कक्षा 12वीं भौतिकी प्रैक्टिस पेपर – Set C
MP Board कक्षा 12वीं भौतिकी की वार्षिक परीक्षा को ध्यान में रखते हुए Practice Paper – Set C विद्यार्थियों के निरंतर अभ्यास हेतु तैयार किया गया है। यह प्रश्नपत्र परीक्षा के स्तर और प्रश्नों की प्रकृति को समझने में सहायक है।
Set C विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है जो पहले Set A और Set B का अभ्यास कर चुके हैं और अब स्वयं का मूल्यांकन (Self Assessment) करना चाहते हैं।
📝 Practice Paper Set C की प्रमुख विशेषताएँ
- नवीन MP Board सिलेबस के अनुसार तैयार
- अंक भार के अनुसार प्रश्नों का संतुलन
- संकल्पना आधारित एवं विश्लेषणात्मक प्रश्न
- उत्तर प्रस्तुति और लेखन अभ्यास में सहायक
- परीक्षा पूर्व अंतिम रिवीजन के लिए उपयोगी
🎯 Practice Paper Set C किसके लिए लाभकारी?
- कक्षा 12वीं MP Board के सभी विद्यार्थी
- परीक्षा से पहले आत्म-मूल्यांकन करने वाले छात्र
- स्कूल एवं कोचिंग टेस्ट की तैयारी करने वाले विद्यार्थी
- भौतिकी में अच्छे अंक प्राप्त करने के इच्छुक छात्र
महत्वपूर्ण नोट:
यह Practice Paper केवल अभ्यास के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
वास्तविक बोर्ड परीक्षा प्रश्नपत्र इससे भिन्न हो सकता है।
⬇️ Practice Paper Set C
नीचे दिए गए लिंक से आप कक्षा 12वीं भौतिकी Practice Paper – Set C देख या डाउनलोड कर सकते हैं।
कक्षा 12वीं - भौतिक शास्त्र
(मॉडल पेपर: सेट-C)
Created by: D Septa | पूर्णांक: 70 | समय: 3 घंटे
खण्ड अ: वस्तुनिष्ठ प्रश्न (28 अंक)
प्र.1. सही विकल्प चुनकर लिखिए: (1×6 = 6 अंक)
(i) धातुओं का परावैद्युतांक होता है:
👉 (स) अनंत
(ii) विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का SI मात्रक है:
👉 (ब) न्यूटन/कूलाम
(iii) एक आदर्श अमीटर का प्रतिरोध होना चाहिए:
👉 (स) शून्य
(iv) भंवर धाराओं का उपयोग किया जाता है:
👉 (ब) धारामापी को रुद्धदोल (Dead beat) बनाने में
(v) दूरसंचार में प्रयुक्त होने वाली तरंगें हैं:
👉 (स) सूक्ष्म तरंगें
(vi) अर्द्धचालक में वर्जित ऊर्जा अंतराल (Forbidden energy gap) की कोटि होती है:
👉 (अ) 1 eV (लगभग)
प्र.2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए: (1×6 = 6 अंक)
(i) धारामापी को वोल्टमीटर में बदलने के लिए उसकी कुंडली के साथ श्रेणीक्रम में ________ प्रतिरोध जोड़ा जाता है।
उच्च
(ii) ध्रुव प्राबल्य का SI मात्रक ________ है।
एम्पीयर-मीटर (A-m)
(iii) विद्युत चुंबकीय तरंगों में विद्युत क्षेत्र और चुंबकीय क्षेत्र परस्पर ________ होते हैं।
लंबवत
(iv) गोलीय दर्पण के ध्रुव से फोकस तक की दूरी को ________ कहते हैं।
फोकस दूरी (Focal length)
(v) एक फोटॉन का संवेग p = h / ___ होता है।
λ (तरंगदैर्ध्य)
(vi) NOT गेट को ________ गेट भी कहते हैं।
इन्वर्टर (Inverter) / व्युत्क्रमक
प्र.3. सत्य/असत्य लिखिए: (1×5 = 5 अंक)
(i) इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) विभवांतर का मात्रक है।
असत्य (यह ऊर्जा का मात्रक है)
(ii) किरचॉफ का संधि नियम आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है।
सत्य
(iii) अवतल दर्पण में सदैव आभासी प्रतिबिंब बनता है।
असत्य (वास्तविक और आभासी दोनों बन सकते हैं)
(iv) परमाणु का नाभिक धनावेशित होता है।
सत्य
(v) NAND गेट एक सार्वत्रिक (Universal) गेट है।
सत्य
प्र.4. सही जोड़ी बनाइए: (1×6 = 6 अंक)
