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कक्षा 12वीं जीव विज्ञान नोट्स : MP Board Class 12th Biology Blueprint, Notes & Important Question 2026-27

MP Board Class 12th Biology Blueprint, Notes & Important Diagrams 2026-27 | कक्षा 12वीं जीव विज्ञान नोट्स, नामांकित चित्र एवं अंक योजना

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माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश (MPBSE) सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 12वीं जीव विज्ञान (Biology) की नवीनतम अंक योजना, AI-संचालित संक्षिप्त नोट्स, महत्वपूर्ण नामांकित चित्र (Diagrams) एवं अभ्यास प्रश्नोत्तर यहाँ देखें।

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माध्यमिक शिक्षा मण्डल, म.प्र. (MPBSE) सत्र 2026-27: कक्षा 12वीं [विषय: जीव विज्ञान] अध्ययन सामग्री

माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा का आधिकारिक ब्लूप्रिंट (अंक योजना) जारी कर दिया गया है। जीव विज्ञान (Biology) विषय में उच्च अंक प्राप्त करने के लिए सैद्धांतिक अवधारणाओं, पारिभाषिक शब्दावलियों तथा स्पष्ट व स्वच्छ नामांकित चित्रों (Labeled Diagrams) का नियमित अभ्यास अत्यंत आवश्यक है।

विद्यार्थियों और शिक्षकों की परीक्षा तैयारी को सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए यहाँ कक्षा 12वीं जीव विज्ञान (वनस्पति विज्ञान एवं प्राणी विज्ञान) की नवीनतम अंक योजना पर आधारित AI-असिस्टेड संक्षिप्त नोट्स, महत्वपूर्ण चित्र और परीक्षा-उपयोगी अभ्यास प्रश्नोत्तर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

कक्षा 12वीं जीव विज्ञान

सम्पूर्ण सरल नोट्स एवं अभ्यास प्रश्नोत्तर

माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश, भोपाल | हायर सेकेण्डरी परीक्षा सत्र 2026-27

पूर्णांक — 70 | समय — 3:00 घंटे

अंक योजना एवं प्रश्न-पत्र संरचना

इकाईअध्यायअंक
1. जननअध्याय 1 — पुष्पी पादपों में लैंगिक प्रजनन
अध्याय 2 — मानव जनन
अध्याय 3 — जनन स्वास्थ्य
16
2. आनुवंशिकी तथा विकासअध्याय 4 — वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत
अध्याय 5 — वंशागति के आणविक आधार
16
3. मानव कल्याण में जीव विज्ञानअध्याय 6 — विकास
अध्याय 7 — मानव स्वास्थ्य तथा रोग
अध्याय 8 — मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव
14
4. जैव प्रौद्योगिकीअध्याय 9 — जैव प्रौद्योगिकी : सिद्धांत व प्रक्रम
अध्याय 10 — जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग
12
5. पारिस्थितिकीअध्याय 11 — जीव और समष्टियाँ
अध्याय 12 — पारितंत्र
अध्याय 13 — जैव-विविधता एवं संरक्षण
12
कुल70
सबसे अधिक अंक: इकाई 1 और इकाई 2 — 16-16 अंक। इसके बाद इकाई 3 — 14 अंक तथा इकाई 4 एवं 5 — 12-12 अंक।
प्रश्नप्रकारप्रश्नकुल अंक
1सही विकल्प0606
2रिक्त स्थान0606
3सत्य / असत्य0606
4सही जोड़ी0505
5एक वाक्य में उत्तर0505
6–12लघु उत्तरीय07 × 214
13–16मध्यम उत्तरीय04 × 312
17–20दीर्घ उत्तरीय04 × 416

इकाई 1 — जनन (16 अंक)

अध्याय 1 — पुष्पी पादपों में लैंगिक प्रजनन

1. लैंगिक प्रजनन

ऐसा प्रजनन जिसमें नर तथा मादा युग्मकों के संलयन से युग्मनज बनता है, लैंगिक प्रजनन कहलाता है। इससे आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है।

2. पुष्प की संरचना

पुष्प आवृतबीजी पौधों का लैंगिक जनन अंग है। इसके मुख्य भाग बाह्यदल, दल, पुंकेसर और स्त्रीकेसर हैं।

3. पुंकेसर

पुंकेसर नर जनन अंग है। इसमें तंतु और परागकोष होते हैं। परागकोष में सूक्ष्मबीजाणु मातृ कोशिकाएँ पाई जाती हैं।

4. सूक्ष्मबीजाणुजनन

परागकोष में सूक्ष्मबीजाणु मातृ कोशिका अर्धसूत्री विभाजन द्वारा सूक्ष्मबीजाणु बनाती है। यही आगे विकसित होकर परागकण बनाती है।

5. परागकण

परागकण नर युग्मकोद्भिद का प्रतिनिधित्व करता है। इसके बाहरी आवरण को एक्साइन और आंतरिक आवरण को इंटाइन कहा जाता है।

6. स्त्रीकेसर

स्त्रीकेसर के तीन भाग हैं—वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय। अंडाशय में बीजांड पाए जाते हैं।

7. महाबीजाणुजनन

बीजांड में महाबीजाणु मातृ कोशिका अर्धसूत्री विभाजन द्वारा चार महाबीजाणु बनाती है, जिनमें सामान्यतः एक कार्यात्मक महाबीजाणु भ्रूणकोष का निर्माण करता है।

8. भ्रूणकोष

सामान्य आवृतबीजी भ्रूणकोष 7-कोशिकीय और 8-नाभिकीय होता है। इसमें अंड कोशिका, दो सहायक कोशिकाएँ, तीन प्रतिव्यासांत कोशिकाएँ और केंद्रीय कोशिका में दो ध्रुवीय नाभिक होते हैं।

9. परागण

परागकणों का परागकोष से वर्तिकाग्र तक पहुँचना परागण कहलाता है।

प्रकार: स्वपरागण, परपरागण और अन्य पौधों के बीच परागण।

10. परागण के साधन

  • वायु
  • जल
  • कीट
  • पक्षी
  • अन्य जन्तु

11. द्विनिषेचन

आवृतबीजी पौधों की विशिष्ट विशेषता द्विनिषेचन है। एक नर युग्मक अंड कोशिका से संलयित होकर युग्मनज बनाता है और दूसरा नर युग्मक दो ध्रुवीय नाभिकों से संलयित होकर प्राथमिक भ्रूणपोष नाभिक बनाता है।

Syngamy + Triple fusion = Double fertilization

12. भ्रूण एवं भ्रूणपोष

निषेचन के बाद युग्मनज भ्रूण और प्राथमिक भ्रूणपोष नाभिक भ्रूणपोष में विकसित होता है।

13. बीज एवं फल

बीजांड बीज में तथा अंडाशय फल में विकसित होता है।

14. अपोमिक्सिस

निषेचन के बिना बीज बनने की प्रक्रिया अपोमिक्सिस कहलाती है।

15. बहुभ्रूणता

एक बीज में एक से अधिक भ्रूणों का होना बहुभ्रूणता कहलाता है।

2 अंक प्रश्न — उत्तर सहित

प्रश्न 1. परागण क्या है?
परागकोष से परागकणों के वर्तिकाग्र तक स्थानांतरण की प्रक्रिया परागण कहलाती है। यह स्वपरागण या परपरागण हो सकता है।
प्रश्न 2. द्विनिषेचन क्या है?
आवृतबीजी पौधों में एक नर युग्मक का अंड कोशिका से संलयन तथा दूसरे नर युग्मक का दो ध्रुवीय नाभिकों से संलयन द्विनिषेचन कहलाता है।
प्रश्न 3. भ्रूणकोष क्या है?
बीजांड के अंदर स्थित मादा युग्मकोद्भिद भ्रूणकोष कहलाता है। सामान्य भ्रूणकोष 7-कोशिकीय तथा 8-नाभिकीय होता है।

3 अंक प्रश्न — उत्तर सहित

प्रश्न. परागकण की संरचना बताइए।
परागकण के बाहर कठोर एक्साइन तथा भीतर इंटाइन होती है। एक्साइन में स्पोरोपॉलेनिन पाया जाता है। परिपक्व परागकण में सामान्यतः एक वनस्पति कोशिका और एक जनन कोशिका होती है। जनन कोशिका आगे विभाजित होकर दो नर युग्मक बनाती है।
प्रश्न. द्विनिषेचन का महत्व बताइए।
द्विनिषेचन आवृतबीजी पौधों की विशिष्ट विशेषता है। इससे एक ओर भ्रूण का निर्माण होता है तथा दूसरी ओर भ्रूणपोष बनता है, जो विकसित होते भ्रूण को पोषण प्रदान करता है। इससे निषेचन के बाद ही भ्रूणपोष बनने के कारण ऊर्जा की बचत होती है।

