MP Board Class 12th Economics (Macroeconomics) Blueprint, Notes & Important Questions 2026-27 | कक्षा 12वीं समष्टि अर्थशास्त्र नोट्स एवं अंक योजना
कक्षा 12वीं समष्टि अर्थशास्त्र नोट्स
माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश (MPBSE) सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 12वीं समष्टि अर्थशास्त्र (Economics Part-2) की नवीन अंक योजना, AI-संचालित सरल नोट्स, अभ्यास प्रश्नोत्तर और महत्वपूर्ण सूत्रों की पूरी अध्ययन सामग्री यहाँ से देखें।
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- Class 12th Macroeconomics Notes in Hindi
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माध्यमिक शिक्षा मण्डल, म.प्र. (MPBSE) सत्र 2026-27: कक्षा 12वीं [विषय: समष्टि अर्थशास्त्र] अध्ययन सामग्री
माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बोर्ड परीक्षा का नवीन पाठ्यक्रम एवं अंक योजना (Blueprint) जारी कर दी गई है। बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने के लिए नवीनतम अंक विभाजन को समझना और उसी के अनुरूप सटीक अध्ययन सामग्री से तैयारी करना अत्यंत आवश्यक है।
विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुविधा के लिए यहाँ कक्षा 12वीं [विषय: समष्टि अर्थशास्त्र / Macroeconomics] की आधिकारिक अंक योजना पर आधारित विशेष AI-असिस्टेड सरल नोट्स, महत्वपूर्ण सूत्र और अभ्यास प्रश्नोत्तर प्रस्तुत किए जा रहे हैं।
कक्षा 12वीं अर्थशास्त्र
द्वितीय पुस्तक — समष्टि अर्थशास्त्र
सरल नोट्स, महत्वपूर्ण सूत्र एवं अभ्यास प्रश्नोत्तर | माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश | सत्र 2026-27
द्वितीय पुस्तक की इकाईवार अंक योजना
| क्रम | इकाई | आवंटित अंक |
|---|---|---|
| 1 | समष्टि अर्थशास्त्र — एक परिचय | 02 |
| 2 | राष्ट्रीय आय का लेखांकन | 08 |
| 3 | मुद्रा और बैंकिंग | 06 |
| 4 | आय और रोजगार का निर्धारण | 12 |
| 5 | सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था | 06 |
| 6 | खुली अर्थव्यवस्था | 06 |
| कुल | 40 | |
इकाई 1 — समष्टि अर्थशास्त्र : एक परिचय (आवंटित अंक — 02)
1. समष्टि अर्थशास्त्र का अर्थ
पूरी अर्थव्यवस्था या अर्थव्यवस्था के समग्र स्तर का अध्ययन समष्टि अर्थशास्त्र कहलाता है। इसमें किसी एक उपभोक्ता या फर्म के बजाय पूरी अर्थव्यवस्था से संबंधित चर का अध्ययन किया जाता है।
प्रमुख समष्टि आर्थिक चर
- राष्ट्रीय आय
- कुल रोजगार
- सामान्य कीमत स्तर
- कुल उत्पादन
- समग्र माँग
- समग्र पूर्ति
- मुद्रा की पूर्ति
- आर्थिक विकास
- भुगतान संतुलन
2. समष्टि अर्थशास्त्र का उद्भव
आधुनिक समष्टि अर्थशास्त्र का विकास विशेष रूप से महामंदी (Great Depression) के बाद हुआ। उस समय बड़े पैमाने पर बेरोजगारी, उत्पादन में गिरावट और आर्थिक संकट जैसी समस्याएँ सामने आईं। अर्थव्यवस्था के कुल उत्पादन और रोजगार में उतार-चढ़ाव को समझाने में समष्टि अर्थशास्त्र का महत्व बढ़ा।
3. समष्टि और व्यष्टि अर्थशास्त्र
| व्यष्टि अर्थशास्त्र | समष्टि अर्थशास्त्र |
|---|---|
| व्यक्तिगत आर्थिक इकाइयों का अध्ययन | पूरी अर्थव्यवस्था का अध्ययन |
| व्यक्तिगत माँग | समग्र माँग |
| व्यक्तिगत उत्पादन | कुल उत्पादन |
| व्यक्तिगत आय | राष्ट्रीय आय |
| किसी वस्तु की कीमत | सामान्य कीमत स्तर |
| व्यक्तिगत रोजगार | कुल रोजगार |
4. समष्टि अर्थशास्त्र के प्रमुख विषय
राष्ट्रीय आय
किसी देश की आर्थिक गतिविधियों में एक निश्चित अवधि में उत्पन्न आय का अध्ययन।
रोजगार
अर्थव्यवस्था में श्रम के उपयोग तथा बेरोजगारी का अध्ययन।
मुद्रा
मुद्रा की माँग, मुद्रा की पूर्ति एवं उसके कार्यों का अध्ययन।
सामान्य कीमत स्तर
समस्त अर्थव्यवस्था में वस्तुओं एवं सेवाओं के औसत कीमत स्तर का अध्ययन।
आर्थिक उतार-चढ़ाव
मंदी, तेजी, बेरोजगारी एवं आर्थिक वृद्धि आदि का अध्ययन।
1 अंक के प्रश्न — उत्तर सहित
रिक्त स्थान — उत्तर सहित
- समष्टि अर्थशास्त्र ______ अर्थव्यवस्था का अध्ययन करता है। — पूरी
- राष्ट्रीय आय ______ अर्थशास्त्र का प्रमुख विषय है। — समष्टि
- आधुनिक समष्टि अर्थशास्त्र का विकास ______ के बाद हुआ। — महामंदी
सत्य / असत्य — उत्तर सहित
- समष्टि अर्थशास्त्र व्यक्तिगत उपभोक्ता की माँग का ही अध्ययन करता है। — असत्य
- राष्ट्रीय आय समष्टि अर्थशास्त्र का विषय है। — सत्य
- बेरोजगारी का अध्ययन समष्टि अर्थशास्त्र में किया जाता है। — सत्य
2 अंक के प्रश्न — उत्तर सहित
3 अंक का प्रश्न — उत्तर सहित
इकाई 2 — राष्ट्रीय आय का लेखांकन (आवंटित अंक — 08)
1. अंतिम वस्तुएँ
वे वस्तुएँ जो अंतिम उपभोग या निवेश के लिए खरीदी जाती हैं और जिनका आगे पुनर्विक्रय या उत्पादन में उपयोग नहीं किया जाता, अंतिम वस्तुएँ कहलाती हैं।
2. मध्यवर्ती वस्तुएँ
वे वस्तुएँ जिनका प्रयोग आगे किसी अन्य वस्तु या सेवा के उत्पादन में किया जाता है, मध्यवर्ती वस्तुएँ कहलाती हैं।
उदाहरण: आटे से रोटी बनाई जाती है। यदि आटा बेकरी द्वारा रोटी बनाने के लिए खरीदा गया है तो वह मध्यवर्ती वस्तु है।
3. स्टॉक और फ्लो
स्टॉक: किसी निश्चित समय बिंदु पर मापी जाने वाली मात्रा स्टॉक कहलाती है। उदाहरण: 31 मार्च को बैंक में जमा धन।
फ्लो: किसी निश्चित समय अवधि के दौरान मापी जाने वाली मात्रा फ्लो कहलाती है। उदाहरण: एक वर्ष की आय।
4. सकल और शुद्ध निवेश
सकल निवेश: एक निश्चित अवधि में पूँजीगत वस्तुओं पर किया गया कुल निवेश।
शुद्ध निवेश: सकल निवेश में से पूँजी की घिसावट घटाने पर शुद्ध निवेश प्राप्त होता है।
