कक्षा 12वीं भौतिकी प्रैक्टिस पेपर – Set A
मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MP Board) की कक्षा 12वीं भौतिकी परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह Practice Paper – Set A विशेष रूप से तैयार किया गया है।
यह प्रश्नपत्र नवीन परीक्षा पैटर्न, ब्लूप्रिंट और अंक विभाजन को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जिससे विद्यार्थियों को वास्तविक परीक्षा जैसा अभ्यास मिल सके।
📝 प्रैक्टिस पेपर की मुख्य विशेषताएँ
- नवीन MP Board परीक्षा पैटर्न पर आधारित
- MCQ, अति लघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न शामिल
- सिलेबस के सभी महत्वपूर्ण अध्याय कवर
- समय प्रबंधन और उत्तर लेखन अभ्यास में सहायक
- परीक्षा से पूर्व रिवीजन के लिए अत्यंत उपयोगी
🎯 यह प्रैक्टिस पेपर किसके लिए उपयोगी है?
- कक्षा 12वीं MP Board के विद्यार्थी
- वार्षिक परीक्षा की अंतिम तैयारी करने वाले छात्र
- मॉडल पेपर और अनुमानित प्रश्नों का अभ्यास चाहने वाले विद्यार्थी
- कोचिंग / स्कूल टेस्ट की तैयारी कर रहे छात्र
महत्वपूर्ण सूचना:
यह प्रैक्टिस पेपर केवल अभ्यास हेतु तैयार किया गया है।
वास्तविक परीक्षा प्रश्नपत्र इससे भिन्न हो सकता है।
⬇️ Practice Paper Set A
नीचे दिए गए लिंक से आप कक्षा 12वीं भौतिकी Practice Paper – Set A देख सकते हैं।
कक्षा 12वीं - भौतिक शास्त्र
(मॉडल पेपर 2025-26 सेट - A)
Created by : D Septa | पूर्णांक: 70 | समय: 3 घंटे
खण्ड अ: वस्तुनिष्ठ प्रश्न (28 अंक)
प्र.1. सही विकल्प चुनकर लिखिए: (1×6 = 6 अंक)
(i) बिंदु आवेश Q के कारण r दूरी पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (E) समानुपाती होती है:
👉 (स) 1/r²
विवरण: कूलॉम के नियम के अनुसार, E = kQ/r², अतः E ∝ 1/r².
(ii) अतिचालक पदार्थ की चालकता होती है:
👉 (अ) अनंत
विवरण: अतिचालकता की स्थिति में प्रतिरोध शून्य हो जाता है, इसलिए चालकता (G = 1/R) अनंत हो जाती है।
(iii) एक गतिमान आवेश उत्पन्न करता है:
👉 (स) विद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्र दोनों
विवरण: आवेश होने के कारण विद्युत क्षेत्र और गति के कारण चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।
(iv) लेंज का नियम किसके संरक्षण सिद्धांत पर आधारित है?
👉 (स) ऊर्जा
विवरण: लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के नियम का ही एक रूप है, जो प्रेरित धारा की दिशा बताता है।
(v) निर्वात में विद्युत चुम्बकीय तरंगों का वेग होता है:
👉 (ब) c = 1/√(μ₀ε₀)
विवरण: यह मैक्सवेल का प्रसिद्ध संबंध है जो प्रकाश की चाल को विद्युतशीलता और चुंबकशीलता से जोड़ता है।
(vi) P-प्रकार के अर्द्धचालक में बहुसंख्यक आवेश वाहक होते हैं:
👉 (ब) होल (विवर)
विवरण: P-Type (Positive Type) में होल्स की अधिकता होती है, जबकि N-Type में इलेक्ट्रॉनों की।
प्र.2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए: (1×6 = 6 अंक)
(i) आवेश का क्वांटीकरण ________ का मूल कारण है।
इलेक्ट्रॉन का पूर्ण गुणज होना (q = ne)
विवरण: किसी भी वस्तु पर आवेश इलेक्ट्रॉन के आवेश का पूर्ण गुणज होता है।
(ii) किरचॉफ का प्रथम नियम ________ संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है।
आवेश
विवरण: संधि नियम (ΣI = 0) आवेश संरक्षण को दर्शाता है।
(iii) चुंबकीय फ्लक्स का SI मात्रक ________ है।
वेबर (Weber - Wb)
विवरण: चुंबकीय क्षेत्र (B) और क्षेत्रफल (A) का गुणनफल फ्लक्स होता है।
(iv) स्वस्थ नेत्र के लिए स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी ________ होती है।
25 सेमी
विवरण: इस दूरी पर वस्तु सबसे स्पष्ट दिखाई देती है बिना आँखों पर जोर डाले।
(v) फोटॉन का विराम द्रव्यमान ________ होता है।
शून्य
विवरण: फोटॉन हमेशा प्रकाश की चाल से गति करता है, इसका विराम अस्तित्व नहीं होता।
(vi) NAND गेट में AND गेट के साथ ________ गेट जुड़ा होता है।
NOT
विवरण: NAND = NOT + AND.