4 अंक प्रश्न — उत्तर सहित

प्रश्न. आवृतबीजी पौधों में द्विनिषेचन की प्रक्रिया समझाइए।
परागण के बाद परागकण वर्तिकाग्र पर अंकुरित होता है और परागनलिका वर्तिका से होकर अंडाशय तक पहुँचती है। परागनलिका बीजांड में प्रवेश करती है और दो नर युग्मक भ्रूणकोष में पहुँचते हैं। पहला नर युग्मक अंड कोशिका के साथ संलयित होकर द्विगुणित युग्मनज बनाता है। दूसरे नर युग्मक का संलयन केंद्रीय कोशिका के दो ध्रुवीय नाभिकों से होता है और त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष नाभिक बनता है। इन दोनों संलयनों को मिलाकर द्विनिषेचन कहते हैं।
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अध्याय 2 — मानव जनन

1. नर जनन तंत्र

मानव नर जनन तंत्र में वृषण, सहायक नलिकाएँ, सहायक ग्रंथियाँ और बाह्य जनन अंग शामिल हैं। वृषण में शुक्राणुजनन होता है।

2. मादा जनन तंत्र

अंडाशय, अंडवाहिनी, गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा और योनि मादा जनन तंत्र के प्रमुख भाग हैं।

3. शुक्राणुजनन

वृषण की शुक्रजनक नलिकाओं में शुक्राणु बनने की प्रक्रिया शुक्राणुजनन कहलाती है।

4. अंडजनन

अंडाशय में अंडाणु बनने की प्रक्रिया अंडजनन कहलाती है।

5. मासिक धर्म चक्र

मानव मादा में औसतन लगभग 28 दिनों का जनन चक्र होता है। इसमें मासिक, कूपिक, अंडोत्सर्ग और ल्यूटियल चरण प्रमुख हैं।

6. अंडोत्सर्ग

परिपक्व ग्राफियन कूप से अंडाणु के निकलने की प्रक्रिया अंडोत्सर्ग कहलाती है। LH surge इसका प्रमुख कारण है।

7. निषेचन

शुक्राणु और अंडाणु के संलयन से द्विगुणित युग्मनज बनता है। मानव में निषेचन सामान्यतः अंडवाहिनी के ampullary-isthmic junction क्षेत्र में होता है।

8. आरोपण

भ्रूण के गर्भाशय की अंतःपरत में स्थापित होने की प्रक्रिया आरोपण कहलाती है।

9. गर्भावस्था

गर्भावस्था के दौरान भ्रूण का विकास गर्भाशय में होता है। प्लेसेंटा भ्रूण और माँ के बीच पोषक पदार्थ एवं गैसों के आदान-प्रदान में सहायता करता है।

10. प्रसव

गर्भावस्था के अंत में बच्चे के जन्म की प्रक्रिया प्रसव कहलाती है। इसमें ऑक्सीटोसिन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. शुक्राणुजनन क्या है?
वृषण की शुक्रजनक नलिकाओं में शुक्राणुओं के निर्माण की प्रक्रिया शुक्राणुजनन कहलाती है।
प्रश्न 2. अंडोत्सर्ग क्या है?
परिपक्व ग्राफियन कूप से अंडाणु के निकलने को अंडोत्सर्ग कहते हैं। यह LH के तीव्र स्राव से प्रेरित होता है।
प्रश्न 3. प्लेसेंटा का क्या महत्व है?
प्लेसेंटा माँ और भ्रूण के बीच पोषक पदार्थ, ऑक्सीजन और अपशिष्ट पदार्थों के आदान-प्रदान में सहायता करता है तथा कुछ हार्मोन भी स्रावित करता है।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. मानव मासिक धर्म चक्र के प्रमुख चरण बताइए।
मासिक चरण में गर्भाशय की परत का टूटना होता है। कूपिक चरण में कूप का विकास होता है। लगभग मध्य में LH surge के कारण अंडोत्सर्ग होता है। ल्यूटियल चरण में कॉर्पस ल्यूटियम बनता है और प्रोजेस्टेरोन का स्राव बढ़ता है। निषेचन न होने पर चक्र पुनः शुरू हो जाता है।
प्रश्न. मानव निषेचन की प्रक्रिया समझाइए।
शुक्राणु अंडाणु के आसपास पहुँचते हैं और एक शुक्राणु zona pellucida को पार करके अंडाणु से संलयित होता है। इससे नर एवं मादा नाभिकों का संलयन होता है और द्विगुणित युग्मनज बनता है। युग्मनज क्रमिक विभाजनों द्वारा भ्रूण में विकसित होता है।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. मानव नर जनन तंत्र की संरचना एवं कार्य समझाइए।
नर जनन तंत्र में वृषण, शुक्रवाहिनी, सहायक ग्रंथियाँ और बाह्य जनन अंग शामिल हैं। वृषण अंडकोश में स्थित होते हैं और शुक्राणु तथा टेस्टोस्टेरोन बनाते हैं। शुक्रजनक नलिकाओं में शुक्राणुजनन होता है। शुक्राणु एपिडिडिमिस में परिपक्व होते हैं और शुक्रवाहिनी द्वारा आगे ले जाए जाते हैं। वीर्य पुटिका, प्रोस्टेट एवं बल्बोयूरेथ्रल ग्रंथियाँ वीर्य में विभिन्न स्राव मिलाती हैं।

अध्याय 3 — जनन स्वास्थ्य

1. जनन स्वास्थ्य

जनन से संबंधित शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से स्वस्थ अवस्था को जनन स्वास्थ्य कहा जाता है।

2. परिवार नियोजन

परिवार के आकार को नियंत्रित करने और गर्भधारण को योजनाबद्ध करने के लिए विभिन्न गर्भनिरोधक उपाय अपनाए जाते हैं।

3. गर्भनिरोधक उपाय

  • प्राकृतिक विधियाँ
  • बाधा विधियाँ
  • IUD
  • मौखिक गर्भनिरोधक
  • हार्मोनल विधियाँ
  • शल्य विधियाँ

4. यौन संचारित संक्रमण

ऐसे संक्रमण जो मुख्यतः यौन संपर्क से फैलते हैं, STI/STD कहलाते हैं। उदाहरण—गोनोरिया, सिफिलिस, HIV संक्रमण आदि।

5. चिकित्सा गर्भसमापन

चिकित्सकीय कारणों या अन्य वैधानिक परिस्थितियों में गर्भ का चिकित्सकीय रूप से समापन MTP कहलाता है।

6. सहायक जनन तकनीकें

  • IVF
  • ZIFT
  • GIFT
  • IUI

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. जनन स्वास्थ्य क्या है?
जनन से संबंधित शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से स्वस्थ अवस्था तथा सुरक्षित और जिम्मेदार जनन संबंधी व्यवहार को जनन स्वास्थ्य कहा जाता है।
प्रश्न 2. IUD क्या है?
IUD गर्भाशय में स्थापित किया जाने वाला गर्भनिरोधक उपकरण है। यह गर्भधारण को रोकने में सहायता करता है।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. जनन स्वास्थ्य कार्यक्रमों का महत्व बताइए।
इनका उद्देश्य जनन तंत्र से जुड़े रोगों की रोकथाम, सुरक्षित मातृत्व, परिवार नियोजन, यौन संचारित संक्रमणों से बचाव और जनन संबंधी सही जानकारी उपलब्ध कराना है। इससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार होता है।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. विभिन्न गर्भनिरोधक विधियों का वर्णन कीजिए।
प्राकृतिक विधियों में सुरक्षित अवधि तथा withdrawal जैसी विधियाँ शामिल हैं। बाधा विधियों में condom और diaphragm आते हैं। IUD जैसे उपकरण गर्भाशय में लगाए जाते हैं। मौखिक एवं हार्मोनल गर्भनिरोधक अंडोत्सर्ग को रोकने या अन्य परिवर्तन द्वारा गर्भधारण की संभावना कम करते हैं। नसबंदी जैसी शल्य विधियाँ स्थायी गर्भनिरोध प्रदान करती हैं। उचित विधि का चयन चिकित्सकीय सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए।
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इकाई 2 — आनुवंशिकी तथा विकास (16 अंक)

