कक्षा 12वीं इतिहास – Practice Paper Set D
Class 12th History Practice Paper – Set D कक्षा 12वीं इतिहास प्रैक्टिस पेपर – Set D
Set D विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है जो परीक्षा से पहले Full Length Practice Test देना चाहते हैं और समय प्रबंधन के साथ अपनी तैयारी को परखना चाहते हैं।
📝 Practice Paper Set D की मुख्य विशेषताएँ
- नवीन MP Board परीक्षा पैटर्न के अनुसार
- Full Syllabus संतुलित प्रश्नपत्र
- स्रोत आधारित (Source Based) प्रश्न
- मानचित्र कार्य (Map Work) का समावेश
- दीर्घ एवं विश्लेषणात्मक प्रश्नों पर विशेष फोकस
- Final Self-Assessment हेतु उपयुक्त
🎯 यह Practice Paper किनके लिए उपयोगी है?
- कक्षा 12वीं MP Board के सभी विद्यार्थी
- प्री-बोर्ड परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र
- Final Revision कर रहे विद्यार्थी
- इतिहास में उच्च अंक प्राप्त करने का लक्ष्य रखने वाले छात्र
⬇️ Practice Paper
कक्षा 12वीं - इतिहास
Created by: Devendra Kumar Septa | पूर्णांक: 80 | समय: 3 घंटे
(i) अलेक्जेंडर कनिंघम -> (क) 1930
(ii) हरिहर और बुक्का -> (ख) फ्रांसीसी चिकित्सक
(iii) फ्रांसुआ बर्नियर -> (ग) भारतीय पुरातत्व के जनक
(iv) बहादुर शाह जफर -> (घ) अंग्रेजों के लिए निवास क्षेत्र
(v) दांडी यात्रा -> (ङ) विजयनगर के संस्थापक
(vi) सिविल लाइन्स -> (च) संवैधानिक सलाहकार
(vii) बी.एन. राव -> (छ) 1857 के विद्रोह के नेता
(i) अलेक्जेंडर कनिंघम → (ग) भारतीय पुरातत्व के जनक
(ii) हरिहर और बुक्का → (ङ) विजयनगर के संस्थापक
(iii) फ्रांसुआ बर्नियर → (ख) फ्रांसीसी चिकित्सक
(iv) बहादुर शाह जफर → (छ) 1857 के विद्रोह के नेता
(v) दांडी यात्रा → (क) 1930
(vi) सिविल लाइन्स → (घ) अंग्रेजों के लिए निवास क्षेत्र
(vii) बी.एन. राव → (च) संवैधानिक सलाहकार
1. नालियाँ पक्की ईंटों से बनी थीं और ढकी हुई थीं।
2. घरों की नालियाँ पहले एक हौदी में गिरती थीं, फिर मुख्य नाले में मिलती थीं।
कनिंघम को लगता था कि भारतीय इतिहास की शुरुआत गंगा घाटी के शहरों (छठी शताब्दी ई.पू.) से हुई। इसलिए वे हड़प्पा के महत्व और उसकी प्राचीनता को नहीं समझ पाए।
छठी शताब्दी ई.पू. में उत्तर भारत में जो बड़े और शक्तिशाली राज्य उभरे, उन्हें महाजनपद कहा जाता था। इनकी संख्या 16 थी (जैसे मगध, कौशल)।
यह मौर्यकालीन प्रशासन, राजनीति, अर्थव्यवस्था और युद्धनीति की जानकारी देने वाला सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है।
1. उन्हें गाँव से बाहर रहना पड़ता था।
2. वे मरे हुए लोगों के वस्त्र और लोहे के आभूषण पहनते थे।
जब विवाह संबंध अपने ही गोत्र, कुल या जाति के भीतर किए जाते हैं, तो उसे अंतर्विवाह कहते हैं।
उसने लिखा कि यह एक अनोखा फल है जो मनुष्य के सिर जैसा दिखता है। इसके रेशे बालों जैसे होते हैं जिनसे रस्सियाँ बनाई जाती हैं।
बर्नियर ने देखा कि कारीगर कारखानों में कठोर अनुशासन में काम करते थे। वे अपनी मर्जी से काम नहीं कर सकते थे और उनकी स्थिति दयनीय थी।
1. यह मंदिर भगवान शिव (विरूपाक्ष) को समर्पित है।
2. इसमें एक विशाल गोपुरम (प्रवेश द्वार) है जो कृष्णदेव राय ने बनवाया था।
1. उन्होंने विजयनगर साम्राज्य का विस्तार किया।
2. उन्होंने तेलुगु ग्रंथ 'अमुक्तमाल्यद' की रचना की और भव्य मंदिरों का निर्माण करवाया।
महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करती थीं। वे बुवाई, निराई और कटाई में मदद करती थीं। सूत कातना और मिट्टी के बर्तन बनाना भी उनका काम था।
यह टोडरमल द्वारा शुरू की गई भू-राजस्व प्रणाली थी। इसमें पिछले 10 वर्षों की औसत उपज और कीमतों के आधार पर कर (Tax) तय किया जाता था।
अंग्रेजों और जमींदारों ने संथालों की जमीनें छीन ली थीं और उन पर भारी कर लगा दिए थे। साहूकार उन्हें कर्ज के जाल में फंसा रहे थे, इसलिए उन्होंने 'हूल' (विद्रोह) किया।
जोतदार धनी किसान थे। वे गाँव में रहते थे, इसलिए गरीब किसानों पर उनका सीधा नियंत्रण था। जमींदारों की तुलना में वे अधिक प्रभावशाली थे।
अफवाहों ने लोगों को भड़काया। जैसे- कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होना, या अंग्रेजों द्वारा आटे में हड्डियों का चूरा मिलाना। इससे लोगों को लगा कि उनका धर्म खतरे में है।
1. ईसाई मिशनरियों द्वारा धर्म परिवर्तन कराना।
2. सती प्रथा का अंत और विधवा विवाह कानून जैसे सामाजिक सुधारों को धर्म में हस्तक्षेप माना गया।
नमक हर अमीर-गरीब की बुनियादी जरूरत थी। इस पर कर लगाना अन्यायपूर्ण था। नमक ने पूरे देश को भावनात्मक रूप से एक मुद्दे पर जोड़ दिया।
यह (1917) गांधीजी का भारत में पहला सत्याग्रह था। उन्होंने नील की खेती करने वाले किसानों को अंग्रेजों के शोषण से मुक्ति दिलाई। इससे उन्हें जननेता की पहचान मिली।
बी.एन. राव संविधान सभा के 'संवैधानिक सलाहकार' थे। उन्होंने दुनिया के विभिन्न संविधानों का अध्ययन करके भारतीय संविधान का पहला मसौदा तैयार करने में मदद की।
इसका गठन 1946 में 'कैबिनेट मिशन योजना' के तहत हुआ था। इसके सदस्य प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुने गए थे।
वी.एस. सुकथांकर के नेतृत्व में विद्वानों ने विभिन्न लिपियों में लिखी गई महाभारत की हजारों पांडुलिपियों को इकट्ठा किया। उन्होंने उन श्लोकों को चुना जो सभी में समान थे। इससे महाभारत का एक प्रामाणिक रूप सामने आया और क्षेत्रीय विविधताओं का पता चला। यह कार्य 47 वर्षों में पूरा हुआ।
1. सरल शिक्षाएँ: बुद्ध ने जटिल दार्शनिक बहसों के बजाय सरल लोकभाषा (पाली) में उपदेश दिए।
2. समानता: बौद्ध संघ में जाति और वर्ण का भेद नहीं था, जिससे निम्न वर्गों ने इसे अपनाया।
3. राजकीय संरक्षण: अशोक और कनिष्क जैसे राजाओं ने इसे फैलाने में मदद की।
विजयनगर शुष्क क्षेत्र में था, इसलिए जल संचयन जरूरी था। तुंगभद्रा नदी पर बांध बनाकर 'हीरिया नहर' द्वारा पानी लाया गया। 'कमलपुरम तालाब' एक प्रमुख होज था। पानी का उपयोग खेतों की सिंचाई और राजकीय केंद्र की आवश्यकताओं के लिए होता था।
1800 ई. में कर्नल कॉलिन मैकेंजी ने इन खंडहरों को प्रकाश में लाया। उन्होंने विरूपाक्ष मंदिर और पंपा देवी के पुजारियों की स्मृतियों के आधार पर जानकारी जुटाई। बाद में छायाचित्रकारों और अभिलेखशास्त्रियों ने यहाँ के मंदिरों और भवनों का विस्तृत अध्ययन किया।
पहाड़िया: वे राजमहल की पहाड़ियों में रहते थे और 'झूम खेती' (कुदाल से) करते थे। वे जंगल के उत्पादों और शिकार पर निर्भर थे।
संथाल: वे स्थायी कृषि (हल से) करते थे। उन्होंने जंगलों को साफ करके खेती योग्य बनाया और वे एक जगह बसकर रहते थे।
1875 में दक्कन में किसानों ने साहूकारों के खिलाफ विद्रोह किया। ब्रिटिश सरकार ने जाँच के लिए आयोग बनाया। 1878 में पेश इस रिपोर्ट में बताया गया कि किसान भारी करों और साहूकारों के शोषण से त्रस्त थे, जिससे विद्रोह भड़का।
