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कक्षा 12वीं भौतिक विज्ञान नोट्स : MP Board Class 12th Physics Blueprint, Notes & Important Questions 2026-27

MP Board Class 12th Physics Blueprint, Notes & Important Questions 2026-27 | कक्षा 12वीं भौतिक विज्ञान नोट्स, सूत्र एवं अंक योजना

MP Board Class 12th Physics Blueprint 2026-27 Class 12th Physics Notes in Hindi MPBSE MP Board 12th Physics Important Derivations कक्षा 12वीं भौतिक विज्ञान नोट्स एवं सूत्र MPBSE 12th Physics Model Paper and Numerical Questions 2026-27
माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश (MPBSE) सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 12वीं भौतिक विज्ञान (Physics) की नवीनतम अंक योजना, AI-संचालित सरल नोट्स, महत्वपूर्ण व्युत्पत्ति (Derivations), सूत्र चार्ट एवं अभ्यास प्रश्नोत्तर यहाँ देखें।

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माध्यमिक शिक्षा मण्डल, म.प्र. (MPBSE) सत्र 2026-27: कक्षा 12वीं [विषय: भौतिक विज्ञान] अध्ययन सामग्री

माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा का आधिकारिक ब्लूप्रिंट (अंक योजना) जारी कर दिया गया है। भौतिक विज्ञान (Physics) एक ऐसा विषय है जिसमें 100% सफलता प्राप्त करने के लिए सैद्धांतिक नियमों, गणितीय सूत्रों, महत्वपूर्ण व्युत्पत्तियों (Derivations) और संख्यात्मक प्रश्नों (Numericals) का संतुलित अभ्यास आवश्यक है।

विद्यार्थियों और शिक्षकों की परीक्षा तैयारी को प्रभावी और सुगम बनाने के लिए यहाँ कक्षा 12वीं भौतिक विज्ञान की अद्यतन अंक योजना पर आधारित AI-असिस्टेड संक्षिप्त नोट्स, फॉर्मूला शीट, प्रमुख व्युत्पत्तियाँ और परीक्षा-उपयोगी अभ्यास प्रश्नोत्तर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

कक्षा 12वीं भौतिक शास्त्र

सरल नोट्स, सूत्र एवं अभ्यास प्रश्नोत्तर

माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश, भोपाल | हायर सेकेण्डरी परीक्षा सत्र 2026-27

पूर्णांक — 70 | समय — 3:00 घंटे

परीक्षा प्रश्न संरचना

प्रश्नप्रकारप्रश्नप्रति प्रश्नअंक
1सही विकल्प06106
2रिक्त स्थान06106
3सत्य/असत्य05105
4सही जोड़ी06106
5एक वाक्य में उत्तर05105
6–12लघु उत्तरीय07214
13–16मध्यम उत्तरीय04312
17–20दीर्घ उत्तरीय04416
कुल70
तैयारी की प्राथमिकता: सूत्र + परिभाषाएँ + व्युत्पत्तियाँ + संख्यात्मक प्रश्न + ग्राफ/आरेख + 2/3/4 अंक के वर्णनात्मक प्रश्न।

इकाई/अध्यायों का पाठ्यक्रम — संक्षिप्त मानचित्र

अध्यायविषय
1वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र
2स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता
3विद्युत धारा
4गतिमान आवेश और चुंबकत्व
5चुंबकत्व एवं द्रव्य
6वैद्युतचुंबकीय प्रेरण
7प्रत्यावर्ती धारा
8वैद्युतचुंबकीय तरंगे
9किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
10तरंग प्रकाशिकी
11विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति
12परमाणु
13नाभिक
14अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ

अध्याय 1 — वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

1. वैद्युत आवेश

पदार्थ का वह गुण जिसके कारण विद्युत आकर्षण या प्रतिकर्षण बल उत्पन्न होता है, वैद्युत आवेश कहलाता है। आवेश दो प्रकार के होते हैं—धनात्मक और ऋणात्मक

2. चालक और विद्युतरोधी

चालक: जिनमें मुक्त इलेक्ट्रॉन आसानी से गति कर सकते हैं, जैसे ताँबा, एल्युमिनियम।

विद्युतरोधी: जिनमें मुक्त आवेश वाहक आसानी से गति नहीं करते, जैसे काँच, रबर।

3. आवेश के मूल गुण

  • आवेश का संरक्षण
  • आवेश का क्वांटीकरण
  • आवेशों की योगात्मकता
q = ne

जहाँ n पूर्णांक है तथा e इलेक्ट्रॉन का मूल आवेश है।

4. कूलॉम का नियम

दो बिंदु आवेशों के बीच वैद्युत बल उनके आवेशों के गुणनफल के समानुपाती और उनके बीच दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

F = (1/4πε₀) × |q₁q₂|/r²

5. विद्युत क्षेत्र

किसी आवेश के आसपास का वह क्षेत्र जिसमें कोई परीक्षण आवेश विद्युत बल अनुभव करता है, विद्युत क्षेत्र कहलाता है।

E = F/q₀

6. विद्युत क्षेत्र रेखाएँ

  • धनात्मक आवेश से बाहर निकलती हैं।
  • ऋणात्मक आवेश पर समाप्त होती हैं।
  • दो क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
  • जहाँ रेखाएँ सघन होती हैं, वहाँ क्षेत्र अधिक प्रबल होता है।

7. विद्युत फ्लक्स

Φ = E·A = EA cosθ

8. विद्युत द्विध्रुव

समान परिमाण के विपरीत चिन्ह वाले दो बिंदु आवेशों की बहुत कम दूरी पर स्थित व्यवस्था विद्युत द्विध्रुव कहलाती है।

p = q × 2a

9. एकसमान बाह्य क्षेत्र में द्विध्रुव

τ = pE sinθ
U = −pE cosθ

10. संतत आवेश वितरण

जब आवेश बहुत बड़ी संख्या में लगातार वितरित हो तो उसे संतत आवेश वितरण कहते हैं। यह रेखीय, पृष्ठीय या आयतन आवेश घनत्व के रूप में व्यक्त किया जाता है।

λ = dq/dl
σ = dq/dA
ρ = dq/dV

11. गाउस का नियम

Φ = qenclosed/ε₀

किसी बंद पृष्ठ से कुल विद्युत फ्लक्स उस पृष्ठ के भीतर स्थित कुल आवेश को ε₀ से भाग देने के बराबर होता है।

12. गाउस नियम के अनुप्रयोग

  • अनंत लंबी आवेशित तार
  • अनंत आवेशित समतल चादर
  • गोलकीय आवेश वितरण

2 अंक प्रश्न — उत्तर सहित

प्रश्न 1. आवेश के संरक्षण का सिद्धांत क्या है?
किसी पृथक तंत्र में कुल विद्युत आवेश का मान स्थिर रहता है। आवेश न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, केवल एक वस्तु से दूसरी में स्थानांतरित हो सकता है।
प्रश्न 2. विद्युत क्षेत्र क्या है?
किसी आवेश के आसपास का वह क्षेत्र जिसमें परीक्षण आवेश विद्युत बल का अनुभव करता है, विद्युत क्षेत्र कहलाता है। E = F/q₀
प्रश्न 3. विद्युत द्विध्रुव क्या है?
समान परिमाण के विपरीत चिन्ह वाले दो आवेशों की बहुत कम दूरी पर स्थित व्यवस्था विद्युत द्विध्रुव कहलाती है। इसका द्विध्रुव आघूर्ण p = q×2a होता है।

3 अंक प्रश्न — उत्तर सहित

प्रश्न. विद्युत क्षेत्र रेखाओं के तीन गुण लिखिए।
विद्युत क्षेत्र रेखाएँ धनात्मक आवेश से निकलती और ऋणात्मक आवेश पर समाप्त होती हैं। किसी बिंदु पर स्पर्शरेखा उस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दिशा बताती है। दो क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं। रेखाओं की सघनता क्षेत्र की तीव्रता को दर्शाती है।

4 अंक प्रश्न — उत्तर सहित

प्रश्न. गाउस के नियम को समझाइए तथा इसके उपयोग लिखिए।
गाउस के नियम के अनुसार किसी बंद पृष्ठ से कुल विद्युत फ्लक्स उस पृष्ठ के भीतर स्थित कुल आवेश को ε₀ से भाग देने के बराबर होता है। Φ = q/ε₀। यह नियम विशेष सममित आवेश वितरणों के विद्युत क्षेत्र की गणना में अत्यंत उपयोगी है। इसके द्वारा अनंत लंबी आवेशित तार, अनंत समतल चादर और गोलकीय आवेश वितरण के लिए विद्युत क्षेत्र ज्ञात किया जा सकता है।

महत्वपूर्ण संख्यात्मक

प्रश्न. दो आवेश 2 μC और 3 μC एक-दूसरे से 0.3 m दूर हैं। उनके बीच बल ज्ञात कीजिए।
F = 9×10⁹ × (2×10⁻⁶×3×10⁻⁶)/(0.3)²
= 0.6 N
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अध्याय 2 — स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता

1. स्थिरवैद्युत विभव

किसी बिंदु पर इकाई धनात्मक परीक्षण आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किए गए कार्य को उस बिंदु का स्थिरवैद्युत विभव कहते हैं।

V = W/q

2. बिंदु आवेश के कारण विभव

V = (1/4πε₀)(q/r)

3. आवेशों के निकाय के कारण विभव

V = (1/4πε₀) Σ(qᵢ/rᵢ)

4. समविभव पृष्ठ

ऐसा पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिंदु पर विद्युत विभव समान होता है, समविभव पृष्ठ कहलाता है। समविभव पृष्ठ पर आवेश को चलाने में कार्य शून्य होता है।

5. विद्युत द्विध्रुव के कारण विभव

द्विध्रुव के कारण विभव आवेश, द्विध्रुव आघूर्ण और बिंदु की स्थिति पर निर्भर करता है।

6. स्थितिज ऊर्जा

U = qV

7. चालक की स्थिरवैद्युतिकी

  • स्थिरवैद्युत संतुलन में चालक के अंदर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है।
  • अतिरिक्त आवेश चालक की सतह पर रहता है।
  • चालक का विभव समान रहता है।

8. परावैद्युत एवं ध्रुवण

ऐसा पदार्थ जो विद्युत क्षेत्र में ध्रुवित हो सकता है और संधारित्र की धारिता बढ़ा सकता है, परावैद्युत कहलाता है।

9. संधारित्र

विद्युत आवेश तथा ऊर्जा को संग्रहित करने वाला उपकरण संधारित्र कहलाता है।

C = Q/V

10. समांतर प्लेट संधारित्र

C = ε₀A/d

परावैद्युत पदार्थ भरने पर—

C = Kε₀A/d

11. संधारित्रों का संयोजन

श्रेणी संयोजन:

1/C = 1/C₁ + 1/C₂ + ...

समानांतर संयोजन:

C = C₁ + C₂ + ...

12. संचित ऊर्जा

U = 1/2 CV² = 1/2 QV = Q²/2C

2 अंक प्रश्न — उत्तर सहित

प्रश्न 1. विद्युत विभव क्या है?
किसी बिंदु पर इकाई धनात्मक परीक्षण आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किए गए कार्य को विद्युत विभव कहते हैं। V = W/q
प्रश्न 2. संधारित्र की धारिता क्या है?
संधारित्र पर संचित आवेश और उसके बीच विभवांतर के अनुपात को धारिता कहते हैं। C = Q/V

3 अंक प्रश्न — उत्तर सहित

प्रश्न. श्रेणी और समानांतर संयोजन में अंतर बताइए।
श्रेणी संयोजन में सभी संधारित्रों पर समान आवेश रहता है और तुल्य धारिता प्रत्येक व्यक्तिगत धारिता से कम होती है। समानांतर संयोजन में सभी संधारित्रों पर समान विभव रहता है और तुल्य धारिता सभी धारिताओं के योग के बराबर होती है।

4 अंक प्रश्न — उत्तर सहित

प्रश्न. संधारित्र में संचित ऊर्जा का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
संधारित्र को आवेशित करते समय किसी क्षण q आवेश पर विभव V = q/C होगा। सूक्ष्म कार्य dW = Vdq = (q/C)dq। अतः कुल ऊर्जा U = ∫₀ᴼ (q/C)dq = Q²/2C। चूँकि Q = CV, इसलिए U = 1/2 CV² = 1/2 QV = Q²/2C
प्रश्न. 4 μF संधारित्र को 100 V पर आवेशित किया गया। संचित ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
U = 1/2 CV² = 1/2 × 4×10⁻⁶ × 100² = 0.02 J
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अध्याय 3 — विद्युत धारा

1. विद्युत धारा

I = Q/t

2. ओम का नियम

V = IR

3. प्रतिरोध

R = ρL/A

4. प्रतिरोधकता

पदार्थ का वह गुण जो उसके विद्युत प्रवाह के विरोध को दर्शाता है, प्रतिरोधकता कहलाती है। इसका SI मात्रक Ωm है।

5. इलेक्ट्रॉन का अपवाह वेग

विद्युत क्षेत्र की उपस्थिति में चालक के मुक्त इलेक्ट्रॉनों का औसत निर्देशित वेग अपवाह वेग कहलाता है।

I = neAvd

6. ओम के नियम की सीमाएँ

ओम का नियम सभी पदार्थों और सभी परिस्थितियों में लागू नहीं होता। डायोड, ट्रांजिस्टर तथा कुछ इलेक्ट्रोलाइटिक पदार्थ ओमीय व्यवहार नहीं करते।

7. विद्युत शक्ति

P = VI = I²R = V²/R

8. विद्युत ऊर्जा

W = Pt

9. सेल और विद्युत वाहक बल

सेल रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है। सेल द्वारा इकाई आवेश को पूरे परिपथ में चलाने के लिए दी गई ऊर्जा को विद्युत वाहक बल (emf) कहते हैं।

10. आंतरिक प्रतिरोध

सेल के अंदर इलेक्ट्रोलाइट के कारण धारा के प्रवाह का विरोध आंतरिक प्रतिरोध कहलाता है।

11. किरचॉफ के नियम

जंक्शन नियम: किसी जंक्शन पर प्रवेश करने वाली धाराओं का योग निकलने वाली धाराओं के योग के बराबर होता है।

ΣI = 0

लूप नियम: बंद परिपथ में सभी विभव परिवर्तनों का बीजगणितीय योग शून्य होता है।

ΣV = 0

12. व्हीटस्टोन सेतु

P/Q = R/S

संतुलित अवस्था में गैल्वेनोमीटर में धारा शून्य होती है।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. ओम का नियम लिखिए।
स्थिर तापमान पर किसी चालक में धारा उसके सिरों के बीच विभवांतर के समानुपाती होती है। V = IR
प्रश्न 2. प्रतिरोधकता क्या है?
पदार्थ का वह गुण जो विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करता है, प्रतिरोधकता कहलाता है। R = ρL/A
प्रश्न 3. किरचॉफ का जंक्शन नियम क्या है?
किसी जंक्शन पर आने वाली कुल धारा जाने वाली कुल धारा के बराबर होती है। यह आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. ओम के नियम की सीमाएँ लिखिए।
ओम का नियम उन पदार्थों पर लागू नहीं होता जिनकी प्रतिरोधकता तापमान या अन्य भौतिक स्थितियों के साथ बदलती है। अर्धचालक युक्तियाँ जैसे डायोड और ट्रांजिस्टर गैर-ओमीय व्यवहार करती हैं। इलेक्ट्रोलाइट तथा गैसों में भी सामान्यतः सरल ओम का नियम लागू नहीं होता।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. किरचॉफ के दोनों नियमों को समझाइए।
जंक्शन नियम: किसी विद्युत जंक्शन पर आने वाली धाराओं का योग बाहर जाने वाली धाराओं के योग के बराबर होता है। यह आवेश संरक्षण पर आधारित है।

लूप नियम: किसी बंद लूप में सभी emf और विभव पतनों का बीजगणितीय योग शून्य होता है। यह ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है। जटिल परिपथों में अज्ञात धाराओं और विभवों को ज्ञात करने में दोनों नियम अत्यंत उपयोगी हैं।
प्रश्न. 10 Ω प्रतिरोध में 2 A धारा बह रही है। शक्ति ज्ञात कीजिए।
P = I²R = 2² × 10 = 40 W
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अध्याय 4 — गतिमान आवेश और चुंबकत्व

1. चुंबकीय बल

F = q(v × B)

परिमाण के लिए—

F = qvB sinθ

2. चुंबकीय क्षेत्र में कण की गति

यदि आवेशित कण चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत गति करे तो वह वृत्ताकार पथ में चलता है।

r = mv/qB
ω = qB/m

3. बायो-सावर्ट नियम

dB = (μ₀/4π) × (I dl sinθ/r²)

4. वृत्ताकार पाश के अक्ष पर चुंबकीय क्षेत्र

B = μ₀IR² / [2(R²+x²)3/2]

5. ऐम्पियर का परिपथीय नियम

∮B·dl = μ₀Ienclosed

6. परिनालिका

B = μ₀nI

7. दो समानांतर धारावाही तारों के बीच बल

F/L = μ₀I₁I₂/(2πd)

8. धारा पाश पर बल आघूर्ण

τ = NIAB sinθ

9. चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण

M = NIA

10. चल कुंडली गैल्वेनोमीटर

यह छोटी विद्युत धाराओं को मापने वाला उपकरण है। इसमें चुंबकीय क्षेत्र में धारा प्रवाहित कुंडली पर बल आघूर्ण के कारण संकेत मिलता है।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. चुंबकीय बल का सूत्र लिखिए।
F = qvB sinθ। यह बल वेग और चुंबकीय क्षेत्र की दिशाओं पर निर्भर करता है।
प्रश्न 2. परिनालिका क्या है?
बहुत बड़ी संख्या में पास-पास लिपटी तार की कुंडलियों से बनी लंबी बेलनाकार व्यवस्था परिनालिका कहलाती है। इसके भीतर चुंबकीय क्षेत्र लगभग समान होता है। B = μ₀nI

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान आवेशित कण की गति समझाइए।
जब आवेशित कण चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत प्रवेश करता है तो उस पर qvB बल लगता है। यह बल वेग के लंबवत होता है और अभिकेंद्रीय बल की भूमिका निभाता है। इसलिए कण वृत्ताकार पथ में चलता है और उसकी त्रिज्या r = mv/qB होती है।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. चल कुंडली गैल्वेनोमीटर का सिद्धांत और कार्यप्रणाली समझाइए।
चल कुंडली गैल्वेनोमीटर में एक हल्की कुंडली को शक्तिशाली रेडियल चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है। जब कुंडली में धारा प्रवाहित होती है तो उस पर बल आघूर्ण उत्पन्न होता है। इससे कुंडली घूमती है और संकेतक पैमाने पर विचलन देता है। संतुलन में चुंबकीय बल आघूर्ण और प्रत्यास्थ पुनर्स्थापन बल आघूर्ण बराबर होते हैं। अतः विचलन धारा के समानुपाती होता है। इसी सिद्धांत से गैल्वेनोमीटर को एमीटर तथा वोल्टमीटर में बदला जाता है।
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अध्याय 5 — चुंबकत्व एवं द्रव्य