प्र.3. सत्य/असत्य का चयन कीजिए: (1×5 = 5 अंक)
(i) दो विद्युत क्षेत्र रेखाएं एक-दूसरे को काट सकती हैं।
असत्य
विवरण: यदि वे काटेंगी तो कटान बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दो दिशाएं होंगी, जो असंभव है।
(ii) एक आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध अनंत होना चाहिए।
सत्य
विवरण: ताकि वह परिपथ से कोई धारा न ले और सही विभवांतर मापे।
(iii) ट्रांसफॉर्मर का उपयोग दिष्ट धारा (DC) में किया जा सकता है।
असत्य
विवरण: ट्रांसफॉर्मर अन्योन्य प्रेरण पर कार्य करता है जो केवल AC (परिवर्तित फ्लक्स) में संभव है।
(iv) पराबैंगनी किरणों की खोज रिटर ने की थी।
सत्य
विवरण: जोहान रिटर ने UV किरणों की खोज की थी।
(v) जेनर डायोड का उपयोग वोल्टेज नियंत्रक के रूप में होता है।
सत्य
विवरण: यह भंजन क्षेत्र (Breakdown region) में कार्य करता है और वोल्टेज स्थिर रखता है।
प्र.4. सही जोड़ी मिलाइए: (1×6 = 6 अंक)
(i) लॉरेंज बल -> (क) E = mc²
(ii) स्नेल का नियम -> (ख) λ = h/p
(iii) द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता -> (ग) F = q(v × B)
(iv) दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य -> (घ) μ = sin i / sin r
(v) रिडबर्ग नियतांक -> (ङ) नाभिकीय संलयन
(vi) तारों की ऊर्जा का स्रोत -> (च) R = 1.097 × 10⁷ m⁻¹
(ii) स्नेल का नियम -> (ख) λ = h/p
(iii) द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता -> (ग) F = q(v × B)
(iv) दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य -> (घ) μ = sin i / sin r
(v) रिडबर्ग नियतांक -> (ङ) नाभिकीय संलयन
(vi) तारों की ऊर्जा का स्रोत -> (च) R = 1.097 × 10⁷ m⁻¹
सही मिलान:
1. लॉरेंज बल → (ग) F = q(v × B) (चुंबकीय बल)
2. स्नेल का नियम → (घ) μ = sin i / sin r (अपवर्तन)
3. द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता → (क) E = mc² (आइंस्टीन)
4. दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य → (ख) λ = h/p (द्रव्य तरंगे)
5. रिडबर्ग नियतांक → (च) R = 1.097 × 10⁷ m⁻¹
6. तारों की ऊर्जा का स्रोत → (ङ) नाभिकीय संलयन
1. लॉरेंज बल → (ग) F = q(v × B) (चुंबकीय बल)
2. स्नेल का नियम → (घ) μ = sin i / sin r (अपवर्तन)
3. द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता → (क) E = mc² (आइंस्टीन)
4. दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य → (ख) λ = h/p (द्रव्य तरंगे)
5. रिडबर्ग नियतांक → (च) R = 1.097 × 10⁷ m⁻¹
6. तारों की ऊर्जा का स्रोत → (ङ) नाभिकीय संलयन
प्र.5. एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए: (1×5 = 5 अंक)
(i) उस पृष्ठ का नाम लिखिए जिसके प्रत्येक बिंदु पर विभव समान होता है।
समविभव पृष्ठ (Equipotential Surface)
(ii) अनुगमन वेग (Drift Velocity) और विद्युत क्षेत्र की तीव्रता में क्या संबंध है?
v_d ∝ E (अनुगमन वेग विद्युत क्षेत्र के समानुपाती होता है)
(iii) स्वप्रेरकत्व का SI मात्रक लिखिए।
हेनरी (Henry - H)
(iv) वह न्यूनतम आवृत्ति जिसके नीचे प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन संभव नहीं है, क्या कहलाती है?
