एमपी बोर्ड कक्षा 10वीं हिन्दी मॉडल पेपर सेट C – नवीनतम पैटर्न पर आधारित
Class 10th Hindi Model Paper Set C
मुख्य जानकारी
- विषय: हिन्दी
- कक्षा: 10वीं (MP Board)
- पेपर सेट: Set C
- पूर्णांक: 75 अंक
मॉडल पेपर की विशेषताएँ
- नवीनतम सिलेबस के अनुसार तैयार
- बोर्ड परीक्षा पैटर्न पर आधारित
- महत्वपूर्ण एवं संभावित प्रश्न शामिल
- कम समय में अभ्यास के लिए उपयुक्त
- पुनरावृत्ति (Revision) हेतु उपयोगी
विद्यार्थियों के लिए लाभ
- त्वरित अभ्यास का अवसर
- समय प्रबंधन में सुधार
- प्रश्नों की संरचना समझने में सहायक
- परीक्षा आत्मविश्वास बढ़ाने में मददगार
Class 10th Hindi Model Paper Set C
MP Board Class 10th Model Paper SET C
कक्षा 10वीं - हिन्दी
Created by : D. Septa | पूर्णांक: 75 | समय: 3 घंटे
कारण (R): उसे अपनी माँ से डर लगता था। कथन-कारण
(ii) 16-16 मात्राएं -> (ख) जयशंकर प्रसाद
(iii) मन्नू भंडारी -> (ग) यतीन्द्र मिश्र
(iv) नौबतखाने में इबादत -> (घ) एक कहानी यह भी
(v) दांत खट्टे करना -> (ङ) सिक्किम की राजधानी
(vi) गंगटोक -> (च) परास्त करना
1. छायावाद के प्रवर्तक → (ख) जयशंकर प्रसाद
2. 16-16 मात्राएं → (क) चौपाई (सम मात्रिक छंद)
3. मन्नू भंडारी → (घ) एक कहानी यह भी (आत्मकथा)
4. नौबतखाने में इबादत → (ग) यतीन्द्र मिश्र (लेखक)
5. दांत खट्टे करना → (च) परास्त करना (मुहावरा)
6. गंगटोक → (ङ) सिक्किम की राजधानी
1. गुरु की महत्ता: भक्तिकाल में ईश्वर प्राप्ति के लिए गुरु को अनिवार्य माना गया है (जैसे कबीर और तुलसी ने गुरु वंदना की है)।
2. स्वांतः सुखाय रचना: कवियों ने लोकमंगल और आत्म-संतुष्टि के लिए काव्य रचना की, न कि केवल राजदरबारों के लिए।
1. अज्ञेय: 'हरी घास पर क्षण भर'।
2. धर्मवीर भारती: 'अंधा युग' (या 'कनुप्रिया')।
लक्ष्मण के अनुसार:
1. वीर योद्धा युद्धभूमि में अपनी वीरता का प्रदर्शन करते हैं, शत्रुओं के सामने अपनी डींगें नहीं हांकते।
2. वे ब्राह्मणों, गायों, देवताओं और कमजोरों पर अपनी वीरता नहीं दिखाते। वे धैर्यवान और विनम्र होते हैं।
गोपियों ने उद्धव को व्यंग्य में 'बड़भागी' (भाग्यवान) कहा है। उनका आशय यह है कि उद्धव कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम रूपी सागर में डूबने से बचे रहे, जो कि एक दुर्भाग्य की बात है। वे उस कमल के पत्ते के समान हैं जो पानी में रहकर भी सूखा रहता है।
परिभाषा: जो कारण (व्यक्ति, वस्तु या परिस्थिति) हृदय में स्थित स्थायी भाव को जागृत या उद्दीप्त करते हैं, उन्हें विभाव कहते हैं।
भेद: इसके दो भेद हैं - 1. आलंबन विभाव, 2. उद्दीपन विभाव।
जहाँ किसी वस्तु या स्थिति का वर्णन इतना बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए कि लोक सीमा का उल्लंघन हो जाए, वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है।
