एमपी बोर्ड कक्षा 10वीं हिन्दी मॉडल पेपर – सेट D
Class 10th Hindi Model Paper Set D
मुख्य जानकारी
- विषय: हिन्दी
- कक्षा: 10वीं (MP Board)
- पेपर सेट: Set D
- पूर्णांक: 75 अंक
मॉडल पेपर की विशेषताएँ
- नवीनतम सिलेबस पर आधारित
- बोर्ड परीक्षा पैटर्न के अनुरूप
- महत्वपूर्ण एवं संभावित प्रश्न शामिल
- त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision) हेतु उपयोगी
- स्वमूल्यांकन (Self-Assessment) में सहायक
विद्यार्थियों के लिए लाभ
- कम समय में प्रभावी अभ्यास
- अंक वितरण की स्पष्ट समझ
- परीक्षा के लिए आत्मविश्वास में वृद्ध
Class 10th Hindi Model Paper Set D
कक्षा 10वीं - हिन्दी
Created by : D Septa | पूर्णांक: 75 | समय: 3 घंटे
कारण (R): वे पान खाने के बहुत शौकीन थे। कथन-कारण
(ii) संस्कृति -> (ख) यशपाल
(iii) लखनवी अंदाज -> (ग) आधुनिक कबीर
(iv) बालम खीरा -> (घ) भदंत आनंद कौसल्यायन
(v) उपमा अलंकार -> (ङ) सा, सी, से, सम
(vi) मैं क्यों लिखता हूँ -> (च) अज्ञेय
1. नागार्जुन → (ग) आधुनिक कबीर (जनकवि होने के कारण)
2. संस्कृति → (ख) भदंत आनंद कौसल्यायन (लेखक)
3. लखनवी अंदाज → (ख) यशपाल (लेखक)
4. बालम खीरा → (क) ककड़ी-खीरा (रेलवे स्टेशन पर बिकने वाला)
5. उपमा अलंकार → (ङ) सा, सी, से, सम (वाचक शब्द)
6. मैं क्यों लिखता हूँ → (च) अज्ञेय (लेखक)
1. शोषकों के प्रति विद्रोह: प्रगतिवादी कवि पूँजीपतियों और शोषक वर्ग के खिलाफ आवाज उठाते हैं।
2. शोषितों के प्रति सहानुभूति: गरीबों, मजदूरों और किसानों की दुर्दशा का यथार्थ चित्रण किया गया है।
सूरदास वात्सल्य और श्रृंगार रस के सम्राट हैं। उनकी रचनाओं में कृष्ण के बाल रूप और गोपियों के अनन्य प्रेम का सजीव और मार्मिक चित्रण मिलता है। उनकी भक्ति सखा भाव की है।
परशुराम ने कहा कि मैं बाल ब्रह्मचारी और अत्यंत क्रोधी हूँ। मैं क्षत्रिय कुल का शत्रु हूँ और मैंने अपनी भुजाओं के बल पर धरती को कई बार राजाओं से हीन करके ब्राह्मणों को दान कर दिया है। मेरा फरसा गर्भ के बच्चों का भी नाश करने वाला है।
कवि निराला बादलों से प्रार्थना करते हैं कि वे रिमझिम बरसने के बजाय 'गरजें' और पूरे आकाश को घेर लें। वे चाहते हैं कि बादल अपनी गर्जना से लोगों में उत्साह और क्रांति का संचार करें और भीषण गर्मी से तप्त धरती को शीतलता प्रदान करें।
परिभाषा: खंडकाव्य में जीवन के किसी एक पक्ष या एक घटना का चित्रण होता है। इसमें पूरी कथा नहीं होती, पर यह अपने आप में पूर्ण होता है।
उदाहरण: 'पंचवटी' (मैथिलीशरण गुप्त)।
संसार की नश्वरता और वैराग्य के भाव से मन में जो शांति उत्पन्न होती है, उसे शांत रस कहते हैं। इसका स्थायी भाव 'निर्वेद' है।
उदाहरण: "मन रे तन कागद का पुतला। लागै बूँद बिनसि जाय छिन में, गर्व करै क्या इतना।"