अध्याय 4 — वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत

1. आनुवंशिकी

वंशागति तथा विभिन्नताओं का अध्ययन आनुवंशिकी कहलाता है।

2. मेंडल

ग्रेगर जॉन मेंडल ने मटर के पौधों पर प्रयोग करके वंशागति के मूल सिद्धांत बताए।

3. प्रभुत्व का नियम

विषमयुग्मजी अवस्था में एक कारक का लक्षण प्रकट हो सकता है जबकि दूसरा अप्रकट रहता है।

4. पृथक्करण का नियम

युग्मक निर्माण के समय किसी गुण के दोनों एलील अलग हो जाते हैं।

5. स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम

दो या अधिक गुणों के एलील स्वतंत्र रूप से युग्मकों में वितरित हो सकते हैं, यदि वे स्वतंत्र रूप से वंशागत होते हों।

6. एकसंकर संकरण

Phenotypic ratio = 3 : 1
Genotypic ratio = 1 : 2 : 1

7. द्विसंकर संकरण

Phenotypic ratio = 9 : 3 : 3 : 1

8. अपूर्ण प्रभुत्व

जब विषमयुग्मजी का फीनोटाइप दोनों समरूपों के बीच का होता है, तो अपूर्ण प्रभुत्व कहलाता है।

9. सह-प्रभुत्व

जब दोनों एलील विषमयुग्मजी अवस्था में समान रूप से व्यक्त होते हैं, तो सह-प्रभुत्व कहलाता है। ABO रक्त समूह इसका उदाहरण है।

10. बहु एलील

जब एक जीन के दो से अधिक एलील जनसंख्या में पाए जाएँ तो बहु एलील कहा जाता है।

11. लिंग निर्धारण

मनुष्य में XX मादा तथा XY नर होता है। नर का Y-युक्त शुक्राणु संतान का लिंग निर्धारित करता है।

12. लिंग-सहलग्न वंशागति

X गुणसूत्र पर स्थित जीन से होने वाली वंशागति को X-linked inheritance कहते हैं। हीमोफीलिया और वर्णांधता इसके उदाहरण हैं।

13. उत्परिवर्तन

आनुवंशिक पदार्थ में अचानक होने वाला स्थायी परिवर्तन उत्परिवर्तन कहलाता है।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. मेंडल का पृथक्करण नियम क्या है?
युग्मक निर्माण के समय किसी जीन के दोनों एलील एक-दूसरे से पृथक हो जाते हैं और प्रत्येक युग्मक में एक एलील जाता है।
प्रश्न 2. सह-प्रभुत्व क्या है?
जब विषमयुग्मजी अवस्था में दोनों एलील अपने-अपने लक्षण पूर्णतः व्यक्त करते हैं, तो इसे सह-प्रभुत्व कहते हैं। ABO रक्त समूह इसका उदाहरण है।
प्रश्न 3. X-linked वंशागति क्या है?
X गुणसूत्र पर स्थित जीन द्वारा निर्धारित लक्षणों की वंशागति X-linked inheritance कहलाती है। हीमोफीलिया और वर्णांधता उदाहरण हैं।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. एकसंकर संकरण का परिणाम समझाइए।
शुद्ध लंबे पौधे TT और शुद्ध बौने पौधे tt के संकरण से F₁ पीढ़ी में सभी Tt लंबे पौधे प्राप्त होते हैं। F₁ के स्वपरागण से F₂ में 3 लंबे : 1 बौना फीनोटाइपिक अनुपात तथा 1 TT : 2 Tt : 1 tt जीनोटाइपिक अनुपात मिलता है।
प्रश्न. मनुष्य में लिंग निर्धारण समझाइए।
स्त्री में XX और पुरुष में XY गुणसूत्र होते हैं। स्त्री के सभी अंडाणु X गुणसूत्र वाले होते हैं। पुरुष दो प्रकार के शुक्राणु बनाता है—X और Y। X शुक्राणु के साथ निषेचन से XX मादा और Y शुक्राणु के साथ निषेचन से XY नर बनता है। इसलिए आनुवंशिक रूप से पिता संतान का लिंग निर्धारित करता है।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. मेंडल के वंशागति के नियमों को उदाहरण सहित समझाइए।
मेंडल ने मटर के पौधों पर प्रयोग कर वंशागति के नियम बताए। प्रभुत्व के नियम के अनुसार विषमयुग्मजी अवस्था में एक लक्षण व्यक्त होता है। पृथक्करण के नियम के अनुसार युग्मक निर्माण के समय एलील अलग हो जाते हैं। स्वतंत्र अपव्यूहन के अनुसार स्वतंत्र रूप से वंशागत होने वाले विभिन्न जीनों के एलील युग्मक निर्माण में स्वतंत्र रूप से व्यवस्थित हो सकते हैं। एकसंकर संकरण में F₂ का 3:1 और द्विसंकर संकरण में 9:3:3:1 अनुपात इन सिद्धांतों के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।
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अध्याय 5 — वंशागति के आणविक आधार

1. DNA

DNA अधिकांश जीवों में आनुवंशिक पदार्थ है। यह न्यूक्लियोटाइडों से बना बहुलक है। प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड में शर्करा, फॉस्फेट और नाइट्रोजनी क्षार होता है।

2. DNA की संरचना

वॉटसन और क्रिक ने DNA की द्विकुंडली संरचना का मॉडल प्रस्तुत किया। इसमें दो प्रतिलोमांतर श्रृंखलाएँ होती हैं और क्षार पूरकता द्वारा जुड़े रहते हैं।

A = T तथा G ≡ C

3. DNA प्रतिकृतिकरण

DNA अपनी प्रतिकृति अर्धसंरक्षी विधि से बनाता है। प्रत्येक नई DNA अणु में एक पुरानी और एक नई श्रृंखला होती है।

4. प्रतिलेखन

DNA से RNA बनने की प्रक्रिया प्रतिलेखन कहलाती है।

5. अनुवादन

mRNA की सूचना के आधार पर राइबोसोम पर प्रोटीन संश्लेषण की प्रक्रिया अनुवादन कहलाती है।

6. आनुवंशिक कूट

तीन न्यूक्लियोटाइडों का समूह एक codon कहलाता है। प्रत्येक codon सामान्यतः एक अमीनो अम्ल को निर्दिष्ट करता है।

7. DNA fingerprinting

व्यक्तियों के DNA में उपस्थित विशिष्ट अनुक्रम पैटर्न की पहचान द्वारा व्यक्ति की पहचान करने की तकनीक DNA fingerprinting कहलाती है।

8. मानव जीनोम परियोजना

मानव जीनोम परियोजना का उद्देश्य मानव DNA के जीनोम का अनुक्रमण और मानचित्रण करना था।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. DNA की अर्धसंरक्षी प्रतिकृति क्या है?
DNA की प्रतिकृति में प्रत्येक नई द्विकुंडली DNA में एक पुरानी और एक नई पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखला होती है। इसे अर्धसंरक्षी प्रतिकृतिकरण कहते हैं।
प्रश्न 2. प्रतिलेखन क्या है?
DNA के साँचे से RNA के संश्लेषण की प्रक्रिया प्रतिलेखन कहलाती है।
प्रश्न 3. आनुवंशिक कूट क्या है?
mRNA में तीन लगातार न्यूक्लियोटाइडों का समूह जो एक अमीनो अम्ल के लिए संकेत देता है, आनुवंशिक कूट या codon कहलाता है।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. DNA को आनुवंशिक पदार्थ क्यों माना जाता है?
DNA अपनी प्रतिकृति बना सकता है, आनुवंशिक सूचना को संग्रहित करता है और संतति तक उसका संचरण करता है। इसकी संरचना में होने वाले परिवर्तन विविधता का आधार बनते हैं। DNA प्रोटीन संश्लेषण को नियंत्रित करके कोशिकीय कार्यों पर प्रभाव डालता है।
प्रश्न. प्रतिलेखन और अनुवादन में अंतर बताइए।
प्रतिलेखन में DNA की सूचना से RNA बनता है और यह सामान्यतः नाभिक में होता है। अनुवादन में mRNA की सूचना के आधार पर राइबोसोम पर प्रोटीन बनता है। प्रतिलेखन का उत्पाद RNA और अनुवादन का उत्पाद पॉलीपेप्टाइड होता है।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. DNA की संरचना एवं प्रतिकृतिकरण की प्रक्रिया समझाइए।
DNA दो प्रतिलोमांतर पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं से बनी द्विकुंडली है। दोनों श्रृंखलाएँ पूरक क्षारों के बीच हाइड्रोजन बंध द्वारा जुड़ी रहती हैं। प्रतिकृतिकरण के समय DNA की दोनों श्रृंखलाएँ अलग होती हैं और प्रत्येक पुरानी श्रृंखला नई पूरक श्रृंखला के लिए साँचे का कार्य करती है। इसलिए बनने वाले प्रत्येक DNA अणु में एक पुरानी तथा एक नई श्रृंखला होती है। यह अर्धसंरक्षी प्रतिकृतिकरण कहलाता है।
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इकाई 3 — मानव कल्याण में जीव विज्ञान (14 अंक)