देहली आवृत्ति (Threshold Frequency)
(v) शुद्ध अर्द्धचालक में अशुद्धि मिलाने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
डोपिंग (Doping) या अपमिश्रण
खण्ड ब: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
प्र.6. विद्युत फ्लक्स किसे कहते हैं? इसका SI मात्रक लिखिए।
अथवा
आवेश के क्वांटीकरण का सिद्धान्त लिखिए।
उत्तर: विद्युत क्षेत्र में स्थित किसी पृष्ठ के लम्बवत गुजरने वाली कुल बल रेखाओं की संख्या को विद्युत फ्लक्स कहते हैं। मात्रक: न्यूटन-मीटर²/कूलॉम (Nm²/C) या वोल्ट-मीटर (Vm)।
(अथवा) उत्तर: प्रकृति में किसी भी वस्तु पर आवेश एक न्यूनतम इकाई आवेश (e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C) का पूर्ण गुणज होता है। अर्थात q = ±ne, जहाँ n एक पूर्णांक है।
(अथवा) उत्तर: प्रकृति में किसी भी वस्तु पर आवेश एक न्यूनतम इकाई आवेश (e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C) का पूर्ण गुणज होता है। अर्थात q = ±ne, जहाँ n एक पूर्णांक है।
प्र.7. ओम का नियम लिखिए तथा इसकी शर्तें बताइए।
अथवा
अनुगमन वेग किसे कहते हैं?
उत्तर: यदि किसी चालक की भौतिक अवस्था (ताप, लम्बाई) में परिवर्तन न हो, तो उसके सिरों पर लगाया गया विभवान्तर उसमें प्रवाहित धारा के समानुपाती होता है (V ∝ I)।
(अथवा) उत्तर: विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में चालक के अंदर मुक्त इलेक्ट्रॉन जिस औसत वेग से धन सिरे की ओर गति करते हैं, उसे अनुगमन वेग कहते हैं।
(अथवा) उत्तर: विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में चालक के अंदर मुक्त इलेक्ट्रॉन जिस औसत वेग से धन सिरे की ओर गति करते हैं, उसे अनुगमन वेग कहते हैं।
प्र.8. बायो-सावर्ट का नियम लिखिए।
अथवा
एम्पियर का परिपथीय नियम लिखिए।
उत्तर: किसी धारावाही अल्पांश (dl) के कारण किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र (dB) धारा (I), अल्पांश की लम्बाई, और sine कोण के समानुपाती तथा दूरी (r) के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। dB ∝ (Idl sinθ)/r²
(अथवा) उत्तर: निर्वात में किसी बंद वक्र के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र का रेखीय समाकलन उस वक्र द्वारा घिरी हुई कुल धारा का μ₀ गुना होता है। ∮B.dl = μ₀I
(अथवा) उत्तर: निर्वात में किसी बंद वक्र के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र का रेखीय समाकलन उस वक्र द्वारा घिरी हुई कुल धारा का μ₀ गुना होता है। ∮B.dl = μ₀I
प्र.9. स्वप्रेरण और अन्योन्य प्रेरण में दो अंतर लिखिए।
अथवा
फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के नियम लिखिए।
उत्तर:
1. स्वप्रेरण एक ही कुंडली में होता है, अन्योन्य प्रेरण दो कुंडलियों में होता है।
2. स्वप्रेरण में प्रेरित धारा मुख्य धारा को प्रभावित करती है, अन्योन्य में दूसरी कुंडली में धारा प्रेरित होती है।
(अथवा) उत्तर: 1. जब किसी परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है।
2. प्रेरित वि.वा.बल फ्लक्स परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है।
2. स्वप्रेरण में प्रेरित धारा मुख्य धारा को प्रभावित करती है, अन्योन्य में दूसरी कुंडली में धारा प्रेरित होती है।
(अथवा) उत्तर: 1. जब किसी परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है।
2. प्रेरित वि.वा.बल फ्लक्स परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है।
प्र.10. पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए दो आवश्यक शर्तें लिखिए।
अथवा
खतरे के सिग्नल लाल रंग के क्यों होते हैं?