उदाहरण: "हनुमान की पूँछ में, लगन न पाई आग। लंका सिगरी जल गई, गए निसाचर भाग।"
कैप्टन एक देशभक्त नागरिक था। उसे नेताजी की बिना चश्मे वाली मूर्ति अधूरी और आहत करती थी। इसलिए वह अपनी छोटी सी दुकान से एक चश्मा मूर्ति पर लगा देता था। जब कोई ग्राहक वह चश्मा मांग लेता, तो वह उसे बेचकर मूर्ति पर दूसरा चश्मा लगा देता था।
भगत के इकलौते बेटे की मृत्यु के बाद वे अकेले रह गए थे। पुत्रवधू को चिंता थी कि बुढ़ापे में भगत जी के लिए भोजन कौन बनाएगा और बीमार पड़ने पर उनकी देखभाल कौन करेगा। इसलिए सेवाभाव के कारण वह उन्हें छोड़कर नहीं जाना चाहती थी।
रिपोर्ताज फ्रांसीसी भाषा का शब्द है। जब लेखक किसी घटना का आंखों देखा हाल इस प्रकार वर्णित करता है कि वह पाठक के हृदय को छू ले और उसका प्रभाव अमिट हो, तो उसे रिपोर्ताज कहते हैं।
1. विषय: रेखाचित्र किसी भी व्यक्ति (सामान्य या विशेष) का हो सकता है, संस्मरण प्रायः किसी महापुरुष या विशेष घटना का होता है।
2. तटस्थता: रेखाचित्र में लेखक तटस्थ रहकर चित्र खींचता है, संस्मरण में लेखक की आत्मीयता और निजी अनुभव जुड़े होते हैं।
रामवृक्ष बेनीपुरी जी 'कलम के जादूगर' कहे जाते हैं। उनकी भाषा ओजस्वी, खड़ी बोली हिंदी है जिसमें तत्सम, तद्भव और देशज शब्दों का सुंदर समन्वय है। उनकी शैली चित्रात्मक है, जिससे वर्णन सजीव हो उठता है।
जिस समास में दोनों पद प्रधान हों और विग्रह करने पर 'और', 'या', 'अथवा' लगता हो, उसे द्वंद्व समास कहते हैं।
उदाहरण: माता-पिता (माता और पिता), सुख-दुख (सुख और दुख)।
इस पाठ में बताया गया है कि बच्चे का अपनी माँ के प्रति गहरा लगाव होता है। सुख के समय भले ही वह पिता के साथ खेले, लेकिन विपत्ति या डर के समय उसे माँ की गोद (अँचल) में ही सुरक्षा और शांति मिलती है।
1. उसने भारत के पहाड़ी प्रदेशों और पत्थरों की खानों का दौरा किया।
2. उसने देश के महापुरुषों की मूर्तियों की नाक टटोली।
3. उसने बिहार सेक्रेटेरिएट के सामने शहीद बच्चों की मूर्तियों की नाक देखी।
4. अंत में, उसने एक जीवित व्यक्ति की नाक काटकर मूर्ति पर लगा दी।
1. आग बबूला होना
2. गागर में सागर भरना
सार्थक शब्दों का वह व्यवस्थित समूह जिससे अपेक्षित अर्थ पूर्ण रूप से स्पष्ट हो जाए, वाक्य कहलाता है। अर्थ के आधार पर वाक्य के 8 भेद होते हैं (जैसे- विधानवाचक, निषेधवाचक, प्रश्नवाचक आदि)।
1. आग बबूला होना (बहुत क्रोधित होना): गृहकार्य पूरा न होने पर शिक्षक छात्र पर आग बबूला हो गए।
2. गागर में सागर भरना (थोड़े में बहुत कहना): बिहारी जी ने अपने दोहों में गागर में सागर भर दिया है।
"मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,
मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।"
"फसल क्या है?