भले ही पानवाला कैप्टन का मजाक उड़ाता था, लेकिन मन ही मन वह उसकी देशभक्ति का सम्मान करता था। कैप्टन की मृत्यु से उसे महसूस हुआ कि कस्बे से एक सच्चा देशभक्त चला गया। यह आत्मीयता और दुख उसे उदास कर गई और उसकी आँखों में आँसू आ गए।
बिस्मिल्ला खाँ को 2001 में 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया। वे रियाज (अभ्यास) के लिए अक्सर बालाजी मंदिर (गंगा किनारे) जाते थे, जहाँ एकांत में वे शहनाई बजाते थे।
बाबू गुलाबराय के अनुसार - "निबंध उस गद्य रचना को कहते हैं जिसमें एक सीमित आकार के भीतर, किसी विषय का वर्णन या प्रतिपादन एक विशेष निजीपन, स्वच्छंदता, सजीवता और सुसंबद्धता के साथ किया गया हो।"
नाटक के प्रमुख तत्व निम्नलिखित हैं:
1. कथावस्तु, 2. पात्र एवं चरित्र चित्रण, 3. संवाद (कथोपकथन), 4. देशकाल एवं वातावरण, 5. भाषा-शैली, 6. उद्देश्य, 7. अभिनयता (रंगमंच)।
1. 'सूरज कब निकलेगा' (कहानी संग्रह)
2. 'आएंगे अच्छे दिन भी' (कहानी संग्रह)
दो वर्णों के मेल से जो विकार (परिवर्तन) उत्पन्न होता है, उसे संधि कहते हैं।
भेद: 1. स्वर संधि, 2. व्यंजन संधि, 3. विसर्ग संधि।
जितेंन नार्गे लेखिका का ड्राइवर कम गाइड था। वह स्थानीय निवासी था, इसलिए उसे सिक्किम की भौगोलिक स्थिति और संस्कृति का अच्छा ज्ञान था। उसने लेखिका को न केवल घुमाया, बल्कि वहां के जनजीवन, कठिनाइयों और मान्यताओं से भी परिचित कराया।
भोलानाथ और उसके साथी अपने खेल के लिए घर की टूटी-फूटी और बेकार चीजों का उपयोग करते थे। जैसे - मिट्टी के बर्तन, टूटे घड़े के टुकड़े (ठीकरे), दियासलाई की डिब्बियाँ, पत्ते, और धूल-मिट्टी। वे इन्हीं से मिठाई की दुकान या भोज का आयोजन करते थे।
1. राम पुस्तक पढ़ता है। (कर्मवाच्य में)
2. वह कल आएगा। (निषेधवाचक में)
1. राम के द्वारा पुस्तक पढ़ी जाती है।
2. वह कल नहीं आएगा।
परिभाषा: लोकोक्ति (लोक + उक्ति) वह कथन है जो लोक जीवन के लंबे अनुभव पर आधारित होता है और स्वतंत्र रूप से प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण: "नाच न जाने आँगन टेढ़ा" (काम न आने पर बहाने बनाना)।
"नाथ संभुधनु भंजनिहारा।
होइहि केउ एक दास तुम्हारा।
आयेसु काह कहिअ किन मोही।
सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।"
"अट नहीं रही है
आभा फागुन की तन
सट नहीं रही है।"
संदर्भ: यह चौपाई 'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' (तुलसीदास) से ली गई है।
प्रसंग: शिव धनुष टूटने पर क्रोधित परशुराम से राम विनम्रतापूर्वक बात कर रहे हैं।
व्याख्या: श्रीराम कहते हैं - "हे नाथ! शिवजी के धनुष को तोड़ने वाला आपका ही कोई एक दास होगा। आपकी क्या आज्ञा है? आप मुझसे क्यों नहीं कहते?" राम के ये शांत वचन सुनकर क्रोधी मुनि (परशुराम) और अधिक क्रोधित होकर बोले...