1. छड़ चुंबक

छड़ चुंबक के दो ध्रुव होते हैं—उत्तर और दक्षिण। अकेला चुंबकीय ध्रुव अलग से प्राप्त नहीं किया जा सकता।

2. चुंबकीय द्विध्रुव

चुंबक को एक चुंबकीय द्विध्रुव के रूप में समझा जा सकता है।

3. चुंबकत्व एवं गाउस का नियम

∮B·dA = 0

किसी बंद पृष्ठ से कुल चुंबकीय फ्लक्स शून्य होता है।

4. चुंबकीकरण

बाह्य चुंबकीय क्षेत्र के कारण पदार्थ के प्रति इकाई आयतन में उत्पन्न चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण को चुंबकीकरण कहते हैं।

5. चुंबकीय गुणों के आधार पर पदार्थ

  • प्रतिचुंबकीय: कमजोर रूप से प्रतिकर्षित
  • अनुचुंबकीय: कमजोर रूप से आकर्षित
  • लौहचुंबकीय: प्रबल रूप से आकर्षित

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. प्रतिचुंबकीय पदार्थ क्या हैं?
वे पदार्थ जो चुंबकीय क्षेत्र द्वारा बहुत कमजोर रूप से प्रतिकर्षित होते हैं, प्रतिचुंबकीय पदार्थ कहलाते हैं।
प्रश्न 2. अनुचुंबकीय और लौहचुंबकीय पदार्थों में अंतर बताइए।
अनुचुंबकीय पदार्थ चुंबकीय क्षेत्र की ओर कमजोर आकर्षित होते हैं, जबकि लौहचुंबकीय पदार्थ बहुत प्रबल आकर्षण दिखाते हैं और स्थायी चुंबकत्व भी धारण कर सकते हैं।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. प्रतिचुंबकीय, अनुचुंबकीय और लौहचुंबकीय पदार्थों की तुलना कीजिए।
प्रतिचुंबकीय पदार्थ चुंबकीय क्षेत्र से कमजोर प्रतिकर्षित होते हैं। अनुचुंबकीय पदार्थ कमजोर आकर्षित होते हैं और चुंबकीय क्षेत्र हटने पर चुंबकत्व लगभग समाप्त हो जाता है। लौहचुंबकीय पदार्थ प्रबल आकर्षित होते हैं तथा स्थायी चुंबकत्व धारण कर सकते हैं।
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अध्याय 6 — वैद्युतचुंबकीय प्रेरण

1. चुंबकीय फ्लक्स

Φ = BA cosθ

2. फैराडे का प्रेरण नियम

ε = −dΦ/dt

कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होने पर प्रेरित emf उत्पन्न होती है।

3. लेंज का नियम

प्रेरित धारा की दिशा उस परिवर्तन का विरोध करती है जिसके कारण वह उत्पन्न हुई है। यह ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत से जुड़ा है।

4. गतिक emf

ε = Blv

5. स्व-प्रेरकत्व

ε = −L(dI/dt)

6. ऊर्जा

U = 1/2 LI²

7. प्रत्यावर्ती धारा जनित्र

यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने वाला उपकरण जनित्र कहलाता है। विद्युतचुंबकीय प्रेरण इसका आधार है।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. फैराडे का नियम लिखिए।
किसी परिपथ में प्रेरित emf उससे संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स के समय के साथ परिवर्तन की दर के ऋणात्मक के बराबर होती है। ε = −dΦ/dt
प्रश्न 2. लेंज का नियम क्या है?
प्रेरित धारा की दिशा उस कारण से उत्पन्न परिवर्तन का विरोध करती है जिससे वह धारा उत्पन्न हुई है।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण को कैसे दर्शाता है?
यदि प्रेरित धारा कारण उत्पन्न परिवर्तन को बढ़ाने की दिशा में होती तो बिना बाहरी कार्य के ऊर्जा उत्पन्न होती रहती। वास्तविकता में प्रेरित धारा परिवर्तन का विरोध करती है, इसलिए प्रेरित धारा प्राप्त करने के लिए बाहरी कार्य करना पड़ता है। इस प्रकार ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत संतुष्ट होता है।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. विद्युतचुंबकीय प्रेरण की घटना तथा फैराडे के नियम को समझाइए।
जब किसी परिपथ से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तब परिपथ में प्रेरित emf उत्पन्न होती है। इसे विद्युतचुंबकीय प्रेरण कहते हैं। फैराडे के अनुसार प्रेरित emf चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर के समानुपाती होती है। ε = −dΦ/dt में ऋणात्मक चिह्न लेंज के नियम को दर्शाता है। इसका उपयोग जनित्र, ट्रांसफॉर्मर और कई विद्युत उपकरणों में होता है।
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अध्याय 7 — प्रत्यावर्ती धारा

1. प्रत्यावर्ती धारा

जिस धारा की दिशा और परिमाण समय के साथ आवर्ती रूप से बदलते हैं, उसे प्रत्यावर्ती धारा कहते हैं।

i = I₀ sinωt

2. RMS मान

Irms = I₀/√2
Vrms = V₀/√2

3. प्रतिरोधक पर AC

शुद्ध प्रतिरोधक में धारा और वोल्टता समान कला में होती हैं।

4. प्रेरक पर AC

शुद्ध प्रेरक में धारा वोल्टता से 90° पीछे रहती है।

5. संधारित्र पर AC

शुद्ध संधारित्र में धारा वोल्टता से 90° आगे रहती है।

6. प्रेरकीय रिएक्टेंस

XL = ωL

7. धारितीय रिएक्टेंस

XC = 1/ωC

8. LCR परिपथ

Z = √[R² + (XL−XC)²]

9. अनुनाद

XL = XC
ω₀ = 1/√LC

10. शक्ति गुणांक

P = VrmsIrmscosφ

11. ट्रांसफॉर्मर

Vs/Vp = Ns/Np

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. RMS मान क्या है?
AC के उस समतुल्य DC मान को RMS मान कहते हैं जो समान प्रतिरोध में समान ऊष्मीय प्रभाव उत्पन्न करे। साइनाकार धारा के लिए Irms = I₀/√2
प्रश्न 2. शक्ति गुणांक क्या है?
AC परिपथ में वोल्टता और धारा के बीच कला कोण φ के cos को शक्ति गुणांक कहते हैं। Power factor = cosφ

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. LCR परिपथ में अनुनाद की अवस्था समझाइए।
अनुनाद की अवस्था में प्रेरकीय रिएक्टेंस और धारितीय रिएक्टेंस बराबर होते हैं। XL = XC। अतः शुद्ध प्रतिबाधा R के बराबर हो जाती है और धारा अधिकतम होती है। अनुनादी कोणीय आवृत्ति ω₀ = 1/√LC होती है।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. ट्रांसफॉर्मर का सिद्धांत, रचना और कार्य समझाइए।
ट्रांसफॉर्मर पारस्परिक विद्युतचुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है। इसमें प्राथमिक और द्वितीयक कुंडलियाँ लोहे के कोर पर लिपटी होती हैं। प्राथमिक कुंडली में AC देने पर बदलता हुआ चुंबकीय फ्लक्स उत्पन्न होता है, जिससे द्वितीयक में emf प्रेरित होती है। Vs/Vp = Ns/Np। यदि Ns>Np तो यह step-up और यदि Ns<Np तो step-down transformer होता है।
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अध्याय 8 — वैद्युतचुंबकीय तरंगे

1. विस्थापन धारा

बदलते विद्युत क्षेत्र से संबंधित प्रभावी धारा को विस्थापन धारा कहते हैं। यह मैक्सवेल के सिद्धांत में महत्वपूर्ण है।

2. वैद्युतचुंबकीय तरंगे

त्वरित आवेशों द्वारा उत्पन्न दोलित विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों की पारस्परिक रूप से लंबवत तथा तरंग संचरण की दिशा के भी लंबवत तरंगों को वैद्युतचुंबकीय तरंगे कहते हैं।

c = 1/√(μ₀ε₀)

3. प्रमुख गुण

  • ये अनुप्रस्थ तरंगें हैं।
  • निर्वात में प्रकाश की चाल से चलती हैं।
  • माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।
  • विद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्र समान कला में दोलित होते हैं।

4. वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम

तरंगउपयोग/विशेषता
रेडियो तरंगेंसंचार
माइक्रोवेवरडार, संचार, ओवन
अवरक्ततापीय उपयोग
दृश्य प्रकाशदृष्टि
पराबैंगनीजीवाणु नाश, फ्लोरेसेंस
X-किरणेंचिकित्सीय इमेजिंग
गामा किरणेंपरमाणु एवं चिकित्सा अनुप्रयोग

2 अंक प्रश्न

प्रश्न. वैद्युतचुंबकीय तरंगें क्या हैं?
दोलित विद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्रों से बनी अनुप्रस्थ तरंगें, जो एक-दूसरे तथा संचरण दिशा के लंबवत होती हैं, वैद्युतचुंबकीय तरंगें कहलाती हैं।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम के क्रम को समझाइए।
आवृत्ति बढ़ने के क्रम में रेडियो तरंगें, माइक्रोवेव, अवरक्त, दृश्य प्रकाश, पराबैंगनी, X-किरणें और गामा किरणें आती हैं। इनके साथ तरंगदैर्ध्य घटता और ऊर्जा बढ़ती है।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. वैद्युतचुंबकीय तरंगों के प्रमुख गुण लिखिए।
वैद्युतचुंबकीय तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं और निर्वात में प्रकाश की चाल से चलती हैं। इन्हें संचरण के लिए भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। इनके विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र परस्पर तथा तरंग संचरण की दिशा के लंबवत होते हैं और समान कला में दोलित होते हैं। इनकी ऊर्जा और संवेग दोनों होते हैं।
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अध्याय 9 — किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र

1. परावर्तन

प्रकाश का किसी सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौटना परावर्तन कहलाता है।

2. दर्पण सूत्र

1/f = 1/v + 1/u

3. आवर्धन

m = −v/u = hᵢ/h₀

4. अपवर्तन

प्रकाश का एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करते समय उसकी चाल और दिशा में परिवर्तन अपवर्तन कहलाता है।

5. स्नेल का नियम

n₁ sin i = n₂ sin r

6. पूर्ण आंतरिक परावर्तन

जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है और आपतन कोण क्रांतिक कोण से बड़ा होता है, तो प्रकाश पूर्णतः परावर्तित हो जाता है।

7. लेंस सूत्र

1/f = 1/v − 1/u

8. लेंस की शक्ति

P = 1/f

जहाँ f मीटर में है। शक्ति का मात्रक डायोप्टर है।

9. प्रिज्म

प्रिज्म में प्रकाश अपवर्तन के कारण विचलित होता है तथा श्वेत प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण भी हो सकता है।

10. प्रकाशिक यंत्र

  • मानव नेत्र
  • माइक्रोस्कोप
  • दूरबीन
  • दृष्टिदोष सुधारने वाले लेंस

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. पूर्ण आंतरिक परावर्तन की दो शर्तें लिखिए।
प्रकाश को सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना चाहिए और आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए।
प्रश्न 2. लेंस की शक्ति क्या है?
लेंस की फोकस दूरी के व्युत्क्रम को उसकी शक्ति कहते हैं। P = 1/f, जहाँ f मीटर में है।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. पूर्ण आंतरिक परावर्तन के तीन अनुप्रयोग लिखिए।
पूर्ण आंतरिक परावर्तन का उपयोग ऑप्टिकल फाइबर, प्रिज्म आधारित परावर्तन यंत्रों और चिकित्सीय एंडोस्कोपी में किया जाता है। ऑप्टिकल फाइबर में प्रकाश लंबी दूरी तक बहुत कम हानि के साथ संचरित किया जाता है।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. लेंस सूत्र और लेंस की शक्ति को समझाइए।
पतले लेंस के लिए कार्तीय संकेत परंपरा के अनुसार 1/f = 1/v − 1/u होता है। लेंस की शक्ति उसकी फोकस दूरी के व्युत्क्रम के बराबर होती है—P = 1/f, जहाँ f मीटर में है। उत्तल लेंस की शक्ति धनात्मक और अवतल लेंस की शक्ति ऋणात्मक होती है। शक्ति का SI मात्रक डायोप्टर है।
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अध्याय 10 — तरंग प्रकाशिकी

1. हाइगेंस का सिद्धांत

तरंगाग्र का प्रत्येक बिंदु द्वितीयक तरंगिकाओं का स्रोत होता है और नया तरंगाग्र इन तरंगिकाओं का लिफाफा होता है।

2. व्यतिकरण

दो कला-संबद्ध प्रकाश तरंगों के अध्यारोपण से तीव्रता में स्थान-स्थान पर परिवर्तन की घटना व्यतिकरण कहलाती है।

3. यंग का द्वि-छिद्र प्रयोग

β = λD/d

जहाँ β फ्रिंज चौड़ाई है।

4. रचनात्मक व्यतिकरण

Path difference = nλ

5. विनाशी व्यतिकरण

Path difference = (2n+1)λ/2

6. विवर्तन

प्रकाश का किसी छोटे छिद्र या बाधा के किनारों से मुड़कर फैलना विवर्तन कहलाता है।

7. ध्रुवण

प्रकाश के दोलनों को एक निश्चित तल तक सीमित करने की घटना ध्रुवण कहलाती है। इससे प्रकाश की अनुप्रस्थ प्रकृति सिद्ध होती है।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. व्यतिकरण क्या है?
दो कला-संबद्ध प्रकाश तरंगों के अध्यारोपण से तीव्रता में क्रमिक अधिकतम और न्यूनतम उत्पन्न होने की घटना व्यतिकरण कहलाती है।
प्रश्न 2. ध्रुवण क्या सिद्ध करता है?
ध्रुवण यह सिद्ध करता है कि प्रकाश तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. यंग के द्वि-छिद्र प्रयोग का महत्व बताइए।
यंग के द्वि-छिद्र प्रयोग ने प्रकाश के तरंग स्वरूप का प्रत्यक्ष प्रमाण दिया। दो सुसंगत स्रोतों से प्राप्त प्रकाश के व्यतिकरण के कारण स्क्रीन पर चमकीली और अंधेरी धारियाँ बनती हैं। इससे प्रकाश की तरंगदैर्ध्य भी निर्धारित की जा सकती है।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. यंग के द्वि-छिद्र प्रयोग में फ्रिंज चौड़ाई का व्यंजक लिखिए।
दो सुसंगत छिद्रों से निकलने वाली तरंगों के कारण स्क्रीन पर व्यतिकरण धारियाँ बनती हैं। यदि छिद्रों के बीच दूरी d, स्क्रीन की दूरी D और प्रकाश की तरंगदैर्ध्य λ है, तो समीपवर्ती दो समान प्रकृति की धारियों के बीच दूरी β = λD/d होती है। इसे फ्रिंज चौड़ाई कहते हैं। अतः फ्रिंज चौड़ाई तरंगदैर्ध्य और स्क्रीन दूरी के समानुपाती तथा छिद्र दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
प्रश्न. λ = 600 nm, D = 1.5 m और d = 0.5 mm हो तो फ्रिंज चौड़ाई ज्ञात कीजिए।
β = λD/d = (600×10⁻⁹×1.5)/(0.5×10⁻³) = 1.8×10⁻³ m = 1.8 mm
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अध्याय 11 — विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

1. इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन

धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन निकालने की घटना इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन कहलाती है। इसके लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

2. प्रकाश-विद्युत प्रभाव

उचित आवृत्ति के प्रकाश को धातु की सतह पर डालने पर इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन प्रकाश-विद्युत प्रभाव कहलाता है।

3. आइंस्टाइन का प्रकाश-विद्युत समीकरण

hν = φ + Kmax
Kmax = hν − φ = eV₀

4. कार्य फलन

धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को कार्य फलन कहते हैं।

5. देहली आवृत्ति

ν₀ = φ/h

6. फोटॉन

प्रकाश ऊर्जा के छोटे-छोटे पैकेटों को फोटॉन कहते हैं।

E = hν = hc/λ

7. द्रव्य की तरंग प्रकृति

डी-ब्रॉग्ली ने प्रस्तावित किया कि प्रत्येक गतिमान कण से एक तरंग संबद्ध होती है।

λ = h/p = h/mv

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. प्रकाश-विद्युत प्रभाव क्या है?
उचित आवृत्ति के प्रकाश के धातु की सतह पर पड़ने से इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन प्रकाश-विद्युत प्रभाव कहलाता है।
प्रश्न 2. फोटॉन की ऊर्जा का सूत्र लिखिए।
E = hν = hc/λ

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. प्रकाश-विद्युत प्रभाव प्रकाश के कणीय स्वभाव का प्रमाण क्यों है?
प्रकाश-विद्युत प्रभाव में इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन देहली आवृत्ति पर निर्भर करता है और अधिकतम गतिज ऊर्जा प्रकाश की आवृत्ति के साथ बदलती है। प्रकाश की तीव्रता बढ़ाने पर फोटोधारा बढ़ सकती है लेकिन अधिकतम गतिज ऊर्जा सीधे नहीं बढ़ती। ये तथ्य फोटॉन आधारित कणीय मॉडल से स्पष्ट होते हैं।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. आइंस्टाइन का प्रकाश-विद्युत समीकरण समझाइए।
आइंस्टाइन के अनुसार प्रकाश फोटॉन के रूप में ऊर्जा लेकर आता है। प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा hν होती है। इसका एक भाग धातु का कार्य फलन φ पूरा करने में खर्च होता है और शेष ऊर्जा उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा बनती है। अतः hν = φ + Kmax या Kmax = hν − φ = eV₀। इससे देहली आवृत्ति की अवधारणा भी स्पष्ट होती है।
प्रश्न. किसी फोटॉन की आवृत्ति 6×10¹⁴ Hz है। उसकी ऊर्जा ज्ञात कीजिए। (h = 6.63×10⁻³⁴ J s)
E = hν = 6.63×10⁻³⁴ × 6×10¹⁴ = 3.978×10⁻¹⁹ J
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अध्याय 12 — परमाणु

1. रदरफोर्ड का नाभिकीय मॉडल

रदरफोर्ड के α-कण प्रकीर्णन प्रयोग से निष्कर्ष निकला कि परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त है तथा उसका धनात्मक आवेश और लगभग पूरा द्रव्यमान एक छोटे नाभिक में केंद्रित है।

2. परमाण्वीय स्पेक्ट्रम

परमाणु द्वारा उत्सर्जित या अवशोषित प्रकाश की तरंगदैर्ध्यों का विशिष्ट समूह परमाण्वीय स्पेक्ट्रम कहलाता है।

3. बोर का मॉडल

  • इलेक्ट्रॉन कुछ स्थिर कक्षाओं में घूमते हैं।
  • स्थिर कक्षा में ऊर्जा का विकिरण नहीं होता।
  • कक्षीय कोणीय संवेग क्वांटित होता है।
mvr = nh/2π

4. हाइड्रोजन परमाणु की ऊर्जा

Eₙ = −13.6/n² eV

5. हाइड्रोजन लाइन स्पेक्ट्रम

1/λ = R(1/n₁² − 1/n₂²)