5. मूल्यह्रास
पूँजीगत वस्तुओं के उपयोग, समय बीतने तथा तकनीकी अप्रचलन के कारण उनके मूल्य में होने वाली कमी को मूल्यह्रास कहते हैं। इसे स्थिर पूँजी उपभोग भी कहा जाता है।
6. घरेलू क्षेत्र और विदेशी क्षेत्र
घरेलू क्षेत्र: किसी देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर होने वाली आर्थिक गतिविधियाँ।
विदेशी क्षेत्र: अन्य देशों के साथ वस्तु, सेवा, आय तथा वित्तीय लेन-देन।
7. राष्ट्रीय आय
किसी देश के सामान्य निवासियों द्वारा एक निश्चित अवधि में अर्जित साधन आय का योग राष्ट्रीय आय कहलाता है। राष्ट्रीय आय की अवधारणा को सामान्यतः शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद साधन लागत पर (NNP at Factor Cost) के रूप में समझा जाता है।
8. सकल घरेलू उत्पाद — GDP
एक देश की भौगोलिक सीमा के भीतर एक निश्चित अवधि में उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) कहते हैं।
9. सकल राष्ट्रीय उत्पाद — GNP
देश के सामान्य निवासियों द्वारा एक निश्चित अवधि में उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के सकल मौद्रिक मूल्य को GNP कहते हैं।
10. विदेशों से शुद्ध साधन आय — NFIA
विदेश से प्राप्त साधन आय तथा विदेशों को दी गई साधन आय के अंतर को विदेशों से शुद्ध साधन आय कहते हैं।
11. NDP
12. NNP
13. बाजार कीमत और साधन लागत
बाजार कीमत: वस्तु या सेवा की वह कीमत जो बाजार में खरीदार द्वारा चुकाई जाती है।
साधन लागत: उत्पादन के साधनों को दी गई पारिश्रमिक राशि के आधार पर मापी गई लागत।
14. शुद्ध अप्रत्यक्ष कर
15. साधन लागत से बाजार कीमत
16. बाजार कीमत से साधन लागत
17. राष्ट्रीय आय की गणना की विधियाँ
- उत्पाद अथवा मूल्यवर्धित विधि
- आय विधि
- व्यय विधि
18. उत्पाद अथवा मूल्यवर्धित विधि
इसमें अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों द्वारा उत्पन्न शुद्ध मूल्यवर्धित का योग किया जाता है।
19. आय विधि
उत्पादन के साधनों को प्राप्त होने वाली आय का योग आय विधि कहलाता है।
- कर्मचारियों का पारिश्रमिक
- परिचालन अधिशेष
- मिश्रित आय
20. व्यय विधि
अर्थव्यवस्था में अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं पर किए गए अंतिम व्यय का योग व्यय विधि कहलाता है।
21. आय का वर्तुल प्रवाह
उत्पादक और परिवार क्षेत्र के बीच आय, उत्पादन एवं व्यय का निरंतर प्रवाह आय का वर्तुल प्रवाह कहलाता है। परिवार उत्पादन के साधन उपलब्ध कराते हैं और फर्मों से आय प्राप्त करते हैं। परिवार उसी आय का उपयोग वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद में करते हैं। इस प्रकार आय और व्यय का निरंतर चक्र चलता रहता है।
22. नाममात्र और वास्तविक GDP
नाममात्र GDP: वर्तमान वर्ष की कीमतों पर मापा गया GDP।
वास्तविक GDP: आधार वर्ष की कीमतों पर मापा गया GDP।
वास्तविक GDP उत्पादन की वास्तविक मात्रा में परिवर्तन का बेहतर संकेत देता है।
23. GDP और कल्याण
GDP आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण सूचक है, लेकिन यह सामाजिक कल्याण का पूर्ण मापक नहीं है।
- आय का वितरण
- गैर-बाजारी सेवाएँ
- पर्यावरणीय क्षति
- अवकाश
- जीवन की गुणवत्ता
- उत्पादन की गुणवत्ता
इसलिए GDP बढ़ने से आवश्यक नहीं कि प्रत्येक व्यक्ति का कल्याण उसी अनुपात में बढ़े।
महत्वपूर्ण सूत्र
1 अंक के प्रश्न — उत्तर सहित
- GDP का अर्थ है— सकल घरेलू उत्पाद
- GNP = ? — GDP + NFIA
- NDP = ? — GDP − मूल्यह्रास
- शुद्ध अप्रत्यक्ष कर = ? — अप्रत्यक्ष कर − सब्सिडी
- अंतिम वस्तुओं का उपयोग होता है— अंतिम उपभोग या निवेश में
- राष्ट्रीय आय का सामान्य माप है— NNP at Factor Cost
- Y = C + I किससे संबंधित है? — दो-क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था
- X − M दर्शाता है— शुद्ध निर्यात
रिक्त स्थान — उत्तर सहित
- GDP का पूरा नाम ________ है। — सकल घरेलू उत्पाद
- GNP = GDP + ________। — NFIA
- NDP = GDP − ________। — मूल्यह्रास
- शुद्ध अप्रत्यक्ष कर = अप्रत्यक्ष कर − ________। — सब्सिडी
- सकल निवेश में से ________ घटाने पर शुद्ध निवेश मिलता है। — मूल्यह्रास
- राष्ट्रीय आय का सामान्य माप ________ at Factor Cost है। — NNP
सत्य / असत्य — उत्तर सहित
- GDP में केवल अंतिम वस्तुओं का मूल्य शामिल किया जाता है। — सत्य
- GNP = GDP − NFIA होता है। — असत्य
- NDP प्राप्त करने के लिए GDP में से मूल्यह्रास घटाया जाता है। — सत्य
- GDP सामाजिक कल्याण का पूर्ण मापक है। — असत्य
- मध्यवर्ती वस्तुओं के मूल्य को सीधे जोड़ने से दोहरी गणना हो सकती है। — सत्य
- वास्तविक GDP चालू कीमतों पर मापा जाता है। — असत्य
2 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न — उत्तर सहित
3 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न — उत्तर सहित
4 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न — उत्तर सहित
आय विधि: उत्पादन के साधनों को प्राप्त मजदूरी, किराया, ब्याज, लाभ तथा मिश्रित आय जैसी साधन आय का योग किया जाता है।
व्यय विधि: अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं पर किए गए अंतिम उपभोग, निवेश, सरकारी व्यय तथा शुद्ध निर्यात को जोड़ा जाता है।
खुली अर्थव्यवस्था में—Y = C + I + G + (X − M)। तीनों विधियों का सही प्रयोग करने पर एक ही राष्ट्रीय आय प्राप्त होती है।
संख्यात्मक अभ्यास — उत्तर सहित
इकाई 3 — मुद्रा और बैंकिंग (आवंटित अंक — 06)
1. मुद्रा का अर्थ