(क) -> (ख)
(i) लॉरेंज बल -> (क) E = mc2
(ii) चुंबकीय फ्लक्स -> (ख) ध्रुवण
(iii) ब्रूस्टर का नियम -> (ग) qvB sinθ
(iv) आइंस्टीन -> (घ) φ = B A cosθ
(v) लाइमन श्रेणी -> (ङ) दिष्टकारी
(vi) P-N संधि डायोड -> (च) पराबैंगनी क्षेत्र
(i) लॉरेंज बल -> (क) E = mc2
(ii) चुंबकीय फ्लक्स -> (ख) ध्रुवण
(iii) ब्रूस्टर का नियम -> (ग) qvB sinθ
(iv) आइंस्टीन -> (घ) φ = B A cosθ
(v) लाइमन श्रेणी -> (ङ) दिष्टकारी
(vi) P-N संधि डायोड -> (च) पराबैंगनी क्षेत्र
सही मिलान:
(i) लॉरेंज बल → (ग) qvB sinθ
(ii) चुंबकीय फ्लक्स → (घ) φ = B A cosθ
(iii) ब्रूस्टर का नियम → (ख) ध्रुवण
(iv) आइंस्टीन → (क) E = mc2
(v) लाइमन श्रेणी → (च) पराबैंगनी क्षेत्र
(vi) P-N संधि डायोड → (ङ) दिष्टकारी
(i) लॉरेंज बल → (ग) qvB sinθ
(ii) चुंबकीय फ्लक्स → (घ) φ = B A cosθ
(iii) ब्रूस्टर का नियम → (ख) ध्रुवण
(iv) आइंस्टीन → (क) E = mc2
(v) लाइमन श्रेणी → (च) पराबैंगनी क्षेत्र
(vi) P-N संधि डायोड → (ङ) दिष्टकारी
प्र.5. एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए: (1×5 = 5 अंक)
(i) आवेश के क्वाण्टीकरण का सूत्र लिखिए।
q = ± ne
(ii) स्वप्रेरकत्व (Self-Inductance) का SI मात्रक क्या है?
हेनरी (Henry)
(iii) रडार प्रणाली में किन तरंगों का उपयोग होता है?
सूक्ष्म तरंगें (Microwaves)
(iv) निरोधी विभव (Cut-off potential) किस पर निर्भर करता है?
आपतित प्रकाश की आवृत्ति पर।
(v) नाभिकीय संलयन को ताप-नाभिकीय अभिक्रिया क्यों कहते हैं?
क्योंकि यह अत्यधिक उच्च ताप पर ही संभव होती है।
खण्ड ब: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
प्र.6. विद्युत फ्लक्स की परिभाषा और इसका SI मात्रक लिखिए।
अथवा
एक कूलॉम आवेश को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: विद्युत क्षेत्र में स्थित किसी पृष्ठ के लंबवत गुजरने वाली कुल विद्युत क्षेत्र रेखाओं की संख्या को उस पृष्ठ से संबद्ध विद्युत फ्लक्स कहते हैं।
मात्रक: न्यूटन-मीटर²/कूलाम (N-m²/C) या वोल्ट-मीटर।
मात्रक: न्यूटन-मीटर²/कूलाम (N-m²/C) या वोल्ट-मीटर।
उत्तर: यदि समान परिमाण के दो सजातीय आवेश निर्वात या वायु में 1 मीटर की दूरी पर स्थित हों और एक-दूसरे को 9 × 109 न्यूटन के बल से प्रतिकर्षित करें, तो प्रत्येक आवेश 1 कूलॉम कहलाता है।
प्र.7. ओम का नियम लिखिए और इसकी सीमाएँ बताइए।
अथवा
विशिष्ट प्रतिरोध (प्रतिरोधकता) को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: यदि किसी चालक की भौतिक अवस्था (ताप, लंबाई) न बदले, तो चालक के सिरों का विभवांतर उसमें प्रवाहित धारा के अनुक्रमानुपाती होता है (V ∝ I)।
सीमाएँ: 1. ताप नियत रहना चाहिए। 2. यह केवल धात्विक चालकों के लिए सत्य है (डायोड/ट्रांजिस्टर पर लागू नहीं)।
सीमाएँ: 1. ताप नियत रहना चाहिए। 2. यह केवल धात्विक चालकों के लिए सत्य है (डायोड/ट्रांजिस्टर पर लागू नहीं)।
उत्तर: एकांक लंबाई और एकांक अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले चालक के प्रतिरोध को उसका विशिष्ट प्रतिरोध या प्रतिरोधकता कहते हैं। इसका मात्रक ओम-मीटर (Ω-m) है।
प्र.8. बायो-सावर्ट का नियम लिखिए।
अथवा
फ्लेमिंग के बाएं हाथ का नियम लिखिए।
उत्तर: किसी धारावाही चालक के अल्पांश (dl) के कारण किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र (dB) निम्न सूत्र द्वारा दिया जाता है:
dB = (μ0/4π) (I dl sinθ / r2).