संदर्भ: कविता 'अट नहीं रही है', कवि 'सूर्यकांत त्रिपाठी निराला' ।
भावार्थ: कवि कहते हैं कि फागुन मास की सुंदरता इतनी अधिक और व्यापक है कि वह प्रकृति में समा नहीं पा रही है। चारों ओर फूल खिले हैं, हवा सुगंधित है, और यह मादकता इतनी ज्यादा है कि तन-मन में भी नहीं समा रही है (सट नहीं रही है)। प्रकृति का कोना-कोना उल्लास से भर गया है।
"काशी संस्कृति की पाठशाला है... शास्त्रों में काशी 'आनंदकानन' के नाम से प्रतिष्ठित है। काशी में बिस्मिल्ला खाँ हैं। काशी में विश्वनाथ हैं, जगदंबा हैं।"
"आग की खोज एक बहुत बड़ी खोज थी। शायद पेट की ज्वाला की प्रेरणा एक कारण रही। सुई-धागे की खोज शायद शरीर को सजाने की प्रवृत्ति का परिणाम रही होगी।"
संदर्भ: पाठ 'नौबतखाने में इबादत', लेखक 'यतीन्द्र मिश्र' ।
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि काशी (वाराणसी) भारतीय संस्कृति का केंद्र है, जहाँ धर्म, संगीत और कला का संगम है। शास्त्रों में इसे आनंद का वन (आनंदकानन) कहा गया है। यहाँ बाबा विश्वनाथ (शिव) का मंदिर है, और यहीं संगीत के साधक बिस्मिल्ला खाँ हैं। गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल काशी, धर्म और कला दोनों को अपने में समेटे हुए है।
संदर्भ: पाठ 'संस्कृति', लेखक 'भदंत आनंद कौसल्यायन' ।
आशय: लेखक मानव सभ्यता के विकास के मूल कारणों की खोज कर रहे हैं। वे कहते हैं कि मनुष्य ने आग की खोज इसलिए की होगी क्योंकि उसे भूख मिटानी थी और भोजन पकाना था। इसी तरह, सुई-धागे का आविष्कार तन को ढकने और सुंदर दिखने की इच्छा से हुआ होगा। आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है और यही संस्कृति का आधार है।
मेरे विद्यालय का नाम 'सांदीपनि विद्यालय' है। यह शहर के शोरगुल से दूर एक शांत वातावरण में स्थित है। विद्यालय का भवन विशाल और हवादार है। इसमें लगभग 20 कमरे, एक बड़ा खेल का मैदान और एक समृद्ध पुस्तकालय है। हमारे प्रधानाचार्य बहुत अनुशासन प्रिय और विद्वान हैं। शिक्षक हमें पुत्रवत स्नेह से पढ़ाते हैं। यहाँ पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जाता है। मुझे अपने विद्यालय पर बहुत गर्व है।
सुनीता: अरे अनीता! सब्जी लेने आई हो? थैला नहीं लाई?
अनीता: भूल गई थी। भैया से प्लास्टिक की थैली मांग ली।
सुनीता: अनीता, यह ठीक नहीं है। प्लास्टिक पर्यावरण के लिए जहर है। यह न तो सड़ता है और न ही खत्म होता है।
अनीता: बात तो सच है। गायें भी इसे खाकर बीमार पड़ जाती हैं।
सुनीता: इसीलिए हमें कपड़े के थैले का इस्तेमाल करना चाहिए।
अनीता: तुम सही कह रही हो। मैं आज से ही कपड़े का थैला साथ रखूँगी।
"स्वावलंबन का अर्थ है - अपना सहारा स्वयं बनना। किसी दूसरे पर बोझ न बनकर अपने पैरों पर खड़ा होना। स्वावलंबी व्यक्ति समाज में सम्मान पाता है..."
(क) शीर्षक लिखिए।
(ख) स्वावलंबी व्यक्ति समाज में क्या पाता है?
(ग) 'सम्मान' का विलोम लिखिए।
(घ) सारांश लिखिए।
"चींटी को देखो, वह सरल विरल काली रेखा,
तम के तागे सी जो हिल-डुल,
चलती लघुपद पल-पल मिल-जुल..."
(क) शीर्षक लिखिए।
(ख) चींटी कैसे चलती है?
(ग) 'तम' का अर्थ क्या है?
