MP Board Class 12th Accountancy Blueprint, Notes & Important Questions 2026-27 | कक्षा 12वीं लेखाशास्त्र नोट्स, प्रविष्टियाँ एवं अंक योजना
- MP Board Class 12th Accountancy Blueprint 2026-27
- Class 12th Accountancy Notes in Hindi MPBSE
- MP Board 12th Accountancy Important Questions 2026-27
- कक्षा 12वीं लेखाशास्त्र नोट्स एवं जर्नल प्रविष्टियाँ
- MPBSE 12th Accountancy Model Paper and Solution 2026-27
माध्यमिक शिक्षा मण्डल, म.प्र. (MPBSE) सत्र 2026-27: कक्षा 12वीं लेखाशास्त्र / Accountancy अध्ययन सामग्री
माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा का आधिकारिक ब्लूप्रिंट (अंक योजना) जारी कर दिया गया है। लेखाशास्त्र (Accountancy) वाणिज्य संकाय का एक मुख्य प्रायोगिक एवं गणनात्मक विषय है। यह दो प्रमुख भागों—साझेदारी फर्मों तथा कंपनी के लिए लेखांकन एवं वित्तीय विवरणों का विश्लेषण में विभाजित है। जर्नल प्रविष्टियों के नियमों, पुनर्मूल्यांकन खाता, अंशों के निर्गमन व जब्ती, और रोकड़ प्रवाह विवरण के सटीक प्रारूपों का नियमित अभ्यास करके विद्यार्थी इस विषय में 100 में से 100 अंक प्राप्त कर सकते हैं।
विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुविधा के लिए यहाँ कक्षा 12वीं लेखाशास्त्र के दोनों भागों की नवीनतम अंक योजना पर आधारित AI-असिस्टेड संक्षिप्त नोट्स, मानक लेखा प्रारूप, जर्नल प्रविष्टियाँ एवं परीक्षा-उपयोगी अभ्यास प्रश्नोत्तर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
कक्षा 12वीं लेखाशास्त्र (Accountancy)
सम्पूर्ण विस्तृत सरल नोट्स, सूत्र, जर्नल एंट्री एवं अभ्यास प्रश्नोत्तर
माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश, भोपाल
हायर सेकेण्डरी परीक्षा सत्र 2026-27
पूर्णांक — 80 | समय — 3:00 घंटे
अंक योजना एवं प्रश्न-पत्र संरचना
| अध्याय | विषय | अंक |
|---|---|---|
| 1 | साझेदारी लेखांकन — आधारभूत अवधारणाएँ | 12 |
| 2 | साझेदारी फर्म का पुनर्गठन — साझेदार का प्रवेश | 12 |
| 3 | साझेदारी फर्म का पुनर्गठन — साझेदार की सेवानिवृत्ति / मृत्यु | 08 |
| 4 | साझेदारी फर्म का विघटन | 04 |
| अध्याय | विषय | अंक |
|---|---|---|
| 1 | अंशपूँजी के लिए लेखांकन | 16 |
| 2 | ऋणपत्रों का निर्गम | 08 |
| 3 | कंपनी के वित्तीय विवरण | 08 |
| 4 | लेखांकन अनुपात | 04 |
| 5 | रोकड़ प्रवाह विवरण | 08 |
| प्रश्न | प्रकार | संख्या | अंक |
|---|---|---|---|
| 1 | सही विकल्प | 06 | 06 |
| 2 | रिक्त स्थान | 06 | 06 |
| 3 | सत्य / असत्य | 06 | 06 |
| 4 | सही जोड़ी | 07 | 07 |
| 5 | एक वाक्य में उत्तर | 07 | 07 |
| 6–15 | लघु उत्तरीय | 10 | 20 |
| 16–19 | मध्यम उत्तरीय | 04 | 12 |
| 20–23 | दीर्घ उत्तरीय | 04 | 16 |
भाग–1 | अध्याय 1 — साझेदारी लेखांकन : आधारभूत अवधारणाएँ (12 अंक)
1. साझेदारी का अर्थ
साझेदारी वह संबंध है जो उन व्यक्तियों के बीच होता है जिन्होंने किसी व्यवसाय के लाभ को आपस में बाँटने के लिए सहमति की है और व्यवसाय उस सभी या किसी एक व्यक्ति द्वारा उन सभी के लिए चलाया जाता है। साझेदारी का मूल आधार आपसी समझौता है।
2. साझेदारी की प्रमुख विशेषताएँ
- कम-से-कम दो व्यक्तियों का होना।
- व्यवसाय चलाने का उद्देश्य।
- लाभ-हानि बाँटने का समझौता।
- आपसी एजेंसी — प्रत्येक साझेदार फर्म और अन्य साझेदारों का प्रतिनिधि होता है।
- साझेदारी का आधार समझौता है।
- व्यवसाय के संचालन में पारस्परिक विश्वास आवश्यक है।