dB = (μ0/4π) (I dl sinθ / r2).
उत्तर: यदि हम बाएं हाथ के अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा को परस्पर लंबवत फैलाएं, और यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा धारा की दिशा को प्रदर्शित करे, तो अंगूठा चालक पर लगने वाले बल की दिशा को प्रदर्शित करेगा।
प्र.9. स्वप्रेरण और अन्योन्य प्रेरण में दो अंतर लिखिए।
अथवा
भंवर धाराएं (Eddy Currents) क्या हैं? इनसे क्या हानि है?
उत्तर: 1. स्वप्रेरण: इसमें एक ही कुंडली होती है, धारा परिवर्तन से उसी में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है।
2. अन्योन्य प्रेरण: इसमें दो कुंडलियां होती हैं, एक में धारा परिवर्तन से दूसरी में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है।
2. अन्योन्य प्रेरण: इसमें दो कुंडलियां होती हैं, एक में धारा परिवर्तन से दूसरी में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है।
उत्तर: जब किसी चालक से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो उसमें जल में भंवर के समान चक्करदार प्रेरित धाराएं उत्पन्न हो जाती हैं, जिन्हें भंवर धाराएं कहते हैं।
हानि: इससे विद्युत ऊर्जा ऊष्मीय ऊर्जा के रूप में व्यर्थ होती है।
हानि: इससे विद्युत ऊर्जा ऊष्मीय ऊर्जा के रूप में व्यर्थ होती है।
प्र.10. प्रकाश के प्रकीर्णन से आप क्या समझते हैं?
अथवा
लेंस की क्षमता को परिभाषित कीजिए और इसका मात्रक लिखिए।
उत्तर: जब प्रकाश किसी ऐसे माध्यम से गुजरता है जिसमें धूल आदि के कणों का आकार प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की तुलना में बहुत छोटा होता है, तो प्रकाश विभिन्न दिशाओं में बिखर जाता है। इसे प्रकाश का प्रकीर्णन कहते हैं। (आकाश का नीला रंग इसी कारण है)।
उत्तर: लेंस की फोकस दूरी के व्युत्क्रम (प्रतिलोम) को लेंस की क्षमता कहते हैं, जबकि फोकस दूरी मीटर में मापी गई हो।
P = 1/f(m). मात्रक: डायोप्टर (D)।
P = 1/f(m). मात्रक: डायोप्टर (D)।
प्र.11. प्रकाश विद्युत प्रभाव क्या है?
अथवा
द्रव्य तरंगें (Matter Waves) क्या हैं? इनके दो गुण लिखिए।
उत्तर: जब किसी धातु की सतह पर उचित आवृत्ति (देहली आवृत्ति से अधिक) का प्रकाश आपतित होता है, तो उसकी सतह से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होने लगते हैं। इस घटना को प्रकाश विद्युत प्रभाव कहते हैं।
उत्तर: गतिमान द्रव्य कणों (जैसे इलेक्ट्रॉन) के साथ तरंग संबद्ध होती है, जिसे द्रव्य तरंग कहते हैं।
गुण: 1. ये विद्युत चुंबकीय तरंगें नहीं हैं। 2. ये आवेश पर निर्भर नहीं करतीं।
गुण: 1. ये विद्युत चुंबकीय तरंगें नहीं हैं। 2. ये आवेश पर निर्भर नहीं करतीं।
प्र.12. नाभिकीय विखंडन और नाभिकीय संलयन में दो अंतर लिखिए।
अथवा
समस्थानिक (Isotopes) किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर: 1. विखंडन: एक भारी नाभिक टूटकर दो हल्के नाभिक बनाता है। (परमाणु बम)
2. संलयन: दो हल्के नाभिक मिलकर एक भारी नाभिक बनाते हैं। (सूर्य की ऊर्जा)
2. संलयन: दो हल्के नाभिक मिलकर एक भारी नाभिक बनाते हैं। (सूर्य की ऊर्जा)
उत्तर: एक ही तत्व के वे परमाणु जिनके परमाणु क्रमांक समान होते हैं लेकिन द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है।
उदाहरण: हाइड्रोजन के समस्थानिक - प्रोटियम (1H1), ड्यूटेरियम (1H2), ट्राइटियम (1H3)।
उदाहरण: हाइड्रोजन के समस्थानिक - प्रोटियम (1H1), ड्यूटेरियम (1H2), ट्राइटियम (1H3)।
खण्ड स: लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक)
प्र.13. अनुगमन वेग (Drift Velocity) और धारा घनत्व (Current Density) में संबंध स्थापित कीजिए।
अथवा
किरचॉफ के नियमों को सचित्र समझाइए।
उत्तर: माना चालक की लंबाई l, क्षेत्रफल A, एकांक आयतन में इलेक्ट्रॉन n, अनुगमन वेग vd है।
कुल आवेश q = (nAl)e.