(घ) भावार्थ लिखिए।
(क) शीर्षक: स्वावलंबन / आत्मनिर्भरता।
(ख) उत्तर: स्वावलंबी व्यक्ति समाज में 'सम्मान' पाता है।
(ग) विलोम: अपमान।
(घ) सारांश: स्वावलंबन का अर्थ आत्मनिर्भर होना है। जो व्यक्ति दूसरों पर निर्भर नहीं रहता, वह आत्मविश्वासी और सुखी होता है। समाज ऐसे व्यक्ति का आदर करता है। उन्नति के लिए स्वावलंबी होना आवश्यक है।
(क) शीर्षक: चींटी / कर्मठता।
(ख) उत्तर: चींटी अपने छोटे-छोटे पैरों से पल-पल मिलकर और कतार बनाकर चलती है।
(ग) अर्थ: अँधेरा / काला रंग।
(घ) भावार्थ: कवि पंत जी चींटी की कर्मठता का वर्णन करते हैं। चींटी एक छोटा सा जीव है, लेकिन वह निरंतर कार्य करती है, मिल-जुलकर चलती है और कभी हार नहीं मानती। यह मनुष्यों के लिए प्रेरणा है।
सेवा में,
श्रीमान प्राचार्य महोदय,
सांदीपनि विद्यालय, बड़वानी।
विषय: खेल सामग्री उपलब्ध कराने बाबत।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय का खेल सचिव (Sports Secretary) हूँ। हमारे विद्यालय में आगामी खेल प्रतियोगिताएँ होने वाली हैं, किंतु हमारे खेल कक्ष में क्रिकेट के बल्ले, फुटबॉल और वॉलीबॉल नेट की कमी है। पुरानी सामग्री टूट-फूट गई है। इससे छात्रों को अभ्यास करने में असुविधा हो रही है।
अतः आपसे प्रार्थना है कि शीघ्र ही नई खेल सामग्री उपलब्ध कराने की कृपा करें ताकि हम अच्छा प्रदर्शन कर सकें।
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
रोहित वर्मा,
कक्षा 10वीं
दिनांक: XX/XX/2026
छात्रावास, इंदौर
दिनांक: XX/XX/2026
प्रिय बहन रिया,
शुभाशीष।
कल ही पिताजी का पत्र मिला। यह जानकर मेरा मन खुशी से भर गया कि तुमने विद्यालय की अंतर-विद्यालयी वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह तुम्हारी वाकपटुता और मेहनत का परिणाम है। मुझे तुम पर बहुत गर्व है। मेरी ओर से तुम्हें ढेर सारी बधाई। इसी तरह आगे बढ़ती रहो।
मैं अगली छुट्टियों में घर आऊंगा तो तुम्हारे लिए एक उपहार लाऊंगा।
तुम्हारा भाई,
संदीप
1. पर्यावरण प्रदूषण
रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. प्रदूषण के प्रकार, 3. कारण, 4. प्रभाव, 5. निवारण के उपाय, 6. उपसंहार।
1. प्रस्तावना: आज मानव के सामने सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण प्रदूषण की है। हवा, पानी और मिट्टी का अवांछित तत्वों से दूषित हो जाना प्रदूषण कहलाता है।
2. प्रकार: वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, मृदा प्रदूषण।
3. कारण: औद्योगीकरण, वाहनों का धुआँ, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, और प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग।
4. प्रभाव: प्रदूषण से ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है, मौसम चक्र बिगड़ रहा है और नई-नई बीमारियाँ (जैसे अस्थमा, कैंसर) फैल रही हैं।
5. निवारण: हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए। प्लास्टिक का उपयोग बंद करना चाहिए। कारखानों को शहरों से दूर स्थापित करना चाहिए।
6. उपसंहार: यदि हमने अभी पर्यावरण की रक्षा नहीं की, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह धरती रहने लायक नहीं बचेगी। "पृथ्वी को बचाना है, प्रदूषण को हटाना है।"
2. विद्यार्थी जीवन और अनुशासन
रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. अनुशासन का अर्थ, 3. विद्यार्थी जीवन में महत्व, 4. अनुशासनहीनता के कारण, 5. उपसंहार।