और तो कुछ नहीं है वह
नदियों के पानी का जादू है वह..."
संदर्भ: पाठ्यपुस्तक क्षितिज भाग-2, कविता 'आत्मकथ्य', कवि 'जयशंकर प्रसाद' ।
प्रसंग: कवि अपनी आत्मकथा न लिखने का कारण बताते हुए जीवन की नश्वरता का वर्णन कर रहे हैं।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि मेरा मन रूपी भौंरा गुनगुना कर न जाने अपनी कौन सी दुखभरी कहानी सुनाना चाहता है। जब मैं अपने जीवन की ओर देखता हूँ, तो पाता हूँ कि जीवन रूपी वृक्ष से खुशियों की पत्तियां मुरझा कर गिर रही हैं। अर्थात मेरा जीवन दुखों और अभावों से भरा है, इसमें सुख के पल बहुत कम और क्षणिक रहे हैं।
संदर्भ: कविता 'फसल', कवि 'नागार्जुन' ।
भावार्थ: कवि कहते हैं कि फसल केवल एक पौधा नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मनुष्य के सहयोग का परिणाम है। यह नदियों के जल का प्रभाव (जादू) है, करोड़ों इंसानों के हाथों की मेहनत (स्पर्श की महिमा) है, और विभिन्न प्रकार की मिट्टी का गुणधर्म है। साथ ही, इसमें सूरज की किरणों का रूपांतरण और हवा की थिरकन भी शामिल है।
"नवाब साहब ने खीरे की सब फाँकों को खिड़की के बाहर फेंककर तौलिये से हाथ और होंठ पोंछ लिए और गर्व से गुलाबी आँखों से हमारी ओर देख लिया, मानो कह रहे हों - यह है खानदानी रईसों का तरीका!"
"काशी में संगीत आयोजन की एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है... यह आयोजन पिछले कई वर्षों से संकटमोचन मंदिर में होता आया है।"
संदर्भ: पाठ 'लखनवी अंदाज', लेखक 'यशपाल' ।
प्रसंग: नवाब साहब द्वारा खीरे को सूंघकर फेंकने के बाद के उनके हाव-भाव का वर्णन।
व्याख्या: लेखक बताते हैं कि नवाब साहब ने खीरे की सभी स्वादिष्ट फाँकों को बिना खाए ही खिड़की से बाहर फेंक दिया। इसके बाद उन्होंने बड़े इत्मीनान से हाथ-मुंह पोंछे और लेखक की ओर गर्व भरी नजरों से देखा। उनका यह व्यवहार यह जताने के लिए था कि हम रईस लोग हैं, हम खीरे जैसी तुच्छ चीज खाते नहीं, बस उसकी सुगंध लेते हैं। यह उनके झूठे अभिमान और बनावटीपन को दर्शाता है।
संदर्भ: पाठ 'नौबतखाने में इबादत', लेखक 'यतीन्द्र मिश्र' ।
आशय: लेखक काशी (बनारस) की सांस्कृतिक समृद्धि का वर्णन कर रहे हैं। काशी केवल धर्म की नगरी नहीं, बल्कि संगीत और कला का भी केंद्र है। यहाँ संकटमोचन मंदिर में हनुमान जयंती के अवसर पर शास्त्रीय संगीत और नृत्य का भव्य आयोजन होता है। बिस्मिल्ला खाँ जैसे महान कलाकार इसमें अपनी हाजिरी लगाना (शहनाई बजाना) अपना धर्म समझते थे।
अनुशासन (अनु + शासन) का अर्थ है नियमों का पालन करना। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अनुशासन का अत्यधिक महत्व है। प्रकृति भी अनुशासन में रहकर कार्य करती है—सूरज का उगना, ऋतुओं का बदलना। विद्यार्थी जीवन में तो यह सफलता की कुंजी है। अनुशासित व्यक्ति अपने समय और ऊर्जा का सही उपयोग करता है। जिस देश के नागरिक अनुशासित होते हैं, वह देश निरंतर प्रगति करता है। अनुशासनहीनता जीवन को अस्त-व्यस्त कर देती है। अतः हमें बचपन से ही अनुशासन को अपने जीवन का अंग बनाना चाहिए।
नागरिक 1: भाई साहब, क्या हाल है हमारे शहर का? जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं।