उत्तर:
1. प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना चाहिए।
2. आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए।
(अथवा) उत्तर: लाल रंग का तरंगदैर्घ्य सबसे अधिक होता है, जिसके कारण इसका प्रकीर्णन (Scattering) सबसे कम होता है। इसलिए यह कोहरे या धुएं में भी दूर तक दिखाई देता है।
2. आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए।
(अथवा) उत्तर: लाल रंग का तरंगदैर्घ्य सबसे अधिक होता है, जिसके कारण इसका प्रकीर्णन (Scattering) सबसे कम होता है। इसलिए यह कोहरे या धुएं में भी दूर तक दिखाई देता है।
प्र.11. कार्यफलन और देहली आवृत्ति की परिभाषा लिखिए।
अथवा
प्रकाश विद्युत प्रभाव क्या है?
उत्तर:
कार्यफलन: वह न्यूनतम ऊर्जा जो किसी धातु पृष्ठ से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन के लिए आवश्यक होती है।
देहली आवृत्ति: वह न्यूनतम आवृत्ति जिससे कम आवृत्ति पर प्रकाश विद्युत प्रभाव नहीं होता।
(अथवा) उत्तर: जब किसी धातु की सतह पर उचित आवृत्ति का प्रकाश डाला जाता है, तो उसकी सतह से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होने लगते हैं। इस घटना को प्रकाश विद्युत प्रभाव कहते हैं।
देहली आवृत्ति: वह न्यूनतम आवृत्ति जिससे कम आवृत्ति पर प्रकाश विद्युत प्रभाव नहीं होता।
(अथवा) उत्तर: जब किसी धातु की सतह पर उचित आवृत्ति का प्रकाश डाला जाता है, तो उसकी सतह से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होने लगते हैं। इस घटना को प्रकाश विद्युत प्रभाव कहते हैं।
प्र.12. समस्थानिक और समभारिक में अंतर लिखिए।
अथवा
नाभिकीय विखंडन और नाभिकीय संलयन में अंतर लिखिए।
उत्तर:
समस्थानिक: परमाणु क्रमांक समान, द्रव्यमान संख्या भिन्न (जैसे H-1, H-2)।
समभारिक: द्रव्यमान संख्या समान, परमाणु क्रमांक भिन्न (जैसे C-14, N-14)।
(अथवा) उत्तर: विखंडन में एक भारी नाभिक दो हल्के नाभिकों में टूटता है, जबकि संलयन में दो हल्के नाभिक मिलकर एक भारी नाभिक बनाते हैं।
समभारिक: द्रव्यमान संख्या समान, परमाणु क्रमांक भिन्न (जैसे C-14, N-14)।
(अथवा) उत्तर: विखंडन में एक भारी नाभिक दो हल्के नाभिकों में टूटता है, जबकि संलयन में दो हल्के नाभिक मिलकर एक भारी नाभिक बनाते हैं।
खण्ड स: लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक)
प्र.13. समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता का व्यंजक स्थापित कीजिए।
अथवा
विद्युत द्विध्रुव की अक्षीय स्थिति में विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक ज्ञात कीजिए।
उत्तर संकेत (समांतर प्लेट संधारित्र):
1. दो प्लेटें A और B मानिए, एक पर +q और दूसरी पर -q आवेश।
2. प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र E = σ/ε₀ = q/(Aε₀)।
3. विभवान्तर V = E × d = qd/(Aε₀)।
4. धारिता C = q/V = Aε₀/d।
(अथवा) उत्तर संकेत (अक्षीय स्थिति): 1. द्विध्रुव के कारण +q और -q से दूरी लेकर तीव्रता E₁ और E₂ निकालें।
2. परिणामी E = E₁ - E₂।
3. अंतिम व्यंजक: E = (1/4πε₀) × (2pr / (r²-l²)²)। छोटे द्विध्रुव के लिए E = 2kp/r³।
2. प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र E = σ/ε₀ = q/(Aε₀)।
3. विभवान्तर V = E × d = qd/(Aε₀)।
4. धारिता C = q/V = Aε₀/d।
(अथवा) उत्तर संकेत (अक्षीय स्थिति): 1. द्विध्रुव के कारण +q और -q से दूरी लेकर तीव्रता E₁ और E₂ निकालें।
2. परिणामी E = E₁ - E₂।
3. अंतिम व्यंजक: E = (1/4πε₀) × (2pr / (r²-l²)²)। छोटे द्विध्रुव के लिए E = 2kp/r³।
प्र.14. विभवमापी का सिद्धांत समझाइए। यह वोल्टमीटर से श्रेष्ठ क्यों है?