1942 का भारत छोड़ो आंदोलन केवल नेताओं तक सीमित नहीं था। जब बड़े नेता जेल गए, तो नेतृत्व युवाओं (जयप्रकाश नारायण) और आम जनता ने संभाला। छात्रों, मजदूरों और किसानों ने हड़तालें कीं। महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सतारा और मेदिनीपुर में समानांतर सरकारें बनीं।
गांधीजी के लिए चरखा केवल कपड़ा बनाने का औजार नहीं था, बल्कि वह 'स्वावलंबन' और 'आत्मनिर्भरता' का प्रतीक था। खादी पहनने से विदेशी कपड़ों पर निर्भरता खत्म होती थी और गरीबों को रोजगार मिलता था। यह अंग्रेजों की आर्थिक रीढ़ तोड़ने का हथियार था।
1. संसार दुखमय है: जीवन में दुख है (जन्म, मरण, रोग)।
2. दुख का कारण: इच्छा या तृष्णा (Craving)।
3. अष्टांगिक मार्ग: सम्यक दृष्टि, सम्यक कर्म आदि द्वारा इच्छाओं पर विजय पाकर 'निर्वाण' प्राप्त किया जा सकता है।
4. अहिंसा और कर्म: जीवों पर दया और अच्छे कर्मों पर जोर।
सांची का स्तूप एक अर्धगोलाकार टीला (अंड) है। इसके ऊपर एक चौकोर संरचना 'हर्मिका' (देवताओं का घर) है। हर्मिका के ऊपर एक मस्तूल (यष्टि) और छतरी है। स्तूप के चारों ओर प्रदक्षिणा पथ और पत्थर की वेदिका (Railings) है। चारों दिशाओं में भव्य तोरणद्वार (Gateways) हैं जिन पर जातक कथाएँ उकेरी गई हैं।
1. हिंदू-मुस्लिम एकता: घोषणाओं में दोनों धर्मों की भावनाओं का ख्याल रखा गया। गाय और सुअर की चर्बी वाले मुद्दे ने दोनों को एक किया।
2. साझा शत्रु: सभी का उद्देश्य 'फिरंगियों' (अंग्रेजों) को भगाना था।
3. प्रतीक: बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट घोषित कर एक ध्वज के नीचे लड़ने का प्रयास किया।
1. मार्शल लॉ: उत्तर भारत में मार्शल लॉ लागू किया गया और सैन्य अधिकारियों को विद्रोहियों को सजा देने के असीमित अधिकार दिए गए।
2. सैन्य बल: ब्रिटेन से नई सैन्य टुकड़ियाँ मंगवाई गईं।
3. फूट डालो: जमींदारों को जमीन लौटाने का वादा करके विद्रोहियों से अलग किया।
4. क्रूरता: विद्रोहियों को तोपों से उड़ा दिया गया और सार्वजनिक फाँसी दी गई।
बी. पोकर बहादुर ने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचिका की मांग रखी ताकि उन्हें सही प्रतिनिधित्व मिले। इसका कड़ा विरोध हुआ। सरदार पटेल ने इसे "विष" कहा जो देश को बांट देगा। गोविंद वल्लभ पंत ने इसे अल्पसंख्यकों के लिए ही आत्मघाती बताया। अंत में इसे खारिज कर दिया गया ताकि एक एकीकृत राष्ट्र बने।
डॉ. अंबेडकर ने दमित जातियों (दलितों) के लिए राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों की मांग की। एन.जी. रंगा ने कहा कि असली अल्पसंख्यक गरीब और शोषित हैं। चर्चा के बाद, संविधान में 'छुआछूत' को समाप्त किया गया और विधायिका व नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था की गई।
1. राखीगढ़ी: हरियाणा
2. बोधगया: बिहार (गया जिला)
3. अजमेर: राजस्थान
4. झाँसी: उत्तर प्रदेश (मध्य प्रदेश सीमा के पास)
5. अमृतसर: पंजाब
6. बम्बई: महाराष्ट्र (पश्चिमी तट)
इस प्रैक्टिस पेपर में दिए गए सभी प्रश्न केवल विद्यार्थियों के अभ्यास और शैक्षणिक मार्गदर्शन के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। ये प्रश्नपत्र किसी भी प्रकार से वास्तविक MP Board परीक्षा प्रश्नपत्र का आधिकारिक प्रतिरूप नहीं हैं। अंतिम परीक्षा की तैयारी हेतु विद्यार्थियों को MP Board की आधिकारिक पाठ्यपुस्तकों एवं निर्देशों का पालन करना चाहिए।
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