नागरिक 2: सही कह रहे हैं आप। नगरपालिका की गाड़ी भी रोज नहीं आती। बदबू से जीना मुश्किल हो गया है।
नागरिक 1: लेकिन गलती हमारी भी तो है। हम लोग भी कचरा डस्टबिन में डालने के बजाय सड़क पर फेंक देते हैं।
नागरिक 2: यह तो है। अगर हम जागरूक नहीं होंगे, तो केवल सरकार को कोसने से कुछ नहीं होगा।
नागरिक 1: बिल्कुल! चलिए, आज से हम संकल्प लें कि हम न गंदगी करेंगे और न करने देंगे।
"पुस्तकें हमारी सबसे अच्छी मित्र होती हैं। वे हमें ज्ञान देती हैं और हमारा मनोरंजन करती हैं। एक अच्छी पुस्तक सौ मित्रों के बराबर होती है..."
(क) शीर्षक लिखिए।
(ख) पुस्तकें हमारी मित्र क्यों हैं?
(ग) 'मनोरंजन' का संधि विच्छेद करें।
(घ) सारांश लिखिए।
"जो बीत गई सो बात गई,
जीवन में एक सितारा था,
माना वह बेहद प्यारा था..."
(क) शीर्षक लिखिए।
(ख) कवि क्या संदेश देना चाहता है?
(ग) 'सितारा' किसका प्रतीक है?
(घ) भावार्थ लिखिए।
(क) शीर्षक: पुस्तकों का महत्व / सच्ची मित्र: पुस्तकें।
(ख) उत्तर: क्योंकि वे हमें ज्ञान देती हैं, सही मार्ग दिखाती हैं, और कभी धोखा नहीं देतीं।
(ग) संधि विच्छेद: मनः + रंजन (विसर्ग संधि)।
(घ) सारांश: पुस्तकें मानव जीवन में सच्चे मित्र की भूमिका निभाती हैं। वे ज्ञान का भंडार हैं और एकांत में हमारी साथी हैं। अच्छी पुस्तकों का अध्ययन हमारे चरित्र निर्माण में सहायक होता है।
(क) शीर्षक: बीती ताहि बिसार दे / आशावाद।
(ख) उत्तर: कवि संदेश दे रहे हैं कि बीते हुए दुखों को भूलकर आगे बढ़ना चाहिए।
(ग) प्रतीक: सितारा किसी प्रियजन या प्रिय वस्तु का प्रतीक है।
(घ) भावार्थ: कवि हरिवंश राय बच्चन कहते हैं कि जीवन में असफलताएं और वियोग आते रहते हैं। जैसे आकाश अपने टूटे तारे का शोक नहीं मनाता, वैसे ही हमें भी जो बीत गया, उसे भूलकर भविष्य की ओर देखना चाहिए।
सेवा में,
स्वास्थ्य अधिकारी महोदय,
नगर निगम, इंदौर (म.प्र.)।
विषय: नियमित जलापूर्ति न होने की शिकायत हेतु।
मान्यवर,
मैं आपका ध्यान सुदामा नगर क्षेत्र की पेयजल समस्या की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। पिछले एक सप्ताह से हमारे क्षेत्र में नलों में पानी बहुत कम दबाव से आ रहा है और वह भी अनियमित समय पर। कभी-कभी गंदा पानी भी आता है। गर्मी के मौसम में इससे निवासियों को भारी परेशानी हो रही है।
अतः आपसे निवेदन है कि इस समस्या की जाँच करवाकर नियमित और स्वच्छ जलापूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
भवदीय,
रमेश कुमार,
सुदामा नगर, इंदौर।
दिनांक: 25/03/2026
परीक्षा भवन,
दिनांक: 25/03/2026
प्रिय अनुज आयुष,
शुभाशीष।
हम सब यहाँ कुशल हैं। पिताजी के पत्र से पता चला कि तुम आजकल पढ़ाई में ध्यान नहीं दे रहे हो और अपना ज्यादा समय खेलकूद या मोबाइल में बिता रहे हो। भाई, यह समय तुम्हारे जीवन की नींव है। 'गया वक्त फिर हाथ नहीं आता'। अगर तुम अभी समय का सदुपयोग करोगे, तो भविष्य में सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी। खेलकूद भी जरूरी है, लेकिन पढ़ाई पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
आशा है तुम मेरी सलाह मानोगे और एक समय-सारिणी बनाकर पढ़ाई करोगे।