अध्याय 6 — विकास

1. जैव विकास

समय के साथ जीवों की आनुवंशिक और वंशागत विशेषताओं में होने वाले परिवर्तन, जिनसे नई प्रजातियों का विकास हो सकता है, जैव विकास कहलाते हैं।

2. डार्विन का सिद्धांत

डार्विन ने प्राकृतिक वरण के सिद्धांत द्वारा विकास को समझाया। अधिक संतान उत्पन्न होती है, संसाधनों के लिए संघर्ष होता है और अनुकूल विविधताओं वाले जीवों के जीवित रहने तथा प्रजनन की संभावना अधिक होती है।

3. प्राकृतिक वरण

पर्यावरण के अनुकूल लक्षण वाले जीवों का चयनात्मक रूप से अधिक जीवित रहना और प्रजनन करना प्राकृतिक वरण कहलाता है।

4. विकास के प्रमाण

  • जीवाश्म
  • समजात अंग
  • समरूप अंग
  • भ्रूणविज्ञान
  • आणविक प्रमाण

5. अनुकूली विकिरण

एक सामान्य पूर्वज से अलग-अलग पर्यावरणीय परिस्थितियों में कई रूपों का विकास अनुकूली विकिरण कहलाता है।

6. हार्डी-वीनबर्ग सिद्धांत

बड़ी, यादृच्छिक संकरण करने वाली जनसंख्या में, यदि चयन, प्रवास, उत्परिवर्तन और आनुवंशिक विचलन जैसे कारक अनुपस्थित हों तो जीन आवृत्तियाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थिर रह सकती हैं।

p² + 2pq + q² = 1

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. प्राकृतिक वरण क्या है?
पर्यावरण के अनुकूल विविधताओं वाले जीवों के अधिक जीवित रहने और प्रजनन करने की प्रक्रिया प्राकृतिक वरण कहलाती है।
प्रश्न 2. अनुकूली विकिरण क्या है?
एक सामान्य पूर्वज से अलग-अलग पर्यावरणों के अनुकूल अनेक रूपों या प्रजातियों का विकास अनुकूली विकिरण कहलाता है।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. विकास के तीन प्रमाण लिखिए।
जीवाश्म विकास के क्रमिक परिवर्तन का प्रमाण देते हैं। समजात अंग सामान्य पूर्वज का संकेत देते हैं। भ्रूणविज्ञान तथा आणविक समानताएँ भी विभिन्न जीवों के बीच विकासात्मक संबंध स्थापित करती हैं।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. डार्विन के प्राकृतिक वरण सिद्धांत को समझाइए।
जीव बहुत अधिक संख्या में संतान उत्पन्न करते हैं, लेकिन संसाधन सीमित होने के कारण सभी जीवित नहीं रह सकते। इससे अस्तित्व के लिए संघर्ष होता है। जीवों में प्राकृतिक विविधताएँ होती हैं और उनमें से पर्यावरण के अनुकूल लक्षण वाले जीवों की जीवित रहने एवं प्रजनन करने की संभावना अधिक होती है। इन अनुकूल लक्षणों का पीढ़ियों में संचय होने से जनसंख्या में परिवर्तन और अंततः नई प्रजातियों का विकास हो सकता है।

अध्याय 7 — मानव स्वास्थ्य तथा रोग

1. स्वास्थ्य

स्वास्थ्य केवल रोग का अभाव नहीं बल्कि शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से स्वस्थ स्थिति है।

2. रोगजनक

रोग उत्पन्न करने वाले जीव या परजीवी रोगजनक कहलाते हैं।

3. प्रमुख रोग

रोगरोगजनक
मलेरियाPlasmodium
टाइफाइडSalmonella typhi
निमोनियाकुछ बैक्टीरिया/वायरस
डेंगूवायरस
AIDSHIV

4. प्रतिरक्षा

रोगजनकों के विरुद्ध शरीर की सुरक्षा क्षमता प्रतिरक्षा कहलाती है।

5. प्रतिरक्षा के प्रकार

  • जन्मजात प्रतिरक्षा
  • अर्जित प्रतिरक्षा
  • सक्रिय प्रतिरक्षा
  • निष्क्रिय प्रतिरक्षा

6. एंटीबॉडी

प्रतिजन के विरुद्ध B-लिम्फोसाइटों से बनने वाले विशेष प्रोटीन एंटीबॉडी कहलाते हैं।

7. AIDS

AIDS HIV संक्रमण के कारण प्रतिरक्षा तंत्र के कमजोर होने से संबंधित अवस्था है।

8. कैंसर

कोशिकाओं के अनियंत्रित तथा असामान्य विभाजन से कैंसर विकसित हो सकता है।

9. नशीली दवाएँ

मादक पदार्थों का दुरुपयोग शरीर, मानसिक स्वास्थ्य तथा सामाजिक जीवन पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. जन्मजात और अर्जित प्रतिरक्षा में अंतर बताइए।
जन्मजात प्रतिरक्षा जन्म से उपस्थित सामान्य सुरक्षा है। अर्जित प्रतिरक्षा जीवन में रोगजनक या टीकाकरण के संपर्क के बाद विकसित होती है और विशिष्ट होती है।
प्रश्न 2. AIDS का कारण क्या है?
AIDS का कारण Human Immunodeficiency Virus अर्थात HIV संक्रमण है। यह प्रतिरक्षा तंत्र की प्रमुख कोशिकाओं को प्रभावित करता है।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. टीकाकरण का महत्व बताइए।
टीकाकरण शरीर में किसी रोगजनक के विरुद्ध विशिष्ट प्रतिरक्षा विकसित करने में सहायता करता है। इससे प्रतिरक्षा तंत्र स्मृति कोशिकाएँ बना सकता है और भविष्य में उसी रोगजनक के संपर्क पर तेज प्रतिक्रिया देता है।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को समझाइए।
मानव शरीर में जन्मजात और अर्जित दोनों प्रकार की प्रतिरक्षा होती है। त्वचा, श्लेष्मा और कुछ रासायनिक पदार्थ जन्मजात रक्षा में भाग लेते हैं। अर्जित प्रतिरक्षा में B-लिम्फोसाइट एंटीबॉडी बनाते हैं तथा T-लिम्फोसाइट कोशिकीय प्रतिरक्षा में भाग लेते हैं। प्रतिरक्षा स्मृति के कारण शरीर भविष्य के संक्रमणों पर अधिक प्रभावी प्रतिक्रिया दे सकता है।

अध्याय 8 — मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव

1. सूक्ष्मजीवों का उपयोग

सूक्ष्मजीव खाद्य पदार्थों के निर्माण, औषधि उत्पादन, उद्योग, कृषि तथा अपशिष्ट उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

2. किण्वन

सूक्ष्मजीवों द्वारा कार्बनिक पदार्थों के अवायवीय अपघटन से विभिन्न उत्पाद बनते हैं। यीस्ट का उपयोग शराब निर्माण में किया जाता है।

3. दही

Lactobacillus जैसे जीवाणु दूध के लैक्टोज को लैक्टिक अम्ल में बदलते हैं और दही बनने में सहायता करते हैं।

4. एंटीबायोटिक

सूक्ष्मजीवों से प्राप्त या उनसे प्रेरित ऐसे पदार्थ जो कुछ रोगजनक सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रोकते या नष्ट करते हैं, एंटीबायोटिक कहलाते हैं।