3. साझेदारी विलेख (Partnership Deed)
साझेदारों के बीच लिखित समझौते को साझेदारी विलेख कहा जाता है। इसमें साझेदारों के अधिकार, कर्तव्य, पूँजी, लाभ-विभाजन तथा अन्य शर्तें लिखी होती हैं।
साझेदारी विलेख में सामान्यतः लिखी जाने वाली बातें
- फर्म का नाम और व्यवसाय
- साझेदारों के नाम व पते
- पूँजी की राशि
- लाभ-विभाजन अनुपात
- साझेदारों के वेतन/कमीशन
- पूँजी पर ब्याज
- आहरण पर ब्याज
- साझेदार के ऋण पर ब्याज
- आहरण की सीमा
- नए साझेदार का प्रवेश
- सेवानिवृत्ति/मृत्यु की शर्तें
- विवाद निपटान की व्यवस्था
4. साझेदारी खातों के विशिष्ट पहलू
(क) लाभ का विभाजन
यदि साझेदारी विलेख में लाभ-विभाजन अनुपात दिया गया है तो उसी अनुपात में लाभ वितरित किया जाता है। यदि कोई अनुपात नहीं दिया गया हो तो सामान्यतः साझेदार बराबर अनुपात में लाभ बाँटते हैं।
(ख) पूँजी पर ब्याज
पूँजी पर ब्याज तभी दिया जाता है जब साझेदारी विलेख में इसका प्रावधान हो।
(ग) आहरण पर ब्याज
यदि विलेख में प्रावधान हो तो साझेदार द्वारा निजी उपयोग के लिए निकाली गई राशि पर ब्याज लिया जा सकता है।
(घ) साझेदार का वेतन/कमीशन
साझेदार को वेतन या कमीशन तभी दिया जाता है जब समझौते में इसका प्रावधान हो।
(ङ) साझेदार को ऋण पर ब्याज
फर्म द्वारा साझेदार से लिए गए ऋण पर निर्धारित शर्तों के अनुसार ब्याज देय हो सकता है।
5. साझेदारों के पूँजी खातों का अनुरक्षण
पूँजी खातों के दो प्रमुख प्रकार हैं:
| आधार | स्थायी पूँजी पद्धति | परिवर्तनशील पूँजी पद्धति |
|---|---|---|
| Capital Account | स्थायी रहता है | बैलेंस बदलता रहता है |
| Current Account | अलग बनाया जाता है | सामान्यतः अलग नहीं बनाया जाता |
| लाभ का प्रभाव | Current A/c में | Capital A/c में |
| आहरण | Current A/c में | Capital A/c में |
6. साझेदारों के बीच लाभ का विभाजन
लाभ-हानि निर्धारण के बाद निम्न समायोजन किए जा सकते हैं:
- पूँजी पर ब्याज
- आहरण पर ब्याज
- वेतन
- कमीशन
- लाभ की गारंटी
- पूर्व समायोजन
7. एक साझेदार को लाभ की गारंटी
कभी-कभी किसी साझेदार को न्यूनतम निश्चित लाभ की गारंटी दी जाती है। यदि उसके वास्तविक लाभ का हिस्सा गारंटीकृत राशि से कम हो तो अंतर की राशि की पूर्ति गारंटी देने वाले साझेदार द्वारा की जाती है।
उदाहरण
A और B का लाभ-विभाजन अनुपात 3:2 है। कुल लाभ ₹50,000 है। B को न्यूनतम ₹22,000 का लाभ गारंटीकृत है।
B का सामान्य लाभ = 50,000 × 2/5 = ₹20,000
गारंटीकृत लाभ = ₹22,000
कमी = ₹2,000
यदि A ने गारंटी दी है, तो A के हिस्से से ₹2,000 B को स्थानांतरित किया जाएगा।
8. पूर्व समायोजन (Past Adjustments)
यदि किसी वर्ष साझेदारों को लाभ बाँटते समय पूँजी पर ब्याज, आहरण पर ब्याज, वेतन, कमीशन या लाभ-विभाजन अनुपात के किसी समायोजन को भूल दिया गया हो तो अगले चरण में संयुक्त रूप से एक समायोजन प्रविष्टि करके सही प्रभाव दिया जाता है।
पूर्व समायोजन की प्रक्रिया
- प्रत्येक साझेदार का सही हिस्सा निकालें।
- पहले किए गए वितरण से तुलना करें।
- अंतर ज्ञात करें।
- जिस साझेदार को अधिक मिला है उसे Debit करें।
- जिसे कम मिला है उसे Credit करें।
महत्वपूर्ण जर्नल एंट्री
Profit & Loss Appropriation A/c Dr.
To Partner's Capital/Current A/c
Profit & Loss Appropriation A/c Dr.
To Partner's Capital/Current A/c
Partner's Capital/Current A/c Dr.
To Profit & Loss Appropriation A/c
Profit & Loss Appropriation A/c Dr.