तुम्हारा बड़ा भाई,
विवेक
1. आत्मनिर्भर भारत
रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. आत्मनिर्भरता का अर्थ, 3. प्रमुख क्षेत्र, 4. चुनौतियाँ और समाधान, 5. उपसंहार।
1. प्रस्तावना: किसी भी राष्ट्र की प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपनी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर कितना निर्भर है। भारत को सशक्त बनाने के लिए 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान एक महत्वपूर्ण पहल है।
2. अर्थ: आत्मनिर्भरता का अर्थ है - अपनी जरूरतों का सामान खुद बनाना और आयात (Import) कम करके निर्यात (Export) बढ़ाना। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक विनिर्माण हब (Global Manufacturing Hub) बनाना है।
3. प्रमुख क्षेत्र: रक्षा, तकनीक, कृषि और ऊर्जा वे प्रमुख क्षेत्र हैं जहाँ भारत को आत्मनिर्भर होना है। 'मेक इन इंडिया' और 'वोकल फॉर लोकल' जैसे नारे इसी दिशा में कदम हैं।
4. लाभ: इससे देश का पैसा देश में रहेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। हम संकट के समय (जैसे महामारी) दूसरों का मुंह नहीं ताकेंगे।
5. उपसंहार: आत्मनिर्भर भारत केवल सरकार का नहीं, बल्कि हर नागरिक का सपना होना चाहिए। जब हम स्वदेशी अपनाएंगे, तभी देश स्वावलंबी और महाशक्ति बनेगा।
2. इंटरनेट: वरदान या अभिशाप
रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. संचार क्रांति, 3. शिक्षा और व्यापार में लाभ, 4. दुष्परिणाम (हानियाँ), 5. उपसंहार।
1. प्रस्तावना: विज्ञान ने हमें कई उपहार दिए हैं, उनमें 'इंटरनेट' सबसे अद्भुत है। इसने पूरी दुनिया को एक छोटे से गाँव (Global Village) में बदल दिया है।
2. वरदान के रूप में: इंटरनेट ज्ञान का सागर है। छात्र किसी भी विषय की जानकारी सेकंडों में प्राप्त कर सकते हैं। ऑनलाइन बैंकिंग, शॉपिंग और बिल जमा करने जैसी सुविधाओं ने जीवन आसान बना दिया है। कोरोना काल में वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लास इंटरनेट के कारण ही संभव हो पाई।
3. अभिशाप के रूप में: हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। इंटरनेट का अत्यधिक उपयोग समय की बर्बादी, आँखों की कमजोरी और मानसिक तनाव का कारण बन रहा है। साइबर अपराध (हैकिंग, ठगी) और अश्लीलता का प्रसार इसके नकारात्मक पक्ष हैं।
4. उपसंहार: इंटरनेट एक शक्तिशाली साधन है। यह हम पर निर्भर करता है कि हम इसका उपयोग अपने विकास के लिए करते हैं या विनाश के लिए। इसका विवेकपूर्ण उपयोग ही मानवता के हित में है।
3. मेरा प्रिय त्योहार: दीपावली
रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. मनाने का कारण, 3. तैयारी और उत्सव, 4. सामाजिक महत्व, 5. उपसंहार।
1. प्रस्तावना: भारत त्योहारों का देश है। यहाँ होली, ईद, क्रिसमस सब धूमधाम से मनाए जाते हैं, लेकिन मेरा प्रिय त्योहार 'दीपावली' है। यह दीपों का उत्सव है जो अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।
2. मनाने का कारण: माना जाता है कि इसी दिन भगवान राम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर और रावण का वध कर अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दिए जलाए थे।