समय t = l / vd.
धारा I = q/t = (nAle) / (l/vd) = nAe vd.
धारा घनत्व J = I/A = ne vd.
कुल आवेश q = (nAl)e.
समय t = l / vd.
धारा I = q/t = (nAle) / (l/vd) = nAe vd.
धारा घनत्व J = I/A = ne vd.
उत्तर: 1. संधि नियम (KCL): किसी भी संधि पर मिलने वाली समस्त धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है (ΣI = 0)। (आने वाली धारा = जाने वाली धारा)।
2. लूप नियम (KVL): किसी बंद परिपथ में विभव परिवर्तनों का कुल योग शून्य होता है (ΣV = 0)।
2. लूप नियम (KVL): किसी बंद परिपथ में विभव परिवर्तनों का कुल योग शून्य होता है (ΣV = 0)।
प्र.14. एक समान चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान आवेशित कण पर लगने वाले बल के आधार पर चुंबकीय क्षेत्र B के मात्रक (टेस्ला) को परिभाषित कीजिए।
अथवा
धारावाही परिनालिका के स्वप्रेरकत्व का व्यंजक ज्ञात कीजिए। किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर: लॉरेंज बल F = qvB sinθ. यदि q=1C, v=1m/s, θ=90°, F=1N हो, तो B=1 टेस्ला।
अतः यदि 1C आवेश 1 m/s के वेग से चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत गति करे और उस पर 1 न्यूटन बल लगे, तो क्षेत्र की तीव्रता 1 टेस्ला होगी।
अतः यदि 1C आवेश 1 m/s के वेग से चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत गति करे और उस पर 1 न्यूटन बल लगे, तो क्षेत्र की तीव्रता 1 टेस्ला होगी।
व्यंजक: L = μ0 N2 A / l
जहाँ N = कुल फेरे, A = क्षेत्रफल, l = लंबाई।
कारक: 1. फेरों की संख्या (N) के वर्ग के अनुक्रमानुपाती। 2. क्रोड की चुंबकशीलता (μ) पर।
जहाँ N = कुल फेरे, A = क्षेत्रफल, l = लंबाई।
कारक: 1. फेरों की संख्या (N) के वर्ग के अनुक्रमानुपाती। 2. क्रोड की चुंबकशीलता (μ) पर।
प्र.15. सरल सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता के लिए व्यंजक ज्ञात कीजिए जब अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बने।
अथवा
गोलीय अपवर्तक पृष्ठ (उत्तल) के लिए अपवर्तन सूत्र μ/v - 1/u = (μ-1)/R स्थापित कीजिए।
उत्तर: सरल सूक्ष्मदर्शी में एक उत्तल लेंस होता है।
आवर्धन क्षमता m = 1 + D/f.
(यहाँ किरण आरेख बनाकर और त्रिभुजों की समरूपता या लेंस सूत्र का उपयोग करके इसे सिद्ध किया जाता है।)
आवर्धन क्षमता m = 1 + D/f.