To Partners' Capital/Current A/c
अभ्यास प्रश्न — उत्तर सहित
भाग–1 | अध्याय 2 — साझेदारी फर्म का पुनर्गठन : साझेदार का प्रवेश (12 अंक)
1. साझेदारी फर्म का पुनर्गठन
जब साझेदारी फर्म के साझेदारों के आपसी संबंध, लाभ-विभाजन अनुपात, पूँजी या अन्य शर्तों में परिवर्तन किया जाता है, तो साझेदारी फर्म का पुनर्गठन कहा जाता है।
2. पुनर्गठन के प्रकार
- नए साझेदार का प्रवेश
- साझेदार की सेवानिवृत्ति
- साझेदार की मृत्यु
- वर्तमान साझेदारों के लाभ-विभाजन अनुपात में परिवर्तन
3. नए साझेदार का प्रवेश
नए साझेदार का प्रवेश सामान्यतः पुराने साझेदारों की सहमति से होता है। नया साझेदार फर्म में पूँजी, ख्याति (Goodwill) या दोनों ला सकता है।
4. नया लाभ-विभाजन अनुपात
नए साझेदार के प्रवेश के बाद सभी साझेदारों का नया लाभ-विभाजन अनुपात निर्धारित किया जाता है।
5. त्याग अनुपात (Sacrificing Ratio)
पुराने साझेदार नए साझेदार को अपने लाभ का कुछ हिस्सा देते हैं। पुराने साझेदार द्वारा छोड़े गए लाभ के हिस्से को त्याग कहा जाता है।
उदाहरण
A और B का पुराना अनुपात 3:2 है। C को प्रवेश दिया गया और नया अनुपात 5:3:2 है।
A का त्याग = 3/5 − 5/10 = 6/10 − 5/10 = 1/10
B का त्याग = 2/5 − 3/10 = 4/10 − 3/10 = 1/10
अतः त्याग अनुपात = 1:1
6. ख्याति (Goodwill)
फर्म की प्रतिष्ठा, ग्राहकों का विश्वास, लाभ कमाने की क्षमता, अच्छे संबंध, स्थान, अनुभव आदि के कारण व्यवसाय को प्राप्त अतिरिक्त मूल्य को ख्याति कहा जाता है।
ख्याति का महत्व
- नए साझेदार के प्रवेश पर
- साझेदार की सेवानिवृत्ति पर
- साझेदार की मृत्यु पर
- लाभ-विभाजन अनुपात बदलने पर
ख्याति के मूल्यांकन की प्रमुख विधियाँ
(क) औसत लाभ विधि
(ख) अधिलाभ विधि
Goodwill = Super Profit × Number of Years' Purchase
(ग) पूँजीकरण विधि
7. संचित लाभों और हानियों का समायोजन
सामान्य रिजर्व, लाभ-हानि खाते का क्रेडिट बैलेंस, निवेश उतार-चढ़ाव रिजर्व आदि पुराने साझेदारों में पुराने लाभ-विभाजन अनुपात में बाँटे जाते हैं। संचित हानियों या Debit Balance का समायोजन भी पुराने अनुपात में किया जाता है।
General Reserve A/c Dr.
To Old Partners' Capital/Current A/c
Old Partners' Capital/Current A/c Dr.
To Profit & Loss A/c
8. परिसंपत्तियों का पुनर्मूल्यांकन तथा दायित्वों का पुनर्निर्धारण
नए साझेदार के प्रवेश के समय परिसंपत्तियों और दायित्वों को वर्तमान मूल्य पर लाने के लिए Revaluation Account तैयार किया जाता है।
परिसंपत्ति बढ़े
To Revaluation A/c
परिसंपत्ति घटे
To Asset A/c
दायित्व बढ़े
To Liability A/c
दायित्व घटे
To Revaluation A/c
9. Revaluation Profit / Loss
Revaluation Account में लाभ या हानि निकलने पर उसे पुराने साझेदारों में पुराने लाभ-विभाजन अनुपात में बाँटा जाता है।
Revaluation A/c Dr.
To Old Partners' Capital/Current A/c
Old Partners' Capital/Current A/c Dr.
To Revaluation A/c
10. ख्याति के समायोजन का सिद्धांत
नए साझेदार द्वारा लाई गई ख्याति की राशि सामान्यतः पुराने साझेदारों को उनके त्याग अनुपात में दी जाती है।
To New Partner's Capital A/c
To Premium for Goodwill A/c
To Old Partners' Capital/Current A/c
11. ख्याति न लाने की स्थिति
यदि नया साझेदार ख्याति की राशि नकद नहीं लाता, तो प्रश्न में दी गई परिस्थितियों के अनुसार Capital Accounts को उचित समायोजन दिया जाता है।
12. पूँजी का समायोजन
नए साझेदार के प्रवेश के बाद यदि सभी साझेदारों की पूँजी नए लाभ-विभाजन अनुपात के अनुसार तय हो तो अतिरिक्त पूँजी नकद लाई जाती है तथा अधिक पूँजी की राशि निकाली जाती है।
13. पुराने साझेदारों के लाभ-विभाजन अनुपात में परिवर्तन