मुद्रा वह वस्तु है जिसे सामान्यतः वस्तुओं एवं सेवाओं के विनिमय तथा भुगतान के साधन के रूप में स्वीकार किया जाता है।
2. मुद्रा के कार्य
प्राथमिक कार्य
(1) विनिमय का माध्यम: मुद्रा वस्तुओं एवं सेवाओं के विनिमय को सरल बनाती है।
(2) मूल्य का मापक: वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य को मुद्रा में व्यक्त किया जा सकता है।
गौण कार्य
(1) मूल्य संचय: मुद्रा को भविष्य के उपयोग के लिए रखा जा सकता है।
(2) स्थगित भुगतानों का मानक: भविष्य में किए जाने वाले भुगतानों को मुद्रा में व्यक्त किया जा सकता है।
(3) मूल्य हस्तांतरण: मुद्रा के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक क्रय शक्ति स्थानांतरित की जा सकती है।
3. मुद्रा की माँग
लोग मुद्रा को मुख्यतः लेन-देन तथा संपत्ति/सट्टा संबंधी उद्देश्यों के लिए अपने पास रखना चाहते हैं। सरल रूप में मुद्रा की माँग आय और ब्याज दर जैसे तत्वों से प्रभावित होती है।
4. मुद्रा की पूर्ति
अर्थव्यवस्था में एक निश्चित समय पर जनता के पास उपलब्ध मुद्रा की कुल मात्रा को मुद्रा की पूर्ति कहते हैं। सामान्यतः मुद्रा की पूर्ति में जनता के पास मुद्रा तथा मांग जमा जैसे घटक शामिल किए जाते हैं।
5. वाणिज्यिक बैंक
वे बैंक जो जनता से जमा स्वीकार करते हैं और ऋण प्रदान करते हैं, वाणिज्यिक बैंक कहलाते हैं।
- जमा स्वीकार करना
- ऋण देना
- साख का निर्माण
- भुगतान एवं प्रेषण संबंधी सेवाएँ
6. केंद्रीय बैंक
किसी देश की मौद्रिक एवं बैंकिंग व्यवस्था को नियंत्रित करने वाली सर्वोच्च बैंकिंग संस्था केंद्रीय बैंक कहलाती है। भारत में केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) है।
7. साख सृजन
वाणिज्यिक बैंक जनता से प्राप्त जमाओं के आधार पर ऋण देते हैं। बैंक द्वारा दिए गए ऋण पुनः बैंकिंग प्रणाली में जमा हो सकते हैं और इस प्रकार प्रारंभिक जमा से कई गुना जमा/साख का निर्माण हो सकता है। इसे साख सृजन कहते हैं।
8. एक काल्पनिक बैंक का चिट्ठा
| देयताएँ | परिसंपत्तियाँ |
|---|---|
| जमा | ऋण |
| बैंक की पूँजी | नकद/रिजर्व |
बैंक की जमा उसकी देयता होती है, जबकि दिए गए ऋण परिसंपत्ति होते हैं।
9. मुद्रा गुणक
यदि रिजर्व अनुपात 20% है—
अर्थात प्रारंभिक जमा के आधार पर कुल जमा कई गुना हो सकती है।
10. साख सृजन की सीमाएँ
- आरक्षित नकदी की आवश्यकता
- जनता द्वारा नकदी रखने की प्रवृत्ति
- ऋण की माँग
- बैंकिंग प्रणाली में विश्वास
- केंद्रीय बैंक के नियम
- आर्थिक परिस्थितियाँ
11. मुद्रा पूर्ति के नियंत्रण के नीतिगत उपकरण
मात्रात्मक उपकरण
- बैंक दर
- खुले बाजार की क्रियाएँ
- नकद आरक्षित अनुपात (CRR)
- वैधानिक तरलता अनुपात (SLR)
गुणात्मक उपकरण
- चयनात्मक साख नियंत्रण
- नैतिक दबाव आदि
1 अंक के प्रश्न — उत्तर सहित
- मुद्रा का प्रमुख कार्य है— विनिमय का माध्यम
- भारत का केंद्रीय बैंक है— RBI
- बैंक जमा स्वीकार करता है— हाँ
- मुद्रा गुणक का सरल सूत्र है— 1/रिजर्व अनुपात
- CRR किससे संबंधित है? — नकद आरक्षित अनुपात
- खुले बाजार की क्रियाएँ किसके द्वारा की जाती हैं? — केंद्रीय बैंक
- साख का निर्माण कौन करता है? — वाणिज्यिक बैंक
- बैंक के ऋण होते हैं— परिसंपत्ति
रिक्त स्थान — उत्तर सहित
- मुद्रा विनिमय का ________ है। — माध्यम
- RBI भारत का ________ बैंक है। — केंद्रीय
- बैंक जनता से ________ स्वीकार करते हैं। — जमा
- बैंक द्वारा दिए गए ऋण बैंक की ________ होते हैं। — परिसंपत्ति
- CRR का अर्थ ________ है। — नकद आरक्षित अनुपात
सत्य / असत्य — उत्तर सहित
- मुद्रा केवल मूल्य संचय का साधन है। — असत्य
- RBI भारत का केंद्रीय बैंक है। — सत्य
- बैंक ऋण देकर साख का निर्माण कर सकते हैं। — सत्य
- साख सृजन की कोई सीमा नहीं होती। — असत्य
- खुले बाजार की क्रियाएँ केंद्रीय बैंक का मौद्रिक उपकरण हैं। — सत्य
2 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न — उत्तर सहित
3 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न — उत्तर सहित
4 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न — उत्तर सहित
मुद्रा गुणक = 1/रिजर्व अनुपात
खुले बाजार की क्रियाएँ: केंद्रीय बैंक प्रतिभूतियाँ बेचकर तरलता घटा सकता है या खरीदकर तरलता बढ़ा सकता है।
CRR: रिजर्व अनुपात बढ़ाने से बैंकों की ऋण देने की क्षमता कम होती है।
SLR: SLR में वृद्धि से बैंकों के पास ऋण देने के लिए उपलब्ध धन कम हो सकता है।
संख्यात्मक प्रश्न — उत्तर सहित
m = 1/0.20 = 5
उत्तर: मुद्रा गुणक = 5
इकाई 4 — आय और रोजगार का निर्धारण (आवंटित अंक — 12)
1. समग्र माँग
किसी अर्थव्यवस्था में विभिन्न आय स्तरों पर वस्तुओं और सेवाओं पर की जाने वाली कुल नियोजित माँग को समग्र माँग कहते हैं।
2. समग्र माँग के प्रमुख अवयव
उपभोग व्यय: परिवारों द्वारा वस्तुओं एवं सेवाओं पर किया गया व्यय।
निवेश व्यय: फर्मों द्वारा पूँजीगत वस्तुओं पर किया गया व्यय।
सरकारी व्यय: सरकार द्वारा वस्तुओं एवं सेवाओं पर किया गया व्यय।
शुद्ध निर्यात: X − M अर्थात निर्यात में से आयात घटाना।
3. उपभोग फलन
आय और उपभोग के बीच संबंध को उपभोग फलन कहते हैं।
जहाँ C = उपभोग, C̄ = स्वायत्त उपभोग, c = सीमांत उपभोग प्रवृत्ति, Y = आय।
4. स्वायत्त उपभोग
वह उपभोग जो आय शून्य होने पर भी किया जाता है, स्वायत्त उपभोग कहलाता है। इसे C̄ द्वारा दर्शाया जाता है।
5. प्रेरित उपभोग
आय में परिवर्तन के कारण उपभोग में होने वाला परिवर्तन प्रेरित उपभोग कहलाता है।
6. सीमांत उपभोग प्रवृत्ति — MPC
इसका मान सामान्यतः 0 और 1 के बीच माना जाता है।