6. दे-ब्रॉग्ली व्याख्या

इलेक्ट्रॉन को पदार्थ तरंग मानने पर बोर का कोणीय संवेग क्वांटीकरण सिद्ध किया जा सकता है।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. रदरफोर्ड मॉडल की एक प्रमुख कमी बताइए।
शास्त्रीय सिद्धांत के अनुसार घूमता हुआ इलेक्ट्रॉन ऊर्जा विकीर्ण करके नाभिक में गिर जाना चाहिए, इसलिए रदरफोर्ड मॉडल परमाणु की स्थिरता नहीं समझा सका।
प्रश्न 2. बोर की दूसरी अभिगृहीत लिखिए।
इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं स्थिर कक्षाओं में घूम सकता है जिनके लिए उसका कोणीय संवेग mvr = nh/2π हो।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. बोर मॉडल की मुख्य अभिगृहीत लिखिए।
इलेक्ट्रॉन निश्चित स्थिर कक्षाओं में घूमते हैं, जिनमें ऊर्जा का विकिरण नहीं होता। इन स्थिर कक्षाओं में कोणीय संवेग क्वांटित होता है। इलेक्ट्रॉन एक कक्षा से दूसरी कक्षा में जाने पर ही ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण करता है और ऊर्जा का अंतर hν के बराबर होता है।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. बोर मॉडल की सहायता से हाइड्रोजन परमाणु की ऊर्जा का महत्व समझाइए।
बोर मॉडल में इलेक्ट्रॉन निश्चित ऊर्जा स्तरों में रहता है। हाइड्रोजन परमाणु के लिए ऊर्जा Eₙ = −13.6/n² eV होती है। ऋणात्मक चिन्ह बताता है कि इलेक्ट्रॉन बंधी अवस्था में है। इलेक्ट्रॉन जब उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर में आता है तो ऊर्जा का एक फोटॉन उत्सर्जित होता है। विभिन्न ऊर्जा स्तरों के अंतर से हाइड्रोजन का लाइन स्पेक्ट्रम प्राप्त होता है।
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अध्याय 13 — नाभिक

1. नाभिक की संरचना

नाभिक प्रोटॉन और न्यूट्रॉन से मिलकर बना होता है। इन्हें सामूहिक रूप से न्यूक्लिऑन कहते हैं।

2. परमाणु द्रव्यमान

परमाणु द्रव्यमान सामान्यतः परमाणु द्रव्यमान इकाई u में व्यक्त किया जाता है।

3. नाभिक का आकार

R = R₀A1/3

4. द्रव्यमान-ऊर्जा समतुल्यता

E = mc²

5. बंधन ऊर्जा

नाभिक को उसके न्यूक्लिऑनों में पूर्णतः विभाजित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा बंधन ऊर्जा कहलाती है।

BE = Δmc²

6. नाभिकीय बल

नाभिक के न्यूक्लिऑनों के बीच कार्य करने वाला अत्यंत प्रबल तथा अल्प परास का बल नाभिकीय बल कहलाता है।

7. रेडियोऐक्टिवता

अस्थिर नाभिकों का स्वतः α, β या γ विकिरण उत्सर्जित करते हुए स्थिर होने की प्रक्रिया रेडियोऐक्टिवता कहलाती है।

8. क्षय नियम

N = N₀e−λt

9. अर्ध-आयु

T₁/₂ = 0.693/λ

10. नाभिकीय ऊर्जा

नाभिकीय विखंडन और संलयन से बड़ी मात्रा में ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. रेडियोऐक्टिवता क्या है?
अस्थिर परमाणु नाभिकों का स्वतः α, β या γ विकिरण उत्सर्जित करते हुए अधिक स्थिर नाभिक में बदलना रेडियोऐक्टिवता कहलाता है।
प्रश्न 2. अर्ध-आयु क्या है?
किसी रेडियोधर्मी पदार्थ की प्रारंभिक नाभिक संख्या के आधी रह जाने में लगा समय उसकी अर्ध-आयु कहलाता है। T₁/₂ = 0.693/λ

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. नाभिकीय बंधन ऊर्जा क्या है?
नाभिक को उसके प्रोटॉन और न्यूट्रॉन में अलग करने के लिए आवश्यक ऊर्जा नाभिकीय बंधन ऊर्जा कहलाती है। यह द्रव्यमान दोष से संबंधित है और BE = Δmc² द्वारा ज्ञात की जा सकती है। अधिक बंधन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऑन सामान्यतः अधिक स्थिर नाभिक का संकेत देती है।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. रेडियोधर्मी क्षय नियम को समझाइए।
रेडियोधर्मी पदार्थ में क्षय की दर उस समय उपस्थित नाभिकों की संख्या के समानुपाती होती है। अतः dN/dt = −λN। इसका समाकलन करने पर N = N₀e−λt प्राप्त होता है। यहाँ λ क्षय नियतांक है। अर्ध-आयु T₁/₂ = 0.693/λ होती है। रेडियोधर्मी क्षय स्वतःस्फूर्त होता है और सामान्य भौतिक परिस्थितियाँ इसकी दर को सामान्यतः प्रभावित नहीं करतीं।
प्रश्न. किसी पदार्थ की क्षय नियतांक λ = 0.231 s⁻¹ है। अर्ध-आयु ज्ञात कीजिए।
T₁/₂ = 0.693/0.231 = 3 s
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अध्याय 14 — अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ

1. चालक, कुचालक और अर्धचालक

जिन पदार्थों की विद्युत चालकता चालकों से कम और कुचालकों से अधिक होती है, वे अर्धचालक कहलाते हैं। सिलिकॉन और जर्मेनियम प्रमुख उदाहरण हैं।

2. नैज अर्धचालक

शुद्ध अर्धचालक को नैज अर्धचालक कहते हैं। इसमें इलेक्ट्रॉन और होल की सांद्रता समान होती है।

3. अपद्रव्यी अर्धचालक

शुद्ध अर्धचालक में नियंत्रित मात्रा में अशुद्धि मिलाकर चालकता बढ़ाई जाती है।

4. n-प्रकार

पंचसंयोजी अशुद्धि मिलाने पर n-प्रकार अर्धचालक प्राप्त होता है। इसमें इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक वाहक होते हैं।

5. p-प्रकार

त्रिसंयोजी अशुद्धि मिलाने पर p-प्रकार अर्धचालक प्राप्त होता है। इसमें होल बहुसंख्यक वाहक होते हैं।

6. p-n संधि

p और n प्रकार अर्धचालकों के संपर्क से p-n संधि बनती है। इसके पास depletion region और barrier potential बनता है।

7. डायोड

p-n संधि पर आधारित दो-टर्मिनल अर्धचालक युक्ति डायोड कहलाती है।

8. अग्र अभिनति

p-पक्ष को धनात्मक और n-पक्ष को ऋणात्मक टर्मिनल से जोड़ने पर अग्र अभिनति होती है।

9. प्रतिलोम अभिनति

p-पक्ष को ऋणात्मक और n-पक्ष को धनात्मक टर्मिनल से जोड़ने पर प्रतिलोम अभिनति होती है।

10. दिष्टकारी

AC को DC में बदलने की प्रक्रिया दिष्टकरण कहलाती है। डायोड का उपयोग दिष्टकारी के रूप में किया जाता है।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. नैज अर्धचालक क्या है?
शुद्ध अर्धचालक को नैज अर्धचालक कहते हैं। इसमें तापीय संतुलन पर इलेक्ट्रॉन और होल की संख्या समान होती है।
प्रश्न 2. n-प्रकार अर्धचालक क्या है?
शुद्ध अर्धचालक में पंचसंयोजी अशुद्धि मिलाने से n-प्रकार अर्धचालक बनता है। इसमें इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक वाहक होते हैं।
प्रश्न 3. p-n संधि क्या है?
p-प्रकार और n-प्रकार अर्धचालकों के संपर्क क्षेत्र को p-n संधि कहते हैं। इसके आसपास depletion region बनता है।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. p-प्रकार और n-प्रकार अर्धचालक में अंतर बताइए।
p-प्रकार अर्धचालक त्रिसंयोजी अशुद्धि मिलाने से बनता है और इसमें होल बहुसंख्यक वाहक होते हैं। n-प्रकार पंचसंयोजी अशुद्धि से बनता है और इसमें इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक वाहक होते हैं। दोनों में अल्पसंख्यक वाहक भी उपस्थित रहते हैं।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. p-n जंक्शन डायोड का दिष्टकारी के रूप में उपयोग समझाइए।
p-n जंक्शन डायोड धारा को मुख्यतः एक दिशा में प्रवाहित होने देता है। अग्र अभिनति में अवरोध कम हो जाता है और धारा प्रवाहित होती है, जबकि प्रतिलोम अभिनति में अवरोध बढ़ता है और धारा बहुत कम होती है। इसी एकदिशीय चालकता के कारण डायोड का उपयोग AC को स्पंदित DC में बदलने के लिए दिष्टकारी परिपथों में किया जाता है। अर्ध-तरंग और पूर्ण-तरंग दिष्टकारी इसके प्रमुख रूप हैं।

कक्षा 12वीं भौतिक विज्ञान — सबसे महत्वपूर्ण सूत्र

अध्यायमहत्वपूर्ण सूत्र
वैद्युत आवेशF = (1/4πε₀) q₁q₂/r²
विद्युत क्षेत्रE = F/q₀
विद्युत फ्लक्सΦ = EA cosθ
द्विध्रुव आघूर्णp = q×2a
गाउस नियमΦ = q/ε₀
विभवV = W/q
बिंदु आवेश का विभवV = (1/4πε₀)(q/r)
धारिताC = Q/V
समांतर प्लेट संधारित्रC = ε₀A/d
संधारित्र ऊर्जाU = 1/2CV²
धाराI = Q/t
ओम नियमV = IR
प्रतिरोधR = ρL/A
शक्तिP = VI = I²R = V²/R
अपवाह धाराI = neAvd
चुंबकीय बलF = qvB sinθ
लोरेंत्ज बलF = q(E + v×B)
परिनालिकाB = μ₀nI
धारा पाश आघूर्णτ = NIAB sinθ
चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्णM = NIA
फैराडे नियमε = −dΦ/dt
गतिक emfε = Blv
प्रेरक ऊर्जाU = 1/2LI²
AC RMSIrms = I₀/√2
प्रेरकीय रिएक्टेंसXL = ωL
धारितीय रिएक्टेंसXC = 1/ωC
LCR प्रतिबाधाZ = √[R²+(XL−XC)²]
अनुनादω₀ = 1/√LC
शक्तिP = VrmsIrmscosφ
ट्रांसफॉर्मरVs/Vp = Ns/Np
EM तरंगc = 1/√(μ₀ε₀)
दर्पण1/f = 1/v + 1/u
दर्पण आवर्धनm = −v/u
लेंस1/f = 1/v − 1/u
लेंस शक्तिP = 1/f
स्नेल नियमn₁sin i = n₂sin r
YDS फ्रिंज चौड़ाईβ = λD/d
फोटॉन ऊर्जाE = hν = hc/λ
फोटोइलेक्ट्रिक समीकरणhν = φ + Kmax
डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्यλ = h/p = h/mv
बोर कोणीय संवेगmvr = nh/2π
बोर ऊर्जाEₙ = −13.6/n² eV
नाभिक त्रिज्याR = R₀A1/3
द्रव्यमान-ऊर्जाE = mc²
रेडियोधर्मी क्षयN = N₀e−λt
अर्ध-आयुT₁/₂ = 0.693/λ

अत्यंत महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न — उत्तर सहित

सही विकल्प

  1. आवेश का SI मात्रक है— कूलॉम
  2. कूलॉम नियम किसके बीच बल बताता है? — दो बिंदु आवेशों के बीच
  3. विद्युत क्षेत्र का SI मात्रक है— N/C
  4. संधारित्र की धारिता का SI मात्रक है— फैरड
  5. ओम के नियम का समीकरण है— V = IR
  6. विद्युत शक्ति का एक सूत्र है— P = VI
  7. चुंबकीय बल का सूत्र है— qvB sinθ
  8. फैराडे का नियम किससे संबंधित है? — विद्युतचुंबकीय प्रेरण
  9. LCR अनुनाद में— XL = XC
  10. EM तरंगों को संचरण के लिए माध्यम— आवश्यक नहीं
  11. लेंस की शक्ति का मात्रक— डायोप्टर
  12. फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव किसका प्रमाण है? — प्रकाश का कणीय स्वभाव
  13. बोर मॉडल में कोणीय संवेग— क्वांटित
  14. रेडियोधर्मी अर्ध-आयु का सूत्र— 0.693/λ
  15. n-प्रकार अर्धचालक में बहुसंख्यक वाहक— इलेक्ट्रॉन

रिक्त स्थान — उत्तर सहित

  1. आवेश का SI मात्रक ________ है। — कूलॉम
  2. विद्युत क्षेत्र E = ________। — F/q
  3. संधारित्र की धारिता C = ________। — Q/V
  4. ओम का नियम V = ________। — IR
  5. विद्युत शक्ति P = ________। — VI
  6. चुंबकीय बल F = ________। — qvB sinθ
  7. फैराडे नियम ε = ________। — −dΦ/dt
  8. AC का RMS मान I₀/________ होता है। — √2
  9. लेंस की शक्ति P = ________। — 1/f
  10. फोटॉन की ऊर्जा E = ________। —

सत्य / असत्य — उत्तर सहित

  1. आवेश क्वांटित होता है। — सत्य
  2. विद्युत क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को काट सकती हैं। — असत्य
  3. संधारित्र विद्युत ऊर्जा संग्रहित कर सकता है। — सत्य
  4. ओम का नियम सभी पदार्थों पर लागू होता है। — असत्य
  5. चुंबकीय क्षेत्र स्थिर आवेश पर बल लगाता है। — असत्य
  6. EM तरंगें निर्वात में चल सकती हैं। — सत्य
  7. ध्रुवण प्रकाश की अनुप्रस्थ प्रकृति सिद्ध करता है। — सत्य
  8. फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव के लिए देहली आवृत्ति आवश्यक है। — सत्य
  9. p-प्रकार अर्धचालक में होल बहुसंख्यक वाहक हैं। — सत्य
  10. ट्रांसफॉर्मर DC पर सामान्यतः कार्य करता है। — असत्य

सही जोड़ी — उत्तर सहित

कॉलम Aकॉलम B
1. कूलॉमआवेश
2. फैरडधारिता
3. ओमप्रतिरोध
4. टेस्लाचुंबकीय क्षेत्र
5. डायोप्टरलेंस शक्ति
6. हर्ट्जआवृत्ति

एक वाक्य में उत्तर

  1. कूलॉम नियम क्या बताता है? — दो बिंदु आवेशों के बीच विद्युत बल।
  2. धारिता का SI मात्रक क्या है? — फैरड।
  3. ओम का नियम क्या है? — V = IR।
  4. फैराडे का नियम किससे संबंधित है? — विद्युतचुंबकीय प्रेरण।
  5. AC का RMS मान क्या है? — I₀/√2।
  6. दृश्य प्रकाश किस स्पेक्ट्रम का भाग है? — वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम।
  7. फोटॉन की ऊर्जा क्या है? — E = hν।
  8. बोर का मॉडल किस परमाणु के लिए सफल है? — हाइड्रोजन जैसे एक-इलेक्ट्रॉन परमाणु के लिए।
  9. रेडियोधर्मी क्षय का मूल नियम क्या है? — क्षय दर उपस्थित नाभिकों की संख्या के समानुपाती होती है।
  10. n-प्रकार अर्धचालक में बहुसंख्यक वाहक कौन हैं? — इलेक्ट्रॉन।

संभावित संख्यात्मक प्रश्न — उत्तर सहित

प्रश्न 1. 5 Ω प्रतिरोध में 4 A धारा बह रही है। विभवांतर ज्ञात कीजिए।
V = IR = 4×5 = 20 V
प्रश्न 2. 220 V और 5 A के उपकरण की शक्ति ज्ञात कीजिए।
P = VI = 220×5 = 1100 W
प्रश्न 3. 10 μF संधारित्र को 200 V पर चार्ज किया गया। ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
U = 1/2CV² = 1/2×10×10⁻⁶×200² = 0.2 J
प्रश्न 4. किसी धारावाही चालक में 3 A धारा तथा चुंबकीय क्षेत्र 0.5 T है। चालक की लंबाई 2 m और कोण 90° है। बल ज्ञात कीजिए।
F = BIL sin90° = 0.5×3×2 = 3 N
प्रश्न 5. किसी कुंडली से संबद्ध फ्लक्स 0.5 Wb से 0.1 Wb तक 0.2 s में बदलता है। औसत प्रेरित emf ज्ञात कीजिए।
ε = ΔΦ/Δt = (0.5−0.1)/0.2 = 2 V
प्रश्न 6. AC का अधिकतम धारा मान 10 A है। RMS मान ज्ञात कीजिए।
Irms = I₀/√2 = 10/√2 = 7.07 A
प्रश्न 7. 600 nm तरंगदैर्ध्य वाले प्रकाश की आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
ν = c/λ = 3×10⁸/(600×10⁻⁹) = 5×10¹⁴ Hz
प्रश्न 8. इलेक्ट्रॉन 2×10⁶ m/s की चाल से चल रहा है। उसकी डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य का सूत्र लिखते हुए गणना कीजिए।
λ = h/mv
= 6.63×10⁻³⁴/(9.1×10⁻³¹×2×10⁶)
3.64×10⁻¹⁰ m
प्रश्न 9. किसी रेडियोधर्मी पदार्थ की अर्ध-आयु 10 दिन है। 20 दिन बाद कितने अंश शेष रहेगा?
20 दिन = 2 अर्ध-आयु। शेष अंश = (1/2)² = 1/4
प्रश्न 10. किसी 2 D शक्ति वाले लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
P = 1/f
f = 1/2 = 0.5 m
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कक्षा 12वीं भौतिक विज्ञान — 50 अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न