कभी-कभी बिना नए साझेदार के केवल पुराने साझेदारों के हिस्से में परिवर्तन किया जाता है। ऐसी स्थिति में त्याग या अभिलाभ के अनुसार ख्याति समायोजित की जाती है।
अभ्यास प्रश्न — उत्तर सहित
Super Profit = ₹30,000 − ₹20,000 = ₹10,000।
भाग–1 | अध्याय 3 — साझेदारी फर्म का पुनर्गठन : साझेदार की सेवानिवृत्ति / मृत्यु (08 अंक)
1. सेवानिवृत्ति
जब कोई साझेदार फर्म से अलग हो जाता है और शेष साझेदार व्यवसाय को जारी रखते हैं, तो इसे साझेदार की सेवानिवृत्ति कहते हैं।
2. सेवानिवृत्ति के प्रमुख समायोजन
- नया लाभ-विभाजन अनुपात
- अभिलाभ अनुपात
- ख्याति का समायोजन
- पुनर्मूल्यांकन लाभ/हानि
- संचित लाभ/हानियों का समायोजन
- सेवानिवृत्त साझेदार को देय राशि
- पूँजी का समायोजन
3. नया लाभ-विभाजन अनुपात
सेवानिवृत्त साझेदार का हिस्सा शेष साझेदारों द्वारा प्राप्त किया जाता है। इसलिए Continuing Partners का नया अनुपात निर्धारित किया जाता है।
4. अभिलाभ अनुपात (Gaining Ratio)
जिस अनुपात में शेष साझेदार सेवानिवृत्त साझेदार का लाभ-अंश प्राप्त करते हैं, वही अभिलाभ अनुपात है।
5. ख्याति का व्यवहार
सेवानिवृत्त साझेदार को उसकी ख्याति का उचित हिस्सा मिलता है क्योंकि वह भविष्य के लाभ से अपना हिस्सा छोड़ रहा है। शेष साझेदार अपने अभिलाभ अनुपात में उसे क्षतिपूर्ति करते हैं।
To Retiring Partner's Capital/Current A/c
6. परिसंपत्तियों और दायित्वों का पुनर्मूल्यांकन
सेवानिवृत्ति के समय परिसंपत्तियों और दायित्वों का पुनर्मूल्यांकन किया जाता है। उससे प्राप्त लाभ/हानि को सामान्यतः सभी पुराने साझेदारों में पुराने अनुपात में बाँटा जाता है।
7. संचित लाभ और हानियाँ
रिजर्व, लाभ-हानि का क्रेडिट बैलेंस आदि पुराने साझेदारों में पुराने अनुपात में वितरित किए जाते हैं। संचित हानियों का भी समायोजन पुराने अनुपात में किया जाता है।
8. सेवानिवृत्त साझेदार को देय राशि
देय राशि में निम्न शामिल हो सकते हैं:
- पूँजी खाते का Credit Balance
- Current Account का Credit Balance
- ख्याति में हिस्सा
- Revaluation Profit का हिस्सा
- संचित लाभ/रिजर्व में हिस्सा
- अन्य देय समायोजन
- घटाएँ — आहरण आदि
9. देय राशि का निपटारा
यदि पूरी राशि तुरंत न दी जाए तो इसे Retiring Partner's Loan Account में स्थानांतरित किया जा सकता है।
To Retiring Partner's Loan A/c
10. साझेदार की मृत्यु
मृत साझेदार का खाता मृत्यु की तारीख तक अद्यतन किया जाता है। उसके लाभ के हिस्से, ख्याति, पुनर्मूल्यांकन लाभ, संचित लाभ और अन्य समायोजन के बाद देय राशि उसके विधिक प्रतिनिधि को दी जाती है।
मृत साझेदार के लाभ का निर्धारण
मृत्यु की तारीख तक का लाभ समय, बिक्री या अन्य आधार पर प्रश्नानुसार अनुमानित किया जा सकता है।
अभ्यास प्रश्न — उत्तर सहित
B का पुराना = 2/6 = 1/3; नया = 3/8; अभिलाभ = 3/8 − 1/3 = 1/24।
अतः अभिलाभ अनुपात = 1/8 : 1/24 = 3:1।
भाग–1 | अध्याय 4 — साझेदारी फर्म का विघटन (04 अंक)
1. साझेदारी का विघटन और फर्म का विघटन
| साझेदारी का विघटन | फर्म का विघटन |
|---|---|
| साझेदारों के बीच संबंध में परिवर्तन हो सकता है। | फर्म का व्यवसाय पूर्णतः समाप्त हो जाता है। |
| फर्म जारी रह सकती है। | व्यवसाय समाप्त होता है। |
2. फर्म के विघटन के कारण
- सभी साझेदारों की सहमति
- अनिवार्य परिस्थितियाँ
- किसी घटना के कारण
- न्यायालय के आदेश के कारण
3. Realisation Account
विघटन के समय परिसंपत्तियों को बेचने और बाहरी दायित्वों के निपटारे से होने वाले लाभ/हानि को ज्ञात करने के लिए Realisation Account तैयार किया जाता है।
4. परिसंपत्तियों का हस्तांतरण
To Sundry Assets A/c
5. दायित्वों का हस्तांतरण
To Realisation A/c
6. परिसंपत्ति बिक्री
To Realisation A/c
7. दायित्व भुगतान
To Cash/Bank A/c
8. Realisation Profit
To Partners' Capital A/c
9. Realisation Loss