7. सीमांत बचत प्रवृत्ति — MPS
8. औसत उपभोग प्रवृत्ति — APC
9. औसत बचत प्रवृत्ति — APS
10. उपभोग और आय का संबंध
सामान्यतः आय बढ़ने पर उपभोग भी बढ़ता है, लेकिन उपभोग में वृद्धि आय में वृद्धि से कम हो सकती है। इसी कारण MPC < 1।
11. बचत
आय का वह भाग जो उपभोग पर खर्च नहीं किया जाता, बचत कहलाता है।
12. दो-क्षेत्रीय मॉडल
दो-क्षेत्रीय मॉडल में केवल दो क्षेत्र होते हैं—
- परिवार क्षेत्र
- फर्म क्षेत्र
इस मॉडल में सरकार और विदेशी क्षेत्र को शामिल नहीं किया जाता।
13. संतुलन आय
वह आय स्तर जहाँ नियोजित समग्र माँग उत्पादन या आय के बराबर होती है, संतुलन आय कहलाती है।
दो-क्षेत्रीय मॉडल में—
14. संतुलन की बचत-निवेश शर्त
अर्थात् नियोजित बचत और नियोजित निवेश बराबर होते हैं।
15. समष्टि अर्थशास्त्रीय संतुलन
स्थिर कीमत स्तर की स्थिति में जब समग्र माँग और उत्पादन बराबर होते हैं, तब समष्टि अर्थव्यवस्था संतुलन में होती है।
16. समग्र माँग में परिवर्तन का आय एवं उत्पादन पर प्रभाव
यदि समग्र माँग बढ़ती है तो फर्म अधिक उत्पादन करती हैं। उत्पादन बढ़ने से आय और रोजगार बढ़ सकते हैं। यदि समग्र माँग घटती है तो उत्पादन, आय एवं रोजगार में कमी आ सकती है।
17. निवेश गुणक
निवेश में प्रारंभिक परिवर्तन के कारण संतुलन आय में होने वाले कुल परिवर्तन का अनुपात गुणक कहलाता है।
18. गुणक की क्रियाविधि
मान लीजिए निवेश में ₹100 की वृद्धि की जाती है। प्रारंभिक ₹100 किसी व्यक्ति की आय बनेगा। वह उसका एक भाग खर्च करेगा। वह खर्च किसी दूसरे व्यक्ति की आय बनेगा। दूसरा व्यक्ति भी उसका कुछ भाग खर्च करेगा। यह प्रक्रिया चलती रहती है। इस प्रकार प्रारंभिक निवेश से आय में कई गुना वृद्धि हो सकती है।
19. गुणक का मान
यदि MPC = 0.8 हो तो—
अर्थात् निवेश में ₹100 की वृद्धि से संतुलन आय में ₹500 की वृद्धि हो सकती है।
20. कुछ अन्य महत्वपूर्ण संकल्पनाएँ
प्रभावी माँग: वह समग्र माँग जो अर्थव्यवस्था में वास्तविक उत्पादन और रोजगार के स्तर को निर्धारित करती है।
अनैच्छिक बेरोजगारी: जब व्यक्ति प्रचलित मजदूरी पर काम करने के लिए तैयार हो लेकिन उसे रोजगार न मिले।
पूर्ण रोजगार: जब काम करने के इच्छुक और प्रचलित परिस्थितियों में काम करने योग्य व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त हो।
1 अंक के प्रश्न — उत्तर सहित
- समग्र माँग का दो-क्षेत्रीय सूत्र क्या है? — AD = C + I
- MPC का सूत्र क्या है? — MPC = ΔC/ΔY
- MPS का सूत्र क्या है? — MPS = ΔS/ΔY
- MPC + MPS = ? — 1
- बचत का सूत्र है— S = Y − C
- APC का सूत्र है— C/Y
- APS का सूत्र है— S/Y
- संतुलन आय की शर्त है— Y = AD
- संतुलन पर— S = I
- गुणक का सूत्र है— K = 1/MPS
रिक्त स्थान — उत्तर सहित
- आय का वह भाग जो उपभोग नहीं किया जाता ________ कहलाता है। — बचत
- MPC और MPS का योग ________ होता है। — 1
- दो-क्षेत्रीय मॉडल में AD = ________। — C + I
- संतुलन पर समग्र माँग और आय ________ होती है। — बराबर
- निवेश गुणक का सरल सूत्र ________ है। — 1/MPS
- स्वायत्त उपभोग आय के ________ भी हो सकता है। — शून्य
सत्य / असत्य — उत्तर सहित
- बचत = आय − उपभोग। — सत्य
- MPC + MPS = 2। — असत्य
- संतुलन पर नियोजित AD = उत्पादन। — सत्य
- MPC का मान सामान्यतः 0 और 1 के बीच हो सकता है। — सत्य
- निवेश गुणक प्रारंभिक निवेश से कम आय परिवर्तन उत्पन्न करता है। — असत्य
- समग्र माँग घटने से उत्पादन और रोजगार घट सकते हैं। — सत्य
2 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न — उत्तर सहित
3 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न — उत्तर सहित
4 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न — उत्तर सहित
संख्यात्मक प्रश्न — उत्तर सहित
MPS = 1 − 0.8 = 0.2
ΔY = K × ΔI = 4 × 200 = ₹800 करोड़
ΔC = 950 − 800 = 150
MPC = ΔC/ΔY = 150/200 = 0.75
इकाई 5 — सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था (आवंटित अंक — 06)
1. सरकारी बजट
सरकार की अनुमानित प्राप्तियों और प्रस्तावित व्यय का एक वित्तीय वर्ष के लिए तैयार विवरण सरकारी बजट कहलाता है।
2. सरकारी बजट के उद्देश्य
- आर्थिक स्थिरता
- आर्थिक विकास
- आय एवं संपत्ति की असमानता कम करना
- संसाधनों का उचित आवंटन
- रोजगार को बढ़ावा देना
- मूल्य स्थिरता
3. सरकारी प्राप्तियाँ
सरकारी प्राप्तियों को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है—
- राजस्व प्राप्तियाँ
- पूँजीगत प्राप्तियाँ
4. राजस्व प्राप्तियाँ
वे प्राप्तियाँ जो सरकार की देयता नहीं बढ़ातीं और जिनसे सरकारी परिसंपत्तियों में कमी नहीं आती, राजस्व प्राप्तियाँ कहलाती हैं।
उदाहरण: कर प्राप्तियाँ और गैर-कर प्राप्तियाँ।
5. कर प्राप्तियाँ
सरकार द्वारा अनिवार्य रूप से प्राप्त की जाने वाली रकम कर कहलाती है।
प्रत्यक्ष कर: जिसका भार उसी व्यक्ति पर रहता है जिस पर कर लगाया जाता है। उदाहरण—आयकर।
अप्रत्यक्ष कर: जिसका भार दूसरे व्यक्ति पर स्थानांतरित किया जा सकता है।
6. गैर-कर राजस्व
सरकार की वे राजस्व प्राप्तियाँ जो करों से प्राप्त नहीं होतीं, गैर-कर राजस्व कहलाती हैं।
- शुल्क
- जुर्माना
- ब्याज प्राप्ति
- लाभांश
7. पूँजीगत प्राप्तियाँ
वे प्राप्तियाँ जो सरकार की देयता बढ़ाती हैं या सरकारी परिसंपत्तियों में कमी करती हैं, पूँजीगत प्राप्तियाँ कहलाती हैं।
- सरकारी ऋण
- ऋणों की वसूली
- विनिवेश
8. सरकारी व्यय
- राजस्व व्यय
- पूँजीगत व्यय
9. राजस्व व्यय