  1. कूलॉम का नियम लिखिए।
  2. आवेश के संरक्षण एवं क्वांटीकरण को समझाइए।
  3. विद्युत क्षेत्र और विद्युत फ्लक्स की परिभाषा दीजिए।
  4. गाउस का नियम और उसके अनुप्रयोग लिखिए।
  5. विद्युत द्विध्रुव का आघूर्ण क्या है?
  6. समविभव पृष्ठ क्या है?
  7. संधारित्र की धारिता किन कारकों पर निर्भर करती है?
  8. संधारित्र में संचित ऊर्जा का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
  9. ओम के नियम की सीमाएँ लिखिए।
  10. प्रतिरोधकता और चालकता समझाइए।
  11. किरचॉफ के नियम लिखिए।
  12. व्हीटस्टोन सेतु का सिद्धांत समझाइए।
  13. चुंबकीय बल का सूत्र लिखिए।
  14. बायो-सावर्ट नियम समझाइए।
  15. ऐम्पियर का परिपथीय नियम लिखिए।
  16. दो समानांतर धारावाही तारों के बीच बल का व्यंजक लिखिए।
  17. चल कुंडली गैल्वेनोमीटर का सिद्धांत लिखिए।
  18. प्रतिचुंबकीय, अनुचुंबकीय और लौहचुंबकीय पदार्थों में अंतर बताइए।
  19. फैराडे के विद्युतचुंबकीय प्रेरण नियम लिखिए।
  20. लेंज का नियम और ऊर्जा संरक्षण समझाइए।
  21. गतिक emf क्या है?
  22. AC का RMS मान क्या है?
  23. LCR परिपथ में अनुनाद क्या है?
  24. ट्रांसफॉर्मर का सिद्धांत एवं कार्य लिखिए।
  25. वैद्युतचुंबकीय तरंगों के गुण लिखिए।
  26. वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम का क्रम लिखिए।
  27. दर्पण सूत्र एवं आवर्धन लिखिए।
  28. पूर्ण आंतरिक परावर्तन की शर्तें लिखिए।
  29. लेंस सूत्र और शक्ति लिखिए।
  30. प्रिज्म में विचलन समझाइए।
  31. हाइगेंस सिद्धांत लिखिए।
  32. व्यतिकरण एवं विवर्तन में अंतर बताइए।
  33. यंग के द्वि-छिद्र प्रयोग का सिद्धांत लिखिए।
  34. ध्रुवण प्रकाश की अनुप्रस्थ प्रकृति कैसे सिद्ध करता है?
  35. प्रकाश-विद्युत प्रभाव समझाइए।
  36. आइंस्टाइन का प्रकाश-विद्युत समीकरण लिखिए।
  37. फोटॉन क्या है?
  38. डी-ब्रॉग्ली परिकल्पना क्या है?
  39. रदरफोर्ड मॉडल की सीमाएँ बताइए।
  40. बोर मॉडल की अभिगृहीत लिखिए।
  41. हाइड्रोजन परमाणु की ऊर्जा का सूत्र लिखिए।
  42. नाभिक का आकार किस सूत्र से ज्ञात होता है?
  43. द्रव्यमान दोष और बंधन ऊर्जा समझाइए।
  44. रेडियोधर्मी क्षय का नियम लिखिए।
  45. अर्ध-आयु क्या है?
  46. नाभिकीय विखंडन एवं संलयन में अंतर बताइए।
  47. नैज और अपद्रव्यी अर्धचालक में अंतर बताइए।
  48. p-प्रकार और n-प्रकार अर्धचालक में अंतर बताइए।
  49. p-n संधि और depletion region समझाइए।
  50. डायोड का दिष्टकारी के रूप में उपयोग समझाइए।

एक नजर में — पूरे पाठ्यक्रम का त्वरित रिवीजन

अध्याय 1
आवेश • कूलॉम • E • फ्लक्स • द्विध्रुव • गाउस नियम
अध्याय 2
विभव • समविभव • संधारित्र • धारिता • ऊर्जा
अध्याय 3
I • V=IR • R=ρL/A • शक्ति • Kirchhoff • Wheatstone
अध्याय 4
चुंबकीय बल • Biot-Savart • Ampere • Solenoid • Galvanometer
अध्याय 5
चुंबकीकरण • Gauss law • Dia/Para/Ferro
अध्याय 6
Flux • Faraday • Lenz • Motional emf • Generator
अध्याय 7
AC • RMS • XL • XC • LCR • Resonance • Transformer
अध्याय 8
Displacement current • EM waves • Spectrum
अध्याय 9
Reflection • Refraction • TIR • Lens • Prism • Optical instruments
अध्याय 10
Huygens • Interference • YDSE • Diffraction • Polarisation
अध्याय 11
Photoelectric effect • Photon • Einstein • de Broglie
अध्याय 12
Rutherford • Bohr • Energy levels • Spectrum
अध्याय 13
Nucleus • Mass defect • Binding energy • Radioactivity • Nuclear energy
अध्याय 14
Semiconductor • p/n type • p-n junction • Diode • Rectifier

परीक्षा से पहले अंतिम चेकलिस्ट

  • सभी सूत्रों को कम से कम दो बार लिखकर अभ्यास करें।
  • SI मात्रक और विमाएँ याद करें।
  • कूलॉम नियम, गाउस नियम और विद्युत द्विध्रुव के प्रश्न तैयार करें।
  • संधारित्र के श्रृंखला एवं समानांतर संयोजन पर प्रश्न हल करें।
  • ओम नियम, Kirchhoff और Wheatstone bridge के संख्यात्मक अभ्यास करें।
  • Biot-Savart, Ampere तथा moving charge के सूत्र याद करें।
  • Galvanometer, Generator और Transformer के सिद्धांत तैयार करें।
  • AC में RMS, reactance, impedance, power factor और resonance पर विशेष ध्यान दें।
  • Electromagnetic spectrum का क्रम और उपयोग याद करें।
  • दर्पण एवं लेंस के सूत्र और sign convention दोहराएँ।
  • YDSE, fringe width, diffraction तथा polarisation तैयार करें।
  • Photoelectric equation और de Broglie relation के संख्यात्मक प्रश्न करें।
  • Bohr model के energy levels और hydrogen spectrum याद करें।
  • Binding energy, mass defect, radioactive decay और half-life के numericals करें।
  • p-type, n-type, p-n junction और rectifier के diagram सहित अभ्यास करें।
  • 2 अंक के उत्तर में परिभाषा + सूत्र/मुख्य तथ्य लिखें।
  • 3 अंक में सिद्धांत + तीन प्रमुख बिंदु/चरण लिखें।
  • 4 अंक में सिद्धांत + व्युत्पत्ति/व्याख्या + निष्कर्ष लिखें।
भौतिक विज्ञान की उत्तर लेखन रणनीति: जहाँ भी संभव हो परिभाषा → सिद्धांत → सूत्र → SI मात्रक → गणना/आरेख → अंतिम उत्तर का क्रम अपनाएँ। संख्यात्मक प्रश्नों में केवल अंतिम उत्तर न लिखें; सूत्र, मान रखना, इकाई और अंतिम परिणाम अवश्य दिखाएँ।

इस अध्ययन सामग्री की मुख्य विशेषताएँ

  • ब्लूप्रिंट एवं संशोधित पाठ्यक्रम अनुरूप: 70 अंक की सैद्धांतिक परीक्षा के लिए 1, 2, 3 एवं 4/5 अंक वाले प्रश्नों का सटीक वर्गीकरण।
  • महत्वपूर्ण व्युत्पत्तियाँ (Key Derivations): गॉस का नियम, लेंस निर्माता सूत्र (Lens Maker's Formula), हाइगेंस का तरंग सिद्धांत, प्रिज्म का सूत्र, व्हीटस्टोन सेतु आदि की चरणबद्ध व्याख्या।
  • अध्यायवार सूत्र चार्ट (Formula Sheet): न्यूमेरिकल प्रश्नों को आसानी से हल करने के लिए सभी प्रमुख भौतिक राशियों के सूत्र, मात्रक (SI Units) एवं विमीय सूत्र।
  • नामांकित चित्र एवं परिपथ आरेख: ट्रांसफॉर्मर, जनरेटर, संयुक्त सूक्ष्मदर्शी, खगोलीय दूरदर्शी और p-n संधि डायोड के स्पष्ट नामांकित रेखाचित्र।

परीक्षा-उपयोगी प्रश्न बैंक:

  • वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ / रिक्त स्थान / सही जोड़ी / एक शब्द उत्तर): 28 अंक के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की विशेष तैयारी।
  • अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक): मूलभूत परिभाषाएं, नियम और कारण स्पष्ट करने वाले प्रश्न।
  • लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक): वैचारिक प्रश्न एवं मानक न्यूमेरिकल समस्याएं।
  • दीर्घ उत्तरीय / विश्लेषणात्मक प्रश्न (4/5 अंक): प्रमुख सिद्धांतों का विस्तार एवं बड़े व्युत्पत्ति-आधारित प्रश्न।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

अस्वीकरण (Disclaimer): इस पोस्ट में उपलब्ध कराई गई अंक योजना, पाठ्यक्रम और अध्ययन सामग्री माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश (MPBSE) के आधिकारिक दिशा-निर्देशों एवं सत्र 2026-27 के शैक्षणिक प्रारूप पर आधारित है। यह सामग्री केवल विद्यार्थियों के स्व-अध्ययन, अभ्यास और मार्गदर्शन के उद्देश्य से तैयार की गई है। परीक्षा से संबंधित किसी भी प्रकार के आधिकारिक संशोधन, प्रायोगिक परीक्षा दिशा-निर्देश अथवा अंतिम घोषणा के लिए माध्यमिक शिक्षा मण्डल, म.प्र. की आधिकारिक वेबसाइट (mpbse.nic.in) पर जारी सूचनाओं को ही अंतिम रूप से प्रामाणिक माना जाए।

 

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कक्षा 12वीं राजनीति विज्ञान नोट्स : MP Board Class 12th Political Science Blueprint, Notes & Important Questions 2026-27

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माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश (MPBSE) सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 12वीं राजनीति विज्ञान (भाग 1 एवं 2) की नवीन अंक योजना, AI-संचालित सरल नोट्स, समसामयिक विश्लेषणात्मक प्रश्नोत्तर और मॉडल पेपर यहाँ से देखें।

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माध्यमिक शिक्षा मण्डल, म.प्र. (MPBSE) सत्र 2026-27: कक्षा 12वीं [विषय: राजनीति विज्ञान] अध्ययन सामग्री

माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा की आधिकारिक अंक योजना (Blueprint) जारी कर दी गई है। राजनीति विज्ञान में समकालीन वैश्विक राजनीति और स्वतंत्र भारत के राजनीतिक घटनाक्रमों का विश्लेषणात्मक अध्ययन आवश्यक होता है। सटीक उत्तर लेखन और अवधारणात्मक स्पष्टता से विद्यार्थी इस विषय में उत्कृष्ट अंक अर्जित कर सकते हैं।

विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुविधा के लिए यहाँ कक्षा 12वीं राजनीति विज्ञान (भाग 1: समकालीन विश्व राजनीति एवं भाग 2: स्वतंत्र भारत में राजनीति) की अद्यतन अंक योजना पर आधारित AI-असिस्टेड सरल नोट्स, महत्वपूर्ण अवधारणाएँ एवं परीक्षा-उपयोगी अभ्यास प्रश्नोत्तर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

इस अध्ययन सामग्री की मुख्य विशेषताएँ

  • नवीनतम ब्लूप्रिंट आधारित: 1, 2, 3 एवं 4 अंक वाले प्रश्नों का बोर्ड पैटर्न के अनुसार सटीक विभाजन।
  • संकल्पनात्मक एवं विश्लेषणात्मक नोट्स: वैश्विक संधियों, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, भारतीय संविधान के प्रमुख अनुच्छेदों तथा ऐतिहासिक नीतिगत निर्णयों की सरल बिंदुवार व्याख्या।
  • समसामयिक एवं कार्टून/केस-आधारित प्रश्न: राजनीति विज्ञान की NCERT पाठ्यपुस्तक के प्रमुख कार्टूनों और केस स्टडीज पर आधारित संभावित प्रश्नोत्तर।

कक्षा 12वीं राजनीति विज्ञान

सम्पूर्ण सरल नोट्स एवं अभ्यास प्रश्नोत्तर

माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश, भोपाल | हायर सेकेण्डरी परीक्षा सत्र 2026-27

पूर्णांक — 80 | समय — 3:00 घंटे

अंक योजना — एक नजर में

भागअध्यायआवंटित अंक
भाग-1
समकालीन विश्व राजनीति
1. दो ध्रुवीयता का अंत07
2. सत्ता के समकालीन केन्द्र06
3. समकालीन दक्षिण एशिया05
4. अंतर्राष्ट्रीय संगठन07
5. समकालीन विश्व में सुरक्षा05
6. पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन06
7. वैश्वीकरण04
भाग-2
स्वतंत्र भारत में राजनीति
1. राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ06
2. एक दल के प्रभुत्व का दौर03
3. नियोजित विकास की राजनीति03
4. भारत के विदेश संबंध07
5. कांग्रेस प्रणाली — चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना03
6. लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट07
7. क्षेत्रीय आकांक्षाएँ07
8. भारतीय राजनीति — नए बदलाव04
कुल80
सबसे अधिक अंक वाले अध्याय: दो ध्रुवीयता का अंत, अंतर्राष्ट्रीय संगठन, भारत के विदेश संबंध, लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट तथा क्षेत्रीय आकांक्षाएँ — 7-7 अंक।

परीक्षा प्रश्न संरचना

प्रश्नप्रकारकुल प्रश्नप्रति प्रश्नकुल अंक
1सही विकल्प06106
2रिक्त स्थान06106
3सत्य/असत्य06106
4सही जोड़ी07107
5एक वाक्य में उत्तर07107
6–15लघु उत्तरीय10220
16–19मध्यम उत्तरीय04312
20–23दीर्घ उत्तरीय04416
कुल वस्तुनिष्ठ प्रश्न: 32 | 2 अंक: 10 प्रश्न | 3 अंक: 4 प्रश्न | 4 अंक: 4 प्रश्न

भाग-1 : समकालीन विश्व राजनीति

अध्याय 1 — दो ध्रुवीयता का अंत (07 अंक)

1. दो ध्रुवीय विश्व क्या था?

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व राजनीति मुख्यतः दो महाशक्तियों—संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ—के आसपास विभाजित हो गई। इसे दो ध्रुवीय व्यवस्था कहा गया।

2. शीत युद्ध

अमेरिका और सोवियत संघ के बीच वैचारिक, राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक प्रतिस्पर्धा को शीत युद्ध कहा गया। दोनों महाशक्तियाँ सीधे व्यापक युद्ध से बचते हुए प्रभाव क्षेत्र बढ़ाने का प्रयास करती थीं।

3. सोवियत संघ की विशेषताएँ

  • समाजवादी राजनीतिक-आर्थिक व्यवस्था
  • राज्य के नियंत्रण वाली अर्थव्यवस्था
  • एक-दलीय राजनीतिक व्यवस्था
  • विशाल सैन्य शक्ति
  • पूर्वी यूरोप में प्रभाव

4. गोर्बाचेव

मिखाइल गोर्बाचेव 1985 में सोवियत संघ के नेता बने। उन्होंने पेरेस्त्रोइका और ग्लासनोस्त जैसी नीतियाँ अपनाईं। इनका उद्देश्य सोवियत व्यवस्था में सुधार लाना था।

5. सोवियत संघ का विघटन

1991 में सोवियत संघ का विघटन हुआ। इससे दो ध्रुवीय विश्व व्यवस्था समाप्त हो गई और संयुक्त राज्य अमेरिका प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा।

6. दो ध्रुवीयता के अंत के परिणाम

  • शीत युद्ध समाप्त हुआ।
  • सोवियत संघ विघटित हुआ।
  • अनेक नए स्वतंत्र राष्ट्र अस्तित्व में आए।
  • अमेरिका का वैश्विक प्रभाव बढ़ा।
  • विश्व राजनीति में नई शक्ति-समीकरण की शुरुआत हुई।

7. शॉक थेरेपी

सोवियत संघ के विघटन के बाद कई समाजवादी देशों ने तेज़ी से बाजार अर्थव्यवस्था अपनाने का प्रयास किया। इस आर्थिक संक्रमण को सामान्यतः शॉक थेरेपी कहा जाता है।

2 अंक प्रश्न — उत्तर सहित

प्रश्न 1. दो ध्रुवीयता से क्या आशय है?
दो ध्रुवीयता से आशय ऐसी विश्व व्यवस्था से है जिसमें दो प्रमुख महाशक्तियाँ वैश्विक राजनीति को प्रभावित करती थीं। शीत युद्ध के समय अमेरिका और सोवियत संघ इसके दो प्रमुख ध्रुव थे।
प्रश्न 2. पेरेस्त्रोइका और ग्लासनोस्त क्या थे?
पेरेस्त्रोइका आर्थिक और राजनीतिक पुनर्गठन की नीति थी, जबकि ग्लासनोस्त अधिक खुलापन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ी नीति थी। दोनों नीतियाँ मिखाइल गोर्बाचेव ने सोवियत संघ में अपनाईं।
प्रश्न 3. सोवियत संघ के विघटन का एक प्रमुख परिणाम बताइए।
सोवियत संघ के विघटन से शीत युद्ध और दो ध्रुवीय विश्व व्यवस्था समाप्त हुई तथा संयुक्त राज्य अमेरिका का वैश्विक प्रभाव और बढ़ गया।

3 अंक प्रश्न — उत्तर सहित

प्रश्न. सोवियत संघ के विघटन के प्रमुख कारण बताइए।
सोवियत अर्थव्यवस्था में लंबे समय से ठहराव, राजनीतिक केंद्रीकरण, आर्थिक अक्षमता, विभिन्न गणराज्यों में राष्ट्रवादी भावनाओं का बढ़ना और सुधारों से उत्पन्न राजनीतिक अस्थिरता प्रमुख कारण थे। गोर्बाचेव की सुधार नीतियों ने व्यवस्था को बदलने का प्रयास किया, लेकिन इसके परिणामस्वरूप केंद्रीय नियंत्रण कमजोर हुआ और अंततः 1991 में संघ का विघटन हो गया।

4 अंक प्रश्न — उत्तर सहित

प्रश्न. सोवियत संघ के विघटन के बाद विश्व राजनीति में हुए प्रमुख परिवर्तनों को समझाइए।
सोवियत संघ के विघटन से शीत युद्ध की समाप्ति हुई और दो ध्रुवीय विश्व व्यवस्था खत्म हो गई। कई नए स्वतंत्र गणराज्य अस्तित्व में आए। संयुक्त राज्य अमेरिका विश्व की सबसे प्रभावशाली शक्ति के रूप में उभरा। पूर्वी यूरोप में राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तन हुए तथा कई देशों ने बाजार आधारित व्यवस्था अपनाई। वैश्विक राजनीति में एकध्रुवीयता के साथ-साथ बाद में नई क्षेत्रीय एवं आर्थिक शक्तियों के उभरने की प्रक्रिया भी शुरू हुई।

महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ तथ्य

  1. सोवियत संघ का विघटन — 1991
  2. गोर्बाचेव की प्रमुख सुधार नीतियाँ — पेरेस्त्रोइका और ग्लासनोस्त
  3. शीत युद्ध के दो प्रमुख ध्रुव — अमेरिका और सोवियत संघ
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अध्याय 2 — सत्ता के समकालीन केन्द्र (06 अंक)

1. समकालीन शक्ति केन्द्र

शीत युद्ध के बाद विश्व में केवल सैन्य शक्ति ही नहीं, बल्कि आर्थिक, तकनीकी, राजनीतिक और क्षेत्रीय शक्ति भी महत्वपूर्ण हो गई। यूरोपीय संघ, चीन और जापान जैसे शक्ति केन्द्र उभरे।

2. यूरोपीय संघ

यूरोपीय संघ यूरोपीय देशों का एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन है। इसका उद्देश्य आर्थिक और राजनीतिक सहयोग बढ़ाना है। इसकी साझा संस्थाएँ और कई मामलों में साझा नीतियाँ हैं।

3. चीन का उदय

चीन ने आर्थिक सुधारों और खुलेपन की नीतियों के माध्यम से तेजी से आर्थिक विकास किया। उसने विश्व अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका मजबूत की।

4. जापान

जापान एक विकसित औद्योगिक और तकनीकी शक्ति है। आर्थिक क्षमता, तकनीक और निवेश के कारण उसका वैश्विक महत्व है।