(यहाँ किरण आरेख बनाकर और त्रिभुजों की समरूपता या लेंस सूत्र का उपयोग करके इसे सिद्ध किया जाता है।)
उत्तर (संक्षेप): स्नेल के नियम (n1 sin i = n2 sin r) और छोटे द्वारक के सन्निकटन (sin i ≈ i, tan α ≈ α) का उपयोग करके, तथा बहिष्कोण प्रमेय लगाकर यह सूत्र व्युत्पन्न किया जाता है।
प्र.16. हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की विभिन्न श्रेणियों (लाहमन, बामर, पाश्चन, ब्रैकेट, फुण्ड) का वर्णन कीजिए।
अथवा
नाभिक की बंधन ऊर्जा वक्र खींचिए और इसके मुख्य निष्कर्ष लिखिए।
उत्तर: 1/λ = R (1/n12 - 1/n22)
1. लाहमन: n1=1 (पराबैंगनी क्षेत्र)
2. बामर: n1=2 (दृश्य क्षेत्र)
3. पाश्चन: n1=3 (अवरक्त क्षेत्र) आदि।
1. लाहमन: n1=1 (पराबैंगनी क्षेत्र)
2. बामर: n1=2 (दृश्य क्षेत्र)
3. पाश्चन: n1=3 (अवरक्त क्षेत्र) आदि।
उत्तर: प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा और द्रव्यमान संख्या (A) के बीच ग्राफ।
निष्कर्ष: 1. मध्यवर्ती नाभिकों (A=50-80) की बंधन ऊर्जा सर्वाधिक (स्थायी) होती है।
2. हल्के और बहुत भारी नाभिकों की बंधन ऊर्जा कम (अस्थायी) होती है, इसलिए संलयन और विखंडन होता है।
निष्कर्ष: 1. मध्यवर्ती नाभिकों (A=50-80) की बंधन ऊर्जा सर्वाधिक (स्थायी) होती है।
2. हल्के और बहुत भारी नाभिकों की बंधन ऊर्जा कम (अस्थायी) होती है, इसलिए संलयन और विखंडन होता है।
खण्ड द: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
प्र.17. विद्युत द्विध्रुव के कारण निरक्षीय स्थिति (Equatorial Position) में विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक ज्ञात कीजिए।
अथवा
समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता का व्यंजक ज्ञात कीजिए जब प्लेटों के बीच आंशिक रूप से परावैद्युत पदार्थ भरा हो।
व्यंजक: E = (1/4πε0) [p / (r2 + l2)3/2]
छोटे द्विध्रुव (l << r) के लिए: E = (1/4πε0) (p / r3).
दिशा: द्विध्रुव आघूर्ण के विपरीत (धन से ऋण की ओर)।
छोटे द्विध्रुव (l << r) के लिए: E = (1/4πε0) (p / r3).
दिशा: द्विध्रुव आघूर्ण के विपरीत (धन से ऋण की ओर)।
व्यंजक: C = ε0A / [ (d-t) + t/K ]
जहाँ t = परावैद्युत माध्यम की मोटाई, d = प्लेटों के बीच की दूरी, K = परावैद्युतांक।
यदि t=d (पूर्ण भरा हो), तो C = Kε0A / d.
जहाँ t = परावैद्युत माध्यम की मोटाई, d = प्लेटों के बीच की दूरी, K = परावैद्युतांक।
यदि t=d (पूर्ण भरा हो), तो C = Kε0A / d.
प्र.18. प्रत्यावर्ती धारा जनित्र (Dynamo) का वर्णन निम्न शीर्षकों के अंतर्गत कीजिए: (i) सिद्धांत (ii) नामांकित चित्र (iii) कार्यविधि।
अथवा
चल कुण्डली धारामापी का सिद्धांत समझाइए और इसकी सुग्राहिता कैसे बढ़ाई जा सकती है?