ऐसा व्यय जिससे सरकार की स्थायी परिसंपत्तियों में वृद्धि नहीं होती, राजस्व व्यय कहलाता है।
उदाहरण: वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान, प्रशासनिक व्यय।
10. पूँजीगत व्यय
ऐसा व्यय जिससे परिसंपत्तियों का निर्माण होता है या देयताओं में कमी आती है, पूँजीगत व्यय कहलाता है।
उदाहरण: सड़क निर्माण, स्कूल/अस्पताल भवन, पूँजीगत परियोजनाएँ, ऋण देना।
11. बजट के प्रकार
संतुलित बजट: सरकारी प्राप्तियाँ = सरकारी व्यय।
अधिशेष बजट: प्राप्तियाँ > व्यय।
घाटा बजट: व्यय > प्राप्तियाँ।
12. राजस्व घाटा
13. राजकोषीय घाटा
सरकार की कुल व्यय और कुल प्राप्तियों (उधार को छोड़कर) के बीच अंतर को राजकोषीय घाटा कहते हैं।
14. प्राथमिक घाटा
15. बजट घाटे के प्रभाव
सकारात्मक प्रभाव
- आर्थिक मंदी में माँग बढ़ाने में सहायता
- रोजगार वृद्धि
- बुनियादी ढाँचे में निवेश
- आर्थिक विकास को प्रोत्साहन
संभावित नकारात्मक प्रभाव
- सरकारी ऋण में वृद्धि
- ब्याज भार में वृद्धि
- मुद्रास्फीतिकारी दबाव
- निजी निवेश पर दबाव
1 अंक के प्रश्न — उत्तर सहित
- सरकारी बजट किस अवधि के लिए बनाया जाता है? — एक वित्तीय वर्ष
- राजस्व घाटा = ? — राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँ
- प्राथमिक घाटा = ? — राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान
- आयकर किस प्रकार का कर है? — प्रत्यक्ष कर
- सरकारी ऋण किस प्रकार की प्राप्ति है? — पूँजीगत प्राप्ति
- सड़क निर्माण किस प्रकार का व्यय है? — पूँजीगत व्यय
- वेतन भुगतान किस प्रकार का व्यय है? — राजस्व व्यय
रिक्त स्थान — उत्तर सहित
- जब प्राप्तियाँ और व्यय बराबर हों तो बजट ________ होता है। — संतुलित
- व्यय प्राप्तियों से अधिक होने पर ________ बजट होता है। — घाटे का
- राजकोषीय घाटे में से ब्याज भुगतान घटाने पर ________ घाटा मिलता है। — प्राथमिक
- आयकर ________ कर है। — प्रत्यक्ष
- सरकारी ऋण ________ प्राप्ति है। — पूँजीगत
सत्य / असत्य — उत्तर सहित
- सरकारी बजट केवल व्यय का विवरण है। — असत्य
- राजस्व प्राप्तियाँ सरकार की देयता नहीं बढ़ातीं। — सत्य
- सरकारी ऋण पूँजीगत प्राप्ति है। — सत्य
- प्राथमिक घाटा हमेशा राजकोषीय घाटे से बड़ा होता है। — असत्य
- पूँजीगत व्यय से परिसंपत्तियों में वृद्धि हो सकती है। — सत्य
2 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न — उत्तर सहित
3 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न — उत्तर सहित
4 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न — उत्तर सहित
प्राप्तियाँ दो प्रकार की होती हैं—राजस्व प्राप्तियाँ तथा पूँजीगत प्राप्तियाँ। राजस्व प्राप्तियों में कर और गैर-कर प्राप्तियाँ आती हैं, जबकि पूँजीगत प्राप्तियों में उधार, ऋणों की वसूली और विनिवेश शामिल होते हैं।
व्यय भी दो प्रकार का होता है—राजस्व व्यय तथा पूँजीगत व्यय। वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान राजस्व व्यय के उदाहरण हैं, जबकि सड़क, भवन एवं आधारभूत संरचना पर व्यय पूँजीगत व्यय के उदाहरण हैं।
राजकोषीय घाटा: कुल सरकारी व्यय − उधार को छोड़कर कुल प्राप्तियाँ।
प्राथमिक घाटा: राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान।
इनसे सरकार की वर्तमान वित्तीय स्थिति, उधारी की आवश्यकता तथा ब्याज भार का पता लगाने में सहायता मिलती है।
संख्यात्मक प्रश्न — उत्तर सहित
इकाई 6 — खुली समष्टि अर्थव्यवस्था (आवंटित अंक — 06)
1. खुली अर्थव्यवस्था
वह अर्थव्यवस्था जो अन्य देशों के साथ वस्तुओं, सेवाओं, आय एवं वित्तीय परिसंपत्तियों का लेन-देन करती है, खुली अर्थव्यवस्था कहलाती है।
2. अदायगी/भुगतान संतुलन
किसी देश और शेष विश्व के बीच एक निश्चित अवधि में किए गए सभी आर्थिक लेन-देन का व्यवस्थित विवरण भुगतान संतुलन (Balance of Payments) कहलाता है।
3. भुगतान संतुलन के प्रमुख खाते
- चालू खाता
- पूँजी खाता
4. चालू खाता
चालू खाते में वस्तुओं एवं सेवाओं का व्यापार, आय तथा हस्तांतरण से संबंधित लेन-देन शामिल होते हैं।
- वस्तुओं का निर्यात
- वस्तुओं का आयात
- सेवाओं का निर्यात/आयात
- साधन आय
- हस्तांतरण
5. पूँजी खाता
पूँजी खाते में वित्तीय परिसंपत्तियों एवं देयताओं से संबंधित लेन-देन दर्ज किए जाते हैं।
- विदेशी निवेश
- ऋण
- बैंकिंग पूँजी
- अन्य पूँजी प्रवाह
6. भुगतान संतुलन में घाटा
जब भुगतान संतुलन के संबंधित समग्र लेन-देन में विदेशी मुद्रा का बहिर्वाह अंतर्वाह से अधिक हो जाता है, तो घाटे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
7. विदेशी विनिमय
एक देश की मुद्रा को दूसरे देश की मुद्रा में बदलने की व्यवस्था विदेशी विनिमय कहलाती है।
8. विनिमय दर
एक मुद्रा की दूसरी मुद्रा में व्यक्त कीमत को विनिमय दर कहते हैं।
उदाहरण: 1 डॉलर = ₹X
9. लचीली/तिरती विनिमय दर
जिस विनिमय दर का निर्धारण विदेशी विनिमय बाजार में माँग और पूर्ति की शक्तियों से होता है, उसे तिरती या लचीली विनिमय दर कहते हैं।
10. स्थिर विनिमय दर
जब सरकार या केंद्रीय बैंक किसी निश्चित स्तर पर विनिमय दर बनाए रखने का प्रयास करता है, तो इसे स्थिर विनिमय दर कहा जाता है।
11. तिरती विनिमय दर के गुण
- बाजार शक्तियों के अनुसार समायोजन
- विदेशी मुद्रा भंडार पर अपेक्षाकृत कम दबाव
- बाह्य असंतुलन को समायोजित करने में सहायता
12. तिरती विनिमय दर के दोष
- विनिमय दर में उतार-चढ़ाव
- व्यापार में अनिश्चितता
- सट्टेबाजी की संभावना
- आयातित मुद्रास्फीति का जोखिम
13. स्थिर विनिमय दर के गुण