5. ASEAN

ASEAN दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन है जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग बढ़ाना है।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. यूरोपीय संघ क्या है?
यूरोपीय संघ यूरोपीय देशों का क्षेत्रीय संगठन है जो आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ावा देता है। यह विश्व राजनीति में एक महत्वपूर्ण शक्ति केन्द्र है।
प्रश्न 2. चीन के उदय का एक कारण बताइए।
चीन के आर्थिक सुधारों और खुलेपन की नीतियों से उत्पादन, व्यापार और विदेशी निवेश में वृद्धि हुई, जिससे चीन एक प्रमुख वैश्विक आर्थिक शक्ति बना।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. यूरोपीय संघ की शक्ति के प्रमुख आधार बताइए।
यूरोपीय संघ की शक्ति का आधार उसका विशाल साझा बाजार, आर्थिक समृद्धि, तकनीकी क्षमता, विकसित संस्थाएँ और सदस्य देशों की सामूहिक राजनीतिक भूमिका है। कई क्षेत्रों में सामूहिक निर्णय लेने से उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रभाव क्षमता बढ़ती है।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. चीन को समकालीन शक्ति केन्द्र के रूप में समझाइए।
चीन ने आर्थिक सुधारों के बाद तेज औद्योगिकीकरण और निर्यात-आधारित विकास हासिल किया। विशाल जनसंख्या और बाजार, विनिर्माण क्षमता, तकनीकी विकास तथा विदेशी निवेश ने उसकी आर्थिक शक्ति बढ़ाई। इसके साथ चीन ने कूटनीतिक और सैन्य क्षमता भी विकसित की। आज वह एशिया तथा विश्व राजनीति में महत्वपूर्ण शक्ति है और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं तथा वैश्विक व्यापार में उसकी भूमिका लगातार बढ़ी है।
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अध्याय 3 — समकालीन दक्षिण एशिया (05 अंक)

1. दक्षिण एशिया

दक्षिण एशिया में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मालदीव जैसे देश शामिल माने जाते हैं। क्षेत्र में विविध राजनीतिक व्यवस्थाएँ और लंबे समय से चले आ रहे विवाद हैं।

2. भारत-पाकिस्तान संबंध

कश्मीर, सीमा विवाद, आतंकवाद और जल जैसे मुद्दों ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है। समय-समय पर बातचीत और शांति प्रयास भी हुए हैं।

3. लोकतंत्र और सैन्य शासन

भारत और कुछ अन्य दक्षिण एशियाई देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ विकसित हुईं, जबकि पाकिस्तान में विभिन्न समयों पर सैन्य शासन रहा।

4. श्रीलंका

श्रीलंका में सिंहली और तमिल समुदायों के बीच संघर्ष ने लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता पैदा की। LTTE से संबंधित संघर्ष विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा।

5. क्षेत्रीय सहयोग — SAARC

SAARC दक्षिण एशियाई देशों के क्षेत्रीय सहयोग का संगठन है। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग और विकास को बढ़ावा देना है।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. SAARC क्या है?
SAARC दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन है। इसका उद्देश्य दक्षिण एशिया के देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाना है।
प्रश्न 2. भारत-पाकिस्तान संबंधों में प्रमुख विवाद कौन-सा है?
कश्मीर विवाद भारत-पाकिस्तान संबंधों का प्रमुख विवाद रहा है। इसके अतिरिक्त आतंकवाद, सीमा और जल संबंधी मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. दक्षिण एशिया में लोकतंत्र के विकास की स्थिति समझाइए।
दक्षिण एशिया में लोकतंत्र का अनुभव एक जैसा नहीं रहा। भारत में लोकतंत्र निरंतर बना रहा, जबकि पाकिस्तान में सैन्य शासन के दौर आए। नेपाल में राजशाही से लोकतांत्रिक गणराज्य की ओर परिवर्तन हुआ और अन्य देशों में भी लोकतांत्रिक संस्थाओं का विकास अलग-अलग गति से हुआ।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता क्यों है?
दक्षिण एशियाई देशों में भौगोलिक निकटता, समान ऐतिहासिक अनुभव और आर्थिक तथा सामाजिक समस्याएँ हैं। आतंकवाद, गरीबी, जल, पर्यावरण, व्यापार और स्वास्थ्य जैसी समस्याओं के समाधान के लिए सहयोग आवश्यक है। SAARC जैसे मंच क्षेत्रीय संवाद और सहयोग को बढ़ावा दे सकते हैं। हालांकि राजनीतिक विवाद और आपसी अविश्वास कई बार क्षेत्रीय सहयोग को सीमित करते हैं।
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अध्याय 4 — अंतर्राष्ट्रीय संगठन (07 अंक)

1. अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का महत्व

अंतर्राष्ट्रीय संगठन देशों को संवाद, सहयोग और सामूहिक समस्या-समाधान का मंच प्रदान करते हैं।

2. संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 1945 में हुई। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना, देशों के बीच सहयोग बढ़ाना और मानवाधिकारों को बढ़ावा देना है।

3. संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख संस्थाएँ

  • महासभा
  • सुरक्षा परिषद
  • आर्थिक और सामाजिक परिषद
  • अंतरराष्ट्रीय न्यायालय
  • सचिवालय
  • न्यासी परिषद

4. सुरक्षा परिषद

सुरक्षा परिषद में पाँच स्थायी सदस्य हैं—अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन। स्थायी सदस्यों के पास वीटो अधिकार है।

5. संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी संरचना आज के वैश्विक शक्ति संतुलन को पूरी तरह नहीं दर्शाती। भारत सहित कई देश सुरक्षा परिषद में व्यापक प्रतिनिधित्व और सुधार की माँग करते रहे हैं।

6. अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ

विश्व बैंक, IMF, WTO आदि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. संयुक्त राष्ट्र की स्थापना कब हुई?
उत्तर: 1945 में।
प्रश्न 2. सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्य कौन हैं?
उत्तर: अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन।
प्रश्न 3. वीटो क्या है?
सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य को किसी महत्वपूर्ण प्रस्ताव को रोकने की विशेष शक्ति को वीटो अधिकार कहा जाता है।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता क्यों है?
संयुक्त राष्ट्र की वर्तमान संरचना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियों पर आधारित है। आज एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की भूमिका बढ़ गई है। इसलिए अधिक प्रतिनिधित्व, लोकतांत्रिकता और निर्णय प्रक्रिया में सुधार आवश्यक माना जाता है। भारत जैसे देश सुरक्षा परिषद के विस्तार की माँग करते हैं।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. संयुक्त राष्ट्र के महत्व का वर्णन कीजिए।
संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने का प्रमुख वैश्विक मंच है। यह देशों को संवाद और विवाद समाधान का अवसर देता है। शांति स्थापना अभियानों, मानवाधिकारों, स्वास्थ्य, विकास, शरणार्थी सहायता तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। विभिन्न विशेषीकृत संस्थाओं के माध्यम से यह सामाजिक और आर्थिक समस्याओं पर भी काम करता है। हालांकि उसकी प्रभावशीलता कई बार शक्तिशाली देशों के हितों और सुरक्षा परिषद की संरचना से प्रभावित होती है।
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अध्याय 5 — समकालीन विश्व में सुरक्षा (05 अंक)

1. सुरक्षा का अर्थ

किसी देश, समाज या व्यक्ति को गंभीर खतरों से सुरक्षित रखने की व्यवस्था को सुरक्षा कहा जाता है। परंपरागत रूप से सुरक्षा को मुख्यतः सैन्य शक्ति और बाहरी आक्रमण से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन आधुनिक समय में इसकी अवधारणा अधिक व्यापक हो गई है।

2. पारंपरिक सुरक्षा

पारंपरिक सुरक्षा मुख्यतः राज्य की सुरक्षा पर केंद्रित होती है। इसमें बाहरी सैन्य आक्रमण, सीमा सुरक्षा, युद्ध, शक्ति संतुलन और राष्ट्रीय संप्रभुता जैसे विषय शामिल हैं।

  • बाहरी सैन्य खतरे से सुरक्षा
  • सीमा और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा
  • राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा
  • सैन्य शक्ति का महत्व
  • युद्ध एवं शक्ति संतुलन से संबंधित प्रश्न

3. गैर-पारंपरिक सुरक्षा

गैर-पारंपरिक सुरक्षा में ऐसे खतरे शामिल हैं जो केवल सैन्य आक्रमण तक सीमित नहीं हैं। इनमें आतंकवाद, गरीबी, महामारी, पर्यावरणीय संकट, खाद्य संकट और मानव सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।

4. मानव सुरक्षा

मानव सुरक्षा का केंद्र राज्य के बजाय व्यक्ति और उसका सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन है। इसमें व्यक्ति को हिंसा, बीमारी, भूख, गरीबी तथा अन्य गंभीर खतरों से सुरक्षा देने पर बल दिया जाता है।

5. सहयोगात्मक सुरक्षा

आज कई सुरक्षा चुनौतियों का समाधान किसी एक देश द्वारा संभव नहीं है। आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, महामारी और परमाणु हथियार जैसे प्रश्नों के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।

2 अंक प्रश्न — उत्तर सहित

प्रश्न 1. पारंपरिक सुरक्षा से क्या आशय है?
पारंपरिक सुरक्षा मुख्यतः राज्य को बाहरी सैन्य आक्रमण, युद्ध, सीमा खतरे तथा राष्ट्रीय संप्रभुता से संबंधित खतरों से सुरक्षित रखने पर केंद्रित होती है।
प्रश्न 2. गैर-पारंपरिक सुरक्षा के दो उदाहरण दीजिए।
आतंकवाद और महामारी गैर-पारंपरिक सुरक्षा के प्रमुख उदाहरण हैं। इसके अतिरिक्त गरीबी और पर्यावरणीय संकट भी इसमें शामिल हैं।

3 अंक प्रश्न — उत्तर सहित

प्रश्न. मानव सुरक्षा और राज्य सुरक्षा में अंतर बताइए।
राज्य सुरक्षा का मुख्य केंद्र राष्ट्र-राज्य, उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता होती है। मानव सुरक्षा का केंद्र व्यक्ति होता है। राज्य सुरक्षा मुख्यतः बाहरी सैन्य खतरों पर ध्यान देती है, जबकि मानव सुरक्षा में गरीबी, भूख, बीमारी, हिंसा और पर्यावरणीय संकट जैसे व्यापक खतरे शामिल होते हैं।

4 अंक प्रश्न — उत्तर सहित

प्रश्न. समकालीन विश्व में सुरक्षा की अवधारणा व्यापक क्यों हुई है?
आज सुरक्षा के सामने केवल सैन्य आक्रमण ही चुनौती नहीं है। आतंकवाद, महामारी, जलवायु परिवर्तन, खाद्य एवं जल संकट, गरीबी और पर्यावरणीय संकट किसी भी देश और समाज को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। इन समस्याओं का प्रभाव सीमा पार भी हो सकता है। इसलिए आधुनिक सुरक्षा दृष्टिकोण में सैन्य सुरक्षा के साथ मानव सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा, पर्यावरणीय सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को भी महत्व दिया जाता है।
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अध्याय 6 — पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन (06 अंक)

1. पर्यावरण का राजनीतिक महत्व

पर्यावरणीय समस्याएँ अब केवल स्थानीय या राष्ट्रीय विषय नहीं रह गई हैं। जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, जैव विविधता का क्षय, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों की कमी जैसे मुद्दे अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा बन चुके हैं।

2. वैश्विक संपदा

ऐसे प्राकृतिक संसाधन या क्षेत्र जिन पर किसी एक देश का अधिकार नहीं होता और जिनका प्रभाव पूरी मानवता पर पड़ता है, वैश्विक संपदा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। उदाहरण के रूप में वायुमंडल, समुद्र और अंटार्कटिका से जुड़े संसाधनों को देखा जा सकता है।

3. पर्यावरणीय समस्याएँ

  • जलवायु परिवर्तन
  • ग्लोबल वार्मिंग
  • वनों की कटाई
  • जैव विविधता का ह्रास
  • वायु एवं जल प्रदूषण
  • प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन

4. पर्यावरणीय न्याय

पर्यावरण संरक्षण की लागत और उसके लाभों का न्यायपूर्ण वितरण पर्यावरणीय न्याय से संबंधित है। विकासशील देशों का तर्क है कि विकसित देशों ने ऐतिहासिक रूप से अधिक प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया है और प्रदूषण में भी उनका योगदान अधिक रहा है।

5. सतत विकास

ऐसा विकास जिसमें वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा जाए, सतत विकास कहलाता है।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. पर्यावरणीय न्याय क्या है?
पर्यावरण संरक्षण से होने वाले लाभों और उसकी लागत का देशों तथा विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच न्यायपूर्ण वितरण पर्यावरणीय न्याय कहलाता है।
प्रश्न 2. सतत विकास से क्या आशय है?
ऐसा विकास जो वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करे और भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता को प्रभावित न करे, सतत विकास कहलाता है।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग क्यों आवश्यक है?
जलवायु परिवर्तन, समुद्री प्रदूषण और वायुमंडलीय समस्याएँ किसी एक देश तक सीमित नहीं रहतीं। एक देश के प्रदूषण का प्रभाव दूसरे देशों पर भी पड़ सकता है। इसलिए उत्सर्जन कम करने, तकनीक साझा करने, वित्तीय सहायता देने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए देशों के बीच सहयोग आवश्यक है।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. पर्यावरण के प्रश्न पर विकसित और विकासशील देशों के दृष्टिकोण में अंतर समझाइए।
विकसित देशों द्वारा ऐतिहासिक रूप से अधिक औद्योगिकीकरण और संसाधनों के उपयोग के कारण विकासशील देश तर्क देते हैं कि पर्यावरणीय जिम्मेदारी में ऐतिहासिक योगदान को ध्यान में रखा जाना चाहिए। विकासशील देशों की प्राथमिकता गरीबी हटाना और आर्थिक विकास करना भी है। इसलिए वे तकनीक और वित्तीय सहायता की मांग करते हैं। दूसरी ओर विकसित देश सभी देशों से पर्यावरण संरक्षण और उत्सर्जन नियंत्रण में भागीदारी की अपेक्षा करते हैं। इसीलिए वैश्विक पर्यावरणीय नीति में समानता तथा साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारी महत्वपूर्ण विषय है।
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अध्याय 7 — वैश्वीकरण (04 अंक)

1. वैश्वीकरण का अर्थ

विश्व की अर्थव्यवस्थाओं, समाजों और संस्कृतियों का व्यापार, पूँजी, तकनीक, संचार और विचारों के माध्यम से एक-दूसरे से अधिक जुड़ना वैश्वीकरण कहलाता है।

2. वैश्वीकरण के प्रमुख कारण

  • सूचना और संचार तकनीक का विकास
  • परिवहन के साधनों में सुधार
  • व्यापार एवं निवेश का विस्तार
  • आर्थिक उदारीकरण
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विस्तार

3. वैश्वीकरण के आर्थिक प्रभाव

वैश्वीकरण से विदेशी निवेश, तकनीक, बाजार और व्यापार के अवसर बढ़े। अनेक देशों में उत्पादन और सेवाओं का अंतर्राष्ट्रीयकरण हुआ।

4. वैश्वीकरण के राजनीतिक प्रभाव

वैश्वीकरण ने राष्ट्र-राज्य की भूमिका को समाप्त नहीं किया, बल्कि उसकी भूमिका के स्वरूप में परिवर्तन किया। राज्य को वैश्विक आर्थिक नियमों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ समन्वय करना पड़ता है।

5. वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभाव

फिल्म, इंटरनेट, संगीत, भोजन और जीवनशैली के माध्यम से विभिन्न संस्कृतियों का आदान-प्रदान बढ़ा है। इसके साथ स्थानीय संस्कृतियों के सामने चुनौतियाँ भी उत्पन्न हुई हैं।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. वैश्वीकरण क्या है?
विश्व के विभिन्न देशों और समाजों का आर्थिक, राजनीतिक, तकनीकी और सांस्कृतिक रूप से अधिक परस्पर जुड़ना वैश्वीकरण कहलाता है।
प्रश्न 2. वैश्वीकरण का एक प्रमुख कारण बताइए।
सूचना एवं संचार तकनीक का तीव्र विकास वैश्वीकरण का प्रमुख कारण है।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. वैश्वीकरण के तीन प्रमुख प्रभाव बताइए।
वैश्वीकरण से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश बढ़े, नई तकनीकों का प्रसार हुआ तथा देशों के बीच आर्थिक एवं सांस्कृतिक संपर्क बढ़ा। इसके साथ स्थानीय उद्योगों और रोजगार के सामने प्रतिस्पर्धा की चुनौतियाँ भी आईं।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. वैश्वीकरण के सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
सकारात्मक प्रभावों में विदेशी निवेश, नई तकनीक, नए बाजार, रोजगार के अवसर और अंतर्राष्ट्रीय संपर्कों का विस्तार शामिल हैं। नकारात्मक प्रभावों में छोटे उत्पादकों पर वैश्विक प्रतिस्पर्धा का दबाव, आर्थिक असमानता, कुछ क्षेत्रों में रोजगार की असुरक्षा तथा स्थानीय संस्कृतियों पर बाहरी प्रभाव शामिल हैं। इसलिए वैश्वीकरण का प्रभाव समाज और आर्थिक क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
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भाग-2 : स्वतंत्र भारत में राजनीति

अध्याय 1 — राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ (06 अंक)

1. स्वतंत्रता के समय भारत के सामने चुनौतियाँ

  • राष्ट्रीय एकता और अखंडता बनाए रखना
  • विभाजन की समस्या और शरणार्थियों का पुनर्वास
  • देशी रियासतों का भारतीय संघ में विलय
  • लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना
  • विविध भाषाई, धार्मिक एवं सांस्कृतिक समूहों को साथ रखना

2. रियासतों का एकीकरण

स्वतंत्रता के समय भारतीय उपमहाद्वीप में अनेक देशी रियासतें थीं। भारत सरकार ने समझौते, बातचीत और राजनीतिक प्रयासों के माध्यम से अधिकांश रियासतों को भारतीय संघ में शामिल किया।

3. हैदराबाद

हैदराबाद के भारतीय संघ में विलय का प्रश्न जटिल था। अंततः 1948 में सैन्य कार्रवाई के बाद हैदराबाद भारत का हिस्सा बना।

4. जम्मू-कश्मीर

जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय और उसके बाद उत्पन्न विवाद ने स्वतंत्र भारत की राजनीति और सुरक्षा को प्रभावित किया।

5. भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन

भारत में विभिन्न भाषाई समूहों ने अपनी भाषा और सांस्कृतिक पहचान के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग की। भाषाई राज्यों के गठन ने विविधता को संघीय ढाँचे में समायोजित करने में मदद की।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. राष्ट्र निर्माण की दो प्रमुख चुनौतियाँ लिखिए।
राष्ट्रीय एकता स्थापित करना और विभाजन से उत्पन्न शरणार्थी एवं साम्प्रदायिक संकट का समाधान करना प्रमुख चुनौतियाँ थीं।
प्रश्न 2. देशी रियासतों के एकीकरण का महत्व क्या था?
रियासतों के एकीकरण से भारत की राजनीतिक और भौगोलिक एकता मजबूत हुई तथा एक संगठित भारतीय संघ का निर्माण संभव हुआ।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. भाषाई राज्यों के निर्माण का महत्व बताइए।
भाषाई राज्यों के निर्माण से विभिन्न भाषाई समुदायों को प्रशासनिक और सांस्कृतिक पहचान मिली। इससे क्षेत्रीय असंतोष को लोकतांत्रिक ढंग से समायोजित करने में सहायता मिली और भारतीय संघवाद मजबूत हुआ।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. स्वतंत्र भारत में राष्ट्र निर्माण की प्रमुख चुनौतियों को समझाइए।
स्वतंत्रता के समय भारत को विभाजन की हिंसा और शरणार्थियों के पुनर्वास की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा। दूसरी चुनौती देशी रियासतों का भारतीय संघ में एकीकरण था। तीसरी चुनौती भाषा, धर्म, जाति और क्षेत्रीय विविधताओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था में समायोजित करना थी। इसके साथ लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थापना तथा राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना भी आवश्यक था। संविधान, संघवाद और लोकतांत्रिक व्यवस्था ने इन चुनौतियों से निपटने का आधार प्रदान किया।
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अध्याय 2 — एक दल के प्रभुत्व का दौर (03 अंक)

1. कांग्रेस का प्रभुत्व

स्वतंत्रता के बाद प्रारंभिक दशकों में भारतीय राजनीति में कांग्रेस का व्यापक प्रभुत्व रहा। लोकसभा और अधिकांश राज्यों में कांग्रेस को लगातार चुनावी सफलता मिली।

2. कांग्रेस के प्रभुत्व के कारण

  • स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत
  • व्यापक सामाजिक आधार
  • देशभर में संगठनात्मक नेटवर्क
  • प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं की लोकप्रियता
  • विपक्षी दलों का अपेक्षाकृत कमजोर होना

3. विपक्ष का महत्व

कांग्रेस के प्रभुत्व के बावजूद विपक्षी दल लोकतांत्रिक राजनीति में सक्रिय रहे। उन्होंने विभिन्न सामाजिक और वैचारिक समूहों को प्रतिनिधित्व दिया।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न. कांग्रेस के प्रभुत्व के दो कारण बताइए।
स्वतंत्रता आंदोलन से मिली लोकप्रियता और पूरे देश में मजबूत संगठन कांग्रेस के प्रभुत्व के प्रमुख कारण थे।
प्रश्न. कांग्रेस प्रणाली का अर्थ क्या है?
ऐसी राजनीतिक व्यवस्था जिसमें कांग्रेस लंबे समय तक प्रमुख चुनावी एवं राजनीतिक शक्ति बनी रही और विभिन्न सामाजिक समूहों को अपने भीतर समाहित करती रही, कांग्रेस प्रणाली कहलाती है।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. कांग्रेस का प्रभुत्व लोकतंत्र-विरोधी क्यों नहीं था?
भारत में नियमित और प्रतिस्पर्धी चुनाव होते थे। विपक्षी दल मौजूद थे और मतदाताओं को विकल्प उपलब्ध थे। इसलिए कांग्रेस का प्रभुत्व चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक वैधता के भीतर स्थापित हुआ था।
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अध्याय 3 — नियोजित विकास की राजनीति (03 अंक)

1. नियोजन का अर्थ

आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए उपलब्ध संसाधनों का प्राथमिकताओं के अनुसार योजनाबद्ध उपयोग करना नियोजन कहलाता है।

2. योजना आयोग

भारत ने स्वतंत्रता के बाद आर्थिक विकास के लिए योजनाबद्ध विकास का मार्ग अपनाया। योजना आयोग ने विकास की प्राथमिकताओं और योजनाओं को तैयार करने में भूमिका निभाई।

3. मिश्रित अर्थव्यवस्था

भारत ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों को महत्व देने वाली मिश्रित अर्थव्यवस्था को अपनाया।

4. नियोजन के उद्देश्य

  • आर्थिक विकास
  • गरीबी कम करना
  • रोजगार बढ़ाना
  • औद्योगिकीकरण
  • सामाजिक एवं आर्थिक असमानता कम करना

2 अंक प्रश्न

प्रश्न. मिश्रित अर्थव्यवस्था क्या है?
जिस अर्थव्यवस्था में सार्वजनिक तथा निजी दोनों क्षेत्रों की भूमिका होती है, उसे मिश्रित अर्थव्यवस्था कहा जाता है।
प्रश्न. नियोजन क्यों अपनाया गया?
गरीबी, बेरोजगारी, कम औद्योगिक विकास और सीमित संसाधनों को ध्यान में रखते हुए आर्थिक विकास को दिशा देने के लिए भारत ने नियोजन अपनाया।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. भारत में नियोजित विकास के तीन प्रमुख उद्देश्य लिखिए।
आर्थिक विकास की गति बढ़ाना, गरीबी एवं बेरोजगारी कम करना तथा औद्योगिकीकरण और संसाधनों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देना इसके प्रमुख उद्देश्य थे।
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अध्याय 4 — भारत के विदेश संबंध (07 अंक)

1. भारत की विदेश नीति

भारत की विदेश नीति राष्ट्रीय हित, राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता, विश्व शांति, उपनिवेशवाद-विरोध और स्वतंत्र निर्णय क्षमता जैसे सिद्धांतों से प्रभावित रही है।

2. गुटनिरपेक्षता

शीत युद्ध के दौरान भारत ने अमेरिका या सोवियत संघ के किसी सैन्य गुट में शामिल होने के बजाय स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई। इसे गुटनिरपेक्षता कहा गया।

3. पंचशील

  • एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान
  • एक-दूसरे पर आक्रमण न करना
  • आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना
  • समानता और पारस्परिक लाभ
  • शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व

4. भारत-चीन संबंध

प्रारंभ में भारत और चीन के संबंध मैत्रीपूर्ण थे और पंचशील समझौते ने इसमें योगदान दिया। बाद में सीमा विवाद और अन्य मतभेदों के कारण तनाव बढ़ा तथा 1962 में दोनों देशों के बीच युद्ध हुआ।

5. भारत-पाकिस्तान संबंध

भारत-पाकिस्तान संबंधों में कश्मीर, सीमा, आतंकवाद और सुरक्षा प्रमुख मुद्दे रहे हैं। दोनों देशों के बीच युद्ध तथा शांति वार्ता दोनों का इतिहास रहा है।

6. भारत और परमाणु नीति

भारत ने परमाणु क्षमता को राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता से जोड़ा। भारत ने परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में भी समर्थन व्यक्त किया है।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. गुटनिरपेक्षता से क्या आशय है?
किसी सैन्य गुट में शामिल हुए बिना स्वतंत्र विदेश नीति अपनाना और प्रत्येक अंतर्राष्ट्रीय मुद्दे पर अपने राष्ट्रीय हित के अनुसार निर्णय लेना गुटनिरपेक्षता कहलाता है।
प्रश्न 2. पंचशील का कोई दो सिद्धांत लिखिए।
एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान तथा एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना पंचशील के प्रमुख सिद्धांत हैं।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. भारत की विदेश नीति के प्रमुख उद्देश्य लिखिए।
राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा, विश्व शांति को बढ़ावा देना, स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखना तथा आर्थिक विकास के लिए अनुकूल अंतर्राष्ट्रीय वातावरण बनाना भारत की विदेश नीति के प्रमुख उद्देश्य हैं।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. भारत की गुटनिरपेक्ष नीति का महत्व समझाइए।
गुटनिरपेक्षता ने भारत को शीत युद्ध के दोनों शक्ति गुटों से स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता दी। भारत ने उपनिवेशवाद, नस्लवाद और सैन्य गुटबंदी का विरोध किया। भारत ने विकासशील देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया और विश्व शांति तथा निरस्त्रीकरण का समर्थन किया। इस नीति के माध्यम से भारत ने राष्ट्रीय हितों के साथ अंतर्राष्ट्रीय शांति और सहयोग को भी महत्व दिया।
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अध्याय 5 — कांग्रेस प्रणाली: चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना (03 अंक)

1. 1967 का चुनाव

1967 के आम चुनावों में कांग्रेस का प्रभुत्व पहली बार गंभीर रूप से चुनौतीपूर्ण हुआ। कई राज्यों में गैर-कांग्रेसी दलों ने सरकारें बनाईं।

2. गैर-कांग्रेसवाद

विभिन्न विपक्षी दलों द्वारा कांग्रेस के विरुद्ध एकजुट होकर चुनावी और राजनीतिक रणनीति अपनाने को गैर-कांग्रेसवाद की राजनीति से जोड़ा गया।

3. कांग्रेस विभाजन — 1969

1969 में कांग्रेस में विभाजन हुआ। संगठन और नेतृत्व के बीच संघर्ष ने पार्टी के भीतर बड़ी राजनीतिक टूट पैदा की।

4. इंदिरा गांधी का नेतृत्व

इंदिरा गांधी ने लोकप्रिय नीतियों और 'गरीबी हटाओ' जैसे नारों के माध्यम से व्यापक जनसमर्थन प्राप्त किया। 1971 के चुनावों में कांग्रेस को महत्वपूर्ण सफलता मिली।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न. 1967 के चुनावों का महत्व बताइए।
1967 में कांग्रेस को कई राज्यों में गंभीर चुनौती मिली। इससे लंबे समय से चले आ रहे कांग्रेस प्रभुत्व की कमजोरी सामने आई और गैर-कांग्रेसी राजनीति मजबूत हुई।
प्रश्न. 1969 में कांग्रेस में क्या हुआ?
1969 में कांग्रेस का विभाजन हुआ। पार्टी के संगठनात्मक नेतृत्व और इंदिरा गांधी के नेतृत्व के बीच संघर्ष इसका प्रमुख कारण बना।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. कांग्रेस प्रणाली को मिली प्रमुख चुनौतियों का वर्णन कीजिए।
1967 के चुनावों में विपक्षी दलों का मजबूत होना, राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारों का बनना और 1969 में कांग्रेस का विभाजन प्रमुख चुनौतियाँ थीं। इन घटनाओं ने कांग्रेस के भीतर तथा बाहर दोनों स्तरों पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाई।
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अध्याय 6 — लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट (07 अंक)

1. संकट की पृष्ठभूमि

1970 के दशक में आर्थिक संकट, बेरोजगारी, महँगाई और भ्रष्टाचार के आरोपों ने राजनीतिक असंतोष को बढ़ाया। विभिन्न राज्यों में सरकार के विरुद्ध आंदोलन हुए।

2. गुजरात और बिहार आंदोलन

छात्र और जनता ने भ्रष्टाचार, महँगाई एवं शासन की समस्याओं के विरुद्ध आंदोलन किए। बिहार आंदोलन में जयप्रकाश नारायण ने महत्वपूर्ण नेतृत्व दिया।

3. सम्पूर्ण क्रांति

जयप्रकाश नारायण ने राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन के लिए 'सम्पूर्ण क्रांति' का आह्वान किया।

4. आपातकाल

25 जून 1975 को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया। इस अवधि में राजनीतिक गतिविधियों, प्रेस की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों पर अनेक प्रतिबंध लगाए गए तथा विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियाँ हुईं।

5. 1977 का चुनाव

1977 के चुनाव में जनता पार्टी को सफलता मिली और केंद्र में पहली बार कांग्रेस के बाहर की सरकार बनी। इसने भारतीय लोकतंत्र में मतदाता की शक्ति को स्पष्ट किया।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. राष्ट्रीय आपातकाल कब घोषित किया गया?
25 जून 1975 को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया।
प्रश्न 2. सम्पूर्ण क्रांति का आह्वान किसने किया?
जयप्रकाश नारायण ने सम्पूर्ण क्रांति का आह्वान किया।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़े प्रभाव लिखिए।
नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध लगा, प्रेस पर नियंत्रण बढ़ा और विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियाँ हुईं। राजनीतिक विरोध की गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगे। इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा का महत्व स्पष्ट हुआ।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. 1975-77 के आपातकाल से भारतीय लोकतंत्र को क्या सीख मिली?
आपातकाल ने दिखाया कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए केवल चुनाव पर्याप्त नहीं हैं। स्वतंत्र न्यायपालिका, स्वतंत्र प्रेस, नागरिक अधिकार, विपक्ष की भूमिका और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता आवश्यक हैं। सत्ता के अत्यधिक केंद्रीकरण से लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। 1977 के चुनाव ने यह सिद्ध किया कि जनता लोकतांत्रिक माध्यम से सरकार को बदल सकती है।
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अध्याय 7 — क्षेत्रीय आकांक्षाएँ (07 अंक)

1. क्षेत्रीय आकांक्षा

किसी क्षेत्र के लोगों की भाषा, संस्कृति, पहचान, स्वायत्तता, आर्थिक विकास या राजनीतिक अधिकारों से संबंधित विशेष मांगों को क्षेत्रीय आकांक्षा कहा जाता है।

2. पंजाब

पंजाब में भाषाई, धार्मिक और राजनीतिक मांगों ने समय-समय पर तनाव उत्पन्न किया। आनंदपुर साहिब प्रस्ताव तथा बाद की हिंसक परिस्थितियाँ इस अध्याय के महत्वपूर्ण विषय हैं।

3. जम्मू-कश्मीर

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में स्वायत्तता, पहचान, चुनाव, आतंकवाद और अलगाववाद जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहे हैं।

4. उत्तर-पूर्व

उत्तर-पूर्व के अनेक क्षेत्रों में जातीय पहचान, स्वायत्तता, आर्थिक विकास और अलग राज्य की मांगें उठीं। विभिन्न समझौतों और संवैधानिक व्यवस्थाओं द्वारा समाधान के प्रयास किए गए।

5. क्षेत्रीय आकांक्षाएँ और राष्ट्रीय एकता

लोकतंत्र में क्षेत्रीय आकांक्षाओं को दबाने के बजाय संवाद, संघवाद, स्वायत्तता और विकास के माध्यम से समायोजित करना राष्ट्रीय एकता को मजबूत कर सकता है।

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. क्षेत्रीय आकांक्षा से क्या आशय है?
किसी क्षेत्र के लोगों द्वारा अपनी भाषा, संस्कृति, पहचान, स्वायत्तता अथवा विकास संबंधी विशेष मांगों को क्षेत्रीय आकांक्षा कहा जाता है।
प्रश्न 2. क्षेत्रीय आकांक्षाओं का समाधान कैसे किया जा सकता है?
संवाद, संघीय व्यवस्था, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, स्वायत्तता तथा संवैधानिक समझौतों के माध्यम से क्षेत्रीय आकांक्षाओं का लोकतांत्रिक समाधान किया जा सकता है।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. उत्तर-पूर्व भारत की राजनीति की तीन प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर-पूर्व में जातीय और सांस्कृतिक विविधता, स्वायत्तता की मांग तथा अलग पहचान से जुड़ी राजनीतिक आकांक्षाएँ प्रमुख हैं। कुछ क्षेत्रों में सशस्त्र आंदोलनों और बाद में शांति समझौतों का अनुभव भी रहा है।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. क्षेत्रीय आकांक्षाएँ भारतीय राष्ट्र की एकता के लिए चुनौती होने के साथ अवसर भी हैं। समझाइए।
क्षेत्रीय आकांक्षाओं की उपेक्षा होने पर अलगाववाद, हिंसा और असंतोष बढ़ सकता है। लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में इन्हें क्षेत्रीय दलों, संघवाद, स्वायत्तता, संवाद और विकास के माध्यम से समायोजित किया जा सकता है। क्षेत्रीय पहचान को सम्मान मिलने से नागरिकों का भारतीय लोकतंत्र पर विश्वास बढ़ता है। इसलिए लोकतांत्रिक समायोजन क्षेत्रीय विविधता को राष्ट्रीय एकता की शक्ति में बदल सकता है।
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अध्याय 8 — भारतीय राजनीति: नए बदलाव (04 अंक)

1. 1989 के बाद की राजनीति

1989 के बाद भारतीय राजनीति में कांग्रेस के एकदलीय प्रभुत्व की जगह बहुदलीय तथा गठबंधन राजनीति का दौर मजबूत हुआ।

2. गठबंधन राजनीति

जब अनेक राजनीतिक दल मिलकर सरकार बनाते हैं तो इसे गठबंधन सरकार कहा जाता है। गठबंधन राजनीति में सहमति और समझौते का महत्व बढ़ जाता है।

3. मंडल आयोग

मंडल आयोग की सिफारिशों ने पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण और सामाजिक न्याय की राजनीति को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बनाया।

4. भाजपा का उदय

भारतीय जनता पार्टी ने 1980 के दशक के बाद राष्ट्रीय राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत की और आगे चलकर प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक दल के रूप में उभरी।

5. क्षेत्रीय दलों की भूमिका

क्षेत्रीय दलों ने राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गठबंधन सरकारों के निर्माण में अनेक क्षेत्रीय दल निर्णायक रहे।

6. नई राजनीतिक सहमति

  • आर्थिक सुधार
  • सामाजिक न्याय
  • गठबंधन राजनीति
  • क्षेत्रीय दलों की भूमिका
  • पिछड़े वर्गों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व

2 अंक प्रश्न

प्रश्न 1. गठबंधन राजनीति क्या है?
जब दो या अधिक राजनीतिक दल मिलकर सरकार बनाते हैं और सरकार का संचालन साझा समर्थन एवं सहमति के आधार पर करते हैं, तो इसे गठबंधन राजनीति कहते हैं।
प्रश्न 2. मंडल आयोग किससे संबंधित था?
मंडल आयोग सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान तथा उनके लिए आरक्षण की सिफारिशों से संबंधित था।

3 अंक प्रश्न

प्रश्न. 1989 के बाद भारतीय राजनीति में आए प्रमुख बदलाव लिखिए।
एकदलीय प्रभुत्व में कमी, गठबंधन राजनीति का विस्तार, क्षेत्रीय दलों का बढ़ता प्रभाव तथा सामाजिक न्याय और आरक्षण की राजनीति का महत्व बढ़ना प्रमुख बदलाव थे।

4 अंक प्रश्न

प्रश्न. 1989 के बाद गठबंधन राजनीति के प्रमुख प्रभावों को समझाइए।
गठबंधन राजनीति ने क्षेत्रीय दलों को राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान दिया। केंद्र सरकारों को विभिन्न दलों के साथ समझौता और सहमति बनानी पड़ी। इससे संघीय भावना मजबूत हुई और विभिन्न क्षेत्रों की राजनीतिक आकांक्षाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व मिला। हालांकि गठबंधन सरकारों में निर्णय लेने की प्रक्रिया जटिल हो सकती है, फिर भी इस दौर ने भारतीय लोकतंत्र में बहुदलीय प्रतिस्पर्धा और राजनीतिक सहमति को मजबूत किया।
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कक्षा 12वीं राजनीति विज्ञान — अध्याय 1 से 15 के महत्वपूर्ण प्रश्न एवं मॉडल उत्तर

परीक्षा उपयोग: नीचे सभी 15 अध्यायों से महत्वपूर्ण 2 अंक, 3 अंक एवं 4 अंक के प्रश्न दिए गए हैं। उत्तर परीक्षा में लिखने योग्य भाषा में हैं। प्रत्येक अध्याय के प्रमुख तथ्य, कारण, परिणाम, तुलना तथा विश्लेषणात्मक प्रश्नों को शामिल किया गया है।