अथवा
व्हीटस्टोन सेतु का सिद्धांत (P/Q = R/S) किरचॉफ के नियमों की सहायता से व्युत्पन्न कीजिए।
उत्तर संकेत (विभवमापी):
सिद्धांत: एकसमान तार पर विभव पतन तार की लम्बाई के समानुपाती होता है (V ∝ l)।
श्रेष्ठता: यह शून्य विक्षेप स्थिति (Open Circuit) पर काम करता है, अतः सेल से कोई धारा नहीं लेता और यथार्थ वि.वा.बल मापता है।
(अथवा) उत्तर संकेत (व्हीटस्टोन सेतु): 1. बंद पाश ABDA और BCDB में किरचॉफ का वोल्टता नियम लगाएं।
2. संतुलन की स्थिति में गैल्वेनोमीटर धारा Ig = 0 रखें।
3. दोनों समीकरणों को हल करके P/Q = R/S प्राप्त करें।
श्रेष्ठता: यह शून्य विक्षेप स्थिति (Open Circuit) पर काम करता है, अतः सेल से कोई धारा नहीं लेता और यथार्थ वि.वा.बल मापता है।
(अथवा) उत्तर संकेत (व्हीटस्टोन सेतु): 1. बंद पाश ABDA और BCDB में किरचॉफ का वोल्टता नियम लगाएं।
2. संतुलन की स्थिति में गैल्वेनोमीटर धारा Ig = 0 रखें।
3. दोनों समीकरणों को हल करके P/Q = R/S प्राप्त करें।
प्र.15. ट्रांसफॉर्मर का वर्णन निम्न शीर्षकों के अंतर्गत कीजिए:
(i) सिद्धांत
(ii) प्रकार
(iii) ऊर्जा क्षय के कारण
(i) सिद्धांत
(ii) प्रकार
(iii) ऊर्जा क्षय के कारण
अथवा
प्रत्यावर्ती धारा जनित्र (AC Generator) का नामांकित चित्र बनाकर उसकी कार्यविधि समझाइए।
उत्तर संकेत (ट्रांसफॉर्मर):
(i) अन्योन्य प्रेरण। (ii) उच्चायी और अपचायी। (iii) ताम्र क्षय, लौह क्षय, शैथिल्य क्षय।
(अथवा) उत्तर संकेत (AC जनित्र): सिद्धांत: विद्युत चुंबकीय प्रेरण।
मुख्य भाग: क्षेत्र चुंबक, आर्मेचर, सर्पी वलय, ब्रुश।
कार्यविधि: जब कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में घूमती है, तो फ्लक्स परिवर्तन से प्रेरित धारा उत्पन्न होती है (फ्लेमिंग का दायां हाथ नियम)।
(अथवा) उत्तर संकेत (AC जनित्र): सिद्धांत: विद्युत चुंबकीय प्रेरण।
मुख्य भाग: क्षेत्र चुंबक, आर्मेचर, सर्पी वलय, ब्रुश।
कार्यविधि: जब कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में घूमती है, तो फ्लक्स परिवर्तन से प्रेरित धारा उत्पन्न होती है (फ्लेमिंग का दायां हाथ नियम)।
प्र.16. बोर के परमाणु मॉडल के मुख्य अभिगृहीत लिखिए।
अथवा
हाइड्रोजन परमाणु के उत्सर्जन स्पेक्ट्रम की विभिन्न श्रेणियों (लाइमन, बामर, आदि) का वर्णन कीजिए।
उत्तर संकेत (बोर मॉडल):
1. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित कक्षाओं में घूमते हैं।
2. कोणीय संवेग क्वांटीकृत होता है (L = nh/2π)।
3. इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का उत्सर्जन तभी करते हैं जब वे उच्च कक्षा से निम्न कक्षा में कूदते हैं (E₂ - E₁ = hν)।
(अथवा) उत्तर संकेत (श्रेणियाँ): 1. लाइमन (UV क्षेत्र), 2. बामर (दृश्य क्षेत्र), 3. पाश्चन, 4. ब्रैकेट, 5. फुण्ड (अवरक्त क्षेत्र)।
2. कोणीय संवेग क्वांटीकृत होता है (L = nh/2π)।
3. इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का उत्सर्जन तभी करते हैं जब वे उच्च कक्षा से निम्न कक्षा में कूदते हैं (E₂ - E₁ = hν)।
(अथवा) उत्तर संकेत (श्रेणियाँ): 1. लाइमन (UV क्षेत्र), 2. बामर (दृश्य क्षेत्र), 3. पाश्चन, 4. ब्रैकेट, 5. फुण्ड (अवरक्त क्षेत्र)।
खण्ड द: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