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थिरता
- भविष्य के भुगतान की बेहतर योजना
- विनिमय दर की अनिश्चितता कम
14. स्थिर विनिमय दर के दोष
- विदेशी मुद्रा भंडार की आवश्यकता
- केंद्रीय बैंक पर दबाव
- स्वतंत्र मौद्रिक नीति में बाधा
- विनिमय दर को कृत्रिम रूप से बनाए रखने की समस्या
15. प्रबंधित तिरती विनिमय दर
ऐसी विनिमय दर व्यवस्था जिसमें विनिमय दर मुख्यतः बाजार शक्तियों से निर्धारित होती है, लेकिन अत्यधिक उतार-चढ़ाव या असंतुलन की स्थिति में केंद्रीय बैंक हस्तक्षेप करता है, प्रबंधित तिरती विनिमय दर कहलाती है।
16. विनिमय दर में परिवर्तन
मुद्रा का मूल्यह्रास: तिरती व्यवस्था में घरेलू मुद्रा के मूल्य में बाजार के कारण कमी।
मुद्रा का मूल्यवृद्धि: घरेलू मुद्रा के मूल्य में बाजार के कारण वृद्धि।
अवमूल्यन: स्थिर विनिमय दर व्यवस्था में सरकार/केंद्रीय बैंक द्वारा घरेलू मुद्रा का आधिकारिक मूल्य घटाना।
पुनर्मूल्यन: स्थिर विनिमय दर व्यवस्था में घरेलू मुद्रा का आधिकारिक मूल्य बढ़ाना।
1 अंक के प्रश्न — उत्तर सहित
- भुगतान संतुलन किसका विवरण है? — देश और शेष विश्व के बीच आर्थिक लेन-देन का
- भुगतान संतुलन का एक प्रमुख खाता है— चालू खाता
- दूसरा प्रमुख खाता है— पूँजी खाता
- एक मुद्रा की दूसरी मुद्रा में कीमत कहलाती है— विनिमय दर
- बाजार माँग एवं पूर्ति से निर्धारित विनिमय दर कहलाती है— तिरती विनिमय दर
- सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से मुद्रा का मूल्य घटाना कहलाता है— अवमूल्यन
- बाजार शक्तियों से घरेलू मुद्रा के मूल्य में कमी कहलाती है— मूल्यह्रास
रिक्त स्थान — उत्तर सहित
- भुगतान संतुलन को संक्षेप में ________ कहा जाता है। — BOP
- चालू खाते में वस्तुओं और ________ का व्यापार शामिल होता है। — सेवाओं
- एक मुद्रा की दूसरी मुद्रा में कीमत ________ कहलाती है। — विनिमय दर
- बाजार शक्तियों से निर्धारित विनिमय दर को ________ विनिमय दर कहते हैं। — तिरती
- स्थिर विनिमय दर में मुद्रा का आधिकारिक मूल्य घटाना ________ कहलाता है। — अवमूल्यन
सत्य / असत्य — उत्तर सहित
- भुगतान संतुलन में विदेशी लेन-देन दर्ज होते हैं। — सत्य
- चालू खाते में केवल पूँजीगत लेन-देन होते हैं। — असत्य
- तिरती विनिमय दर बाजार की शक्तियों से प्रभावित होती है। — सत्य
- स्थिर विनिमय दर में केंद्रीय बैंक की कोई भूमिका नहीं होती। — असत्य
- प्रबंधित तिरती व्यवस्था में केंद्रीय बैंक हस्तक्षेप कर सकता है। — सत्य
2 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न — उत्तर सहित
3 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न — उत्तर सहित
4 अंक के महत्वपूर्ण प्रश्न — उत्तर सहित
स्थिर विनिमय दर: सरकार या केंद्रीय बैंक विनिमय दर को एक निश्चित स्तर पर बनाए रखने का प्रयास करता है।
प्रबंधित तिरती विनिमय दर: विनिमय दर सामान्यतः बाजार शक्तियों से निर्धारित होती है, लेकिन केंद्रीय बैंक अत्यधिक उतार-चढ़ाव की स्थिति में हस्तक्षेप करता है।
इस प्रकार प्रबंधित तिरती व्यवस्था तिरती और नियंत्रित व्यवस्था के बीच एक मिश्रित रूप है।
चालू खाते में वस्तुओं के निर्यात-आयात, सेवाओं के लेन-देन, साधन आय तथा हस्तांतरण शामिल होते हैं।
पूँजी खाते में विदेशी निवेश, ऋण, बैंकिंग पूँजी तथा अन्य वित्तीय लेन-देन शामिल होते हैं। चालू खाते से देश की वस्तु एवं सेवा संबंधी बाह्य स्थिति तथा पूँजी खाते से वित्तीय पूँजी के प्रवाह का पता चलता है।
द्वितीय पुस्तक — महत्वपूर्ण तुलनात्मक प्रश्न
1. GDP और GNP
| GDP | GNP |
|---|---|
| घरेलू सीमा में उत्पादन | देश के सामान्य निवासियों का उत्पादन |
| घरेलू क्षेत्र पर आधारित | निवासियों पर आधारित |
| GDP | GDP + NFIA |
2. GDP और NDP
| GDP | NDP |
|---|---|
| सकल घरेलू उत्पाद | शुद्ध घरेलू उत्पाद |
| मूल्यह्रास शामिल | मूल्यह्रास घटाया गया |
| GDP | GDP − मूल्यह्रास |
3. नाममात्र और वास्तविक GDP
| नाममात्र GDP | वास्तविक GDP |
|---|---|
| वर्तमान कीमतों पर | आधार वर्ष की कीमतों पर |
| कीमत प्रभाव शामिल | कीमत प्रभाव हटाया जा सकता है |
| वास्तविक उत्पादन तुलना में कम उपयोगी | उत्पादन परिवर्तन के लिए अधिक उपयोगी |
4. राजस्व और पूँजीगत प्राप्तियाँ
| राजस्व प्राप्तियाँ | पूँजीगत प्राप्तियाँ |
|---|---|
| सामान्यतः देयता नहीं बढ़ातीं | देयता बढ़ा सकती हैं |
| परिसंपत्तियों में कमी नहीं | परिसंपत्ति कम कर सकती हैं |
| कर, शुल्क | उधार, विनिवेश |
5. राजस्व और पूँजीगत व्यय
| राजस्व व्यय | पूँजीगत व्यय |
|---|---|
| स्थायी परिसंपत्ति निर्माण नहीं | परिसंपत्ति निर्माण संभव |
| वेतन, पेंशन | सड़क, भवन |
| सामान्य प्रशासनिक/चालू खर्च | विकासात्मक पूँजी निवेश |
6. मूल्यह्रास और अवमूल्यन
| मूल्यह्रास | अवमूल्यन |
|---|---|
| पूँजीगत वस्तुओं के मूल्य में कमी | मुद्रा के आधिकारिक मूल्य में कमी |
| पूँजीगत संपत्ति से संबंधित | विदेशी विनिमय से संबंधित |
| उपयोग/समय/अप्रचलन का कारण | सरकार/केंद्रीय बैंक का निर्णय |
7. तिरती और स्थिर विनिमय दर
| तिरती | स्थिर |
|---|---|
| माँग-पूर्ति से निर्धारित | सरकार/केंद्रीय बैंक द्वारा समर्थित |
| स्वतः समायोजन | आधिकारिक हस्तक्षेप |
| उतार-चढ़ाव अधिक | अपेक्षाकृत स्थिर |
| विदेशी मुद्रा भंडार पर कम नियमित दबाव | पर्याप्त भंडार आवश्यक हो सकता है |
द्वितीय पुस्तक — सभी महत्वपूर्ण सूत्र
| संकल्पना | सूत्र |
|---|---|
| GNP | GDP + NFIA |
| NDP | GDP − मूल्यह्रास |
| NNP | GNP − मूल्यह्रास |
| NFIA | विदेश से प्राप्त साधन आय − विदेश को दी गई साधन आय |
| शुद्ध अप्रत्यक्ष कर | अप्रत्यक्ष कर − सब्सिडी |
| बाजार कीमत | साधन लागत + शुद्ध अप्रत्यक्ष कर |
| शुद्ध निवेश | सकल निवेश − मूल्यह्रास |
| समग्र माँग | C + I |
| खुली अर्थव्यवस्था में AD | C + I + G + (X−M) |
| उपभोग फलन | C = C̄ + cY |
| बचत | S = Y − C |
| MPC | ΔC/ΔY |
| MPS | ΔS/ΔY |
| APC | C/Y |
| APS | S/Y |
| MPC + MPS | 1 |
| APC + APS | 1 |
| संतुलन आय | Y = AD |
| दो-क्षेत्रीय संतुलन | Y = C + I |
| संतुलन की बचत-निवेश शर्त | S = I |
| निवेश गुणक | K = ΔY/ΔI |
| गुणक | K = 1/(1−MPC) |
| गुणक | K = 1/MPS |
| राजस्व घाटा | राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँ |
| राजकोषीय घाटा | कुल व्यय − उधार को छोड़कर कुल प्राप्तियाँ |
| प्राथमिक घाटा | राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान |
द्वितीय पुस्तक — महत्वपूर्ण संख्यात्मक प्रश्नों के पूर्ण उत्तर
ΔY = K × ΔI = 5 × 500 = ₹2,500 करोड़
ΔC = 2,000 − 1,600 = 400
MPC = 400/500 = 0.8
परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण संभावित प्रश्न — उत्तर सहित संकेत
इकाई 1
- समष्टि अर्थशास्त्र क्या है? — पूरी अर्थव्यवस्था के समग्र आर्थिक चरों का अध्ययन।
- समष्टि अर्थशास्त्र का महत्व बताइए। — राष्ट्रीय आय, रोजगार, कीमत, विकास, मंदी आदि के अध्ययन में सहायक।
- समष्टि एवं व्यष्टि अर्थशास्त्र में अंतर बताइए। — व्यष्टि व्यक्तिगत इकाइयों और समष्टि पूरी अर्थव्यवस्था का अध्ययन करता है।
इकाई 2
- अंतिम एवं मध्यवर्ती वस्तुओं में अंतर। — अंतिम उपभोग/निवेश के लिए; मध्यवर्ती आगे उत्पादन के लिए।
- स्टॉक एवं फ्लो में अंतर। — स्टॉक समय बिंदु पर; फ्लो समय अवधि में।
- मूल्यह्रास क्या है? — पूँजीगत वस्तुओं के मूल्य में कमी।
- GDP क्या है? — घरेलू सीमा में उत्पादित अंतिम वस्तु-सेवा का सकल मूल्य।
- GNP क्या है? — GDP + NFIA।
- GDP एवं GNP में अंतर। — घरेलू उत्पादन बनाम निवासियों का उत्पादन।
- NDP क्या है? — GDP − मूल्यह्रास।
- NNP क्या है? — GNP − मूल्यह्रास।
- NFIA क्या है? — विदेश से प्राप्त साधन आय − विदेश को दी गई साधन आय।
- बाजार कीमत एवं साधन लागत। — शुद्ध अप्रत्यक्ष कर का अंतर।
- शुद्ध अप्रत्यक्ष कर क्या है? — अप्रत्यक्ष कर − सब्सिडी।
- राष्ट्रीय आय की तीन विधियाँ। — उत्पाद, आय और व्यय विधि।
- मूल्यवर्धित विधि। — उत्पादन मूल्य − मध्यवर्ती उपभोग का योग।
- आय विधि। — उत्पादन साधनों की आय का योग।
- व्यय विधि। — अंतिम व्यय का योग।
- आय का वर्तुल प्रवाह। — परिवार और फर्मों के बीच आय-व्यय का निरंतर चक्र।
- नाममात्र एवं वास्तविक GDP। — वर्तमान बनाम आधार वर्ष कीमतें।
- GDP को कल्याण का पूर्ण मापक क्यों नहीं? — आय-वितरण, पर्यावरण, अवकाश, गैर-बाजारी सेवाएँ आदि शामिल नहीं होते।
इकाई 3
- मुद्रा क्या है? — सामान्यतः स्वीकार्य विनिमय एवं भुगतान माध्यम।
- मुद्रा के कार्य। — विनिमय माध्यम, मूल्य मापक, मूल्य संचय, स्थगित भुगतान का मानक।
- मुद्रा की माँग। — मुद्रा रखने की इच्छा; आय एवं ब्याज से प्रभावित।
- मुद्रा की पूर्ति। — अर्थव्यवस्था में उपलब्ध मुद्रा की कुल मात्रा।
- वाणिज्यिक बैंक। — जमा स्वीकार करने और ऋण देने वाले बैंक।
- केंद्रीय बैंक। — देश की सर्वोच्च बैंकिंग/मौद्रिक संस्था; भारत में RBI।
- साख सृजन। — प्रारंभिक जमा से कई गुना जमा/ऋण निर्माण।
- मुद्रा गुणक। — 1/रिजर्व अनुपात।
- साख सृजन की सीमाएँ। — रिजर्व, नकदी पसंद, ऋण माँग, बैंकिंग विश्वास, केंद्रीय बैंक नियम।
- मौद्रिक नियंत्रण के उपकरण। — बैंक दर, खुले बाजार, CRR, SLR, चयनात्मक नियंत्रण।
इकाई 4
- समग्र माँग क्या है? — कुल नियोजित माँग।
- समग्र माँग के अवयव। — C, I, G तथा X−M।
- उपभोग फलन। — C = C̄ + cY।
- स्वायत्त और प्रेरित उपभोग। — आय से स्वतंत्र बनाम आय से प्रभावित।
- MPC और MPS। — ΔC/ΔY तथा ΔS/ΔY।
- MPC + MPS = 1 सिद्ध कीजिए। — ΔY = ΔC + ΔS से।
- संतुलन आय। — Y = AD।
- Y = AD तथा S = I शर्त। — संतुलन आय एवं बचत-निवेश दृष्टिकोण।
- निवेश गुणक। — K = 1/(1−MPC) = 1/MPS।
- गुणक क्रियाविधि। — प्रारंभिक निवेश से आय-व्यय की क्रमिक वृद्धि।
- समग्र माँग में परिवर्तन का प्रभाव। — AD बढ़ने पर उत्पादन, आय और रोजगार बढ़ सकते हैं।
- पूर्ण रोजगार और अनैच्छिक बेरोजगारी। — कार्य करने योग्य/इच्छुक लोगों का रोजगार तथा रोजगार चाहने पर भी रोजगार न मिलना।
इकाई 5
- सरकारी बजट क्या है? — वित्तीय वर्ष की अनुमानित प्राप्तियों और प्रस्तावित व्यय का विवरण।
- सरकारी बजट के उद्देश्य। — संसाधन आवंटन, असमानता, स्थिरता, विकास, रोजगार, कीमत स्थिरता।
- राजस्व प्राप्तियाँ एवं पूँजीगत प्राप्तियाँ। — देयता न बढ़ाने वाली बनाम देयता बढ़ाने/परिसंपत्ति घटाने वाली।
- राजस्व व्यय एवं पूँजीगत व्यय। — चालू खर्च बनाम परिसंपत्ति निर्माण।
- संतुलित, अधिशेष एवं घाटा बजट। — प्राप्ति = व्यय; प्राप्ति > व्यय; व्यय > प्राप्ति।
- राजस्व घाटा। — राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँ।
- राजकोषीय घाटा। — कुल व्यय − उधार को छोड़कर कुल प्राप्तियाँ।
- प्राथमिक घाटा। — राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान।
- सरकारी घाटे के प्रभाव। — माँग/रोजगार/विकास में सहायता, पर ऋण एवं मुद्रास्फीति का दबाव संभव।
इकाई 6
- खुली अर्थव्यवस्था। — अन्य देशों से आर्थिक लेन-देन करने वाली अर्थव्यवस्था।
