कक्षा 11वीं रसायन Practice Paper 2025–26
आदर्श प्रश्न पत्र (SET-D) | विषय: रसायन (Chemistry)
कक्षा 11वीं रसायन Practice Paper 2025–26 (SET-D) विशेष रूप से अंतिम रिवीजन और स्पीड प्रैक्टिस को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह सेट उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है जो परीक्षा से ठीक पहले कम समय में प्रभावी अभ्यास करना चाहते हैं।
SET-D में महत्वपूर्ण, बार-बार पूछे जाने वाले तथा स्कोरिंग प्रश्नों को शामिल किया गया है, जिससे विद्यार्थी उत्तर लेखन की गति और सटीकता दोनों में सुधार कर सकें।
- ✔️ फाइनल रिवीजन के लिए चयनित प्रश्न
- ✔️ समय प्रबंधन और स्पीड बढ़ाने में सहायक
- ✔️ महत्वपूर्ण रासायनिक अभिक्रियाओं का त्वरित अभ्यास
- ✔️ बोर्ड परीक्षा आत्मविश्वास बढ़ाने में उपयोगी
आदर्श प्रश्न पत्र 2025-26 (SET-D)
कक्षा: 11वीं | विषय: रसायन विज्ञान
पूर्णांक: 70 | समय: 3:00 घंटे
1 मोल = 22.4L = 44g (CO₂ का मोलर द्रव्यमान)
(s=0, p=1, d=2, f=3)
समूह में नीचे जाने पर आयनन ऊर्जा घटती है।
फ्लोरीन अधिक ऋणात्मक है (-1)।
समान ताप और दाब पर जब गैसें रासायनिक अभिक्रिया करती हैं, तो उनके आयतन सरल अनुपात में होते हैं।
कार्बन-12 समस्थानिक के एक परमाणु के द्रव्यमान का 1/12वां भाग।
समस्थानिकों में परमाणु क्रमांक समान होते हैं (जैसे C-12, C-14), जबकि समभारिकों में द्रव्यमान संख्या समान होती है (जैसे Ar-40, Ca-40)।
4s < 3d < 4p
द्वितीय आवर्त के कुछ तत्व तृतीय आवर्त के अगले समूह के तत्वों के साथ गुणों में समानता दर्शाते हैं (जैसे Li और Mg)।
अपूर्ण d-कक्षकों की उपस्थिति और d-d संक्रमण के कारण।
जब साझे का इलेक्ट्रॉन युग्म केवल एक परमाणु द्वारा दिया जाता है। उदाहरण: NH₄⁺ में N और H के बीच।
अनुचुंबकीय में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं (चुंबक से आकर्षित), प्रतिचुंबकीय में सभी युग्मित होते हैं (प्रतिकर्षित)।
अवस्था फलन (जैसे H, U) केवल प्रारंभिक और अंतिम अवस्था पर निर्भर करते हैं। पथ फलन (जैसे कार्य, ऊष्मा) प्रक्रिया के रास्ते पर।
1 ग्राम तुल्यांक अम्ल द्वारा 1 ग्राम तुल्यांक क्षार को पूर्णतः उदासीन करने पर मुक्त ऊष्मा।
आयन्स बनते हैं (धनायन और ऋणायन), क्योंकि साझा इलेक्ट्रॉन युग्म एक ही परमाणु ले जाता है।
इलेक्ट्रॉन चाहने वाले अभिकर्मक (धनावेशित या उदासीन)। उदाहरण: H⁺, AlCl₃, NO₂⁺.
यह रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
वह अभिक्रिया जिसमें ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों साथ-साथ होते हैं।
Δx × Δp ≥ h/4π. महत्व: यह केवल सूक्ष्म कणों (इलेक्ट्रॉन) के लिए सार्थक है, बड़े पिंडों के लिए नहीं।
He परमाणु (1s²) के लिए चारों क्वांटम संख्याएं भिन्न होती हैं। n=1, l=0, m=0, s=+1/2 और -1/2।
अक्रिय गैसों के मिश्रण का कुल दाब, घटक गैसों के आंशिक दाबों के योग के बराबर होता है (P_total = p1 + p2 + p3...)।
1. गैस के कण अत्यंत छोटे होते हैं।
2. कणों के बीच कोई आकर्षण बल नहीं होता।
3. टक्करें पूर्णतः प्रत्यास्थ होती हैं।
π-इलेक्ट्रॉनों का विस्थापन। +M प्रभाव: इलेक्ट्रॉन देना (जैसे -OH, -NH₂)। -M प्रभाव: इलेक्ट्रॉन खींचना (जैसे -NO₂, -CHO)।
σ-इलेक्ट्रॉनों का π-बंध या p-कक्षक के साथ विस्थापन। इसे 'नो बॉन्ड रेजोनेंस' भी कहते हैं। यह एल्कीन और कार्बोनियम आयन के स्थायित्व को समझाता है।
Qsp < Ksp (असंतृप्त), Qsp = Ksp (संतृप्त), Qsp > Ksp (अवक्षेपण होगा)।
[H⁺][OH⁻] = 10⁻¹⁴ (Kw)। दोनों तरफ log लेने पर व्युत्पत्ति होती है।
एथीन: sp² संकरण, त्रिकोणीय समतलीय, 120° कोण।
एथाइन: sp संकरण, रेखीय, 180° कोण।
σ1s < σ*1s < ... < π2px=π2py < σ2pz...
N₂ प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic) है क्योंकि सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं।
कोल्बे: RCOOK (जलीय) का विद्युत अपघटन → R-R (एनोड पर)।
वुर्ट्ज: 2RX + 2Na → R-R (शुष्क ईथर)।
C-C एकल बंध के मुक्त घूर्णन से उत्पन्न आकाशीय व्यवस्थाएं। सांतरित (Staggered) रूप अधिक स्थायी होता है।
ब्रह्मांड की एन्ट्रॉपी लगातार बढ़ रही है। स्वतः प्रवर्तित प्रक्रमों में ΔS_total > 0 होता है।
(i) दहन की एन्थैल्पी
(ii) संभवन की मानक एन्थैल्पी
(i) 1 मोल पदार्थ के पूर्ण दहन पर मुक्त ऊष्मा।
(ii) 1 मोल यौगिक के उसके तत्वों (मानक अवस्था) से बनने पर ऊष्मा परिवर्तन।
लवण के आयनों की जल के साथ क्रिया। CH₃COO⁻ जल से H⁺ लेता है, जिससे OH⁻ की अधिकता हो जाती है, अतः विलयन क्षारीय होता है।
किसी दुर्बल विद्युत अपघट्य के विलयन में समान आयन वाला प्रबल विद्युत अपघट्य मिलाने पर वियोजन कम हो जाता है। उदाहरण: साबुन का अवक्षेपण, II समूह में H₂S के साथ HCl।
⚠️ उत्तर सम्बन्धी डिस्क्लेमर
इस Practice Paper में दिए गए उत्तर केवल शैक्षणिक अभ्यास एवं मार्गदर्शन हेतु हैं। वास्तविक परीक्षा में उत्तरों का मूल्यांकन बोर्ड द्वारा निर्धारित मॉडल उत्तर, शब्द-सीमा एवं मूल्यांकन दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा। अंतिम तैयारी हेतु NCERT पाठ्य-पुस्तक एवं शिक्षक के मार्गदर्शन को प्राथमिकता दें।
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