To Realisation A/c
10. साझेदार को परिसंपत्ति लेने पर
To Realisation A/c
अभ्यास प्रश्न
अध्याय 1 — अंशपूँजी के लिए लेखांकन (16 अंक)
1. कंपनी का अर्थ
कंपनी एक ऐसी कृत्रिम विधिक इकाई है जिसका अपने सदस्यों से पृथक अस्तित्व होता है। इसकी अपनी संपत्ति, अधिकार और दायित्व हो सकते हैं।
2. कंपनी की प्रमुख विशेषताएँ
- पृथक विधिक अस्तित्व
- स्थायी उत्तराधिकार
- सीमित दायित्व
- पूँजी का अंशों में विभाजन
- स्वामित्व और प्रबंधन का पृथक्करण
- अंशों के हस्तांतरण की व्यवस्था
3. कंपनी के प्रकार
- निजी कंपनी
- सार्वजनिक कंपनी
- अन्य वैधानिक वर्गीकरण
4. कंपनी की अंशपूँजी
कंपनी द्वारा अंशों के माध्यम से प्राप्त पूँजी को अंशपूँजी कहा जाता है।
5. अंशों की प्रमुख श्रेणियाँ
- अंशपूँजी / Equity Shares: स्वामित्व का प्रतिनिधित्व करते हैं और लाभांश लाभ पर निर्भर कर सकता है।
- Preference Shares: लाभांश तथा पूँजी वापसी के संबंध में प्राथमिकता प्राप्त होती है।
6. अंश निर्गम के चरण
- Application
- Allotment
- Calls
7. Application Money
To Share Application A/c
आवंटन के समय:
To Share Capital A/c
8. Allotment Money
To Share Capital A/c
To Share Allotment A/c
9. Call Money
To Share Capital A/c
To Share Call A/c
10. अधि-अभिदान (Oversubscription)
जब जनता द्वारा आवेदन किए गए अंश, कंपनी द्वारा निर्गमित अंशों से अधिक होते हैं, तो इसे अधि-अभिदान कहते हैं।
अधि-अभिदान के संभावित उपचार
- कुछ आवेदन अस्वीकार कर रकम वापस करना
- अनुपातिक आवंटन
- अतिरिक्त आवेदन धनराशि को Allotment/Calls में समायोजित करना
11. Calls in Arrears
जब अंशधारक द्वारा देय Call Money समय पर नहीं दिया जाता, तो उसे Calls in Arrears कहा जाता है।
12. Calls in Advance
जब अंशधारक भविष्य में देय कॉल की राशि पहले ही दे देता है, तो इसे Calls in Advance कहा जाता है।
13. अंशों का हरण (Forfeiture)
यदि अंशधारक देय राशि, विशेष रूप से कॉल मनी, का भुगतान नहीं करता और कंपनी नियमों के अनुसार उसके अंश वापस लेती है, तो इसे अंशों का हरण कहते हैं।
Securities Premium A/c Dr. (यदि लागू हो)
To Share Forfeiture A/c
To Calls in Arrears A/c
14. हरण किए गए अंशों का पुनर्निर्गम
Share Forfeiture A/c Dr. (यदि बट्टा दिया हो)
To Share Capital A/c
पुनर्निर्गम के बाद शेष Share Forfeiture लाभ को Capital Reserve में स्थानांतरित किया जाता है।
To Capital Reserve A/c
15. अंश जारी करने की सामान्य गणनाएँ
अभ्यास प्रश्न — उत्तर सहित
अध्याय 2 — ऋणपत्रों का निर्गम (08 अंक)
1. ऋणपत्र का अर्थ
ऋणपत्र कंपनी द्वारा स्वीकार किए गए दीर्घकालीन ऋण का दस्तावेज है। ऋणपत्रधारी सामान्यतः कंपनी का ऋणदाता होता है, स्वामी नहीं।
2. अंश और ऋणपत्र में अंतर
| आधार | अंश | ऋणपत्र |
|---|---|---|
| स्थिति | स्वामित्व | ऋण |
| धारक | अंशधारक | ऋणपत्रधारक |
| प्रतिफल | लाभांश | ब्याज |
| जोखिम | अधिक | तुलनात्मक रूप से कम |
3. ऋणपत्रों के प्रकार
- Secured / Unsecured
- Registered / Bearer
- Convertible / Non-convertible
- Redeemable / अन्य वर्गीकरण
4. ऋणपत्रों का निर्गम
To Debentures A/c
5. Premium on Issue of Debentures
To Debentures A/c
To Securities Premium A/c
6. Issue at Discount
Discount/Loss on Issue of Debentures A/c Dr.
To Debentures A/c
7. अधि-अभिदान
यदि आवेदन प्राप्तियाँ उपलब्ध ऋणपत्रों से अधिक हों तो कंपनी द्वारा स्वीकृति, अस्वीकृति अथवा अनुपातिक आवंटन किया जा सकता है।
8. नकद के अतिरिक्त प्रतिफल पर ऋणपत्र
यदि कंपनी किसी विक्रेता से संपत्ति खरीदकर उसके प्रतिफल में ऋणपत्र जारी करती है तो यह non-cash consideration के रूप में ऋणपत्रों का निर्गम है।
To Vendor A/c
Vendor A/c Dr.
To Debentures A/c
9. संपाश्विक प्रतिभूति के रूप में ऋणपत्र
जब ऋणपत्र बैंक/अन्य ऋणदाता को अतिरिक्त सुरक्षा के रूप में जारी किए जाते हैं तो इन्हें collateral security कहा जाता है।
10. ऋणपत्र पर ब्याज
To Debentureholders / Bank A/c
11. ऋणपत्र निर्गम पर बट्टा/हानि का अपलेखन
ऋणपत्रों के निर्गम पर बट्टा या निर्गम हानि को निर्धारित लेखांकन उपचार के अनुसार लाभ-हानि में क्रमशः अपलिखित किया जाता है।
अभ्यास प्रश्न
अध्याय 3 — कंपनी के वित्तीय विवरण (08 अंक)
1. वित्तीय विवरण का अर्थ
वित्तीय विवरण वे औपचारिक विवरण हैं जिनके माध्यम से कंपनी की वित्तीय स्थिति, वित्तीय प्रदर्शन तथा संबंधित जानकारी प्रस्तुत की जाती है।
2. वित्तीय विवरणों की प्रकृति
- ऐतिहासिक वित्तीय सूचना पर आधारित
- लेखांकन सिद्धांतों के अनुसार तैयार
- वित्तीय स्थिति का सार प्रस्तुत करने वाले
- निर्णय लेने में उपयोगी
3. वित्तीय विवरण के उद्देश्य
- लाभप्रदता की जानकारी
- वित्तीय स्थिति की जानकारी
- नकदी तथा संसाधनों का अध्ययन
- प्रबंधन और निवेशकों को निर्णय में सहायता
- ऋणदाताओं को जानकारी
4. वित्तीय विवरणों के प्रकार
- Balance Sheet
- Statement of Profit and Loss
- Cash Flow Statement
- संबंधित Notes to Accounts
5. वित्तीय विवरणों की उपयोगिता एवं महत्व
- निवेश निर्णय
- ऋण निर्णय
- प्रबंधन नियंत्रण
- लाभप्रदता विश्लेषण
- वित्तीय स्थिति का अध्ययन
- तुलनात्मक विश्लेषण
6. वित्तीय विवरणों की सीमाएँ
- ऐतिहासिक लागत पर निर्भरता
- मूल्य स्तर में परिवर्तन का सीमित प्रतिबिंब
- गुणात्मक कारक सामान्यतः सीधे नहीं दिखते
- लेखांकन नीतियों का प्रभाव
- भविष्य की निश्चित भविष्यवाणी नहीं करते
अभ्यास प्रश्न
अध्याय 4 — लेखांकन अनुपात (04 अंक)
1. अनुपात का अर्थ
दो संबंधित लेखांकन राशियों के बीच गणितीय संबंध को लेखांकन अनुपात कहते हैं।
2. अनुपात विश्लेषण के उद्देश्य
- तरलता का अध्ययन
- ऋण शोधन क्षमता का अध्ययन
- क्रियाशीलता का अध्ययन
- लाभप्रदता का अध्ययन
3. अनुपात विश्लेषण के लाभ
- तुलना में सहायक
- कमजोर क्षेत्रों की पहचान
- निर्णय लेने में सहायता
- वित्तीय प्रदर्शन का अध्ययन
4. अनुपात विश्लेषण की सीमाएँ
- गलत आंकड़ों से गलत निष्कर्ष
- विभिन्न लेखांकन नीतियों का प्रभाव
- एक अनुपात से पूर्ण निर्णय संभव नहीं
- मूल्य स्तर परिवर्तन का प्रभाव
5. अनुपातों के प्रकार
Current Ratio
Quick Ratio
Debt-Equity आदि
Inventory, Debtors, Working Capital
Gross Profit, Net Profit आदि
6. द्रवता अनुपात
7. ऋण शोधन क्षमता अनुपात
8. क्रियाशीलता / आवर्त अनुपात
9. लाभप्रदता अनुपात
उदाहरण
Current Assets = ₹2,00,000 और Current Liabilities = ₹1,00,000।
अभ्यास प्रश्न
अध्याय 5 — रोकड़ प्रवाह विवरण (08 अंक)
1. रोकड़ प्रवाह विवरण का अर्थ
किसी लेखांकन अवधि में रोकड़ और रोकड़ तुल्यराशियों में होने वाले आगमन और निर्गमन को वर्गीकृत करके प्रस्तुत करने वाला विवरण रोकड़ प्रवाह विवरण कहलाता है।
2. रोकड़ एवं रोकड़ तुल्यराशियाँ
रोकड़ में नकद तथा बैंक शेष शामिल होते हैं। रोकड़ तुल्यराशियाँ अत्यधिक तरल, अल्पकालीन निवेश होते हैं जिन्हें शीघ्रता से ज्ञात नकद में बदला जा सकता है और जिनमें मूल्य परिवर्तन का जोखिम बहुत कम होता है।
3. रोकड़ प्रवाह के उद्देश्य
- नकदी की उपलब्धता समझना
- नकदी के स्रोत और उपयोग का अध्ययन
- भविष्य की नकदी योजना में सहायता
- तरलता का आकलन
4. रोकड़ प्रवाह विवरण के लाभ
- Cash position स्पष्ट होती है।
- Liquidity का अध्ययन होता है।
- भविष्य के cash requirements का अनुमान लगाया जा सकता है।
- निवेश और वित्तीय निर्णयों में सहायता मिलती है।
5. रोकड़ प्रवाह का वर्गीकरण
| क्रियाकलाप | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| Operating Activities | मुख्य व्यवसाय से संबंधित गतिविधियाँ | ग्राहकों से प्राप्त नकदी, सप्लायर को भुगतान |
| Investing Activities | दीर्घकालीन परिसंपत्तियों/निवेशों से संबंधित | मशीन खरीदना, निवेश बेचना |
| Financing Activities | पूँजी और ऋण से संबंधित | अंश जारी करना, ऋण लेना/चुकाना |
6. प्रचालन क्रियाकलापों से रोकड़ प्रवाह
Operating Cash Flow ज्ञात करने के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विधि का प्रयोग किया जा सकता है। अप्रत्यक्ष विधि में सामान्यतः लाभ को नकदी आधार पर समायोजित किया जाता है।
अप्रत्यक्ष विधि में सामान्य समायोजन
- Depreciation जोड़ना