अध्याय 1 — दो ध्रुवीयता का अंत

प्रश्न 1. द्विध्रुवीय विश्व व्यवस्था से क्या आशय है?
द्विध्रुवीय विश्व व्यवस्था से आशय ऐसी अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था से है जिसमें दो प्रमुख महाशक्तियाँ विश्व राजनीति को प्रभावित करती हैं। शीत युद्ध के समय अमेरिका और सोवियत संघ इसके दो प्रमुख शक्ति केन्द्र थे।
प्रश्न 2. शीत युद्ध क्या था?
अमेरिका और सोवियत संघ के बीच प्रत्यक्ष युद्ध के बिना वैचारिक, राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य प्रतिस्पर्धा को शीत युद्ध कहा गया। दोनों महाशक्तियाँ अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र और सहयोगी बढ़ाने का प्रयास करती थीं।
प्रश्न 3. सोवियत संघ के विघटन के प्रमुख कारण बताइए।
सोवियत अर्थव्यवस्था में लंबे समय से ठहराव, राजनीतिक केंद्रीकरण, प्रशासनिक अक्षमता, विभिन्न गणराज्यों में राष्ट्रवादी भावनाओं का बढ़ना तथा आर्थिक एवं राजनीतिक सुधारों से उत्पन्न अस्थिरता प्रमुख कारण थे। इन परिस्थितियों के कारण केंद्रीय सत्ता कमजोर हुई और 1991 में सोवियत संघ का विघटन हो गया।
प्रश्न 4. सोवियत संघ के विघटन के परिणाम समझाइए।
सोवियत संघ के विघटन से शीत युद्ध समाप्त हुआ और द्विध्रुवीय विश्व व्यवस्था समाप्त हो गई। अनेक नए स्वतंत्र राष्ट्र अस्तित्व में आए। अमेरिका का वैश्विक प्रभाव बढ़ा। पूर्व समाजवादी देशों में राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तन हुए तथा विश्व राजनीति में नए शक्ति-संतुलन की प्रक्रिया शुरू हुई।

अध्याय 2 — सत्ता के समकालीन केन्द्र

प्रश्न 5. यूरोपीय संघ क्या है?
यूरोपीय संघ यूरोपीय देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है जो आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देता है। इसकी सामूहिक आर्थिक एवं राजनीतिक शक्ति के कारण यह विश्व राजनीति का एक महत्वपूर्ण शक्ति केन्द्र है।
प्रश्न 6. चीन के उदय के प्रमुख कारण बताइए।
आर्थिक सुधार, खुलेपन की नीति, विदेशी निवेश, औद्योगिक उत्पादन, निर्यात और विशाल घरेलू बाजार चीन की शक्ति के प्रमुख आधार हैं। इन कारणों से चीन विश्व अर्थव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरा।
प्रश्न 7. यूरोपीय संघ को एक महत्वपूर्ण शक्ति केन्द्र क्यों माना जाता है?
यूरोपीय संघ के पास विशाल आर्थिक बाजार, विकसित औद्योगिक और तकनीकी क्षमता, साझा संस्थाएँ तथा सामूहिक राजनीतिक प्रभाव है। कई अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर यूरोपीय देश सामूहिक रूप से प्रभाव डाल सकते हैं।
प्रश्न 8. चीन और जापान की शक्ति के प्रमुख आधारों की तुलना कीजिए।
चीन की शक्ति का प्रमुख आधार विशाल जनसंख्या, औद्योगिक उत्पादन, निर्यात, बढ़ती तकनीकी क्षमता और सैन्य शक्ति है। जापान की शक्ति का प्रमुख आधार अत्याधुनिक तकनीक, विकसित उद्योग, आर्थिक क्षमता और उच्च उत्पादकता है। दोनों एशिया के महत्वपूर्ण शक्ति केन्द्र हैं।

अध्याय 3 — समकालीन दक्षिण एशिया

प्रश्न 9. दक्षिण एशिया के प्रमुख देशों के नाम लिखिए।
दक्षिण एशिया के प्रमुख देशों में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मालदीव शामिल हैं।
प्रश्न 10. भारत-पाकिस्तान संबंधों में प्रमुख विवाद कौन-कौन से हैं?
कश्मीर विवाद, सीमा संबंधी विवाद, आतंकवाद एवं सुरक्षा के प्रश्न तथा कुछ जल संबंधी मुद्दे भारत-पाकिस्तान संबंधों को प्रभावित करते रहे हैं।
प्रश्न 11. दक्षिण एशिया में लोकतंत्र की स्थिति समझाइए।
दक्षिण एशिया में लोकतंत्र का अनुभव समान नहीं रहा है। भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था निरंतर बनी रही, जबकि पाकिस्तान में विभिन्न समयों पर सैन्य शासन रहा। नेपाल में राजशाही से लोकतांत्रिक गणराज्य की ओर परिवर्तन हुआ। क्षेत्र के अन्य देशों ने भी अलग-अलग स्तर पर लोकतांत्रिक संस्थाओं का विकास किया।
प्रश्न 12. SAARC का महत्व एवं सीमाएँ बताइए।
SAARC का उद्देश्य दक्षिण एशियाई देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाना है। लेकिन सदस्य देशों के बीच राजनीतिक तनाव, विशेषकर भारत-पाकिस्तान संबंधों के मतभेद, संगठन की कार्यक्षमता को कई बार सीमित करते हैं।

अध्याय 4 — अंतर्राष्ट्रीय संगठन

प्रश्न 13. संयुक्त राष्ट्र की स्थापना कब और क्यों हुई?
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 1945 में हुई। इसका मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना, देशों के बीच सहयोग बढ़ाना, संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान में सहायता करना तथा वैश्विक विकास और मानवाधिकारों को बढ़ावा देना है।
प्रश्न 14. सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य कौन-कौन हैं?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्य हैं—अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन।
प्रश्न 15. वीटो शक्ति क्या है?
सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य को किसी महत्वपूर्ण प्रस्ताव को रोकने की विशेष शक्ति वीटो शक्ति कहलाती है।
प्रश्न 16. संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता क्यों है?
संयुक्त राष्ट्र की वर्तमान संरचना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियों को दर्शाती है। वर्तमान विश्व में एशिया, अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों का महत्व बढ़ चुका है। इसलिए अधिक प्रतिनिधित्व, लोकतांत्रिकता तथा सुरक्षा परिषद के विस्तार के लिए सुधार आवश्यक माना जाता है।

अध्याय 5 — समकालीन विश्व में सुरक्षा

प्रश्न 17. पारंपरिक सुरक्षा से क्या आशय है?
पारंपरिक सुरक्षा मुख्यतः राज्य को बाहरी सैन्य आक्रमण, युद्ध, सीमा विवाद और राष्ट्रीय संप्रभुता से जुड़े खतरों से सुरक्षित रखने पर केंद्रित होती है।
प्रश्न 18. गैर-पारंपरिक सुरक्षा के कोई तीन उदाहरण दीजिए।
आतंकवाद, महामारी और पर्यावरणीय संकट गैर-पारंपरिक सुरक्षा के प्रमुख उदाहरण हैं। इनके अतिरिक्त गरीबी, खाद्य संकट और मानव सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 19. मानव सुरक्षा और राज्य सुरक्षा में अंतर बताइए।
राज्य सुरक्षा का केंद्र राष्ट्र-राज्य, उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता है। मानव सुरक्षा का केंद्र व्यक्ति है। मानव सुरक्षा में बीमारी, गरीबी, भूख, हिंसा और पर्यावरणीय संकट जैसे खतरे भी शामिल होते हैं।
प्रश्न 20. आधुनिक विश्व में सुरक्षा की अवधारणा व्यापक क्यों हुई?
आज आतंकवाद, महामारी, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक संकट, गरीबी, खाद्य एवं जल संकट जैसे खतरे भी मानव और समाज को प्रभावित करते हैं। इनमें से अनेक खतरे सीमा पार प्रभाव डालते हैं, इसलिए सुरक्षा केवल सैन्य विषय न रहकर व्यापक मानव एवं वैश्विक सुरक्षा का विषय बन गई है।

अध्याय 6 — पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन

प्रश्न 21. पर्यावरणीय न्याय क्या है?
पर्यावरणीय संसाधनों के लाभ और पर्यावरण संरक्षण की लागत का विभिन्न देशों एवं सामाजिक समूहों में न्यायपूर्ण वितरण पर्यावरणीय न्याय कहलाता है।
प्रश्न 22. सतत विकास क्या है?
ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को प्रभावित न करे, सतत विकास कहलाता है।
प्रश्न 23. पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग क्यों आवश्यक है?
जलवायु परिवर्तन, समुद्री प्रदूषण और वायुमंडलीय संकट किसी एक देश तक सीमित नहीं रहते। इसलिए देशों के बीच उत्सर्जन नियंत्रण, तकनीकी सहयोग, वित्तीय सहायता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
प्रश्न 24. पर्यावरण के प्रश्न पर विकसित और विकासशील देशों के दृष्टिकोण समझाइए।
विकासशील देश तर्क देते हैं कि औद्योगिक देशों का ऐतिहासिक प्रदूषण और संसाधन उपयोग अधिक रहा है, इसलिए उन पर अधिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। विकासशील देशों को गरीबी हटाने और आर्थिक विकास के लिए संसाधनों की आवश्यकता है। विकसित देश सभी देशों से पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी चाहते हैं। इसलिए न्याय, जिम्मेदारी और विकास के अधिकार का प्रश्न महत्वपूर्ण है।

अध्याय 7 — वैश्वीकरण

प्रश्न 25. वैश्वीकरण क्या है?
विश्व के विभिन्न देशों और समाजों का व्यापार, पूँजी, तकनीक, संचार तथा सांस्कृतिक संपर्कों के माध्यम से अधिक परस्पर जुड़ना वैश्वीकरण कहलाता है।
प्रश्न 26. वैश्वीकरण के प्रमुख कारण लिखिए।
सूचना एवं संचार तकनीक का विकास, परिवहन के साधनों में सुधार, आर्थिक उदारीकरण, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विस्तार वैश्वीकरण के प्रमुख कारण हैं।
प्रश्न 27. वैश्वीकरण के सकारात्मक प्रभाव लिखिए।
वैश्वीकरण से विदेशी निवेश, नई तकनीक, व्यापार, नए बाजार और कुछ क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े। देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक संपर्क भी मजबूत हुआ।
प्रश्न 28. वैश्वीकरण की आलोचना के प्रमुख आधार बताइए।
वैश्वीकरण से आर्थिक असमानता बढ़ने, छोटे उत्पादकों पर प्रतिस्पर्धात्मक दबाव आने, कुछ क्षेत्रों में रोजगार असुरक्षित होने तथा स्थानीय संस्कृतियों पर बाहरी प्रभाव बढ़ने की आलोचना की जाती है।

अध्याय 8 — राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ

प्रश्न 29. स्वतंत्र भारत के सामने राष्ट्र निर्माण की प्रमुख चुनौतियाँ क्या थीं?
विभाजन और शरणार्थी समस्या, देशी रियासतों का एकीकरण, राष्ट्रीय एकता स्थापित करना, विविधताओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था में समायोजित करना तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थापना प्रमुख चुनौतियाँ थीं।
प्रश्न 30. देशी रियासतों के एकीकरण का महत्व बताइए।
रियासतों के एकीकरण से भारत की राजनीतिक और भौगोलिक एकता मजबूत हुई तथा एक संगठित भारतीय संघ का निर्माण संभव हुआ।
प्रश्न 31. भाषाई राज्यों का निर्माण क्यों किया गया?
विभिन्न भाषाई समुदाय अपनी भाषा और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप प्रशासनिक व्यवस्था चाहते थे। भाषाई आधार पर राज्यों के गठन से क्षेत्रीय आकांक्षाओं को लोकतांत्रिक ढंग से समायोजित करने में सहायता मिली और भारतीय संघवाद मजबूत हुआ।
प्रश्न 32. भारत में राष्ट्र निर्माण की सफलता के प्रमुख कारण बताइए।
संविधान की स्वीकृति, लोकतांत्रिक संस्थाएँ, संघवाद, चुनावी व्यवस्था, रियासतों का एकीकरण तथा विविधताओं को लोकतांत्रिक ढंग से समायोजित करने की नीति राष्ट्र निर्माण की सफलता के प्रमुख आधार थे।

अध्याय 9 — एक दल के प्रभुत्व का दौर

प्रश्न 33. कांग्रेस के प्रभुत्व के प्रमुख कारण क्या थे?
स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत, व्यापक सामाजिक आधार, मजबूत संगठन, लोकप्रिय राष्ट्रीय नेतृत्व और विपक्षी दलों की अपेक्षाकृत कमजोर स्थिति कांग्रेस के प्रभुत्व के प्रमुख कारण थे।
प्रश्न 34. कांग्रेस को व्यापक सामाजिक गठबंधन क्यों कहा जाता है?
कांग्रेस में विभिन्न जातियों, वर्गों, क्षेत्रों, भाषाई समूहों और विचारधाराओं के लोग शामिल थे। इसलिए यह केवल एक सामाजिक समूह का दल न होकर व्यापक सामाजिक आधार वाला राजनीतिक संगठन था।
प्रश्न 35. क्या कांग्रेस का प्रभुत्व लोकतंत्र के विरुद्ध था?
नहीं। भारत में नियमित और प्रतिस्पर्धी चुनाव होते थे, विपक्षी दल मौजूद थे और मतदाता विकल्प चुन सकते थे। इसलिए कांग्रेस का प्रभुत्व लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया के भीतर स्थापित हुआ था।

अध्याय 10 — नियोजित विकास की राजनीति

प्रश्न 36. भारत ने नियोजन को क्यों अपनाया?
स्वतंत्रता के समय भारत में गरीबी, बेरोजगारी, कम औद्योगिक विकास और सीमित संसाधनों की समस्या थी। इसलिए सरकार ने संसाधनों के योजनाबद्ध उपयोग और आर्थिक विकास को दिशा देने के लिए नियोजन अपनाया।
प्रश्न 37. मिश्रित अर्थव्यवस्था क्या है?
जिस अर्थव्यवस्था में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों को आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका प्राप्त हो, उसे मिश्रित अर्थव्यवस्था कहते हैं।
प्रश्न 38. नियोजित विकास के प्रमुख उद्देश्य बताइए।
आर्थिक विकास को बढ़ाना, गरीबी और बेरोजगारी को कम करना, औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देना, क्षेत्रीय असमानता कम करना तथा संसाधनों का संतुलित उपयोग करना इसके प्रमुख उद्देश्य थे।

अध्याय 11 — भारत के विदेश संबंध

प्रश्न 39. भारत की विदेश नीति के प्रमुख उद्देश्य लिखिए।
राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा, विश्व शांति, स्वतंत्र विदेश नीति, उपनिवेशवाद-विरोध तथा आर्थिक विकास के लिए अनुकूल अंतर्राष्ट्रीय वातावरण बनाना भारत की विदेश नीति के प्रमुख उद्देश्य हैं।
प्रश्न 40. पंचशील के पाँच सिद्धांत लिखिए।
पंचशील के पाँच प्रमुख सिद्धांत हैं—एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान, आक्रमण न करना, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, समानता एवं पारस्परिक लाभ तथा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व।
प्रश्न 41. भारत-चीन संबंधों में तनाव के कारण बताइए।
सीमा विवाद, क्षेत्रीय दावे, तिब्बत से संबंधित प्रश्न और आपसी अविश्वास ने भारत-चीन संबंधों में तनाव पैदा किया। 1962 के युद्ध ने संबंधों को और प्रभावित किया।
प्रश्न 42. भारत की गुटनिरपेक्ष नीति का महत्व समझाइए।
गुटनिरपेक्षता ने भारत को शीत युद्ध के दोनों शक्ति गुटों से स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता दी। भारत ने उपनिवेशवाद और नस्लवाद का विरोध किया, विश्व शांति और निरस्त्रीकरण का समर्थन किया तथा विकासशील देशों के सहयोग को बढ़ावा दिया।

अध्याय 12 — कांग्रेस प्रणाली: चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना

प्रश्न 43. 1967 के चुनावों का महत्व बताइए।
1967 में कांग्रेस को कई राज्यों में गंभीर चुनौती मिली और कई गैर-कांग्रेसी सरकारें बनीं। इससे कांग्रेस के लंबे राजनीतिक प्रभुत्व की कमजोरी सामने आई और विपक्षी राजनीति मजबूत हुई।
प्रश्न 44. गैर-कांग्रेसवाद से क्या आशय है?
कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने के उद्देश्य से विभिन्न विपक्षी दलों के बीच सहयोग और राजनीतिक एकता की रणनीति को गैर-कांग्रेसवाद की राजनीति कहा जाता है।
प्रश्न 45. 1969 में कांग्रेस विभाजन का कारण क्या था?
कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक नेतृत्व और इंदिरा गांधी के नेतृत्व के बीच राजनीतिक संघर्ष बढ़ गया। राष्ट्रपति चुनाव सहित कई मुद्दों पर मतभेद गहरे हुए और 1969 में कांग्रेस का विभाजन हो गया।

अध्याय 13 — लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट

प्रश्न 46. 1975 के आपातकाल की पृष्ठभूमि क्या थी?
आर्थिक कठिनाइयाँ, महँगाई, बेरोजगारी, राजनीतिक असंतोष और सरकार के विरुद्ध व्यापक आंदोलनों ने परिस्थितियों को तनावपूर्ण बनाया। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में भी व्यापक राजनीतिक आंदोलन चल रहा था। इन परिस्थितियों के बीच 25 जून 1975 को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया।
प्रश्न 47. आपातकाल के प्रमुख प्रभाव बताइए।
नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध लगाया गया, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियाँ हुईं, प्रेस पर नियंत्रण बढ़ा और राजनीतिक विरोध की गतिविधियों पर रोक लगी। लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर व्यापक बहस शुरू हुई।
प्रश्न 48. 1977 के चुनाव का महत्व समझाइए।
1977 के चुनाव में जनता पार्टी की जीत हुई और केंद्र में पहली बार कांग्रेस के बाहर की सरकार बनी। इससे यह सिद्ध हुआ कि भारतीय मतदाता सरकार को लोकतांत्रिक तरीके से बदल सकते हैं और लोकतांत्रिक जवाबदेही महत्वपूर्ण है।

अध्याय 14 — क्षेत्रीय आकांक्षाएँ

प्रश्न 49. क्षेत्रीय आकांक्षा क्या है?
किसी क्षेत्र के लोगों की अपनी भाषा, संस्कृति, पहचान, स्वायत्तता, विकास या राजनीतिक अधिकारों से संबंधित विशेष मांगों को क्षेत्रीय आकांक्षा कहा जाता है।
प्रश्न 50. भारत में क्षेत्रीय आकांक्षाओं को कैसे समायोजित किया गया?
संघवाद, राज्यों का पुनर्गठन, स्वायत्तता, क्षेत्रीय दलों, राजनीतिक संवाद और विभिन्न समझौतों के माध्यम से क्षेत्रीय आकांक्षाओं को लोकतांत्रिक ढंग से समायोजित किया गया।
प्रश्न 51. उत्तर-पूर्व भारत की प्रमुख राजनीतिक चुनौतियाँ लिखिए।
जातीय एवं सांस्कृतिक विविधता, स्वायत्तता की मांग, अलग राज्य या अलग पहचान की मांग, आर्थिक विकास की समस्याएँ तथा कुछ क्षेत्रों में सशस्त्र आंदोलनों ने उत्तर-पूर्व की राजनीति को प्रभावित किया।
प्रश्न 52. क्षेत्रीय आकांक्षाएँ राष्ट्रीय एकता को कैसे मजबूत कर सकती हैं?
जब क्षेत्रीय मांगों को लोकतांत्रिक संस्थाओं, संघवाद, स्वायत्तता और संवाद के माध्यम से स्वीकार किया जाता है तो लोगों में व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ता है। इससे अलगाववादी प्रवृत्तियों को कम करके राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया जा सकता है।

अध्याय 15 — भारतीय राजनीति: नए बदलाव

प्रश्न 53. 1989 के बाद भारतीय राजनीति में क्या बदलाव आए?
एकदलीय प्रभुत्व कमजोर हुआ और गठबंधन राजनीति मजबूत हुई। क्षेत्रीय दलों की भूमिका बढ़ी। सामाजिक न्याय और आरक्षण के प्रश्न अधिक महत्वपूर्ण बने तथा बहुदलीय प्रतिस्पर्धा बढ़ी।
प्रश्न 54. मंडल आयोग की राजनीति का महत्व बताइए।
मंडल आयोग की सिफारिशों ने पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण और सामाजिक न्याय को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया। इससे पिछड़े वर्गों की राजनीतिक लामबंदी और प्रतिनिधित्व बढ़ा।
प्रश्न 55. गठबंधन राजनीति की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
गठबंधन राजनीति में अनेक राजनीतिक दल मिलकर सरकार बनाते हैं। इसमें सहमति और समझौते की आवश्यकता होती है। क्षेत्रीय दलों का महत्व बढ़ता है और सरकार को विभिन्न दलों के समर्थन को बनाए रखना पड़ता है।
प्रश्न 56. भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों की भूमिका समझाइए।
क्षेत्रीय दल स्थानीय और क्षेत्रीय मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीति तक पहुँचाते हैं। उन्होंने गठबंधन सरकारों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और केंद्र की राजनीति में संघीय तथा क्षेत्रीय हितों को अधिक महत्व दिलाया।

सभी 15 अध्यायों से 4 अंक के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 57. सोवियत संघ के विघटन ने विश्व राजनीति को कैसे बदला?
सोवियत संघ के विघटन से द्विध्रुवीय विश्व व्यवस्था समाप्त हो गई और शीत युद्ध समाप्त हुआ। अमेरिका का वैश्विक प्रभाव बढ़ा। कई नए स्वतंत्र राष्ट्र बने और पूर्व समाजवादी देशों में आर्थिक-राजनीतिक परिवर्तन शुरू हुए। इसके बाद विश्व राजनीति में नई शक्ति-समीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई।
प्रश्न 58. संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता समझाइए।
वर्तमान संयुक्त राष्ट्र की संस्थागत संरचना द्वितीय विश्व युद्ध के समय की शक्ति-संरचना को अधिक प्रतिबिंबित करती है। वर्तमान में एशिया, अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों का महत्व बढ़ चुका है। इसलिए सुरक्षा परिषद में व्यापक प्रतिनिधित्व, अधिक लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया तथा बदलती वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप संस्थागत सुधार आवश्यक माना जाता है।
प्रश्न 59. भारत की विदेश नीति की प्रमुख विशेषताओं की व्याख्या कीजिए।
भारत की विदेश नीति में गुटनिरपेक्षता, पंचशील, विश्व शांति, उपनिवेशवाद-विरोध, राष्ट्रीय संप्रभुता और स्वतंत्र निर्णय क्षमता प्रमुख रही हैं। भारत ने सैन्य गुटों से दूरी रखते हुए विकासशील देशों के सहयोग और निरस्त्रीकरण का समर्थन किया तथा अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी।
प्रश्न 60. आपातकाल से भारतीय लोकतंत्र को क्या सीख मिली?
आपातकाल ने दिखाया कि लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए केवल चुनाव पर्याप्त नहीं हैं। नागरिक स्वतंत्रता, स्वतंत्र प्रेस, स्वतंत्र न्यायपालिका, विपक्ष की प्रभावी भूमिका और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता भी आवश्यक है। 1977 के चुनाव ने जनता की लोकतांत्रिक शक्ति को पुनः स्थापित किया।
प्रश्न 61. क्षेत्रीय आकांक्षाओं का लोकतांत्रिक समाधान कैसे किया जा सकता है?
क्षेत्रीय आकांक्षाओं का समाधान संघवाद, संवाद, स्वायत्तता, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, राज्यों के पुनर्गठन, आर्थिक विकास और संवैधानिक समझौतों के माध्यम से किया जा सकता है। लोकतंत्र का उद्देश्य विविधताओं को दबाना नहीं बल्कि उन्हें राजनीतिक व्यवस्था में समायोजित करना है।
प्रश्न 62. 1989 के बाद भारतीय राजनीति को परिवर्तन का दौर क्यों कहा जाता है?
1989 के बाद कांग्रेस का दीर्घकालीन प्रभुत्व कमजोर हुआ, गठबंधन राजनीति मजबूत हुई, क्षेत्रीय दलों की भूमिका बढ़ी, मंडल के कारण सामाजिक न्याय की राजनीति प्रमुख बनी तथा बहुदलीय प्रतिस्पर्धा का विस्तार हुआ। इस अवधि ने भारतीय राजनीति को अधिक बहुकेंद्रीय और प्रतिस्पर्धी बनाया।

अध्याय 1 से 15 — अंतिम 30 अति महत्वपूर्ण प्रश्न

क्र.अध्यायअति महत्वपूर्ण प्रश्न
1दो ध्रुवीयता का अंतसोवियत संघ के विघटन के कारण एवं परिणाम
2सत्ता के समकालीन केन्द्रचीन और यूरोपीय संघ का उदय
3समकालीन दक्षिण एशियाभारत-पाक संबंध एवं SAARC
4अंतर्राष्ट्रीय संगठनसंयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता
5समकालीन विश्व में सुरक्षापारंपरिक एवं गैर-पारंपरिक सुरक्षा
6पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनपर्यावरणीय न्याय एवं सतत विकास
7वैश्वीकरणवैश्वीकरण के सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभाव
8राष्ट्र निर्माणस्वतंत्र भारत की राष्ट्र निर्माण चुनौतियाँ
9एक दल का प्रभुत्वकांग्रेस के प्रभुत्व के कारण
10नियोजित विकासमिश्रित अर्थव्यवस्था एवं नियोजन
11भारत के विदेश संबंधगुटनिरपेक्षता एवं पंचशील
12कांग्रेस प्रणाली1967 और 1969 की घटनाएँ
13लोकतांत्रिक संकटआपातकाल एवं 1977 चुनाव
14क्षेत्रीय आकांक्षाएँक्षेत्रीय आकांक्षाओं का लोकतांत्रिक समाधान
15नए बदलावमंडल, गठबंधन एवं क्षेत्रीय दल
शिक्षा • अध्ययन • परीक्षा तैयारी के लिए विजिट कीजिये
अंतिम परीक्षा रणनीति: अध्याय 1 से 15 सभी अध्यायों को समान रूप से कवर करें। 7 अंक वाले अध्यायों से 2, 3 और 4 अंक के उत्तर लिखने का अभ्यास विशेष रूप से करें। वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के लिए तिथियाँ, नाम, संगठन, नीतियाँ और प्रमुख अवधारणाएँ दोहराएँ।

अतिरिक्त वस्तुनिष्ठ अभ्यास

सही विकल्प

  1. गैर-पारंपरिक सुरक्षा का उदाहरण है— महामारी
  2. मानव सुरक्षा का केंद्र है— व्यक्ति
  3. पर्यावरणीय न्याय संबंधित है— पर्यावरणीय लाभ और लागत के न्यायपूर्ण वितरण से
  4. वैश्वीकरण का प्रमुख साधन है— सूचना एवं संचार तकनीक
  5. भारत के सामने स्वतंत्रता के समय प्रमुख चुनौती थी— राष्ट्रीय एकीकरण
  6. 1967 के बाद मजबूत हुई— गैर-कांग्रेसी राजनीति
  7. मिश्रित अर्थव्यवस्था में होते हैं— सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्र
  8. भारत की विदेश नीति का प्रमुख सिद्धांत था— गुटनिरपेक्षता
  9. आपातकाल घोषित हुआ— 25 जून 1975
  10. सम्पूर्ण क्रांति का आह्वान किया— जयप्रकाश नारायण ने
  11. क्षेत्रीय आकांक्षाएँ संबंधित हैं— पहचान और स्वायत्तता से
  12. मंडल आयोग संबंधित है— पिछड़े वर्गों से

रिक्त स्थान — उत्तर सहित

  1. मानव सुरक्षा का केंद्र ________ है। — व्यक्ति
  2. सतत विकास में वर्तमान के साथ ________ पीढ़ियों का ध्यान रखा जाता है। — भविष्य की
  3. वैश्वीकरण में ________ तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका है। — सूचना एवं संचार
  4. भारत ने स्वतंत्रता के समय ________ अर्थव्यवस्था अपनाई। — मिश्रित
  5. 1969 में कांग्रेस में ________ हुआ। — विभाजन
  6. आपातकाल ________ 1975 को घोषित हुआ। — 25 जून
  7. 1989 के बाद ________ राजनीति मजबूत हुई। — गठबंधन

सत्य / असत्य — उत्तर सहित

  1. गैर-पारंपरिक सुरक्षा केवल सैन्य खतरों तक सीमित है। — असत्य
  2. पर्यावरणीय समस्याएँ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की मांग करती हैं। — सत्य
  3. भारत ने शीत युद्ध में सैन्य गुट की सदस्यता ली थी। — असत्य
  4. 1967 में कांग्रेस को कई राज्यों में चुनौती मिली। — सत्य
  5. 1977 में जनता पार्टी सत्ता में आई। — सत्य
  6. क्षेत्रीय आकांक्षाएँ हमेशा राष्ट्र-विरोधी होती हैं। — असत्य
  7. गठबंधन राजनीति में अनेक दलों की भूमिका होती है। — सत्य

सही जोड़ी

कॉलम Aकॉलम B
1. मानव सुरक्षाव्यक्ति की सुरक्षा
2. सतत विकासभविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं का ध्यान
3. मिश्रित अर्थव्यवस्थासार्वजनिक + निजी क्षेत्र
4. 1975आपातकाल
5. जयप्रकाश नारायणसम्पूर्ण क्रांति
6. मंडल आयोगसामाजिक न्याय / पिछड़ा वर्ग
7. गठबंधन राजनीतिबहुदलीय सरकार

एक वाक्य में उत्तर

  1. मानव सुरक्षा क्या है? — व्यक्ति को विभिन्न गंभीर खतरों से सुरक्षित रखने की अवधारणा।
  2. सतत विकास क्या है? — वर्तमान विकास के साथ भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं की रक्षा करना।
  3. मिश्रित अर्थव्यवस्था क्या है? — सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों वाली अर्थव्यवस्था।
  4. गुटनिरपेक्षता क्या है? — सैन्य गुटों से स्वतंत्र विदेश नीति।
  5. आपातकाल कब लगा? — 25 जून 1975।
  6. सम्पूर्ण क्रांति का आह्वान किसने किया? — जयप्रकाश नारायण।
  7. मंडल आयोग किससे संबंधित था? — सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों से।
  8. गठबंधन सरकार क्या है? — दो या अधिक राजनीतिक दलों द्वारा मिलकर बनाई गई सरकार।

4 अंक के अत्यंत महत्वपूर्ण मॉडल प्रश्न — अध्याय 5 से 15

प्रश्न 1. पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा का तुलनात्मक वर्णन कीजिए।
पारंपरिक सुरक्षा मुख्यतः राज्य, सीमा, संप्रभुता और सैन्य आक्रमण से संबंधित है। गैर-पारंपरिक सुरक्षा में आतंकवाद, महामारी, गरीबी, पर्यावरणीय संकट और मानव सुरक्षा जैसे विषय शामिल हैं। पारंपरिक सुरक्षा का केंद्र राज्य है जबकि गैर-पारंपरिक सुरक्षा में व्यक्ति और समाज को भी केंद्र में रखा जाता है।
प्रश्न 2. पर्यावरणीय राजनीति में विकसित और विकासशील देशों के मतभेद समझाइए।
विकासशील देश मानते हैं कि औद्योगिक क्रांति और ऐतिहासिक उत्सर्जन में विकसित देशों का योगदान अधिक रहा है। वे विकास के लिए संसाधनों के उपयोग और तकनीकी एवं वित्तीय सहायता की मांग करते हैं। विकसित देश सभी देशों से पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी चाहते हैं। इसलिए समानता, जिम्मेदारी और विकास के अधिकार के प्रश्नों पर मतभेद दिखाई देते हैं।
प्रश्न 3. भारत के राष्ट्र निर्माण की प्रमुख चुनौतियों की व्याख्या कीजिए।
विभाजन और शरणार्थी समस्या, देशी रियासतों का एकीकरण, भाषाई और सांस्कृतिक विविधताओं का समायोजन तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना प्रमुख चुनौतियाँ थीं। भारतीय संविधान, संघवाद, लोकतांत्रिक संस्थाओं और राजनीतिक संवाद के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान करने का प्रयास किया गया।
प्रश्न 4. भारत की विदेश नीति की प्रमुख विशेषताओं को समझाइए।
भारत की विदेश नीति में गुटनिरपेक्षता, पंचशील, विश्व शांति, उपनिवेशवाद और नस्लवाद का विरोध, राष्ट्रीय संप्रभुता और स्वतंत्र निर्णय क्षमता प्रमुख रहे हैं। भारत ने शीत युद्ध के दौरान किसी सैन्य गुट में शामिल होने के बजाय स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई और विकासशील देशों के सहयोग का समर्थन किया।
प्रश्न 5. आपातकाल के प्रभाव और 1977 के चुनाव का महत्व समझाइए।
आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध, प्रेस पर नियंत्रण और विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियाँ हुईं। 1977 के चुनाव में जनता ने सत्ता परिवर्तन करके लोकतांत्रिक जवाबदेही की शक्ति दिखाई। पहली बार केंद्र में कांग्रेस के बाहर की सरकार बनी। इस घटना ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों के महत्व को स्पष्ट किया।
प्रश्न 6. क्षेत्रीय आकांक्षाओं के लोकतांत्रिक समाधान को समझाइए।
क्षेत्रीय आकांक्षाओं को संवाद, संघवाद, स्वायत्तता, आर्थिक विकास और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के माध्यम से समायोजित किया जा सकता है। क्षेत्रीय दल और लोकतांत्रिक संस्थाएँ स्थानीय मांगों को राष्ट्रीय राजनीति तक पहुँचाते हैं। क्षेत्रीय पहचान का सम्मान करने से अलगाववादी प्रवृत्तियों को कम किया जा सकता है और राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।
प्रश्न 7. 1989 के बाद भारतीय राजनीति में हुए प्रमुख बदलाव समझाइए।
1989 के बाद एकदलीय प्रभुत्व कमजोर हुआ और गठबंधन राजनीति मजबूत हुई। क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ा। मंडल आयोग की सिफारिशों के कारण सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों की राजनीति महत्वपूर्ण हुई। भाजपा एक प्रमुख राष्ट्रीय शक्ति के रूप में उभरी और भारतीय राजनीति अधिक बहुदलीय तथा प्रतिस्पर्धी हुई।

कक्षा 12वीं राजनीति विज्ञान — अंतिम रिवीजन चार्ट

अध्यायअवश्य दोहराएँ
5. समकालीन विश्व में सुरक्षापारंपरिक सुरक्षा, गैर-पारंपरिक सुरक्षा, मानव सुरक्षा, आतंकवाद
6. पर्यावरणपर्यावरणीय न्याय, वैश्विक संपदा, सतत विकास, संसाधन राजनीति
7. वैश्वीकरणअर्थ, कारण, आर्थिक/राजनीतिक/सांस्कृतिक प्रभाव
राष्ट्र निर्माणविभाजन, रियासतें, भाषाई राज्य, राष्ट्रीय एकता
एक दल का प्रभुत्वकांग्रेस प्रभुत्व, कारण, विपक्ष
नियोजित विकासनियोजन, योजना आयोग, मिश्रित अर्थव्यवस्था
भारत के विदेश संबंधगुटनिरपेक्षता, पंचशील, चीन, पाकिस्तान, परमाणु नीति
कांग्रेस प्रणाली1967, गैर-कांग्रेसवाद, 1969 विभाजन, 1971
लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकटजेपी आंदोलन, सम्पूर्ण क्रांति, 1975 आपातकाल, 1977 चुनाव
क्षेत्रीय आकांक्षाएँपंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तर-पूर्व, क्षेत्रीय दल
नए बदलाव1989, मंडल, भाजपा, गठबंधन राजनीति, क्षेत्रीय दल
परीक्षा में उत्तर लेखन: 2 अंक के उत्तर में परिभाषा + 2 मुख्य बिंदु, 3 अंक में संक्षिप्त परिचय + 3 बिंदु तथा 4 अंक में परिचय + कारण/विशेषताएँ + प्रभाव + निष्कर्ष लिखें। जहाँ संभव हो वहाँ वर्ष, घटना, नेता और प्रमुख अवधारणा का उल्लेख करें।

परीक्षा-उपयोगी प्रश्न बैंक:

  • o वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ / रिक्त स्थान / सही जोड़ी / सत्य-असत्य): 1 अंक वाले सभी महत्वपूर्ण तथ्य।
  • o अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक): 30 शब्दों में प्रमुख राजनीतिक शब्दावलियों एवं घटनाओं की परिभाषा।
  • o लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक): 75 शब्दों में कारणों, प्रभावों एवं तुलनात्मक मुद्दों पर केंद्रित।
  • o दीर्घ उत्तरीय / निबंधात्मक प्रश्न (4 अंक): 120 शब्दों में विस्तृत विवेचना और आलोचनात्मक मूल्यांकन।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

अस्वीकरण (Disclaimer): इस पोस्ट में उपलब्ध कराई गई अंक योजना, पाठ्यक्रम एवं अध्ययन सामग्री माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश (MPBSE) के आधिकारिक दिशा-निर्देशों एवं सत्र 2026-27 के शैक्षणिक प्रारूप पर आधारित है। यह सामग्री केवल विद्यार्थियों के स्व-अध्ययन, परीक्षा पूर्व अभ्यास और मार्गदर्शन हेतु तैयार की गई है। परीक्षा से संबंधित किसी भी आधिकारिक संशोधन, तिथि अथवा दिशा-निर्देश के लिए माध्यमिक शिक्षा मण्डल, म.प्र. की आधिकारिक वेबसाइट (mpbse.nic.in) पर जारी सूचना को ही अंतिम रूप से प्रामाणिक माना जाए।

 

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