5. सीवेज उपचार

अपशिष्ट जल के जैविक उपचार में सूक्ष्मजीवों का उपयोग किया जाता है। सक्रिय कीचड़ एवं जैव गैस उत्पादन इसमें महत्वपूर्ण प्रक्रियाएँ हैं।

6. जैव गैस

अवायवीय सूक्ष्मजीवों द्वारा जैविक पदार्थों के अपघटन से methane युक्त बायोगैस बनती है।

7. जैव नियंत्रण

हानिकारक कीटों तथा रोगजनकों को नियंत्रित करने के लिए जैविक एजेंटों का उपयोग जैव नियंत्रण कहलाता है।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. दही बनाने में किस सूक्ष्मजीव की भूमिका है?
Lactobacillus जैसे लैक्टिक अम्ल जीवाणु दूध के लैक्टोज को लैक्टिक अम्ल में बदलकर दही बनने में सहायता करते हैं।
प्रश्न 2. बायोगैस क्या है?
जैविक पदार्थों के अवायवीय अपघटन से बनने वाली methane युक्त गैस को बायोगैस कहते हैं।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. मानव कल्याण में सूक्ष्मजीवों के तीन उपयोग बताइए।
सूक्ष्मजीव दही एवं किण्वित खाद्य पदार्थों के निर्माण में उपयोगी हैं। वे एंटीबायोटिक, एन्जाइम और अन्य औद्योगिक उत्पाद बनाने में सहायक हैं। सीवेज उपचार और बायोगैस निर्माण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. सीवेज उपचार में सूक्ष्मजीवों की भूमिका समझाइए।
सीवेज के प्राथमिक उपचार के बाद जैविक उपचार में सूक्ष्मजीव कार्बनिक पदार्थों को विघटित करते हैं। एरेटेड टैंक में सूक्ष्मजीवी बायोमास कार्बनिक पदार्थों को कम करता है। बनने वाली सक्रिय कीचड़ का एक भाग पुनः उपयोग किया जाता है और दूसरे भाग से बायोगैस प्राप्त की जा सकती है। इससे अपशिष्ट जल का BOD कम होता है और पर्यावरणीय प्रदूषण घटता है।
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इकाई 4 — जैव प्रौद्योगिकी (12 अंक)

अध्याय 9 — जैव प्रौद्योगिकी : सिद्धांत व प्रक्रम

1. जैव प्रौद्योगिकी

जीवित जीवों, कोशिकाओं या जैव-अणुओं का उपयोग करके उपयोगी उत्पाद एवं प्रक्रियाएँ विकसित करने की तकनीक जैव प्रौद्योगिकी कहलाती है।

2. मुख्य आधार

  • आनुवंशिक अभियांत्रिकी
  • जैवप्रक्रम प्रौद्योगिकी
  • DNA पुनर्संयोजन

3. प्रतिबंध एंजाइम

Restriction endonucleases DNA को विशिष्ट न्यूक्लियोटाइड अनुक्रमों पर काटते हैं।

4. DNA लिगेज

DNA के दो खंडों को जोड़ने वाला एंजाइम DNA ligase कहलाता है।

5. क्लोनिंग वेक्टर

ऐसा DNA अणु जो इच्छित जीन को किसी होस्ट कोशिका में ले जाने और उसकी प्रतिकृति में सहायता करता है, क्लोनिंग वेक्टर कहलाता है।

6. PCR

Polymerase Chain Reaction द्वारा किसी विशिष्ट DNA अनुक्रम की बड़ी संख्या में प्रतियाँ बनाई जाती हैं। इसमें denaturation, annealing और extension के चक्र दोहराए जाते हैं।

7. जैवप्रक्रम

वांछित उत्पाद के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए नियंत्रित परिस्थितियों में जैविक प्रक्रियाओं का उपयोग जैवप्रक्रम प्रौद्योगिकी कहलाता है।

8. बायोरिएक्टर

बायोरिएक्टर एक ऐसा पात्र है जिसमें सूक्ष्मजीवों/कोशिकाओं के नियंत्रित विकास द्वारा वांछित जैव उत्पाद बनाए जाते हैं।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. Restriction enzyme क्या है?
ऐसा एंजाइम जो DNA के विशिष्ट अनुक्रमों को पहचानकर उन्हें काटता है, restriction endonuclease कहलाता है।
प्रश्न 2. PCR क्या है?
PCR एक तकनीक है जिसमें किसी विशिष्ट DNA अनुक्रम को in vitro बार-बार प्रतिकृत करके उसकी बहुत अधिक प्रतियाँ बनाई जाती हैं।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. PCR के तीन प्रमुख चरण समझाइए।
Denaturation: DNA की दो श्रृंखलाएँ अलग होती हैं। Annealing: primers पूरक अनुक्रम से जुड़ते हैं। Extension: DNA polymerase नए DNA strands का संश्लेषण करता है। ये चरण कई चक्रों तक दोहराए जाते हैं।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. पुनर्संयोजित DNA प्रौद्योगिकी की प्रमुख अवस्थाएँ समझाइए।
सबसे पहले इच्छित DNA तथा वेक्टर DNA को उपयुक्त restriction enzyme से काटा जाता है। इच्छित जीन को वेक्टर में DNA ligase की सहायता से जोड़ा जाता है। पुनर्संयोजित DNA को उपयुक्त host कोशिका में प्रवेश कराया जाता है। चयनित host कोशिकाओं को बढ़ाकर इच्छित DNA तथा संबंधित उत्पाद का बड़े पैमाने पर निर्माण किया जाता है।

अध्याय 10 — जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

1. कृषि में उपयोग

जैव प्रौद्योगिकी द्वारा कीटरोधी फसलें, रोगरोधी फसलें, पोषणीय गुणवत्ता वाली फसलें तथा तनाव-सहिष्णु किस्में विकसित की जा सकती हैं।

2. Bt फसल

Bt फसल में Bacillus thuringiensis से प्राप्त जीन के कारण कुछ हानिकारक कीटों के विरुद्ध प्रतिरोध विकसित किया जाता है। Bt cotton इसका प्रमुख उदाहरण है।

3. जीन चिकित्सा

दोषपूर्ण जीन के स्थान पर कार्यशील जीन पहुँचाकर आनुवंशिक रोगों के उपचार की पद्धति जीन चिकित्सा कहलाती है।

4. इंसुलिन उत्पादन

पुनर्संयोजित DNA प्रौद्योगिकी द्वारा मानव इंसुलिन का उत्पादन किया जा सकता है।

5. वैक्सीन

जैव प्रौद्योगिकी की सहायता से विभिन्न रोगों के विरुद्ध वैक्सीन विकसित की जा सकती हैं।

6. ट्रांसजेनिक जीव

ऐसे जीव जिनके जीनोम में किसी बाहरी जीन को प्रविष्ट कराया गया हो, ट्रांसजेनिक जीव कहलाते हैं।

7. जैव सुरक्षा

जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग में पर्यावरणीय, स्वास्थ्य संबंधी और नैतिक पहलुओं को ध्यान में रखना आवश्यक है।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. Bt cotton क्या है?
Bt cotton एक आनुवंशिक रूप से रूपांतरित कपास की फसल है जिसमें Bacillus thuringiensis से प्राप्त जीन के कारण कुछ कीटों के विरुद्ध प्रतिरोध विकसित होता है।
प्रश्न 2. जीन चिकित्सा क्या है?
दोषपूर्ण जीन के कार्य को सुधारने या उसके स्थान पर कार्यशील जीन पहुँचाकर आनुवंशिक रोगों का उपचार करने की विधि जीन चिकित्सा कहलाती है।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. जैव प्रौद्योगिकी के कृषि क्षेत्र में तीन उपयोग बताइए।
जैव प्रौद्योगिकी से कीटरोधी फसलें विकसित की जा सकती हैं। पोषणीय गुणवत्ता में सुधार, रोग प्रतिरोध तथा सूखा या लवणता जैसी परिस्थितियों के प्रति सहनशील फसलें भी विकसित की जा सकती हैं। इससे कृषि उत्पादकता बढ़ाने में सहायता मिलती है।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. मानव कल्याण में जैव प्रौद्योगिकी के प्रमुख उपयोग समझाइए।
जैव प्रौद्योगिकी द्वारा मानव इंसुलिन, वैक्सीन और अनेक औषधीय प्रोटीन बनाए जा सकते हैं। जीन चिकित्सा आनुवंशिक रोगों के उपचार का विकल्प प्रदान करती है। ट्रांसजेनिक जीव अनुसंधान और औषधि उत्पादन में उपयोगी हो सकते हैं। कृषि में Bt crops जैसी तकनीकें कीट नियंत्रण और उत्पादन बढ़ाने में सहायक हैं। साथ ही जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग में जैव सुरक्षा और नैतिक पहलुओं का ध्यान रखना आवश्यक है।
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इकाई 5 — पारिस्थितिकी (12 अंक)

अध्याय 11 — जीव और समष्टियाँ

1. जीव और पर्यावरण

प्रत्येक जीव अपने भौतिक और जैविक पर्यावरण के साथ पारस्परिक संबंध रखता है।

2. पर्यावरणीय कारक

  • तापमान
  • जल
  • प्रकाश
  • मिट्टी
  • अन्य जीव

3. जनसंख्या

किसी निश्चित क्षेत्र में एक ही प्रजाति के जीवों का समूह समष्टि या जनसंख्या कहलाता है।

4. जनसंख्या की विशेषताएँ

  • जन्मदर
  • मृत्युदर
  • प्रवास
  • लिंग अनुपात
  • आयु पिरामिड

5. जनसंख्या वृद्धि

संसाधन पर्याप्त होने पर जनसंख्या तेजी से बढ़ सकती है। इसे घातांकीय वृद्धि कहा जाता है।

dN/dt = rN

संसाधन सीमित होने पर वृद्धि पर वहन क्षमता का प्रभाव पड़ता है और लॉजिस्टिक वृद्धि दिखाई देती है।

dN/dt = rN(K−N)/K

6. पारस्परिक क्रियाएँ

अंतःक्रियाप्रभावउदाहरण
परस्परवाद+/+लाइकेन
सहभोजिता+/0वृक्ष पर एपिफाइट
परजीविता+/−कुसकुटा
शिकारिता+/−बाघ-हिरण
प्रतिस्पर्धा−/−संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा
अमेंसलिज्म−/0कुछ रासायनिक अवरोध

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. समष्टि क्या है?
किसी निश्चित क्षेत्र में एक ही प्रजाति के जीवों का समूह जो आपस में प्रजनन करने में सक्षम हों, समष्टि या जनसंख्या कहलाता है।
प्रश्न 2. वहन क्षमता क्या है?
किसी पर्यावरण द्वारा उपलब्ध संसाधनों के आधार पर किसी जनसंख्या के अधिकतम स्थायी आकार को वहन क्षमता कहते हैं।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. परस्परवाद और परजीविता में अंतर बताइए।
परस्परवाद में दोनों सहभागी जीवों को लाभ होता है। परजीविता में एक जीव लाभ प्राप्त करता है जबकि दूसरे को हानि होती है। लाइकेन परस्परवाद तथा कुसकुटा परजीविता का उदाहरण है।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. जनसंख्या वृद्धि के प्रकार समझाइए।
घातांकीय वृद्धि तब होती है जब संसाधन पर्याप्त हों और जनसंख्या तीव्र गति से बढ़े। इसका वक्र J-आकार का होता है। संसाधनों की कमी होने पर वृद्धि धीमी होती है और वहन क्षमता के आसपास स्थिर होने लगती है। इसे लॉजिस्टिक वृद्धि कहते हैं और इसका वक्र S-आकार का होता है।

अध्याय 12 — पारितंत्र

1. पारितंत्र

जीवों तथा उनके अजैविक पर्यावरण के बीच पारस्परिक क्रिया से बनी कार्यात्मक इकाई पारितंत्र कहलाती है।

2. घटक

  • उत्पादक
  • उपभोक्ता
  • अपघटक
  • अजैविक घटक

3. खाद्य श्रृंखला

जीवों में भोजन और ऊर्जा के क्रमिक स्थानांतरण की श्रृंखला खाद्य श्रृंखला कहलाती है।

4. खाद्य जाल

कई खाद्य श्रृंखलाओं के आपस में जुड़े होने से खाद्य जाल बनता है।

5. पारिस्थितिक पिरामिड

संख्या, जैवभार और ऊर्जा के आधार पर पारिस्थितिक पिरामिड बनाए जा सकते हैं।

6. 10 प्रतिशत नियम

एक पोषण स्तर की कुल ऊर्जा का लगभग 10% ही अगले पोषण स्तर तक स्थानांतरित होता है।

7. जैव-भूरासायनिक चक्र

कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और जल आदि के प्राकृतिक चक्र पारितंत्र में पदार्थों के पुनर्चक्रण के लिए महत्वपूर्ण हैं।

8. उत्तराधिकार

किसी क्षेत्र में जैविक समुदायों के क्रमिक परिवर्तन को पारिस्थितिक उत्तराधिकार कहते हैं।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. पारितंत्र क्या है?
जीवित घटकों और उनके अजैविक पर्यावरण के बीच पारस्परिक क्रिया से बनी कार्यात्मक इकाई पारितंत्र कहलाती है।
प्रश्न 2. 10 प्रतिशत नियम क्या है?
एक पोषण स्तर से अगले पोषण स्तर तक औसतन लगभग 10 प्रतिशत ऊर्जा ही स्थानांतरित होती है। शेष ऊर्जा मुख्यतः चयापचय में उपयोग होकर ऊष्मा के रूप में निकलती है।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक में अंतर बताइए।
उत्पादक प्रकाश संश्लेषण या अन्य प्रक्रियाओं द्वारा भोजन बनाते हैं। उपभोक्ता अन्य जीवों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर होते हैं। अपघटक मृत जैव पदार्थों को सरल पदार्थों में बदलते हैं और पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण करते हैं।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह को समझाइए।
पारितंत्र में ऊर्जा का मूल स्रोत सूर्य है। उत्पादक सूर्य की ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलते हैं। यह ऊर्जा प्राथमिक उपभोक्ताओं, द्वितीयक उपभोक्ताओं और उच्च पोषण स्तरों तक पहुँचती है। प्रत्येक पोषण स्तर पर ऊर्जा का बड़ा भाग चयापचय में खर्च होकर ऊष्मा के रूप में निकल जाता है। इसलिए ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय होता है और प्रत्येक स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा घटती जाती है।

अध्याय 13 — जैव-विविधता एवं संरक्षण

1. जैव-विविधता

पृथ्वी पर जीवों में जीन, प्रजाति और पारितंत्र स्तर पर पाई जाने वाली विविधता जैव-विविधता कहलाती है।

2. जैव-विविधता के स्तर

  • आनुवंशिक विविधता
  • प्रजातीय विविधता
  • पारिस्थितिक तंत्र विविधता

3. जैव विविधता का महत्व

जैव-विविधता पारिस्थितिक संतुलन, खाद्य, औषधि, परागण, जलवायु नियंत्रण और अन्य पारिस्थितिक सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

4. जैव-विविधता ह्रास

  • आवास विनाश
  • अतिदोहन
  • विदेशी आक्रामक प्रजातियाँ
  • प्रदूषण
  • जलवायु परिवर्तन

5. संरक्षण के प्रकार

इन-सीटू: प्राकृतिक आवास में संरक्षण। उदाहरण—राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, जैवमंडल रिजर्व।

एक्स-सीटू: प्राकृतिक आवास से बाहर संरक्षण। उदाहरण—वनस्पति उद्यान, चिड़ियाघर, जीन बैंक, बीज बैंक।