1. प्रस्तावना: विद्यार्थी देश का भविष्य हैं। उनके चरित्र निर्माण के लिए अनुशासन उतना ही आवश्यक है जितना शरीर के लिए भोजन।
2. अर्थ: अनुशासन का अर्थ है - 'नियमों का पालन करना' और 'स्वयं पर नियंत्रण रखना' (आत्म-अनुशासन)।
3. महत्व: अनुशासित विद्यार्थी समय का सदुपयोग करता है। वह बड़ों का आदर करता है और अपनी पढ़ाई पर ध्यान देता है। सफलता की पहली सीढ़ी अनुशासन ही है।
4. अनुशासनहीनता: आज छात्रों में अनुशासन की कमी देखी जा रही है। इसका कारण नैतिक शिक्षा की कमी, टीवी/मोबाइल का दुष्प्रभाव और गलत संगत है।
5. उपसंहार: एक अनुशासित छात्र ही आदर्श नागरिक बन सकता है। विद्यालयों और अभिभावकों को मिलकर छात्रों में अनुशासन की भावना जगाने का प्रयास करना चाहिए।
3. विज्ञान के चमत्कार
रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. विभिन्न क्षेत्रों में विज्ञान, 3. संचार और यातायात, 4. विज्ञान एक अभिशाप, 5. उपसंहार।
1. प्रस्तावना: "आज का युग विज्ञान का युग है।" सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हम विज्ञान की बनाई चीजों का ही उपयोग करते हैं।
2. विभिन्न क्षेत्रों में: बिजली ने अंधेरे को दूर किया है। चिकित्सा के क्षेत्र में विज्ञान ने मृत्यु दर को कम किया है और असाध्य रोगों का इलाज ढूंढा है। कृषि में नई तकनीकों से पैदावार बढ़ी है।
3. संचार और यातायात: मोबाइल और इंटरनेट ने दुनिया को छोटा कर दिया है। हम हजारों मील दूर बैठे व्यक्ति से बात कर सकते हैं। हवाई जहाज ने महीनों का सफर घंटों में बदल दिया है।
4. अभिशाप: विज्ञान के दुरुपयोग से परमाणु बम बने हैं जो पूरी मानवता को नष्ट कर सकते हैं। प्रदूषण और बेरोजगारी भी विज्ञान की देन हैं।
5. उपसंहार: विज्ञान एक अच्छा सेवक है लेकिन बुरा स्वामी। यदि हम इसका सही उपयोग करें तो यह वरदान है, अन्यथा अभिशाप।
4. मेरे सपनों का भारत
रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. अतीत का गौरव, 3. वर्तमान समस्याएँ, 4. कैसा हो मेरा भारत, 5. उपसंहार।
1. प्रस्तावना: भारत एक महान देश है। मुझे भारतीय होने पर गर्व है। लेकिन मैं एक ऐसे भारत का सपना देखता हूँ जो हर तरह से संपन्न और सुखी हो।
2. समस्याओं से मुक्त: मेरे सपनों के भारत में गरीबी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार का नामोनिशान न हो। यहाँ जाति और धर्म के नाम पर लड़ाई न हो।
3. शिक्षित और स्वच्छ: मैं चाहता हूँ कि भारत का हर नागरिक शिक्षित हो। देश में स्वच्छता हो और हर गाँव में बिजली-पानी की सुविधा हो। महिलाएँ सुरक्षित हों और उनका सम्मान हो।
4. आत्मनिर्भर: मेरा भारत विज्ञान और तकनीक में दुनिया में सबसे आगे हो। हम अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर न रहें।
5. उपसंहार: मेरे सपनों का भारत 'विश्व गुरु' बने। इसे साकार करने के लिए हम सभी को मिलकर कड़ी मेहनत और ईमानदारी से प्रयास करना होगा।
⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer)
इस पोस्ट में दिए गए प्रश्न एवं उत्तर केवल शैक्षणिक एवं अभ्यास उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। यह मॉडल पेपर संभावित प्रश्नों पर आधारित है तथा बोर्ड परीक्षा में इन्हीं प्रश्नों के आने की कोई गारंटी नहीं है।
उत्तर उपलब्ध पाठ्यपुस्तक एवं सिलेबस के आधार पर तैयार किए गए हैं। अंतिम एवं प्रमाणिक जानकारी के लिए विद्यार्थी अधिकृत पाठ्यपुस्तक एवं बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का ही अनुसरण करें।
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