बाहर (r > R): E = (1/4πε0) q/r2 (संपूर्ण आवेश केंद्र पर माना जा सकता है)।
(ii) पृष्ठ पर (r = R): E = (1/4πε0) q/R2.
(iii) अंदर (r < R): चूँकि अंदर कोई आवेश नहीं है (q = 0), अतः E = 0.
(ii) पृष्ठ पर (r = R): E = (1/4πε0) q/R2.
(iii) अंदर (r < R): चूँकि अंदर कोई आवेश नहीं है (q = 0), अतः E = 0.
उत्तर: प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र E = σ/Kε0 = Q / (KAε0).
विभवांतर V = E \times d = Qd / (KAε0).
धारिता C = Q/V = Q / [Qd / (KAε0)]
C = KAε0 / d.
विभवांतर V = E \times d = Qd / (KAε0).
धारिता C = Q/V = Q / [Qd / (KAε0)]
C = KAε0 / d.
प्र.18. ट्रांसफार्मर का सिद्धांत, बनावट और कार्यविधि का वर्णन कीजिए। इसमें होने वाली ऊर्जा हानियों का उल्लेख कीजिए।
अथवा
L-C-R श्रेणीक्रम परिपथ में प्रतिबाधा (Z) और कलांतर (φ) के लिए व्यंजक ज्ञात कीजिए।
सिद्धांत: अन्योन्य प्रेरण।
बनावट: नर्म लोहे का क्रोड, प्राथमिक और द्वितीयक कुंडलियाँ।
कार्यविधि: AC से क्रोड में परिवर्ती फ्लक्स उत्पन्न होता है, जिससे द्वितीयक कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल बनता है।
हानियाँ: ताम्र हानि, लौह हानि (भंवर धारा + शैथिल्य), फ्लक्स क्षरण।
बनावट: नर्म लोहे का क्रोड, प्राथमिक और द्वितीयक कुंडलियाँ।
कार्यविधि: AC से क्रोड में परिवर्ती फ्लक्स उत्पन्न होता है, जिससे द्वितीयक कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल बनता है।
हानियाँ: ताम्र हानि, लौह हानि (भंवर धारा + शैथिल्य), फ्लक्स क्षरण।
उत्तर: फेजर आरेख से:
परिणामी वोल्टेज V = √[VR2 + (VL - VC)2].
प्रतिबाधा Z = V/I = √[R2 + (XL - XC)2].
कलांतर tanφ = (XL - XC) / R.
परिणामी वोल्टेज V = √[VR2 + (VL - VC)2].
प्रतिबाधा Z = V/I = √[R2 + (XL - XC)2].
कलांतर tanφ = (XL - XC) / R.
प्र.19. खगोलीय दूरदर्शी (Astronomical Telescope) का किरण आरेख खींचिए और इसकी आवर्धन क्षमता का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए जब अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बने।
अथवा
गोलीय उत्तल पृष्ठ पर अपवर्तन के लिए सूत्र μ/v - 1/u = (μ-1)/R की स्थापना कीजिए।
आरेख: अभिदृश्यक बड़ा और नेत्रिका छोटी फोकस दूरी की होती है।
सूत्र: आवर्धन क्षमता m = -(fo/ue).
लेंस सूत्र से 1/ue = 1/fe + 1/D रखने पर:
m = -(fo/fe) (1 + fe/D).
सूत्र: आवर्धन क्षमता m = -(fo/ue).
लेंस सूत्र से 1/ue = 1/fe + 1/D रखने पर:
m = -(fo/fe) (1 + fe/D).
उत्तर: स्नेल के नियम μ = sin i / sin r ≈ i/r और त्रिभुज के बहिष्कोण प्रमेय (i = α + γ, r = γ - β) का उपयोग करके यह संबंध प्राप्त किया जाता है। (विस्तृत ज्यामितीय उत्पत्ति आवश्यक है)।
प्र.20. लॉजिक गेट्स (Logic Gates) क्या हैं? OR, AND, NOT, NAND और NOR गेट के संकेत और सत्यता सारणी बनाइए।
अथवा
P-N संधि डायोड का अर्द्ध-तरंग दिष्टकारी (Half Wave Rectifier) के रूप में वर्णन कीजिए।
लॉजिक गेट: डिजिटल परिपथ जो इनपुट और आउटपुट के बीच तार्किक संबंध का पालन करते हैं।
1. OR: A+B (कोई भी 1 तो आउटपुट 1)।
2. AND: A.B (दोनों 1 तो आउटपुट 1)।
3. NOT: A' (उल्टा)।
4. NAND: AND का उल्टा।
5. NOR: OR का उल्टा।
1. OR: A+B (कोई भी 1 तो आउटपुट 1)।
2. AND: A.B (दोनों 1 तो आउटपुट 1)।
3. NOT: A' (उल्टा)।
4. NAND: AND का उल्टा।
5. NOR: OR का उल्टा।
सिद्धांत: डायोड केवल अग्र अभिनति में धारा प्रवाहित करता है।
कार्यविधि: AC के धनात्मक अर्धचक्र में डायोड अग्र अभिनति (चालक) होता है और धारा बहती है। ऋणात्मक अर्धचक्र में यह पश्च अभिनति (कुचालक) होता है और धारा नहीं बहती। इस प्रकार आउटपुट में केवल आधी तरंग प्राप्त होती है।
कार्यविधि: AC के धनात्मक अर्धचक्र में डायोड अग्र अभिनति (चालक) होता है और धारा बहती है। ऋणात्मक अर्धचक्र में यह पश्च अभिनति (कुचालक) होता है और धारा नहीं बहती। इस प्रकार आउटपुट में केवल आधी तरंग प्राप्त होती है।
⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer):
इस प्रैक्टिस पेपर में दिए गए सभी प्रश्न एवं उत्तर केवल विद्यार्थियों के
अभ्यास और शैक्षणिक मार्गदर्शन के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।
ये प्रश्नपत्र किसी भी प्रकार से वास्तविक MP Board परीक्षा प्रश्नपत्र का
आधिकारिक या हूबहू प्रतिरूप नहीं हैं।
प्रैक्टिस पेपर में दिए गए उत्तर विषय विशेषज्ञों के अनुभव और उपलब्ध शैक्षणिक
स्रोतों के आधार पर तैयार किए गए हैं।
किसी उत्तर में त्रुटि या भिन्नता संभव है, जिसके लिए वेबसाइट/प्रकाशक
कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं होगा।
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