कक्षा 11वीं रसायन Practice Paper 2025–26
आदर्श प्रश्न पत्र (SET-A) | विषय: रसायन (Chemistry)
कक्षा 11वीं रसायन Practice Paper 2025–26 (SET-A) विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा की मजबूत शुरुआत कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह मॉडल प्रश्न पत्र नवीनतम सिलेबस एवं परीक्षा पैटर्न पर आधारित है।
SET-A में मूलभूत अवधारणाओं पर आधारित प्रश्न शामिल हैं, जो अध्यायों की स्पष्ट समझ, सूत्रों, अभिक्रियाओं एवं परिभाषाओं के अभ्यास में सहायक हैं। यह सेट आगे की कठिन तैयारी के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है।
- ✔️ बेसिक कॉन्सेप्ट क्लियर करने वाले प्रश्न
- ✔️ महत्वपूर्ण रासायनिक अभिक्रियाओं का अभ्यास
- ✔️ बोर्ड परीक्षा पैटर्न की समझ
- ✔️ विषय में आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक
आदर्श प्रश्न पत्र 2025-26 (SET-A)
कक्षा: 11वीं | विषय: रसायन विज्ञान
पूर्णांक: 70 | समय: 3:00 घंटे
H (1×2) + O (16) = 18
सूत्र: n² = 3² = 9
विद्युत रासायनिक श्रेणी के अनुसार।
ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता।
किसी पदार्थ की वह मात्रा जिसमें 6.022 × 10²³ कण (परमाणु, अणु या आयन) उपस्थित हों, 1 मोल कहलाती है।
रासायनिक अभिक्रिया में वह अभिकारक जो पहले समाप्त हो जाता है और उत्पाद की मात्रा को सीमित करता है, सीमांत अभिकर्मक कहलाता है।
किसी उपकोश के कक्षकों में इलेक्ट्रॉन तब तक युग्मित नहीं होते जब तक कि प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन न भर जाए।
एक ही परमाणु में किन्हीं भी दो इलेक्ट्रॉनों की चारों क्वांटम संख्याओं का मान समान नहीं हो सकता।
किसी विलगित गैसीय परमाणु से सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा को आयनन एन्थैल्पी कहते हैं।
आंतरिक कोश के इलेक्ट्रॉनों द्वारा बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनों पर नाभिकीय आकर्षण बल को कम करना परिरक्षण प्रभाव कहलाता है।
1. सिग्मा बंध अक्षीय अतिव्यापन से बनता है, पाई बंध पार्श्वीय अतिव्यापन से।
2. सिग्मा बंध प्रबल होता है, पाई बंध दुर्बल होता है।
जब हाइड्रोजन परमाणु किसी अत्यधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व (F, O, N) से जुड़ा होता है, तो उनके बीच बनने वाला आकर्षण बल हाइड्रोजन बंध कहलाता है।
ऊर्जा को न तो नष्ट किया जा सकता है और न ही उत्पन्न, केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है। (ΔU = q + w)
किसी निकाय की अव्यवस्था (randomness) की माप को एन्ट्रॉपी कहते हैं।
Zn + CuSO₄ → ZnSO₄ + Cu
(यहाँ Zn का ऑक्सीकरण और Cu का अपचयन हो रहा है।)
2(+1) + x + 4(-2) = 0
2 + x - 8 = 0 ⇒ x = +6
कार्बनिक यौगिकों की ऐसी श्रेणी जिनके रासायनिक गुण समान हों और क्रमागत सदस्यों के बीच -CH₂- का अंतर हो।
सिग्मा बंध के इलेक्ट्रॉनों का अधिक विद्युत ऋणात्मक परमाणु की ओर विस्थापन प्रेरणिक प्रभाव कहलाता है।
किसी रासायनिक अभिक्रिया में कुल एन्थैल्पी परिवर्तन समान रहता है, चाहे अभिक्रिया एक पद में हो या कई पदों में।
उदाहरण: C + O₂ → CO₂ (ΔH = x)
G = H - TS समीकरण की स्थापना।
जहाँ G गिब्स ऊर्जा, H एन्थैल्पी, T ताप और S एन्ट्रॉपी है।
यदि साम्यावस्था पर ताप, दाब या सांद्रता में परिवर्तन किया जाए, तो साम्य उस दिशा में विस्थापित होता है जिधर किए गए परिवर्तन का प्रभाव कम हो सके।
ताप बढ़ाने पर साम्य ऊष्माशोषी दिशा में जाता है।
pH = -log[H⁺]
pH = -log(10⁻³) = 3
(i) CH₃-CH(Cl)-CH₃
(ii) CH₃-COOH
(iii) CH₂=CH₂
(i) 2-क्लोरो प्रोपेन
(ii) एथेनोइक अम्ल
(iii) एथीन
(i) वुर्ट्ज अभिक्रिया
(ii) फ्रिडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया
वुर्ट्ज: 2RX + 2Na → R-R + 2NaX (शुष्क ईथर में)
फ्रिडेल-क्राफ्ट्स: बेंजीन का एल्किलीकरण (निर्जल AlCl₃ की उपस्थिति में)।
1. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित वृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं।
2. कोणीय संवेग mvr = nh/2π होता है।
3. ऊर्जा का अवशोषण/उत्सर्जन कक्षा बदलने पर होता है।
E = mc² और E = hν समीकरणों को बराबर रखकर λ = h/p सिद्ध करें।
लगभग समान ऊर्जा वाले कक्षकों का आपस में मिलकर समान ऊर्जा और आकार के नए कक्षक बनाना संकरण कहलाता है।
CH₄ में कार्बन sp³ संकरित होता है, आकृति चतुष्फलकीय, कोण 109.5°।
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: σ1s² ... π*2px¹ π*2py¹
बंध कोटि = (Nb - Na)/2 = (10 - 6)/2 = 2 (अनुचुंबकीय प्रकृति)।
बेंजीन (C₆H₆) एक चक्रीय यौगिक है। इसमें एकांतर द्विबंध होते हैं। अनुनाद के कारण सभी C-C बंध लम्बाइयाँ समान (1.39 Å) होती हैं। केकुले संरचना बनाएं।
द्विबंध के चारों ओर समूहों के भिन्न विन्यास के कारण उत्पन्न समावयवता।
उदाहरण: ब्यूट-2-ईन (समपक्ष और विपक्ष)।
वे संख्याएं जो इलेक्ट्रॉन की स्थिति और ऊर्जा बताती हैं।
n: कोश, l: उपकोश (आकृति), m: अभिविन्यास, s: चक्रण।
स्वर्ण पत्र प्रयोग। निष्कर्ष: परमाणु का अधिकांश भाग खोखला है, केंद्र में धनावेशित नाभिक होता है।
वह विलयन जिसका pH थोड़ा अम्ल या क्षार मिलाने पर नहीं बदलता।
प्रकार: अम्लीय और क्षारीय। उदाहरण: CH₃COOH + CH₃COONa.
N₂ + 3H₂ ⇌ 2NH₃ (ΔH = -ve)
अनुकूल परिस्थितियाँ: उच्च दाब (200 atm), निम्न ताप (700K), उत्प्रेरक (Fe)।
⚠️ उत्तर सम्बन्धी डिस्क्लेमर
इस Practice Paper में दिए गए उत्तर केवल शैक्षणिक अभ्यास एवं मार्गदर्शन हेतु हैं। वास्तविक परीक्षा में उत्तरों का मूल्यांकन बोर्ड द्वारा निर्धारित मॉडल उत्तर, शब्द-सीमा एवं मूल्यांकन दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा। अंतिम तैयारी हेतु NCERT पाठ्य-पुस्तक एवं शिक्षक के मार्गदर्शन को प्राथमिकता दें।
📘 SET-A | SET-B | SET-C | SET-D – सम्पूर्ण Chemistry Practice Series
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