- Goodwill Written Off जोड़ना
- Profit on Sale of Asset घटाना
- Loss on Sale of Asset जोड़ना
- Working Capital में परिवर्तन समायोजित करना
7. Working Capital Adjustments
| परिवर्तन | Operating Cash Flow पर प्रभाव |
|---|---|
| Current Asset बढ़े | घटता है |
| Current Asset घटे | बढ़ता है |
| Current Liability बढ़े | बढ़ता है |
| Current Liability घटे | घटता है |
8. निवेश क्रियाकलाप
- स्थायी परिसंपत्ति की खरीद = Cash Outflow
- स्थायी परिसंपत्ति की बिक्री = Cash Inflow
- निवेश की खरीद = Cash Outflow
- निवेश की बिक्री = Cash Inflow
9. वित्तीय क्रियाकलाप
- अंश निर्गम = Cash Inflow
- ऋणपत्र निर्गम = Cash Inflow
- ऋण प्राप्ति = Cash Inflow
- ऋण चुकौती = Cash Outflow
- अंश पूँजी/ऋण की वापसी = Cash Outflow
10. रोकड़ प्रवाह विवरण का निर्माण
+ Net Cash from Operating Activities
+ Net Cash from Investing Activities
+ Net Cash from Financing Activities
= Closing Cash & Cash Equivalents
11. गैर-नकद लेन-देन
ऐसी लेन-देन जिनमें नकदी का वास्तविक प्रवाह नहीं होता, Cash Flow Statement में सामान्यतः cash flow के रूप में नहीं दिखाई जातीं; इन्हें आवश्यकतानुसार अलग से disclose किया जा सकता है।
अभ्यास प्रश्न — उत्तर सहित
महत्वपूर्ण संख्यात्मक प्रश्न — उत्तर सहित
B = 75,000 × 2/5 = ₹30,000
Super Profit = ₹50,000 − ₹40,000 = ₹10,000
कुल Premium = 20,000 × ₹2 = ₹40,000
पूरे पाठ्यक्रम से वस्तुनिष्ठ प्रश्न बैंक — उत्तर सहित
सही विकल्प
- साझेदारी का आधार है — समझौता
- साझेदारी में प्रत्येक साझेदार है — फर्म और अन्य साझेदारों का एजेंट
- लाभ-विभाजन अनुपात बदलने पर ख्याति का समायोजन होता है — हाँ
- नए साझेदार के प्रवेश पर प्रयुक्त अनुपात है — त्याग अनुपात
- सेवानिवृत्ति पर प्रयुक्त अनुपात है — अभिलाभ अनुपात
- फर्म के विघटन पर बनाया जाता है — Realisation Account
- कंपनी की पूँजी अंशों में विभाजित होती है — सही
- अधि-अभिदान का अर्थ है — जारी अंशों से अधिक आवेदन
- ऋणपत्रधारी होता है — ऋणदाता
- अंशधारी होता है — स्वामी
- Current Ratio मापता है — द्रवता
- Debt-Equity Ratio मापता है — दीर्घकालीन वित्तीय संरचना/सॉल्वेंसी
- मशीन की खरीद है — Investing Activity
- अंशों का निर्गम है — Financing Activity
- Depreciation है — Non-cash Expense
रिक्त स्थान — उत्तर सहित
- साझेदारी का आधार ________ है। — समझौता
- नए साझेदार के प्रवेश पर ________ अनुपात ज्ञात किया जाता है। — त्याग
- सेवानिवृत्ति पर ________ अनुपात ज्ञात किया जाता है। — अभिलाभ
- ख्याति को अंग्रेजी में ________ कहते हैं। — Goodwill
- फर्म के विघटन पर ________ Account बनाया जाता है। — Realisation
- अंशों से प्राप्त पूँजी को ________ कहते हैं। — Share Capital
- अंश से अधिक आवेदन को ________ कहते हैं। — Oversubscription
- कंपनी का ऋण दर्शाने वाला साधन ________ है। — Debenture
- Current Assets / Current Liabilities को ________ कहते हैं। — Current Ratio
- Cash Flow की तीन मुख्य गतिविधियाँ ________, ________ और ________ हैं। — Operating, Investing, Financing
सत्य / असत्य
- साझेदारी का आधार समझौता है। — सत्य
- नए साझेदार के प्रवेश पर त्याग अनुपात निकाला जाता है। — सत्य
- सेवानिवृत्ति पर अभिलाभ अनुपात का कोई महत्व नहीं है। — असत्य
- Realisation Account विघटन से संबंधित है। — सत्य
- अंशधारक कंपनी का ऋणदाता होता है। — असत्य
- ऋणपत्र कंपनी का ऋण दर्शाते हैं। — सत्य
- Current Ratio एक लाभप्रदता अनुपात है। — असत्य
- मशीन की खरीद Investing Activity है। — सत्य
- अंशों का निर्गम Financing Activity है। — सत्य
- Depreciation वास्तविक cash outflow है। — असत्य
सही जोड़ी
| कॉलम A | कॉलम B |
|---|---|
| साझेदारी | समझौता |
| नया साझेदार | त्याग अनुपात |
| सेवानिवृत्ति | अभिलाभ अनुपात |
| Goodwill | फर्म की प्रतिष्ठा |
| Realisation | विघटन |
| Share Capital | कंपनी की अंशपूँजी |
| Debenture | ऋण |
| Current Ratio | Liquidity |
| Debt-Equity | Solvency |
| Operating Activity | मुख्य व्यवसाय |
| Investing Activity | स्थायी परिसंपत्तियाँ/निवेश |
| Financing Activity | पूँजी और ऋण |
एक वाक्य में उत्तर
- साझेदारी क्या है? — लाभ बाँटने के समझौते पर आधारित व्यावसायिक संबंध।
- त्याग अनुपात क्या है? — नए साझेदार के लिए पुराने साझेदारों द्वारा छोड़े गए लाभ का अनुपात।