प्र.17. दो समांतर धारावाही चालकों के बीच लगने वाले बल के लिए व्यंजक स्थापित कीजिए। इसके आधार पर 'एक एम्पियर' को परिभाषित कीजिए।
अथवा
चल कुंडली धारामापी (Moving Coil Galvanometer) का सिद्धांत एवं संरचना चित्र सहित समझाइए।
उत्तर संकेत:
F/l = (μ₀/4π) × (2I₁I₂/d)।
परिभाषा: यदि समान धारा वाले दो तार निर्वात में 1 मीटर दूरी पर रखे हों और उनके बीच 2×10⁻⁷ N का बल लगे, तो धारा 1 एम्पियर होगी।
परिभाषा: यदि समान धारा वाले दो तार निर्वात में 1 मीटर दूरी पर रखे हों और उनके बीच 2×10⁻⁷ N का बल लगे, तो धारा 1 एम्पियर होगी।
प्र.18. गोलीय दर्पण के लिए दर्पण सूत्र (1/f = 1/v + 1/u) निगमित कीजिए।
अथवा
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी का वर्णन निम्न बिन्दुओं पर कीजिए:
(i) किरण आरेख
(ii) आवर्धन क्षमता का व्यंजक
(i) किरण आरेख
(ii) आवर्धन क्षमता का व्यंजक
उत्तर संकेत:
उचित किरण आरेख (अवतल दर्पण) बनाकर समरूप त्रिभुजों का उपयोग करें और चिह्न परिपाटी लगाकर सूत्र सिद्ध करें।
प्र.19. यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग (YDSE) में फ्रिंज चौड़ाई (β) का व्यंजक ज्ञात कीजिए।
अथवा
हाइगेन्स के तरंग सिद्धांत के आधार पर प्रकाश के अपवर्तन की व्याख्या कीजिए और स्नेल का नियम सिद्ध कीजिए।
उत्तर संकेत (फ्रिंज चौड़ाई):
पथांतर Δx = xd/D निकालें। दीप्त फ्रिंज के लिए Δx = nλ और अदीप्त के लिए (2n-1)λ/2 रखें।
व्यंजक: β = λD/d.
व्यंजक: β = λD/d.
प्र.20. दिष्टकारी किसे कहते हैं? P-N संधि डायोड का पूर्ण तरंग दिष्टकारी (Full Wave Rectifier) के रूप में वर्णन परिपथ चित्र तथा निवेशी-निर्गत सिग्नल के साथ कीजिए।
अथवा
NAND और NOR गेट को सार्वत्रिक गेट (Universal Gate) क्यों कहते हैं? NAND गेट से AND और OR गेट कैसे प्राप्त करेंगे?
उत्तर संकेत (पूर्ण तरंग दिष्टकारी):
इसमें दो डायोड और एक सेंटर-टैप्ड ट्रांसफॉर्मर का उपयोग होता है। धनात्मक और ऋणात्मक दोनों अर्द्धचक्रों में धारा एक ही दिशा में प्रवाहित होती है।
(अथवा) उत्तर संकेत: क्योंकि इनसे अन्य सभी गेट (AND, OR, NOT) बनाए जा सकते हैं। संयोजन चित्र बनाकर सत्यता सारणी दें।
(अथवा) उत्तर संकेत: क्योंकि इनसे अन्य सभी गेट (AND, OR, NOT) बनाए जा सकते हैं। संयोजन चित्र बनाकर सत्यता सारणी दें।
© 2026 Gyan Deep Info | Septa Deep
⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer):
इस प्रैक्टिस पेपर में दिए गए सभी प्रश्न एवं उत्तर केवल विद्यार्थियों के
अभ्यास और शैक्षणिक मार्गदर्शन के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।
ये प्रश्नपत्र किसी भी प्रकार से वास्तविक MP Board परीक्षा प्रश्नपत्र का
आधिकारिक या हूबहू प्रतिरूप नहीं हैं।
प्रैक्टिस पेपर में दिए गए उत्तर विषय विशेषज्ञों के अनुभव और उपलब्ध शैक्षणिक
स्रोतों के आधार पर तैयार किए गए हैं।
किसी उत्तर में त्रुटि या भिन्नता संभव है, जिसके लिए वेबसाइट/प्रकाशक
कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं होगा।
विद्यार्थियों को सलाह दी जाती है कि अंतिम परीक्षा तैयारी के लिए
MP Board की आधिकारिक पाठ्यपुस्तकों, पाठ्यक्रम एवं निर्देशों
को ही प्राथमिकता दें।
WhatsApp पर Share करने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए









कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें