MP Board कक्षा 12वीं भौतिकी परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए
Practice Paper – Set B विद्यार्थियों के अभ्यास हेतु तैयार किया गया है।
यह प्रश्नपत्र नवीन सिलेबस और वर्तमान परीक्षा पैटर्न को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।
जो छात्र Set A का अभ्यास कर चुके हैं, उनके लिए Set B एक अतिरिक्त और महत्वपूर्ण अभ्यास सामग्री है,
जिससे उनकी अवधारणाएँ और अधिक मजबूत होंगी।
📝 Practice Paper Set B की विशेषताएँ
MP Board के नवीन ब्लूप्रिंट पर आधारित
वस्तुनिष्ठ, लघु, दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों का संतुलित समावेश
परीक्षा में पूछे जाने वाले संभावित प्रश्न
उत्तर लेखन शैली सुधारने में सहायक
Revision और Self-Test के लिए उपयोगी
🎯 यह Practice Paper Set B किसके लिए लाभदायक है?
कक्षा 12वीं MP Board के नियमित विद्यार्थी
परीक्षा से पहले अतिरिक्त अभ्यास चाहने वाले छात्र
मॉडल पेपर जैसा अभ्यास करने वाले विद्यार्थी
स्कूल टेस्ट एवं प्री-बोर्ड परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र
नोट:
यह Practice Paper परीक्षा पूर्व अभ्यास के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
वास्तविक बोर्ड परीक्षा प्रश्नपत्र इससे अलग हो सकता है।
⬇️ Practice Paper Set B
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Physics Model Paper 12th (Set-B) - Sandipani Vidyalaya
कक्षा 12वीं - भौतिक शास्त्र
(मॉडल पेपर: सेट-B)
Created by: D Septa | पूर्णांक: 70 | समय: 3 घंटे
खण्ड अ: वस्तुनिष्ठ प्रश्न (28 अंक)
प्र.1. सही विकल्प चुनकर लिखिए: (1×6 = 6 अंक)
(i) एक कूलाम आवेश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या होती है:
प्र.2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए: (1×6 = 6 अंक)
(i) किरचॉफ का प्रथम नियम ________ संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है।
आवेश
(ii) ट्रांसफार्मर ________ के सिद्धांत पर कार्य करता है।
अन्योन्य प्रेरण (Mutual Induction)
(iii) स्वस्थ नेत्र के लिए स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी ________ होती है।
25 सेमी
(iv) फोटॉन का विराम द्रव्यमान ________ होता है।
शून्य
(v) ताप बढ़ाने पर अर्द्धचालकों की प्रतिरोधकता ________ है।
घटती
(vi) हाइड्रोजन परमाणु की आयनन ऊर्जा ________ होती है।
13.6 eV
प्र.3. सत्य/असत्य लिखिए: (1×5 = 5 अंक)
(i) दो क्षेत्र रेखाएं एक दूसरे को काट सकती हैं।
असत्य (कभी नहीं काटतीं)
(ii) अर्द्धचालकों का प्रतिरोध ताप गुणांक ऋणात्मक होता है।
सत्य
(iii) लेंस की क्षमता का मात्रक डायोप्टर है।
सत्य
(iv) परमाणु में इलेक्ट्रॉन की कक्षा क्वांटम प्रकृति की होती है।
सत्य
(v) दिष्टकारी (Rectifier) प्रत्यावर्ती धारा (AC) को दिष्ट धारा (DC) में बदलता है।
सत्य
प्र.4. सही जोड़ी बनाइए: (1×6 = 6 अंक)
(क) -> (ख)
(i) विद्युत शक्ति -> (क) h/λ
(ii) चल कुण्डली धारामापी -> (ख) I2R
(iii) बूस्टर का नियम -> (ग) 1/√(μ0ε0)
(iv) प्रकाश की चाल -> (घ) धारा का चुंबकीय प्रभाव
(v) संवेग -> (ङ) ध्रुवण
(vi) NAND गेट -> (च) सार्वत्रिक गेट
सही मिलान:
(i) विद्युत शक्ति → (ख) I2R
(ii) चल कुण्डली धारामापी → (घ) धारा का चुंबकीय प्रभाव
(iii) बूस्टर का नियम → (ङ) ध्रुवण
(iv) प्रकाश की चाल → (ग) 1/√(μ0ε0)
(v) संवेग → (क) h/λ
(vi) NAND गेट → (च) सार्वत्रिक गेट
प्र.5. एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए: (1×5 = 5 अंक)
(i) मूल आवेश का मान कितना होता है?
1.6 × 10-19 कूलाम
(ii) उस भौतिक राशि का नाम लिखिए जिसका मात्रक वेबर है।
चुंबकीय फ्लक्स (Magnetic Flux)
(iii) ट्रांसफॉर्मर किस प्रकार की धारा के लिए कार्य करता है?
केवल प्रत्यावर्ती धारा (AC)
(iv) प्रकाश तंतु किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection)
(v) द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता समीकरण लिखिए।
E = mc2
खण्ड ब: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
प्र.6. आवेश के क्वाण्टीकरण से आप क्या समझते हैं?
अथवा
विद्युत क्षेत्र रेखाओं के कोई दो गुण लिखिए।
उत्तर: प्रकृति में किसी भी वस्तु पर आवेश, एक न्यूनतम आवेश (e) के पूर्ण गुणज के रूप में ही हो सकता है, भिन्नात्मक नहीं। इसे आवेश का क्वाण्टीकरण कहते हैं।
सूत्र: Q = ±ne, जहाँ n = 1, 2, 3...
उत्तर: 1. विद्युत क्षेत्र रेखाएं धनावेश से प्रारंभ होकर ऋणावेश पर समाप्त होती हैं।
2. दो विद्युत क्षेत्र रेखाएं कभी भी एक-दूसरे को नहीं काटती हैं।
प्र.7. समविभव पृष्ठ किसे कहते हैं?
अथवा
ओम का नियम लिखिए।
उत्तर: विद्युत क्षेत्र में स्थित वह पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिंदु पर विद्युत विभव का मान समान होता है, समविभव पृष्ठ (Equipotential Surface) कहलाता है।
उत्तर: यदि किसी चालक की भौतिक अवस्था (जैसे ताप, लंबाई) में परिवर्तन न हो, तो उसके सिरों पर लगाया गया विभवांतर (V) उसमें प्रवाहित धारा (I) के अनुक्रमानुपाती होता है। V ∝ I ⇒ V = IR
प्र.8. लॉरेंज बल किसे कहते हैं?
अथवा
चुंबकीय फ्लक्स का मात्रक और विमीय सूत्र लिखिए।
उत्तर: जब कोई आवेशित कण किसी चुंबकीय क्षेत्र में गति करता है, तो उस पर एक बल कार्य करता है जिसे लॉरेंज बल कहते हैं।
सूत्र: F = qvB sinθ
प्र.9. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम लिखिए।
अथवा
विद्युत चुंबकीय तरंगों के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर: 1. जब किसी परिपथ से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो उसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है।
2. प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर के अनुक्रमानुपाती होता है। e = -dφ/dt.
उत्तर: 1. एक्स-किरणों का उपयोग चिकित्सा में हड्डियों की टूटन देखने के लिए।
2. रेडियो तरंगों का उपयोग संचार (रेडियो, टीवी) में।
प्र.10. अपवर्तनांक की परिभाषा लिखिए।
अथवा
पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए आवश्यक शर्तें लिखिए।
उत्तर: निर्वात में प्रकाश की चाल (c) और किसी माध्यम में प्रकाश की चाल (v) के अनुपात को उस माध्यम का अपवर्तनांक (μ) कहते हैं। μ = c/v.
उत्तर: 1. प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना चाहिए।
2. आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए।
प्र.11. कार्यफलन और देहली आवृत्ति को परिभाषित कीजिए।
अथवा
डी-ब्रोग्ली तरंगें क्या हैं? इसका समीकरण लिखिए।
उत्तर:कार्यफलन: वह न्यूनतम ऊर्जा जो किसी धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करने के लिए आवश्यक होती है। देहली आवृत्ति: वह न्यूनतम आवृत्ति जिससे कम आवृत्ति का प्रकाश इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित नहीं कर सकता।
उत्तर: गतिमान कण के साथ संलग्न तरंग को डी-ब्रोग्ली तरंग या द्रव्य तरंग कहते हैं।
समीकरण: λ = h/p = h/mv.
प्र.12. समस्थानिक और समभारिक में अंतर लिखिए।
अथवा
N-प्रकार और P-प्रकार के अर्द्धचालक में दो अंतर लिखिए।
उत्तर:समस्थानिक: परमाणु क्रमांक समान, द्रव्यमान संख्या भिन्न (जैसे 1H1, 1H2)। समभारिक: परमाणु क्रमांक भिन्न, द्रव्यमान संख्या समान (जैसे 18Ar40, 20Ca40)।
उत्तर: 1. N-प्रकार में बहुसंख्यक आवेश वाहक इलेक्ट्रॉन होते हैं, P-प्रकार में होल होते हैं।
2. N-प्रकार पंचसंयोजी अशुद्धि (Pentavalent) मिलाने से बनते हैं, P-प्रकार त्रिसंयोजी (Trivalent) मिलाने से।
खण्ड स: लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक)
प्र.13. सेल के आंतरिक प्रतिरोध, विद्युत वाहक बल और टर्मिनल विभवांतर में संबंध स्थापित कीजिए।
अथवा
व्हीटस्टोन सेतु का सिद्धांत लिखिए और इसके संतुलन के लिए शर्त P/Q = R/S निगमित कीजिए।
उत्तर (संक्षेप): माना सेल का EMF = E, आंतरिक प्रतिरोध = r, बाह्य प्रतिरोध = R।
कुल प्रतिरोध = R + r, धारा I = E / (R+r)
टर्मिनल विभवांतर V = IR E = I(R+r) = IR + Ir = V + Ir
अतः r = (E-V)/I या r = R(E/V - 1).
उत्तर (संक्षेप):सिद्धांत: चार प्रतिरोधों को चतुर्भुज की भुजाओं में जोड़कर एक विकर्ण में धारामापी और दूसरे में सेल जोड़ते हैं। संतुलन की स्थिति में धारामापी में विक्षेप शून्य होता है।
किरचॉफ का नियम लगाकर सिद्ध किया जा सकता है कि P/Q = R/S.
प्र.14. एक अपचायी ट्रांसफार्मर (Step-down Transformer) का सिद्धांत समझाइए।
अथवा
प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में शक्ति के लिए व्यंजक P = Vrms Irms cosφ ज्ञात कीजिए।
उत्तर: यह अन्योन्य प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है। अपचायी ट्रांसफार्मर उच्च वोल्टता को निम्न वोल्टता में बदलता है।
इसमें प्राथमिक कुंडली में फेरों की संख्या (Np) द्वितीयक कुंडली (Ns) से अधिक होती है (Np > Ns)।
परिणामस्वरूप Vs < Vp और धारा का मान बढ़ जाता है।
उत्तर: तात्क्षणिक शक्ति P = Vi। V = V0 sinωt, I = I0 sin(ωt - φ)
एक पूर्ण चक्र के लिए औसत शक्ति निकालने पर: Pavg = (V0I0/2) cosφ = (V0/√2)(I0/√2) cosφ Pavg = Vrms Irms cosφ.
प्र.15. व्यतिकरण और विवर्तन में तीन अंतर लिखिए।
अथवा
हाइगेन्स के द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धांत को समझाइए।
उत्तर:
1. स्रोत: व्यतिकरण दो कला-संबद्ध स्रोतों से होता है, विवर्तन एक ही तरंगाग्र के विभिन्न बिंदुओं से।
2. फ्रिंज चौड़ाई: व्यतिकरण में फ्रिंजों की चौड़ाई समान हो सकती है, विवर्तन में केंद्रीय फ्रिंज सबसे चौड़ी होती है।
3. तीव्रता: व्यतिकरण में दीप्त फ्रिंजों की तीव्रता समान होती है, विवर्तन में घटती जाती है।
उत्तर: 1. तरंगाग्र का प्रत्येक बिंदु एक नए विक्षोभ (स्रोत) का कार्य करता है, जिसे द्वितीयक तरंगिकाएं कहते हैं।
2. ये द्वितीयक तरंगिकाएं माध्यम में प्रकाश की चाल से सभी दिशाओं में फैलती हैं।
3. किसी क्षण इन तरंगिकाओं को स्पर्श करता हुआ खींचा गया पृष्ठ नए तरंगाग्र की स्थिति को प्रदर्शित करता है।
प्र.16. बोर के परमाणु मॉडल के मुख्य अभिगृहीत (Postulates) लिखिए।
अथवा
रेडियोएक्टिव क्षय नियम लिखिए और सिद्ध कीजिए N = N0 e-λt.
उत्तर: 1. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कुछ निश्चित कक्षाओं में बिना ऊर्जा खोए घूमते हैं (स्थायी कक्षाएं)।
2. इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में घूमते हैं जिनका कोणीय संवेग h/2π का पूर्ण गुणज होता है (mvr = nh/2π)।
3. जब इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा कक्षा से निम्न में कूदता है, तो ऊर्जा का उत्सर्जन फोटॉन के रूप में होता है (hν = E2 - E1)।
उत्तर: किसी क्षण रेडियोएक्टिव परमाणुओं के विघटन की दर, उस क्षण उपस्थित अविघटित परमाणुओं की संख्या के अनुक्रमानुपाती होती है। -dN/dt ∝ N ⇒ dN/N = -λ dt
समाकलन करने पर: log N = -λt + C
प्रारंभ में t=0, N=N0, अतः C = log N0 log(N/N0) = -λt ⇒ N = N0 e-λt.
खण्ड द: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
प्र.17. गॉस की प्रमेय लिखिए और सिद्ध कीजिए।
अथवा
समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता के लिए व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। इसकी धारिता कैसे बढ़ाई जा सकती है?
कथन: किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल विद्युत फ्लक्स उस पृष्ठ के भीतर उपस्थित कुल आवेश का 1/ε0 गुना होता है। φ = q/ε0. सिद्धि: एक बिंदु आवेश q को केंद्र मानकर r त्रिज्या का गोला (गाउसीय पृष्ठ) खींचिए। E = (1/4πε0) q/r2 φ = ∫ E.dS = E ∫ dS = E(4πr2) φ = [(1/4πε0) q/r2] (4πr2) = q/ε0.
व्यंजक:C = Kε0A / d
जहाँ A = प्लेटों का क्षेत्रफल, d = प्लेटों के बीच की दूरी, K = परावैद्युतांक। बढ़ाने के उपाय: 1. प्लेटों का क्षेत्रफल (A) बढ़ाकर। 2. प्लेटों के बीच की दूरी (d) कम करके। 3. प्लेटों के बीच उच्च परावैद्युतांक (K) वाला माध्यम भरकर।
प्र.18. L-C-R श्रेणीक्रम परिपथ के लिए निम्नलिखित ज्ञात कीजिए: (i) परिणामी वोल्टेज (ii) परिपथ की प्रतिबाधा (iii) अनुनादी आवृत्ति।
अथवा
दो समांतर धारावाही चालकों के बीच लगने वाले बल के लिए व्यंजक ज्ञात कीजिए। यह बल कब आकर्षण और कब प्रतिकर्षण होता है?
(i) V = √[VR2 + (VL - VC)2]
(ii) Z = √[R2 + (XL - XC)2]
(iii) अनुनाद पर XL = XC ⇒ ωL = 1/ωC ω2 = 1/LC ⇒ f = 1 / (2π√LC).
व्यंजक:F/l = (μ0/4π) (2I1I2 / r) न्यूटन/मीटर। प्रकृति: 1. यदि दोनों तारों में धारा एक ही दिशा में हो, तो आकर्षण बल लगता है।
2. यदि धारा विपरीत दिशा में हो, तो प्रतिकर्षण बल लगता है।
प्र.19. लेंस निर्माता का सूत्र (Lens Maker's Formula) स्थापित कीजिए: 1/f = (μ-1) (1/R1 - 1/R2).
अथवा
प्रिज्म के पदार्थ के अपवर्तनांक के लिए सूत्र स्थापित कीजिए: μ = sin((A+δm)/2) / sin(A/2).
हल (संक्षेप): दो गोलीय पृष्ठों से अपवर्तन के सूत्र का उपयोग करें।
प्रथम पृष्ठ के लिए: μ/v' - 1/u = (μ-1)/R1
द्वितीय पृष्ठ के लिए: 1/v - μ/v' = (1-μ)/R2
दोनों समीकरणों को जोड़ने पर: 1/v - 1/u = (μ-1)(1/R1 - 1/R2)
चूँकि 1/v - 1/u = 1/f, अतः सिद्ध हुआ।
हल (संक्षेप): प्रिज्म में विचलन कोण δ = i + e - A होता है।
न्यूनतम विचलन की स्थिति में i = e और r1 = r2 = r.
तब r = A/2 और i = (A + δm)/2.
स्नेल के नियम μ = sin i / sin r में मान रखने पर सूत्र प्राप्त होता है।
प्र.20. P-N संधि डायोड का पूर्ण तरंग दिष्टकारी (Full Wave Rectifier) के रूप में वर्णन कीजिए (परिपथ आरेख एवं कार्यविधि)।
अथवा
लॉजिक गेट क्या हैं? OR, AND और NOT गेट के संकेत और सत्यता सारणी बनाइए।
परिपथ: इसमें एक सेंटर-टैप ट्रांसफार्मर और दो डायोड (D1, D2) का उपयोग होता है। कार्यविधि: AC के धनात्मक अर्धचक्र में D1 अग्र अभिनति (चालक) और D2 पश्च अभिनति में होता है, जिससे धारा D1 से बहती है। ऋणात्मक अर्धचक्र में D2 अग्र और D1 पश्च होता है, धारा D2 से बहती है। लोड में धारा की दिशा हमेशा एक ही रहती है, जिससे पूर्ण तरंग दिष्टकरण होता है।
लॉजिक गेट: डिजिटल परिपथ जो तार्किक संबंधों पर कार्य करते हैं।
1. OR: Y = A+B (संकेत: घुमावदार त्रिभुज जैसा)। सत्यता सारणी: कोई भी इनपुट 1 तो आउटपुट 1।
2. AND: Y = A.B (संकेत: D आकार)। सारणी: दोनों इनपुट 1 तो आउटपुट 1।
3. NOT: Y = A' (संकेत: त्रिभुज के आगे गोला)। सारणी: 0 का 1, 1 का 0।
⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer):
इस प्रैक्टिस पेपर में दिए गए सभी प्रश्न एवं उत्तर केवल विद्यार्थियों के
अभ्यास और शैक्षणिक मार्गदर्शन के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।
ये प्रश्नपत्र किसी भी प्रकार से वास्तविक MP Board परीक्षा प्रश्नपत्र का
आधिकारिक या हूबहू प्रतिरूप नहीं हैं।
प्रैक्टिस पेपर में दिए गए उत्तर विषय विशेषज्ञों के अनुभव और उपलब्ध शैक्षणिक
स्रोतों के आधार पर तैयार किए गए हैं।
किसी उत्तर में त्रुटि या भिन्नता संभव है, जिसके लिए वेबसाइट/प्रकाशक
कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं होगा।
विद्यार्थियों को सलाह दी जाती है कि अंतिम परीक्षा तैयारी के लिए
MP Board की आधिकारिक पाठ्यपुस्तकों, पाठ्यक्रम एवं निर्देशों
को ही प्राथमिकता दें।
MP Board कक्षा 12वीं भौतिकी की वार्षिक परीक्षा को ध्यान में रखते हुए
Practice Paper – Set C विद्यार्थियों के निरंतर अभ्यास हेतु तैयार किया गया है।
यह प्रश्नपत्र परीक्षा के स्तर और प्रश्नों की प्रकृति को समझने में सहायक है।
Set C विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है जो पहले Set A और Set B का अभ्यास कर चुके हैं
और अब स्वयं का मूल्यांकन (Self Assessment) करना चाहते हैं।
📝 Practice Paper Set C की प्रमुख विशेषताएँ
नवीन MP Board सिलेबस के अनुसार तैयार
अंक भार के अनुसार प्रश्नों का संतुलन
संकल्पना आधारित एवं विश्लेषणात्मक प्रश्न
उत्तर प्रस्तुति और लेखन अभ्यास में सहायक
परीक्षा पूर्व अंतिम रिवीजन के लिए उपयोगी
🎯 Practice Paper Set C किसके लिए लाभकारी?
कक्षा 12वीं MP Board के सभी विद्यार्थी
परीक्षा से पहले आत्म-मूल्यांकन करने वाले छात्र
स्कूल एवं कोचिंग टेस्ट की तैयारी करने वाले विद्यार्थी
भौतिकी में अच्छे अंक प्राप्त करने के इच्छुक छात्र
महत्वपूर्ण नोट:
यह Practice Paper केवल अभ्यास के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
वास्तविक बोर्ड परीक्षा प्रश्नपत्र इससे भिन्न हो सकता है।
⬇️ Practice Paper Set C
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Physics Model Paper 12th (Set-C) - Sandipani Vidyalaya
(vi) अर्द्धचालक में वर्जित ऊर्जा अंतराल (Forbidden energy gap) की कोटि होती है:
(अ) 1 eV(ब) 6 eV(स) 0 eV(द) 100 eV
👉 (अ) 1 eV (लगभग)
प्र.2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए: (1×6 = 6 अंक)
(i) धारामापी को वोल्टमीटर में बदलने के लिए उसकी कुंडली के साथ श्रेणीक्रम में ________ प्रतिरोध जोड़ा जाता है।
उच्च
(ii) ध्रुव प्राबल्य का SI मात्रक ________ है।
एम्पीयर-मीटर (A-m)
(iii) विद्युत चुंबकीय तरंगों में विद्युत क्षेत्र और चुंबकीय क्षेत्र परस्पर ________ होते हैं।
लंबवत
(iv) गोलीय दर्पण के ध्रुव से फोकस तक की दूरी को ________ कहते हैं।
फोकस दूरी (Focal length)
(v) एक फोटॉन का संवेग p = h / ___ होता है।
λ (तरंगदैर्ध्य)
(vi) NOT गेट को ________ गेट भी कहते हैं।
इन्वर्टर (Inverter) / व्युत्क्रमक
प्र.3. सत्य/असत्य लिखिए: (1×5 = 5 अंक)
(i) इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) विभवांतर का मात्रक है।
असत्य (यह ऊर्जा का मात्रक है)
(ii) किरचॉफ का संधि नियम आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है।
सत्य
(iii) अवतल दर्पण में सदैव आभासी प्रतिबिंब बनता है।
असत्य (वास्तविक और आभासी दोनों बन सकते हैं)
(iv) परमाणु का नाभिक धनावेशित होता है।
सत्य
(v) NAND गेट एक सार्वत्रिक (Universal) गेट है।
सत्य
प्र.4. सही जोड़ी बनाइए: (1×6 = 6 अंक)
(क) -> (ख)
(i) लॉरेंज बल -> (क) E = mc2
(ii) चुंबकीय फ्लक्स -> (ख) ध्रुवण
(iii) ब्रूस्टर का नियम -> (ग) qvB sinθ
(iv) आइंस्टीन -> (घ) φ = B A cosθ
(v) लाइमन श्रेणी -> (ङ) दिष्टकारी
(vi) P-N संधि डायोड -> (च) पराबैंगनी क्षेत्र
सही मिलान:
(i) लॉरेंज बल → (ग) qvB sinθ
(ii) चुंबकीय फ्लक्स → (घ) φ = B A cosθ
(iii) ब्रूस्टर का नियम → (ख) ध्रुवण
(iv) आइंस्टीन → (क) E = mc2
(v) लाइमन श्रेणी → (च) पराबैंगनी क्षेत्र
(vi) P-N संधि डायोड → (ङ) दिष्टकारी
प्र.5. एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए: (1×5 = 5 अंक)
(i) आवेश के क्वाण्टीकरण का सूत्र लिखिए।
q = ± ne
(ii) स्वप्रेरकत्व (Self-Inductance) का SI मात्रक क्या है?
हेनरी (Henry)
(iii) रडार प्रणाली में किन तरंगों का उपयोग होता है?
सूक्ष्म तरंगें (Microwaves)
(iv) निरोधी विभव (Cut-off potential) किस पर निर्भर करता है?
आपतित प्रकाश की आवृत्ति पर।
(v) नाभिकीय संलयन को ताप-नाभिकीय अभिक्रिया क्यों कहते हैं?
क्योंकि यह अत्यधिक उच्च ताप पर ही संभव होती है।
खण्ड ब: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
प्र.6. विद्युत फ्लक्स की परिभाषा और इसका SI मात्रक लिखिए।
अथवा
एक कूलॉम आवेश को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: विद्युत क्षेत्र में स्थित किसी पृष्ठ के लंबवत गुजरने वाली कुल विद्युत क्षेत्र रेखाओं की संख्या को उस पृष्ठ से संबद्ध विद्युत फ्लक्स कहते हैं।
मात्रक: न्यूटन-मीटर²/कूलाम (N-m²/C) या वोल्ट-मीटर।
उत्तर: यदि समान परिमाण के दो सजातीय आवेश निर्वात या वायु में 1 मीटर की दूरी पर स्थित हों और एक-दूसरे को 9 × 109 न्यूटन के बल से प्रतिकर्षित करें, तो प्रत्येक आवेश 1 कूलॉम कहलाता है।
प्र.7. ओम का नियम लिखिए और इसकी सीमाएँ बताइए।
अथवा
विशिष्ट प्रतिरोध (प्रतिरोधकता) को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: यदि किसी चालक की भौतिक अवस्था (ताप, लंबाई) न बदले, तो चालक के सिरों का विभवांतर उसमें प्रवाहित धारा के अनुक्रमानुपाती होता है (V ∝ I)। सीमाएँ: 1. ताप नियत रहना चाहिए। 2. यह केवल धात्विक चालकों के लिए सत्य है (डायोड/ट्रांजिस्टर पर लागू नहीं)।
उत्तर: एकांक लंबाई और एकांक अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले चालक के प्रतिरोध को उसका विशिष्ट प्रतिरोध या प्रतिरोधकता कहते हैं। इसका मात्रक ओम-मीटर (Ω-m) है।
प्र.8. बायो-सावर्ट का नियम लिखिए।
अथवा
फ्लेमिंग के बाएं हाथ का नियम लिखिए।
उत्तर: किसी धारावाही चालक के अल्पांश (dl) के कारण किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र (dB) निम्न सूत्र द्वारा दिया जाता है: dB = (μ0/4π) (I dl sinθ / r2).
उत्तर: यदि हम बाएं हाथ के अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा को परस्पर लंबवत फैलाएं, और यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा और मध्यमा धारा की दिशा को प्रदर्शित करे, तो अंगूठा चालक पर लगने वाले बल की दिशा को प्रदर्शित करेगा।
प्र.9. स्वप्रेरण और अन्योन्य प्रेरण में दो अंतर लिखिए।
उत्तर: 1. स्वप्रेरण: इसमें एक ही कुंडली होती है, धारा परिवर्तन से उसी में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है।
2. अन्योन्य प्रेरण: इसमें दो कुंडलियां होती हैं, एक में धारा परिवर्तन से दूसरी में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है।
उत्तर: जब किसी चालक से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो उसमें जल में भंवर के समान चक्करदार प्रेरित धाराएं उत्पन्न हो जाती हैं, जिन्हें भंवर धाराएं कहते हैं। हानि: इससे विद्युत ऊर्जा ऊष्मीय ऊर्जा के रूप में व्यर्थ होती है।
प्र.10. प्रकाश के प्रकीर्णन से आप क्या समझते हैं?
अथवा
लेंस की क्षमता को परिभाषित कीजिए और इसका मात्रक लिखिए।
उत्तर: जब प्रकाश किसी ऐसे माध्यम से गुजरता है जिसमें धूल आदि के कणों का आकार प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की तुलना में बहुत छोटा होता है, तो प्रकाश विभिन्न दिशाओं में बिखर जाता है। इसे प्रकाश का प्रकीर्णन कहते हैं। (आकाश का नीला रंग इसी कारण है)।
उत्तर: लेंस की फोकस दूरी के व्युत्क्रम (प्रतिलोम) को लेंस की क्षमता कहते हैं, जबकि फोकस दूरी मीटर में मापी गई हो। P = 1/f(m). मात्रक: डायोप्टर (D)।
प्र.11. प्रकाश विद्युत प्रभाव क्या है?
अथवा
द्रव्य तरंगें (Matter Waves) क्या हैं? इनके दो गुण लिखिए।
उत्तर: जब किसी धातु की सतह पर उचित आवृत्ति (देहली आवृत्ति से अधिक) का प्रकाश आपतित होता है, तो उसकी सतह से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होने लगते हैं। इस घटना को प्रकाश विद्युत प्रभाव कहते हैं।
उत्तर: गतिमान द्रव्य कणों (जैसे इलेक्ट्रॉन) के साथ तरंग संबद्ध होती है, जिसे द्रव्य तरंग कहते हैं। गुण: 1. ये विद्युत चुंबकीय तरंगें नहीं हैं। 2. ये आवेश पर निर्भर नहीं करतीं।
प्र.12. नाभिकीय विखंडन और नाभिकीय संलयन में दो अंतर लिखिए।
अथवा
समस्थानिक (Isotopes) किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर: 1. विखंडन: एक भारी नाभिक टूटकर दो हल्के नाभिक बनाता है। (परमाणु बम)
2. संलयन: दो हल्के नाभिक मिलकर एक भारी नाभिक बनाते हैं। (सूर्य की ऊर्जा)
उत्तर: एक ही तत्व के वे परमाणु जिनके परमाणु क्रमांक समान होते हैं लेकिन द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है।
उदाहरण: हाइड्रोजन के समस्थानिक - प्रोटियम (1H1), ड्यूटेरियम (1H2), ट्राइटियम (1H3)।
खण्ड स: लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक)
प्र.13. अनुगमन वेग (Drift Velocity) और धारा घनत्व (Current Density) में संबंध स्थापित कीजिए।
अथवा
किरचॉफ के नियमों को सचित्र समझाइए।
उत्तर: माना चालक की लंबाई l, क्षेत्रफल A, एकांक आयतन में इलेक्ट्रॉन n, अनुगमन वेग vd है।
कुल आवेश q = (nAl)e.
समय t = l / vd.
धारा I = q/t = (nAle) / (l/vd) = nAe vd.
धारा घनत्व J = I/A = ne vd.
उत्तर: 1. संधि नियम (KCL): किसी भी संधि पर मिलने वाली समस्त धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है (ΣI = 0)। (आने वाली धारा = जाने वाली धारा)।
2. लूप नियम (KVL): किसी बंद परिपथ में विभव परिवर्तनों का कुल योग शून्य होता है (ΣV = 0)।
प्र.14. एक समान चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान आवेशित कण पर लगने वाले बल के आधार पर चुंबकीय क्षेत्र B के मात्रक (टेस्ला) को परिभाषित कीजिए।
अथवा
धारावाही परिनालिका के स्वप्रेरकत्व का व्यंजक ज्ञात कीजिए। किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर: लॉरेंज बल F = qvB sinθ. यदि q=1C, v=1m/s, θ=90°, F=1N हो, तो B=1 टेस्ला।
अतः यदि 1C आवेश 1 m/s के वेग से चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत गति करे और उस पर 1 न्यूटन बल लगे, तो क्षेत्र की तीव्रता 1 टेस्ला होगी।
व्यंजक:L = μ0 N2 A / l
जहाँ N = कुल फेरे, A = क्षेत्रफल, l = लंबाई। कारक: 1. फेरों की संख्या (N) के वर्ग के अनुक्रमानुपाती। 2. क्रोड की चुंबकशीलता (μ) पर।
प्र.15. सरल सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता के लिए व्यंजक ज्ञात कीजिए जब अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बने।
अथवा
गोलीय अपवर्तक पृष्ठ (उत्तल) के लिए अपवर्तन सूत्र μ/v - 1/u = (μ-1)/R स्थापित कीजिए।
उत्तर: सरल सूक्ष्मदर्शी में एक उत्तल लेंस होता है।
आवर्धन क्षमता m = 1 + D/f.
(यहाँ किरण आरेख बनाकर और त्रिभुजों की समरूपता या लेंस सूत्र का उपयोग करके इसे सिद्ध किया जाता है।)
उत्तर (संक्षेप): स्नेल के नियम (n1 sin i = n2 sin r) और छोटे द्वारक के सन्निकटन (sin i ≈ i, tan α ≈ α) का उपयोग करके, तथा बहिष्कोण प्रमेय लगाकर यह सूत्र व्युत्पन्न किया जाता है।
प्र.16. हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की विभिन्न श्रेणियों (लाहमन, बामर, पाश्चन, ब्रैकेट, फुण्ड) का वर्णन कीजिए।
अथवा
नाभिक की बंधन ऊर्जा वक्र खींचिए और इसके मुख्य निष्कर्ष लिखिए।
उत्तर: प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा और द्रव्यमान संख्या (A) के बीच ग्राफ। निष्कर्ष: 1. मध्यवर्ती नाभिकों (A=50-80) की बंधन ऊर्जा सर्वाधिक (स्थायी) होती है।
2. हल्के और बहुत भारी नाभिकों की बंधन ऊर्जा कम (अस्थायी) होती है, इसलिए संलयन और विखंडन होता है।
खण्ड द: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
प्र.17. विद्युत द्विध्रुव के कारण निरक्षीय स्थिति (Equatorial Position) में विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक ज्ञात कीजिए।
अथवा
समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता का व्यंजक ज्ञात कीजिए जब प्लेटों के बीच आंशिक रूप से परावैद्युत पदार्थ भरा हो।
व्यंजक:E = (1/4πε0) [p / (r2 + l2)3/2]
छोटे द्विध्रुव (l << r) के लिए: E = (1/4πε0) (p / r3).
दिशा: द्विध्रुव आघूर्ण के विपरीत (धन से ऋण की ओर)।
व्यंजक:C = ε0A / [ (d-t) + t/K ]
जहाँ t = परावैद्युत माध्यम की मोटाई, d = प्लेटों के बीच की दूरी, K = परावैद्युतांक।
यदि t=d (पूर्ण भरा हो), तो C = Kε0A / d.
प्र.18. प्रत्यावर्ती धारा जनित्र (Dynamo) का वर्णन निम्न शीर्षकों के अंतर्गत कीजिए: (i) सिद्धांत (ii) नामांकित चित्र (iii) कार्यविधि।
अथवा
चल कुण्डली धारामापी का सिद्धांत समझाइए और इसकी सुग्राहिता कैसे बढ़ाई जा सकती है?
(i) सिद्धांत: विद्युत चुंबकीय प्रेरण (जब कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में घूमती है, तो फ्लक्स परिवर्तन से प्रेरित धारा उत्पन्न होती है)। (ii) चित्र: (चुम्बक ध्रुव N-S, आर्मेचर कुंडली, सर्पी वलय, ब्रश)। (iii) कार्यविधि: फ्लेमिंग के दाएं हाथ के नियम से धारा की दिशा ज्ञात करते हैं। आधे चक्कर बाद धारा की दिशा बदल जाती है (AC)।
सिद्धांत: जब धारावाही कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक बल आघूर्ण (τ = NIAB sinθ) लगता है जो उसे विक्षेपित करता है। (I ∝ θ) सुग्राहिता बढ़ाना: 1. फेरों की संख्या (N) बढ़ाकर। 2. क्षेत्रफल (A) बढ़ाकर। 3. चुंबकीय क्षेत्र (B) बढ़ाकर (नर्म लोहे का क्रोड)। 4. निलंबन तार का ऐंठन नियतांक (C) कम करके (फॉस्फर ब्रॉन्ज)।
प्र.19. संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope) का किरण आरेख बनाइए और इसकी आवर्धन क्षमता का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
अथवा
यंग के द्विक-स्लिट प्रयोग में फ्रिंज चौड़ाई (β) के लिए व्यंजक β = λD/d स्थापित कीजिए।
आरेख: अभिदृश्यक लेंस (छोटा) वस्तु का वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है, जो नेत्रिका (बड़ा) के लिए वस्तु का कार्य करता है और अंतिम आभासी बड़ा प्रतिबिंब बनता है। सूत्र:m = -(vo/uo) (1 + D/fe) (स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर)।
व्यंजक: पथांतर Δx = yd/D।
दीप्त फ्रिंज के लिए Δx = nλ ⇒ y = nλD/d।
क्रमागत फ्रिंजों के बीच की दूरी (चौड़ाई) β = yn+1 - yn = λD/d.
प्र.20. अर्द्ध-तरंग दिष्टकारी (Half Wave Rectifier) के रूप में P-N संधि डायोड का वर्णन कीजिए (परिपथ और कार्यविधि)।
अथवा
N-प्रकार और P-प्रकार के अर्द्धचालकों में अंतर स्पष्ट कीजिए और P-N संधि डायोड की अग्र अभिनति एवं पश्च अभिनति को समझाइए।
परिपथ: ट्रांसफार्मर, एक डायोड, लोड प्रतिरोध। कार्यविधि: AC के केवल धनात्मक अर्धचक्र में डायोड अग्र अभिनति में होता है और चालन करता है। ऋणात्मक अर्धचक्र में यह पश्च अभिनति में होता है और धारा नहीं बहती। इस प्रकार आउटपुट में केवल एक दिशा में रुक-रुक कर धारा मिलती है।
अंतर: N-प्रकार में इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक होते हैं (दाता अशुद्धि), P-प्रकार में होल (ग्राही अशुद्धि)। अभिनति:अग्र: P को बैटरी के धन (+) और N को ऋण (-) से जोड़ते हैं (धारा बहती है)। पश्च: P को ऋण (-) और N को धन (+) से जोड़ते हैं (धारा नगण्य)।
⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer):
इस प्रैक्टिस पेपर में दिए गए सभी प्रश्न एवं उत्तर केवल विद्यार्थियों के
अभ्यास और शैक्षणिक मार्गदर्शन के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।
ये प्रश्नपत्र किसी भी प्रकार से वास्तविक MP Board परीक्षा प्रश्नपत्र का
आधिकारिक या हूबहू प्रतिरूप नहीं हैं।
प्रैक्टिस पेपर में दिए गए उत्तर विषय विशेषज्ञों के अनुभव और उपलब्ध शैक्षणिक
स्रोतों के आधार पर तैयार किए गए हैं।
किसी उत्तर में त्रुटि या भिन्नता संभव है, जिसके लिए वेबसाइट/प्रकाशक
कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं होगा।
विद्यार्थियों को सलाह दी जाती है कि अंतिम परीक्षा तैयारी के लिए
MP Board की आधिकारिक पाठ्यपुस्तकों, पाठ्यक्रम एवं निर्देशों
को ही प्राथमिकता दें।
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Practice Paper – Set D विद्यार्थियों के अंतिम अभ्यास के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
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कक्षा 12वीं MP Board के नियमित एवं स्वाध्यायी विद्यार्थी
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ध्यान दें:
यह Practice Paper केवल अभ्यास हेतु तैयार किया गया है।
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Physics Model Paper 12th (Set-D) - Sandipani Vidyalaya
(iii) विशिष्ट प्रतिरोध (प्रतिरोधकता) का मात्रक है:
(अ) ओम(ब) ओम-मीटर(स) ओम/मीटर(द) ओम-1
👉 (ब) ओम-मीटर (Ω-m)
(iv) यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने वाली युक्ति है:
(अ) DC मोटर(ब) AC डायनेमो(स) ट्रांसफार्मर(द) स्टार्टर
👉 (ब) AC डायनेमो (जनित्र)
(v) ओजोन परत अवशोषित करती है:
(अ) दृश्य प्रकाश(ब) सूक्ष्म तरंगें(स) अवरक्त किरणें(द) पराबैंगनी किरणें
👉 (द) पराबैंगनी किरणें (UV Rays)
(vi) P-N संधि डायोड में अवक्षय पर्त (Depletion Layer) की मोटाई होती है:
(अ) 10-3 m(ब) 10-6 m(स) 10-9 m(द) 10-12 m
👉 (ब) 10-6 m (माइक्रोन कोटि)
प्र.2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए: (1×6 = 6 अंक)
(i) वैद्युत द्विध्रुव पर नेट आवेश ________ होता है।
शून्य (Zero)
(ii) शंट को सदैव ________ क्रम में जोड़ा जाता है।
समांतर (Parallel)
(iii) शुद्ध प्रेरकत्व युक्त AC परिपथ में धारा और वोल्टेज के बीच ________ का कलांतर होता है।
90° या π/2
(iv) आकाश का नीला दिखाई देना प्रकाश के ________ के कारण होता है।
प्रकीर्णन (Scattering)
(v) इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) ________ का मात्रक है।
ऊर्जा
(vi) NAND गेट, AND गेट और ________ गेट के संयोजन से बनता है।
NOT
प्र.3. सत्य/असत्य लिखिए: (1×5 = 5 अंक)
(i) विद्युत आवेश एक अदिश राशि है।
सत्य
(ii) धारा घनत्व एक अदिश राशि है।
असत्य (यह सदिश राशि है)
(iii) प्रतिचुंबकीय पदार्थ प्रबल चुंबकीय क्षेत्र से दुर्बल चुंबकीय क्षेत्र की ओर गति करते हैं।
सत्य
(iv) प्रकाश तंतु अपवर्तन के सिद्धांत पर कार्य करता है।
असत्य (पूर्ण आंतरिक परावर्तन पर)
(v) ज़ेनर डायोड का उपयोग वोल्टेज नियंत्रक के रूप में किया जाता है।
सत्य
प्र.4. सही जोड़ी बनाइए: (1×6 = 6 अंक)
(क) -> (ख)
(i) चुंबकीय आघूर्ण -> (क) ML2T-1
(ii) आंतरिक प्रतिरोध -> (ख) NIA
(iii) स्नेल का नियम -> (ग) Δm
(iv) प्लांक नियतांक -> (घ) q(\vec{v} \times \vec{B})
(v) द्रव्यमान क्षति -> (ङ) r = R(E/V - 1)
(vi) लॉरेंज बल -> (च) μ = sin i / sin r
सही मिलान:
(i) चुंबकीय आघूर्ण → (ख) NIA
(ii) आंतरिक प्रतिरोध → (ङ) r = R(E/V - 1)
(iii) स्नेल का नियम → (च) μ = sin i / sin r
(iv) प्लांक नियतांक → (क) ML2T-1
(v) द्रव्यमान क्षति → (ग) Δm
(vi) लॉरेंज बल → (घ) q(\vec{v} \times \vec{B})
प्र.5. एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए: (1×5 = 5 अंक)
(i) आवेश के क्वाण्टीकरण का कारण क्या है?
इलेक्ट्रॉनों का पूर्ण संख्या में स्थानांतरण।
(ii) लेंज का नियम किस संरक्षण नियम पर आधारित है?
ऊर्जा संरक्षण।
(iii) भारत में घरों में प्रयुक्त प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति कितनी होती है?
50 Hz
(iv) सबसे अधिक वेधन क्षमता किन किरणों की होती है?
गामा किरणें (γ-rays)
(v) निरोधी विभव किसे कहते हैं?
वह न्यूनतम ऋणात्मक विभव जिस पर प्रकाश-विद्युत धारा शून्य हो जाती है।
खण्ड ब: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
प्र.6. विद्युत क्षेत्र रेखाओं के कोई दो गुण लिखिए।
अथवा
समविभव पृष्ठ की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: 1. विद्युत क्षेत्र रेखाएँ धनावेश से प्रारंभ होकर ऋणावेश पर समाप्त होती हैं।
2. दो विद्युत क्षेत्र रेखाएँ कभी भी एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करतीं।
उत्तर: 1. समविभव पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर विभव समान होता है।
2. विद्युत क्षेत्र रेखाएँ समविभव पृष्ठ के सदैव लंबवत होती हैं।
प्र.7. ओम का नियम लिखिए।
अथवा
अनुगमन वेग (Drift Velocity) को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: यदि किसी चालक की भौतिक अवस्था (जैसे ताप, लंबाई) में परिवर्तन न हो, तो उसके सिरों पर लगाया गया विभवांतर (V) उसमें प्रवाहित धारा (I) के अनुक्रमानुपाती होता है। (V = IR)।
उत्तर: किसी चालक के सिरों पर विभवांतर लगाने पर, इलेक्ट्रॉन जिस नियत औसत वेग से निम्न विभव से उच्च विभव (धन सिरे) की ओर गति करते हैं, उसे अनुगमन वेग कहते हैं।
प्र.8. स्वप्रेरण (Self Induction) किसे कहते हैं?
अथवा
भंवर धाराएं (Eddy Currents) क्या हैं?
उत्तर: जब किसी कुंडली में प्रवाहित धारा के मान में परिवर्तन किया जाता है, तो उसी कुंडली में प्रेरित धारा उत्पन्न होने की घटना को स्वप्रेरण कहते हैं।
उत्तर: जब किसी चालक से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो चालक के संपूर्ण आयतन में जल में भंवर के समान प्रेरित धाराएं उत्पन्न हो जाती हैं, जिन्हें भंवर धाराएं कहते हैं।
प्र.9. लेंस की क्षमता और फोकस दूरी में संबंध लिखिए।
अथवा
प्रकाश के वर्ण विक्षेपण (Dispersion) को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: लेंस की क्षमता (P), उसकी फोकस दूरी (f) के व्युत्क्रम के बराबर होती है, जब फोकस दूरी मीटर में मापी गई हो। P = 1/f (m). मात्रक: डायोप्टर (D)।
उत्तर: जब श्वेत प्रकाश किसी प्रिज्म से गुजरता है, तो वह अपने अवयवी सात रंगों में विभक्त हो जाता है। इस घटना को वर्ण विक्षेपण कहते हैं।
प्र.10. कार्यफलन (Work Function) किसे कहते हैं?
अथवा
तापायनिक उत्सर्जन (Thermionic Emission) क्या है?
उत्तर: वह न्यूनतम ऊर्जा जो किसी धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक होती है, उस धातु का कार्यफलन कहलाती है। इसे φ0 या W से दर्शाते हैं।
उत्तर: जब किसी धातु को गर्म किया जाता है, तो उसे ऊष्मीय ऊर्जा मिलने के कारण उसकी सतह से मुक्त इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होने लगते हैं। इसे तापायनिक उत्सर्जन कहते हैं।
प्र.11. नाभिकीय बल के दो गुण लिखिए।
अथवा
समभारिक (Isobars) किसे कहते हैं?
उत्तर: 1. यह प्रकृति का सबसे प्रबल बल है।
2. यह अत्यंत लघु परास (Short Range) वाला बल है (10-15 m)।
3. यह आवेश पर निर्भर नहीं करता।
उत्तर: वे नाभिक जिनकी द्रव्यमान संख्या (A) समान होती है, लेकिन परमाणु क्रमांक (Z) भिन्न होता है, समभारिक कहलाते हैं। उदाहरण: 18Ar40 और 20Ca40.
प्र.12. मोटर और डायनेमो (जनित्र) में मुख्य अंतर क्या है?
अथवा
धारामापी की सुग्राहिता कैसे बढ़ाई जा सकती है?
उत्तर:मोटर: विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है। डायनेमो: यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
उत्तर: 1. कुंडली में फेरों की संख्या (N) बढ़ाकर।
2. शक्तिशाली चुंबक का प्रयोग करके (B बढ़ाकर)।
3. निलंबन पत्ती को पतला और लंबा लेकर (C कम करके)।
खण्ड स: लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक)
प्र.13. सेल के आंतरिक प्रतिरोध के लिए व्यंजक r = R(E/V - 1) निगमित कीजिए।
अथवा
किरचॉफ के नियमों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: माना सेल का EMF = E, आंतरिक प्रतिरोध = r, बाह्य प्रतिरोध = R।
कुल प्रतिरोध = R + r, धारा I = E / (R+r)
टर्मिनल विभवांतर V = IR
अतः E/I = R + r ⇒ r = E/I - R I = V/R रखने पर: r = E/(V/R) - R = R(E/V - 1).
उत्तर: 1. प्रथम नियम (संधि नियम): किसी विद्युत परिपथ की किसी संधि पर मिलने वाली समस्त धाराओं का बीजीय योग शून्य होता है (ΣI = 0)।
2. द्वितीय नियम (लूप नियम): किसी बंद परिपथ में प्रतिरोधों और सेलों के विभवांतरों का कुल बीजीय योग शून्य होता है (ΣV = ΣIR + ΣE = 0)।
प्र.14. एक लंबी परिनालिका के स्वप्रेरकत्व का व्यंजक ज्ञात कीजिए।
अथवा
एक समान चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान आवेश पर लगने वाले लॉरेंज बल का व्यंजक लिखिए। यह बल कब अधिकतम और कब न्यूनतम होता है?
उत्तर: परिनालिका के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र B = μ0NI/l.
कुल फ्लक्स φ = NBA = N(μ0NI/l)A = μ0N2IA/l.
स्वप्रेरकत्व L = φ/I = μ0N2A/l.