- भुगतान संतुलन। — देश और शेष विश्व के सभी आर्थिक लेन-देन का लेखा।
- चालू खाता। — वस्तु, सेवा, आय और हस्तांतरण लेन-देन।
- पूँजी खाता। — निवेश, ऋण और वित्तीय लेन-देन।
- विनिमय दर। — एक मुद्रा की दूसरी मुद्रा में कीमत।
- तिरती विनिमय दर। — माँग और पूर्ति से निर्धारित।
- स्थिर विनिमय दर। — सरकार/केंद्रीय बैंक द्वारा समर्थित निश्चित स्तर।
- प्रबंधित तिरती विनिमय दर। — बाजार व्यवस्था के साथ केंद्रीय बैंक का हस्तक्षेप।
- तिरती और स्थिर विनिमय दर में अंतर। — बाजार निर्धारण बनाम आधिकारिक नियंत्रण।
- मूल्यह्रास, मूल्यवृद्धि, अवमूल्यन और पुनर्मूल्यन। — बाजार आधारित या आधिकारिक मुद्रा मूल्य परिवर्तन।
द्वितीय पुस्तक — त्वरित पुनरावृत्ति
समष्टि = पूरी अर्थव्यवस्था
राष्ट्रीय आय + रोजगार + सामान्य कीमत स्तर + कुल उत्पादन
GDP + NFIA = GNP
GDP − मूल्यह्रास = NDP
GNP − मूल्यह्रास = NNP
NNP at Factor Cost = राष्ट्रीय आय
मुद्रा = विनिमय माध्यम + मूल्य मापक + मूल्य संचय
बैंक → जमा → ऋण → साख सृजन
m = 1/रिजर्व अनुपात
AD = C + I
C = C̄ + cY
S = Y − C
MPC = ΔC/ΔY
MPS = ΔS/ΔY
MPC + MPS = 1
Y = AD
S = I
K = 1/(1−MPC)
K = 1/MPS
बजट = प्राप्तियाँ + व्यय
राजस्व घाटा = RE − RR
राजकोषीय घाटा = कुल व्यय − उधार रहित प्राप्तियाँ
प्राथमिक घाटा = FD − ब्याज
BOP = चालू खाता + पूँजी खाता
विनिमय दर = एक मुद्रा की दूसरी मुद्रा में कीमत
तिरती = माँग + पूर्ति
स्थिर = सरकारी/केंद्रीय बैंक समर्थन
प्रबंधित तिरती = बाजार + केंद्रीय बैंक हस्तक्षेप
विशेष रूप से याद रखने योग्य 15 सूत्र
- GNP = GDP + NFIA
- NDP = GDP − मूल्यह्रास
- NNP = GNP − मूल्यह्रास
- शुद्ध अप्रत्यक्ष कर = अप्रत्यक्ष कर − सब्सिडी
- शुद्ध निवेश = सकल निवेश − मूल्यह्रास
- AD = C + I
- C = C̄ + cY
- S = Y − C
- MPC = ΔC/ΔY
- MPS = ΔS/ΔY
- MPC + MPS = 1
- संतुलन: Y = AD
- संतुलन: S = I
- K = 1/(1−MPC)
- प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान
परीक्षा-पूर्व अंतिम चेकलिस्ट
- समष्टि एवं व्यष्टि अर्थशास्त्र का अंतर।
- GDP, GNP, NDP, NNP का क्रम।
- NFIA और मूल्यह्रास।
- साधन लागत तथा बाजार कीमत।
- शुद्ध अप्रत्यक्ष कर।
- राष्ट्रीय आय की तीन विधियाँ।
- आय का वर्तुल प्रवाह।
- नाममात्र तथा वास्तविक GDP।
- GDP और कल्याण।
- मुद्रा के कार्य।
- मुद्रा माँग एवं मुद्रा पूर्ति।
- साख सृजन।
- मुद्रा गुणक।
- केंद्रीय बैंक के मौद्रिक उपकरण।
- समग्र माँग।
- उपभोग फलन।
- MPC, MPS, APC, APS।
- संतुलन आय।
- Y = AD तथा S = I।
- निवेश गुणक।
- गुणक की क्रियाविधि।
- समग्र माँग में परिवर्तन का प्रभाव।
- सरकारी बजट के उद्देश्य।
- राजस्व एवं पूँजीगत प्राप्तियाँ।
- राजस्व एवं पूँजीगत व्यय।
- राजस्व, राजकोषीय तथा प्राथमिक घाटा।
- भुगतान संतुलन।
- चालू और पूँजी खाता।
- विनिमय दर।
- तिरती, स्थिर और प्रबंधित तिरती विनिमय दर।
- मूल्यह्रास, मूल्यवृद्धि, अवमूल्यन और पुनर्मूल्यन।
- सभी महत्वपूर्ण संख्यात्मक प्रश्नों का अभ्यास।
- प्रत्येक 3 और 4 अंक के उत्तर में सूत्र/उदाहरण जहाँ आवश्यक हो वहाँ अवश्य दें।
अंतिम परीक्षा-उपयोगी प्राथमिकता
इकाई 4 — आय एवं रोजगार — 12 अंक: समग्र माँग, उपभोग, बचत, संतुलन आय, MPC/MPS और गुणक।
इकाई 2 — राष्ट्रीय आय — 8 अंक: GDP/GNP/NDP/NNP, तीनों विधियाँ, मूल्यह्रास, NFIA, बाजार कीमत-साधन लागत और संख्यात्मक प्रश्न।
इकाई 3 — मुद्रा एवं बैंकिंग — 6 अंक: मुद्रा के कार्य, साख सृजन, मुद्रा गुणक एवं मौद्रिक नीति के उपकरण।
इकाई 5 — सरकारी बजट — 6 अंक: प्राप्तियाँ, व्यय, राजस्व घाटा, राजकोषीय घाटा और प्राथमिक घाटा।
इकाई 6 — खुली अर्थव्यवस्था — 6 अंक: भुगतान संतुलन, चालू खाता, पूँजी खाता, विनिमय दर तथा विनिमय दर की प्रणालियाँ।
इकाई 1 — परिचय — 2 अंक: समष्टि अर्थशास्त्र का अर्थ, क्षेत्र तथा व्यष्टि से अंतर।
2. इस अध्ययन सामग्री की मुख्य विशेषताएँ
ब्लूप्रिंट आधारित संरचना: संपूर्ण सामग्री को MP Board 2026-27 के नवीनतम प्रश्न प्रारूप के अनुरूप तैयार किया गया है।
AI-असिस्टेड सरल भाषा में नोट्स: जटिल आर्थिक अवधारणाओं (जैसे GDP, राष्ट्रीय आय की गणना, मौद्रिक नीतियां आदि) को बिंदुवार और समझने में आसान भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
महत्वपूर्ण सूत्र एवं गणनात्मक प्रश्न: परीक्षा में पूछे जाने वाले न्यूमेरिकल प्रश्नों के लिए सभी प्रमुख सूत्रों का संकलन।
परीक्षा-उपयोगी प्रश्नोत्तर:
- वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ / रिक्त स्थान / सही जोड़ी)
- अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
- लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक)
- दीर्घ उत्तरीय / विश्लेषणात्मक प्रश्न (4 अंक)
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
अस्वीकरण (Disclaimer): इस पोस्ट में दी गई अंक योजना एवं अध्ययन सामग्री माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश (MPBSE) के आधिकारिक दिशा-निर्देशों एवं शैक्षणिक सत्र 2026-27 के पाठ्यक्रम पर आधारित है। यह सामग्री केवल विद्यार्थियों के स्व-अध्ययन, अभ्यास एवं मार्गदर्शन के उद्देश्य से तैयार की गई है। परीक्षा संबंधी किसी भी अंतिम आधिकारिक सूचना, संशोधन या प्रमाणीकरण के लिए विद्यार्थी सदैव माध्यमिक शिक्षा मण्डल, म.प्र. की आधिकारिक वेबसाइट (`mpbse.nic.in`) पर जारी निर्देशों को ही मान्य समझें।
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