3. उत्सव: दीपावली से कई दिन पहले घरों की सफाई और पुताई शुरू हो जाती है। धनतेरस, छोटी दिवाली, और मुख्य दिवाली—यह पांच दिनों का उत्सव है। लोग नए कपड़े पहनते हैं, मिठाइयाँ बांटते हैं और रात में लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं। बच्चे पटाखे जलाते हैं।
4. संदेश: यह त्योहार हमें स्वच्छता, भाईचारे और सात्विकता का संदेश देता है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत की याद दिलाता है।
5. उपसंहार: दीपावली खुशियों का त्योहार है। हमें इसे प्रदूषण मुक्त (बिना तेज पटाखों के) और मिल-जुलकर मनाना चाहिए।
4. योग का महत्व
रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. योग का अर्थ, 3. शारीरिक और मानसिक लाभ, 4. अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, 5. उपसंहार।
1. प्रस्तावना: "शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्" - अर्थात शरीर ही सभी कर्तव्यों को पूरा करने का साधन है। स्वस्थ शरीर के लिए योग अत्यंत आवश्यक है। यह भारत की विश्व को दी गई प्राचीन धरोहर है।
2. योग का अर्थ: योग का अर्थ है 'जोड़ना'—आत्मा का परमात्मा से मिलन। यह केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक कला है।
3. लाभ: नियमित योग करने से शरीर लचीला और निरोगी रहता है। प्राणायाम से फेफड़े मजबूत होते हैं। ध्यान (Meditation) से मानसिक शांति मिलती है और तनाव (Stress) कम होता है। यह एकाग्रता बढ़ाने में विद्यार्थियों के लिए बहुत लाभकारी है।
4. विश्व स्तर पर पहचान: भारत के प्रयासों से 21 जून को 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' घोषित किया गया है। आज पूरी दुनिया योग की शक्ति को मान रही है।
5. उपसंहार: भागदौड़ भरी जिंदगी में योग संजीवनी बूटी के समान है। 'करो योग, रहो निरोग'—यही सुखी जीवन का मूलमंत्र है।
⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer)
इस पोस्ट में दिए गए प्रश्न एवं उत्तर केवल अभ्यास और शैक्षणिक उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। ये प्रश्न संभावित (Model) स्वरूप के हैं तथा बोर्ड परीक्षा में इन्हीं प्रश्नों के आने की कोई गारंटी नहीं है।
उत्तर संदर्भ सामग्री एवं पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किए गए हैं। छात्र अंतिम एवं प्रमाणिक जानकारी के लिए संबंधित पाठ्यपुस्तक, अधिकृत सिलेबस एवं बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का ही अनुसरण करें।
इस सामग्री का उद्देश्य विद्यार्थियों की तैयारी में सहयोग करना है, न कि किसी आधिकारिक प्रश्नपत्र का प्रतिनिधित्व करना।
MP Education Gyan Deep किसी भी प्रकार की त्रुटि या परिवर्तन के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।
✍️ GYAN DEEP INFO द्वारा विद्यार्थियों के लिए नियमित रूप से मॉडल पेपर एवं अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। नवीनतम अपडेट के लिए वेबसाइट विजिट करते रहें।









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