6. जैव-विविधता हॉटस्पॉट

ऐसे क्षेत्र जहाँ उच्च स्थानिकता के साथ जैव-विविधता पर गंभीर खतरा हो, जैव-विविधता हॉटस्पॉट कहलाते हैं।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. जैव-विविधता क्या है?
जीवों में जीन, प्रजाति और पारितंत्र स्तर पर पाई जाने वाली विविधता जैव-विविधता कहलाती है।
प्रश्न 2. इन-सीटू संरक्षण क्या है?
जीवों का उनके प्राकृतिक आवास में संरक्षण इन-सीटू संरक्षण कहलाता है। राष्ट्रीय उद्यान और जैवमंडल रिजर्व इसके उदाहरण हैं।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. जैव-विविधता ह्रास के प्रमुख कारण बताइए।
आवास विनाश और विखंडन, जीवों का अतिदोहन तथा बाहरी आक्रामक प्रजातियों का प्रवेश प्रमुख कारण हैं। इसके अतिरिक्त प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन भी जैव-विविधता को प्रभावित करते हैं।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. जैव-विविधता संरक्षण के इन-सीटू एवं एक्स-सीटू उपायों की तुलना कीजिए।
इन-सीटू संरक्षण में जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रखा जाता है, जैसे राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और जैवमंडल रिजर्व। एक्स-सीटू संरक्षण में जीवों को प्राकृतिक आवास से बाहर संरक्षित किया जाता है, जैसे चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान, बीज बैंक और जीन बैंक। प्राकृतिक पारिस्थितिक प्रक्रियाओं को बनाए रखने के लिए इन-सीटू संरक्षण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जबकि अत्यंत संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में एक्स-सीटू विधियाँ उपयोगी होती हैं।
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28 वस्तुनिष्ठ प्रश्न — मॉडल अभ्यास उत्तर सहित

सही विकल्प

  1. द्विनिषेचन किसमें पाया जाता है? — आवृतबीजी पौधों में
  2. मानव में निषेचन सामान्यतः कहाँ होता है? — अंडवाहिनी के ampullary-isthmic junction में
  3. मानव नर में टेस्टोस्टेरोन का स्राव किससे संबंधित है? — लेडिग कोशिकाएँ
  4. मेंडल ने प्रयोग किस पौधे पर किया? — मटर
  5. DNA की द्विकुंडली संरचना का मॉडल किसने दिया? — वॉटसन और क्रिक
  6. प्रथम कोडॉन/आरंभिक कूटोन है— AUG
  7. डार्विन के सिद्धांत का आधार है— प्राकृतिक वरण
  8. मलेरिया का रोगजनक है— Plasmodium
  9. AIDS का कारण है— HIV
  10. दही बनाने में प्रमुख सूक्ष्मजीव है— Lactobacillus
  11. PCR का अर्थ है— Polymerase Chain Reaction
  12. Bt cotton किसके विरुद्ध प्रतिरोधी है? — कुछ कीटों के विरुद्ध
  13. जनसंख्या की अधिकतम स्थायी सीमा कहलाती है— वहन क्षमता
  14. 10% नियम किससे संबंधित है? — ऊर्जा स्थानांतरण
  15. प्राकृतिक आवास में संरक्षण कहलाता है— इन-सीटू संरक्षण

रिक्त स्थान — उत्तर सहित

  1. पुष्पी पौधों में दो नर युग्मकों के संलयन से होने वाली घटना ________ कहलाती है। — द्विनिषेचन
  2. शुक्राणु निर्माण की प्रक्रिया ________ कहलाती है। — शुक्राणुजनन
  3. मासिक चक्र में अंडोत्सर्ग के लिए ________ surge महत्वपूर्ण है। — LH
  4. मेंडल ने ________ पर प्रयोग किए। — मटर
  5. DNA में एडेनिन का पूरक क्षार ________ है। — थाइमिन
  6. mRNA के तीन न्यूक्लियोटाइडों के समूह को ________ कहते हैं। — कोडॉन
  7. डार्विन ने ________ द्वारा विकास को समझाया। — प्राकृतिक वरण
  8. AIDS का रोगजनक ________ है। — HIV
  9. दही में ________ जीवाणु उपयोगी हैं। — Lactobacillus
  10. PCR में DNA को बढ़ाने के लिए ________ का उपयोग किया जाता है। — DNA polymerase

सत्य / असत्य — उत्तर सहित

  1. आवृतबीजी पौधों में द्विनिषेचन पाया जाता है। — सत्य
  2. भ्रूणकोष सामान्यतः 8-कोशिकीय और 7-नाभिकीय होता है। — असत्य
  3. मानव में नर XY और मादा XX होती है। — सत्य
  4. मेंडल ने मटर के पौधे पर प्रयोग किया। — सत्य
  5. DNA अधिकांश जीवों में आनुवंशिक पदार्थ है। — सत्य
  6. प्राकृतिक वरण डार्विन के सिद्धांत का आधार है। — सत्य
  7. मलेरिया बैक्टीरिया से होता है। — असत्य
  8. Bt cotton एक GM crop है। — सत्य
  9. उत्पादक पारितंत्र में ऊर्जा का प्रारंभिक स्थिरीकरण करते हैं। — सत्य
  10. इन-सीटू संरक्षण में जीवों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर रखा जाता है। — असत्य

सही जोड़ी — उत्तर सहित

कॉलम Aकॉलम B
1. द्विनिषेचनआवृतबीजी पौधे
2. मेंडलमटर
3. डार्विनप्राकृतिक वरण
4. Plasmodiumमलेरिया
5. PCRDNA amplification

एक वाक्य में उत्तर

  1. द्विनिषेचन क्या है? — आवृतबीजी पौधों में होने वाले दो संलयनों की प्रक्रिया।
  2. मानव में निषेचन कहाँ होता है? — अंडवाहिनी के ampullary-isthmic junction में।
  3. शुक्राणुजनन क्या है? — शुक्राणु बनने की प्रक्रिया।
  4. मेंडल को किस नाम से जाना जाता है? — आनुवंशिकी का जनक।
  5. प्राकृतिक वरण किसने प्रस्तावित किया? — चार्ल्स डार्विन।
  6. AIDS का रोगजनक क्या है? — HIV।
  7. DNA का पूरा नाम क्या है? — डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल।
  8. PCR का पूरा नाम क्या है? — Polymerase Chain Reaction।
  9. 10% नियम क्या बताता है? — एक पोषण स्तर से अगले तक लगभग 10% ऊर्जा स्थानांतरण।
  10. इन-सीटू संरक्षण क्या है? — प्राकृतिक आवास में संरक्षण।

अत्यंत महत्वपूर्ण आरेख — परीक्षा में अभ्यास करें

जनन
पुष्प की संरचना • परागकण • भ्रूणकोष • द्विनिषेचन • नर जनन तंत्र • मादा जनन तंत्र • मासिक चक्र
आनुवंशिकी
एकसंकर संकरण • द्विसंकर संकरण • DNA double helix • DNA replication • transcription
मानव स्वास्थ्य
प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया • एंटीबॉडी की मूल संरचना • रोग संचरण का योजनात्मक चित्र
जैव प्रौद्योगिकी
pBR322 जैसे vector का सामान्य चित्र • PCR cycle • recombinant DNA प्रक्रिया • bioreactor
पारितंत्र
खाद्य श्रृंखला • ऊर्जा पिरामिड • जनसंख्या वृद्धि वक्र • जैव-भूरासायनिक चक्र
आरेख में अंक: लेबल स्पष्ट रखें, रेखाएँ सीधी रखें और प्रत्येक संरचना का नाम सही स्थान पर लिखें। जीव विज्ञान में सुव्यवस्थित labelled diagram उत्तर को अधिक प्रभावी बनाता है।