(i) सिद्धांत: विद्युत चुंबकीय प्रेरण (जब कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में घूमती है, तो फ्लक्स परिवर्तन से प्रेरित धारा उत्पन्न होती है)।
(ii) चित्र: (चुम्बक ध्रुव N-S, आर्मेचर कुंडली, सर्पी वलय, ब्रश)।
(iii) कार्यविधि: फ्लेमिंग के दाएं हाथ के नियम से धारा की दिशा ज्ञात करते हैं। आधे चक्कर बाद धारा की दिशा बदल जाती है (AC)।
(ii) चित्र: (चुम्बक ध्रुव N-S, आर्मेचर कुंडली, सर्पी वलय, ब्रश)।
(iii) कार्यविधि: फ्लेमिंग के दाएं हाथ के नियम से धारा की दिशा ज्ञात करते हैं। आधे चक्कर बाद धारा की दिशा बदल जाती है (AC)।
सिद्धांत: जब धारावाही कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक बल आघूर्ण (τ = NIAB sinθ) लगता है जो उसे विक्षेपित करता है। (I ∝ θ)
सुग्राहिता बढ़ाना: 1. फेरों की संख्या (N) बढ़ाकर। 2. क्षेत्रफल (A) बढ़ाकर। 3. चुंबकीय क्षेत्र (B) बढ़ाकर (नर्म लोहे का क्रोड)। 4. निलंबन तार का ऐंठन नियतांक (C) कम करके (फॉस्फर ब्रॉन्ज)।
सुग्राहिता बढ़ाना: 1. फेरों की संख्या (N) बढ़ाकर। 2. क्षेत्रफल (A) बढ़ाकर। 3. चुंबकीय क्षेत्र (B) बढ़ाकर (नर्म लोहे का क्रोड)। 4. निलंबन तार का ऐंठन नियतांक (C) कम करके (फॉस्फर ब्रॉन्ज)।
प्र.19. संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope) का किरण आरेख बनाइए और इसकी आवर्धन क्षमता का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
अथवा
यंग के द्विक-स्लिट प्रयोग में फ्रिंज चौड़ाई (β) के लिए व्यंजक β = λD/d स्थापित कीजिए।
आरेख: अभिदृश्यक लेंस (छोटा) वस्तु का वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है, जो नेत्रिका (बड़ा) के लिए वस्तु का कार्य करता है और अंतिम आभासी बड़ा प्रतिबिंब बनता है।
सूत्र: m = -(vo/uo) (1 + D/fe) (स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर)।
सूत्र: m = -(vo/uo) (1 + D/fe) (स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर)।
व्यंजक: पथांतर Δx = yd/D।
दीप्त फ्रिंज के लिए Δx = nλ ⇒ y = nλD/d।
क्रमागत फ्रिंजों के बीच की दूरी (चौड़ाई) β = yn+1 - yn = λD/d.
दीप्त फ्रिंज के लिए Δx = nλ ⇒ y = nλD/d।
क्रमागत फ्रिंजों के बीच की दूरी (चौड़ाई) β = yn+1 - yn = λD/d.
प्र.20. अर्द्ध-तरंग दिष्टकारी (Half Wave Rectifier) के रूप में P-N संधि डायोड का वर्णन कीजिए (परिपथ और कार्यविधि)।
अथवा
N-प्रकार और P-प्रकार के अर्द्धचालकों में अंतर स्पष्ट कीजिए और P-N संधि डायोड की अग्र अभिनति एवं पश्च अभिनति को समझाइए।
परिपथ: ट्रांसफार्मर, एक डायोड, लोड प्रतिरोध।
कार्यविधि: AC के केवल धनात्मक अर्धचक्र में डायोड अग्र अभिनति में होता है और चालन करता है। ऋणात्मक अर्धचक्र में यह पश्च अभिनति में होता है और धारा नहीं बहती। इस प्रकार आउटपुट में केवल एक दिशा में रुक-रुक कर धारा मिलती है।
कार्यविधि: AC के केवल धनात्मक अर्धचक्र में डायोड अग्र अभिनति में होता है और चालन करता है। ऋणात्मक अर्धचक्र में यह पश्च अभिनति में होता है और धारा नहीं बहती। इस प्रकार आउटपुट में केवल एक दिशा में रुक-रुक कर धारा मिलती है।
अंतर: N-प्रकार में इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक होते हैं (दाता अशुद्धि), P-प्रकार में होल (ग्राही अशुद्धि)।
अभिनति: अग्र: P को बैटरी के धन (+) और N को ऋण (-) से जोड़ते हैं (धारा बहती है)। पश्च: P को ऋण (-) और N को धन (+) से जोड़ते हैं (धारा नगण्य)।
अभिनति: अग्र: P को बैटरी के धन (+) और N को ऋण (-) से जोड़ते हैं (धारा बहती है)। पश्च: P को ऋण (-) और N को धन (+) से जोड़ते हैं (धारा नगण्य)।
⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer):
इस प्रैक्टिस पेपर में दिए गए सभी प्रश्न एवं उत्तर केवल विद्यार्थियों के
अभ्यास और शैक्षणिक मार्गदर्शन के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।
ये प्रश्नपत्र किसी भी प्रकार से वास्तविक MP Board परीक्षा प्रश्नपत्र का
आधिकारिक या हूबहू प्रतिरूप नहीं हैं।
प्रैक्टिस पेपर में दिए गए उत्तर विषय विशेषज्ञों के अनुभव और उपलब्ध शैक्षणिक
स्रोतों के आधार पर तैयार किए गए हैं।
किसी उत्तर में त्रुटि या भिन्नता संभव है, जिसके लिए वेबसाइट/प्रकाशक
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