- अभिलाभ अनुपात क्या है? — सेवानिवृत्त साझेदार का लाभ हिस्सा प्राप्त करने का शेष साझेदारों का अनुपात।
- Goodwill क्या है? — फर्म की प्रतिष्ठा और अतिरिक्त लाभ कमाने की क्षमता का मूल्य।
- Realisation Account कब बनाया जाता है? — फर्म के विघटन के समय।
- Share Capital क्या है? — अंशों के निर्गम से प्राप्त कंपनी की पूँजी।
- Oversubscription क्या है? — निर्गमित अंशों से अधिक अंशों के लिए आवेदन।
- Debenture क्या है? — कंपनी के ऋण का दस्तावेज।
- Current Ratio क्या मापता है? — अल्पकालीन द्रवता।
- Cash Flow Statement क्या दर्शाता है? — रोकड़ और रोकड़ तुल्यराशियों के प्रवाह को।
पूरे पाठ्यक्रम से 3 अंक के संभावित प्रश्न — मॉडल उत्तर सहित
4 अंक के अति महत्वपूर्ण प्रश्न — मॉडल उत्तर सहित
कक्षा 12वीं लेखाशास्त्र — अंतिम रिवीजन चार्ट
Deed • Capital • Current A/c • P&L Appropriation • Guarantee • Past Adjustment
New Ratio • Sacrificing Ratio • Goodwill • Revaluation • Reserves • Capital Adjustment
New Ratio • Gaining Ratio • Goodwill • Revaluation • Amount Due • Loan
Realisation • Assets • Liabilities • Realisation Profit/Loss • Capital Settlement
Application • Allotment • Calls • Oversubscription • Arrears • Forfeiture • Reissue
Issue • Premium • Discount • Cash • Non-cash • Collateral • Interest
Meaning • Nature • Objectives • Types • Uses • Limitations
Liquidity • Solvency • Activity • Profitability
Operating • Investing • Financing • Working Capital • Closing Cash
Goodwill = Average Profit × Years' Purchase
Super Profit = Average Profit − Normal Profit
Goodwill = Super Profit × Years' Purchase
Capitalised Value = Average Profit × 100 / Normal Rate of Return
Current Ratio = Current Assets / Current Liabilities
Quick Ratio = Quick Assets / Current Liabilities
Gross Profit Ratio = Gross Profit / Revenue from Operations × 100
Net Profit Ratio = Net Profit / Revenue from Operations × 100
Debt-Equity Ratio = Long-term Debt / Shareholders' Funds
Inventory Turnover = Cost of Revenue from Operations / Average Inventory
Partnership में Ratio, Goodwill, Revaluation और Capital Adjustment के calculations अवश्य करें।
Share Capital में Application, Allotment, Calls, Oversubscription, Forfeiture और Reissue की entries का अभ्यास करें।
Debentures में issue at par/premium/discount, non-cash consideration और collateral security के treatment को दोहराएँ।
Ratios में formula + substitution + final ratio/percentage स्पष्ट लिखें।
Cash Flow में Operating, Investing और Financing classification तथा Working Capital adjustments अवश्य याद करें।
अस्वीकरण (Disclaimer):
1. अध्ययन एवं अभ्यास उद्देश्य: इस पोस्ट में दी गई अंक योजना (Blueprint), पाठ्यक्रम, AI-जनरेटेड सरल नोट्स तथा अभ्यास प्रश्नोत्तर माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश (MPBSE) सत्र 2026-27 के नवीनतम दिशा-निर्देशों एवं NCERT पाठ्यक्रम के आधार पर विद्यार्थियों के स्व-अध्ययन, पुनरावलोकन और परीक्षा अभ्यास के लिए तैयार किए गए हैं।
2. प्रश्नोत्तर एवं संभावित प्रश्न: पोस्ट में शामिल सभी वस्तुनिष्ठ, लघु उत्तरीय एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर केवल मॉडल/अभ्यास प्रश्न (Practice Questions) हैं। यह बोर्ड परीक्षा का कोई आधिकारिक प्रश्नपत्र नहीं है और न ही परीक्षा में हूबहू यही प्रश्न पूछे जाने का कोई दावा किया जाता है।
3. उत्तरों का सत्यापन: यद्यपि सभी उत्तरों, लेखांकन नियमों, प्रविष्टियों एवं गणनाओं को सटीक और त्रुटिरहित रखने का पूर्ण प्रयास किया गया है, फिर भी विद्यार्थी किसी भी तकनीकी या तथ्यात्मक संदेह की स्थिति में अपनी अधिकृत NCERT पाठ्यपुस्तकों तथा विषय शिक्षकों के मार्गदर्शन को ही अंतिम व सर्वमान्य आधार मानें।
4. आधिकारिक सूचना: परीक्षा कार्यक्रम, आंतरिक मूल्यांकन/प्रायोजना कार्य, अंक योजना में किसी भी संभावित संशोधन अथवा आधिकारिक विज्ञप्ति के लिए सदैव माध्यमिक शिक्षा मण्डल, म.प्र. की आधिकारिक वेबसाइट (`mpbse.nic.in`) पर जारी निर्देशों को ही अधिकृत माना जाए।
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