अध्यायवार 50 अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न

  1. पुष्प के नर और मादा जनन अंगों की संरचना समझाइए।
  2. सूक्ष्मबीजाणुजनन और महाबीजाणुजनन में अंतर बताइए।
  3. परागण के प्रकार एवं साधन बताइए।
  4. भ्रूणकोष की संरचना का वर्णन कीजिए।
  5. द्विनिषेचन की प्रक्रिया समझाइए।
  6. मानव नर जनन तंत्र का वर्णन कीजिए।
  7. मानव मादा जनन तंत्र का वर्णन कीजिए।
  8. शुक्राणुजनन समझाइए।
  9. अंडजनन समझाइए।
  10. मासिक चक्र के चरण लिखिए।
  11. निषेचन और आरोपण समझाइए।
  12. जनन स्वास्थ्य का महत्व बताइए।
  13. गर्भनिरोधक विधियों की तुलना कीजिए।
  14. सहायक जनन तकनीकों का वर्णन कीजिए।
  15. मेंडल के नियम उदाहरण सहित लिखिए।
  16. एकसंकर और द्विसंकर संकरण समझाइए।
  17. अपूर्ण प्रभुत्व एवं सह-प्रभुत्व बताइए।
  18. ABO रक्त समूह की वंशागति समझाइए।
  19. लिंग निर्धारण का तंत्र समझाइए।
  20. X-linked वंशागति समझाइए।
  21. DNA की संरचना बताइए।
  22. DNA की अर्धसंरक्षी प्रतिकृति समझाइए।
  23. प्रतिलेखन और अनुवादन में अंतर बताइए।
  24. आनुवंशिक कूट के गुण लिखिए।
  25. DNA fingerprinting क्या है?
  26. मानव जीनोम परियोजना का महत्व बताइए।
  27. डार्विन का प्राकृतिक वरण सिद्धांत समझाइए।
  28. विकास के प्रमाण लिखिए।
  29. हार्डी-वीनबर्ग सिद्धांत समझाइए।
  30. अनुकूली विकिरण क्या है?
  31. मानव स्वास्थ्य और रोग की अवधारणा समझाइए।
  32. प्रतिरक्षा के प्रकार लिखिए।
  33. AIDS के कारण, लक्षण और बचाव लिखिए।
  34. कैंसर क्या है?
  35. टीकाकरण का महत्व समझाइए।
  36. मानव कल्याण में सूक्ष्मजीवों की भूमिका लिखिए।
  37. किण्वन का उपयोग बताइए।
  38. सीवेज उपचार में सूक्ष्मजीवों की भूमिका समझाइए।
  39. बायोगैस का निर्माण समझाइए।
  40. जैव प्रौद्योगिकी क्या है?
  41. recombinant DNA technology समझाइए।
  42. PCR की प्रक्रिया लिखिए।
  43. वेक्टर क्या है?
  44. Bt cotton क्या है?
  45. जीन चिकित्सा समझाइए।
  46. जीव और पर्यावरण के संबंध समझाइए।
  47. जनसंख्या वृद्धि के प्रकार लिखिए।
  48. पारितंत्र की संरचना और कार्य समझाइए।
  49. 10% नियम समझाइए।
  50. जैव-विविधता के संरक्षण की आवश्यकता एवं उपाय बताइए।

अति महत्वपूर्ण तथ्य — त्वरित रिवीजन

विषययाद रखने योग्य तथ्य
द्विनिषेचनएक नर युग्मक + अंड कोशिका; दूसरा + ध्रुवीय नाभिक
भ्रूणकोष7-कोशिकीय, 8-नाभिकीय
मानव मादाXX
मानव नरXY
मेंडलमटर के पौधे
एकसंकर F₂3 : 1
द्विसंकर F₂9 : 3 : 3 : 1
DNAद्विकुंडली संरचना
A-Tदो हाइड्रोजन बंध
G-Cतीन हाइड्रोजन बंध
आरंभिक कोडॉनAUG
मलेरियाPlasmodium
AIDSHIV
दहीLactobacillus
PCRDNA amplification
Bt cottonकीट प्रतिरोध
घातांकीय वृद्धिJ-आकार वक्र
लॉजिस्टिक वृद्धिS-आकार वक्र
ऊर्जा स्थानांतरण10% नियम
इन-सीटूप्राकृतिक आवास में संरक्षण

परीक्षा-पूर्व अंतिम चेकलिस्ट

  • पुष्प की संरचना, परागकण, भ्रूणकोष और द्विनिषेचन का labelled diagram तैयार करें।
  • मानव नर एवं मादा जनन तंत्र के सभी प्रमुख भाग याद करें।
  • शुक्राणुजनन, अंडजनन और मासिक चक्र को क्रमवार पढ़ें।
  • जनन स्वास्थ्य में गर्भनिरोधक तथा सहायक जनन तकनीकें तैयार करें।
  • मेंडल के सभी नियम और 3:1 एवं 9:3:3:1 अनुपात याद करें।
  • अपूर्ण प्रभुत्व, सह-प्रभुत्व और ABO रक्त समूह तैयार करें।
  • लिंग निर्धारण और X-linked inheritance विशेष रूप से पढ़ें।
  • DNA संरचना, प्रतिकृतिकरण, transcription, translation और genetic code तैयार करें।
  • विकास में डार्विन, जीवाश्म, समजात अंग और हार्डी-वीनबर्ग तैयार करें।
  • मानव स्वास्थ्य में immunity, AIDS, cancer और vaccination अवश्य तैयार करें।
  • सूक्ष्मजीवों के औद्योगिक एवं घरेलू उपयोग याद करें।
  • PCR, restriction enzyme, ligase, vector, bioreactor और recombinant DNA technology पर ध्यान दें।
  • Bt cotton, gene therapy और transgenic organisms विशेष रूप से तैयार करें।
  • जनसंख्या वृद्धि, पारितंत्र, 10% नियम और खाद्य श्रृंखला/जाल समझें।
  • जैव-विविधता ह्रास के कारण तथा in-situ/ex-situ conservation तैयार करें।
  • 1 अंक के लिए नाम, वैज्ञानिक नाम, परिभाषा, अनुपात और प्रमुख तथ्य दोहराएँ।
  • 2 अंक में परिभाषा + दो मुख्य बिंदु लिखें।
  • 3 अंक में अवधारणा + तीन क्रमबद्ध बिंदु लिखें।
  • 4 अंक में परिचय + प्रक्रिया/कारण + महत्व/निष्कर्ष लिखें।
  • जहाँ संभव हो, labelled diagram अवश्य बनाएँ।
जीव विज्ञान में अंक बढ़ाने की रणनीति: उत्तरों में वैज्ञानिक शब्दों की spelling सही रखें। प्रक्रियाओं को क्रमवार चरणों में लिखें। आनुवंशिकी में cross तथा ratio स्पष्ट लिखें। जैव प्रौद्योगिकी में enzyme + vector + host + process याद रखें और पारिस्थितिकी में परिभाषा + उदाहरण + प्रभाव के रूप में उत्तर दें।

इस अध्ययन सामग्री की मुख्य विशेषताएँ

  • ब्लूप्रिंट एवं संशोधित पाठ्यक्रम अनुरूप: 70 अंक की सैद्धांतिक परीक्षा के लिए 1, 2, 3 एवं 4/5 अंक वाले प्रश्नों का ब्लूप्रिंट के अनुसार सटीक विभाजन।
  • महत्वपूर्ण नामांकित रेखाचित्र (Labeled Diagrams): नर व मादा जनन तंत्र, बीजांड की संरचना, DNA की द्विकुंडली संरचना, tRNA की संरचना, एंटीबॉडी की संरचना और बायोगैस संयंत्र के स्वच्छ रेखाचित्र।
  • महत्वपूर्ण अंतर एवं तुलनात्मक तालिकाएँ: DNA vs RNA, समजात vs समवृत्ति अंग, स्व-परागण vs पर-परागण, शुक्राणुजनन vs अंडाणुजनन जैसे प्रमुख अंतरों का सरल प्रस्तुतीकरण।
  • जैव प्रौद्योगिकी एवं पारिस्थितिकी के अनुप्रयोग: PCR तकनीक, जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस, पुनर्योगज DNA तकनीक, खाद्य श्रृंखला और ऊर्जा पिरामिड की बिंदुवार व्याख्या।

परीक्षा-उपयोगी प्रश्न बैंक:

  • वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ / रिक्त स्थान / सही जोड़ी / एक शब्द उत्तर): 28 अंक के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक नाम एवं शब्दावली।
  • अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक): 30 शब्दों में संक्षिप्त परिभाषाएं, रोगजनक जीवों के नाम और कारण।
  • लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक): 75 शब्दों में प्रक्रियाओं की व्याख्या एवं तुलनात्मक उत्तर।
  • दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4/5 अंक): 120 शब्दों में नामांकित चित्र सहित विस्तृत उत्तर।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

अस्वीकरण (Disclaimer): इस पोस्ट में उपलब्ध कराई गई अंक योजना, पाठ्यक्रम और अध्ययन सामग्री माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश (MPBSE) के आधिकारिक दिशा-निर्देशों एवं सत्र 2026-27 के शैक्षणिक प्रारूप पर आधारित है। यह सामग्री केवल विद्यार्थियों के स्व-अध्ययन, अभ्यास और मार्गदर्शन के उद्देश्य से तैयार की गई है। परीक्षा से संबंधित किसी भी प्रकार के आधिकारिक संशोधन, प्रायोगिक परीक्षा दिशा-निर्देश अथवा अंतिम घोषणा के लिए माध्यमिक शिक्षा मण्डल, म.प्र. की आधिकारिक वेबसाइट (`mpbse.nic.in`) पर जारी सूचनाओं को ही अंतिम रूप से प्रामाणिक माना जाए। 

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