(जहाँ N = कुल फेरे, A = क्षेत्रफल, l = लंबाई)।
उत्तर:F = qvB sinθ. अधिकतम: जब θ = 90° (आवेश लंबवत गति करे), F = qvB. न्यूनतम: जब θ = 0° या 180° (समांतर गति करे), F = 0.
प्र.15. पूर्ण आंतरिक परावर्तन क्या है? इसकी शर्तें लिखिए। सिद्ध कीजिए μ = 1/sin C.
अथवा
प्रिज्म से अपवर्तन को चित्र सहित समझाइए और विचलन कोण का अर्थ बताइए।
उत्तर: जब प्रकाश सघन से विरल माध्यम में क्रांतिक कोण से अधिक आपतन कोण पर जाता है, तो वह उसी माध्यम में लौट आता है।
स्नेल नियम से: μ = sin r / sin i. क्रांतिक कोण पर i=C और r=90°.
विरल के सापेक्ष सघन का अपवर्तनांक aμg = 1/sin C.
उत्तर: (छात्र को प्रिज्म का चित्र बनाना होगा जिसमें आपतित किरण, अपवर्तित किरण और निर्गत किरण दिखाई गई हों)। विचलन कोण (δ): आपतित किरण को आगे बढ़ाने पर और निर्गत किरण को पीछे बढ़ाने पर उनके बीच जो कोण बनता है, उसे विचलन कोण कहते हैं।
प्र.16. डी-ब्रोग्ली समीकरण λ = h/mv की स्थापना कीजिए।
अथवा
आइंस्टीन का प्रकाश विद्युत समीकरण स्थापित कीजिए।
उत्तर: प्लांक के अनुसार, फोटॉन की ऊर्जा E = hν.
आइंस्टीन के अनुसार, E = mc2.
अतः mc2 = hν = h(c/λ). mc = h/λ ⇒ p = h/λ.
कण के लिए p = mv, अतः λ = h/mv.
उत्तर: आइंस्टीन के अनुसार, आपतित फोटॉन की ऊर्जा (hν) दो कार्यों में व्यय होती है:
1. कार्यफलन (φ0) के रूप में।
2. उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा (Kmax) के रूप में।
अतः hν = φ0 + Kmax.
या Kmax = hν - hν0 = h(ν - ν0).
खण्ड द: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
प्र.17. गाउस की प्रमेय का उपयोग करके एक समान आवेशित गोलीय खोल (Spherical Shell) के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए: (i) खोल के बाहर, (ii) पृष्ठ पर, (iii) खोल के अंदर।
अथवा
समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता के लिए व्यंजक C = Kε0A/d स्थापित कीजिए।
उत्तर: (i) बाहर (r > R): E = (1/4πε0) q/r2 (संपूर्ण आवेश केंद्र पर माना जा सकता है)।
(ii) पृष्ठ पर (r = R): E = (1/4πε0) q/R2.
(iii) अंदर (r < R): चूँकि अंदर कोई आवेश नहीं है (q = 0), अतः E = 0.
उत्तर: प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र E = σ/Kε0 = Q / (KAε0).
विभवांतर V = E \times d = Qd / (KAε0).
धारिता C = Q/V = Q / [Qd / (KAε0)] C = KAε0 / d.
प्र.18. ट्रांसफार्मर का सिद्धांत, बनावट और कार्यविधि का वर्णन कीजिए। इसमें होने वाली ऊर्जा हानियों का उल्लेख कीजिए।
अथवा
L-C-R श्रेणीक्रम परिपथ में प्रतिबाधा (Z) और कलांतर (φ) के लिए व्यंजक ज्ञात कीजिए।
सिद्धांत: अन्योन्य प्रेरण। बनावट: नर्म लोहे का क्रोड, प्राथमिक और द्वितीयक कुंडलियाँ। कार्यविधि: AC से क्रोड में परिवर्ती फ्लक्स उत्पन्न होता है, जिससे द्वितीयक कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल बनता है। हानियाँ: ताम्र हानि, लौह हानि (भंवर धारा + शैथिल्य), फ्लक्स क्षरण।
प्र.19. खगोलीय दूरदर्शी (Astronomical Telescope) का किरण आरेख खींचिए और इसकी आवर्धन क्षमता का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए जब अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बने।
अथवा
गोलीय उत्तल पृष्ठ पर अपवर्तन के लिए सूत्र μ/v - 1/u = (μ-1)/R की स्थापना कीजिए।
आरेख: अभिदृश्यक बड़ा और नेत्रिका छोटी फोकस दूरी की होती है। सूत्र: आवर्धन क्षमता m = -(fo/ue).
लेंस सूत्र से 1/ue = 1/fe + 1/D रखने पर: m = -(fo/fe) (1 + fe/D).
उत्तर: स्नेल के नियम μ = sin i / sin r ≈ i/r और त्रिभुज के बहिष्कोण प्रमेय (i = α + γ, r = γ - β) का उपयोग करके यह संबंध प्राप्त किया जाता है। (विस्तृत ज्यामितीय उत्पत्ति आवश्यक है)।
प्र.20. लॉजिक गेट्स (Logic Gates) क्या हैं? OR, AND, NOT, NAND और NOR गेट के संकेत और सत्यता सारणी बनाइए।
अथवा
P-N संधि डायोड का अर्द्ध-तरंग दिष्टकारी (Half Wave Rectifier) के रूप में वर्णन कीजिए।
लॉजिक गेट: डिजिटल परिपथ जो इनपुट और आउटपुट के बीच तार्किक संबंध का पालन करते हैं।
1. OR: A+B (कोई भी 1 तो आउटपुट 1)।
2. AND: A.B (दोनों 1 तो आउटपुट 1)।
3. NOT: A' (उल्टा)।
4. NAND: AND का उल्टा।
5. NOR: OR का उल्टा।
सिद्धांत: डायोड केवल अग्र अभिनति में धारा प्रवाहित करता है। कार्यविधि: AC के धनात्मक अर्धचक्र में डायोड अग्र अभिनति (चालक) होता है और धारा बहती है। ऋणात्मक अर्धचक्र में यह पश्च अभिनति (कुचालक) होता है और धारा नहीं बहती। इस प्रकार आउटपुट में केवल आधी तरंग प्राप्त होती है।
⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer):
इस प्रैक्टिस पेपर में दिए गए सभी प्रश्न एवं उत्तर केवल विद्यार्थियों के
अभ्यास और शैक्षणिक मार्गदर्शन के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।
ये प्रश्नपत्र किसी भी प्रकार से वास्तविक MP Board परीक्षा प्रश्नपत्र का
आधिकारिक या हूबहू प्रतिरूप नहीं हैं।
प्रैक्टिस पेपर में दिए गए उत्तर विषय विशेषज्ञों के अनुभव और उपलब्ध शैक्षणिक
स्रोतों के आधार पर तैयार किए गए हैं।
किसी उत्तर में त्रुटि या भिन्नता संभव है, जिसके लिए वेबसाइट/प्रकाशक
कानूनी रूप से उत्तरदायी नहीं होगा।
विद्यार्थियों को सलाह दी जाती है कि अंतिम परीक्षा तैयारी के लिए
MP Board की आधिकारिक पाठ्यपुस्तकों, पाठ्यक्रम एवं निर्देशों
को ही प्राथमिकता दें।