विस्तृत अध्ययन नोट्स: पियाजे, कोहलबर्ग और वायगोत्स्की (सिद्धार्थ एवं शैक्षिक निहितार्थ)
1. जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत (Cognitive Development Theory)
स्विस मनोवैज्ञानिक जीन पियाजे के अनुसार, बच्चे सक्रिय ज्ञान निर्माता (Active Builders of Knowledge) होते हैं जो दुनिया के बारे में अपनी समझ का खुद निर्माण करते हैं। पियाजे ने संज्ञानात्मक विकास के चार चरण बताए हैं:
- क) संवेदी-पेशीय अवस्था (Sensory-Motor Stage - 0 से 2 वर्ष): इसमें बच्चा अपनी ज्ञानेन्द्रियों (Sensory organs) और शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से सीखता है। इस अवस्था की मुख्य विशेषता 'वस्तु स्थायित्व' (Object Permanence) का गुण विकसित होना है।
- ख) पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage - 2 से 7 वर्ष): इसमें बच्चा प्रतीकों का उपयोग करना सीखता है, भाषा का विकास होता है। इसमें 'जीववाद' (Animism - निर्जीव वस्तुओं को सजीव समझना), 'अहंकेन्द्रित' (Egocentrism) और 'अनुत्क्रमणीयता' (Irreversibility) पाई जाती है।
- ग) मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage - 7 से 11 वर्ष): बच्चा वस्तुओं और घटनाओं के बारे में तार्किक चिंतन करने लगता है, लेकिन यह चिंतन केवल 'मूर्त' (सामने दिखने वाली) वस्तुओं तक सीमित होता है। इसमें संरक्षण (Conservation) और वर्गीकरण की क्षमता आ जाती है।
- घ) अमूर्त या औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage - 11 वर्ष से ऊपर): इस अवस्था में किशोर अमूर्त चिंतन (Abstract thinking), वैज्ञानिक तर्क और परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक सोच विकसित कर लेता है।
2. लॉरेंस कोहलबर्ग का नैतिक विकास का सिद्धांत (Moral Development Theory)
लॉरेंस कोहलबर्ग ने यह अध्ययन किया कि बच्चे कैसे तय करते हैं कि क्या सही है और क्या गलत। उन्होंने नैतिक विकास के 3 मुख्य स्तर (Levels) और प्रत्येक के अंतर्गत 2-2 अवस्थाएँ (कुल 6 अवस्थाएँ) बताई हैं:
- स्तर 1: पूर्व-पारंपरिक नैतिकता (Pre-conventional Level - 4 से 10 वर्ष): इसमें नैतिकता बाहरी कारकों से तय होती है।
- अवस्था 1: आज्ञाकारिता और दंड से बचना (Obedience and Punishment).
- अवस्था 2: व्यक्तिगत पुरस्कार या स्वार्थ की भावना ("जैसे को तैसा" / Tit for tat).
- स्तर 2: पारंपरिक नैतिकता (Conventional Level - 10 से 13 वर्ष): बच्चा समाज के नियमों और दूसरों की स्वीकृतियों के अनुसार नैतिकता तय करता है।
- अवस्था 3: अच्छा लड़का / अच्छी लड़की बन्ना (Interpersonal Accord).
- अवस्था 4: कानून और व्यवस्था बनाए रखना (Social Order).
- स्तर 3: उत्तर-पारंपरिक नैतिकता (Post-conventional Level - 13 वर्ष से ऊपर): इसमें व्यक्ति अपने स्वयं के आंतरिक विवेक और सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों के आधार पर सही-गलत का निर्णय लेता है।
- अवस्था 5: सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार (Social Contract).
- अवस्था 6: सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत (Universal Ethical Principles).
3. लेव वायगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत (Socio-Cultural Theory)
रूसी मनोवैज्ञानिक लेव वायगोत्स्की का मानना था कि बच्चे का संज्ञानात्मक विकास समाज और संस्कृति की अंतःक्रिया (Interaction) से होता है। उनके सिद्धांत की मुख्य अवधारणाएँ निम्नलिखित हैं:
- MKO (More Knowledgeable Other - अधिक ज्ञاني अन्य): वह व्यक्ति जो बच्चे से अधिक ज्ञानी या कुशल हो (शिक्षक, माता-पिता या साथी)।
- ZPD (Zone of Proximal Development - समीपस्थ विकास का क्षेत्र): वास्तविक विकास स्तर और वयस्क/सहयोगी के मार्गदर्शन में संभावित विकास स्तर के बीच का अंतर।
- Scaffolding (स्कैफोल्डिंग / ढांचा निर्माण): सीखने के दौरान बच्चों को दी जाने वाली अस्थायी सहायता या मार्गदर्शन, जिसे बच्चा स्वतंत्र होने पर धीरे-धीरे हटा लिया जाता है।
📌 अभ्यास हेतु बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
सेवारत शिक्षकों के लिए DPI द्वारा विमर्श पोर्टल पाठ्यक्रम के अनुसार अध्ययन नोट्स एवं अभ्यास प्रश्न







.webp)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें