एमपी बोर्ड कक्षा 10वीं हिन्दी मॉडल पेपर सेट B – नवीनतम पैटर्न पर आधारित
Class 10th Hindi Model Paper Set B
MP Board कक्षा 10वीं हिन्दी मॉडल पेपर Set B विद्यार्थियों को परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए तैयार किया गया है। यह पेपर नवीनतम परीक्षा पैटर्न एवं संशोधित अंक योजना (75 अंक) पर आधारित है।
मुख्य जानकारी
- 📚 विषय: हिन्दी
- 🏫 कक्षा: 10वीं (MP Board)
- 📝 पेपर सेट: Set B
- 📊 पूर्णांक: 75 अंक
- ⏳ समय: 3 घंटे
मॉडल पेपर की विशेषताएँ
- नवीनतम सिलेबस के अनुसार तैयार
- बोर्ड परीक्षा पैटर्न आधारित प्रश्न
- महत्वपूर्ण एवं संभावित प्रश्नों का समावेश
- लेखन कौशल (पत्र, निबंध, सूचना, संवाद) का अभ्यास
- स्वमूल्यांकन (Self-Assessment) हेतु उपयोगी
विद्यार्थियों के लिए लाभ
- परीक्षा से पहले अभ्यास का बेहतर अवसर
- समय प्रबंधन में सुधार
- प्रश्नों की संरचना की स्पष्ट समझ
- आत्मविश्वास में वृद्धि
Class 10th Hindi Model Paper
कक्षा 10वीं - हिन्दी
Created By: D. Septa | पूर्णांक: 75 | समय: 3 घंटे
कारण (R): उसे नेताजी का चेहरा पसंद नहीं था। कथन-कारण
रीतिकाल के अधिकांश कवियों ने अपनी रचनाओं में श्रृंगार रस (संयोग और वियोग) का अत्यधिक और विस्तृत वर्णन किया है। राजाओं को प्रसन्न करने के लिए विलासिता और सौंदर्य का चित्रण प्रधान रहा, इसलिए इसे 'श्रृंगार काल' कहा जाता है।
1. लघु मानववाद की प्रतिष्ठा: आम आदमी के जीवन और संघर्षों को महत्व दिया गया।
2. प्रयोगशीलता: नए बिम्बों, प्रतीकों और उपमानों का प्रयोग किया गया।
1. कमल के पत्ते से: जो पानी में रहकर भी पानी से अछूता रहता है (उस पर पानी की बूंद नहीं ठहरती)।
2. तेल की गागरी (मटकी) से: जिस पर पानी की एक भी बूंद नहीं टिकती।
लक्ष्मण ने तर्क दिया कि:
1. यह धनुष बहुत पुराना और कमजोर था।
2. राम ने इसे नया समझकर छुआ था, लेकिन यह छूते ही टूट गया।
3. बचपन में हमने ऐसे कई छोटे धनुष तोड़े हैं, तब तो आपने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया।
परिभाषा: किसी काव्य को पढ़ने, सुनने या देखने से पाठक, श्रोता या दर्शक को जो आनंद प्राप्त होता है, उसे रस कहते हैं।
अंग (4): 1. स्थायी भाव, 2. विभाव, 3. अनुभाव, 4. संचारी भाव।
जहाँ जड़ प्रकृति (निर्जीव वस्तुओं) पर मानवीय भावनाओं या क्रियाओं का आरोप किया जाता है, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।
उदाहरण: "मेघ आए बड़े बन-ठन के, सँवर के।" (यहाँ बादलों का दामाद की तरह सजना-संवरना दिखाया गया है)।
शहनाई का प्रयोग शुभ कार्यों (विवाह, उत्सव) में किया जाता है और बिस्मिल्ला खाँ शहनाई वादन में सर्वश्रेष्ठ थे। वे 80 वर्षों तक काशी विश्वनाथ के दरबार में शहनाई बजाकर सुर की साधना करते रहे। उनकी शहनाई की धुन लोगों के मन में आनंद और मंगल कामना भर देती थी।
वे बेल्जियम से भारत आए थे, लेकिन उन्होंने भारत को ही अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए आंदोलन किया, रामकथा पर शोध किया (रामकथा: उत्पत्ति और विकास) और प्रसिद्ध अंग्रेजी-हिंदी शब्दकोश तैयार किया। उनका जीवन भारतीयता में पूरी तरह रचा-बसा था।
"विकल विकल, उन्मन थे उन्मन,
विश्व के निदाघ के सकल जन,
आए अज्ञात दिशा से अनंत के घन!"
"मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,
मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।"
संदर्भ: यह पंक्तियाँ पाठ्यपुस्तक 'क्षितिज भाग-2' की कविता 'उत्साह' से ली गई हैं। इसके कवि 'सूर्यकांत त्रिपाठी निराला' हैं।
प्रसंग: कवि बादलों का आह्वान कर रहा है ताकि भीषण गर्मी से तपती धरती और व्याकुल जनमानस को राहत मिले।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि भीषण गर्मी (निदाघ) के कारण संसार के सभी लोग व्याकुल और बेचैन थे। उनका मन कहीं टिक नहीं रहा था (उन्मन थे)। ऐसे कष्टप्रद समय में आकाश में न जाने किस अज्ञात दिशा से बादल घिर आए। यहाँ बादल 'क्रांति' और 'नवजीवन' के प्रतीक हैं जो दुखों को दूर करने आए हैं।
संदर्भ: यह पंक्तियाँ 'आत्मकथ्य' कविता से ली गई हैं, जिसके कवि 'जयशंकर प्रसाद' हैं।
भावार्थ: कवि कहते हैं कि उनका मन रूपी भौंरा गुनगुना कर न जाने अपनी कौन सी दुखभरी कहानी सुनाना चाहता है। वे जब अपने जीवन की ओर देखते हैं तो पाते हैं कि जीवन रूपी वृक्ष से खुशियों रूपी पत्तियां मुरझा कर गिर रही हैं। अर्थात उनका जीवन दुखों, अभावों और निराशा से भरा है। इसमें सुख के पल बहुत कम रहे हैं, इसलिए वे अपनी आत्मकथा लिखने में असमर्थता जताते हैं।
"बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-जिंदगी सब कुछ होम देने वालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है।"
"बालगोबिन भगत की संगीत साधना का चरम उत्कर्ष उस दिन देखा गया जिस दिन उनका बेटा मरा। इकलौता बेटा था वह।"
संदर्भ: यह गद्यांश पाठ 'नेताजी का चश्मा' से लिया गया है। इसके लेखक 'स्वयं प्रकाश' हैं।
प्रसंग: हालदार साहब कैप्टन चश्मेवाले की मृत्यु और पानवाले की संवेदनहीनता पर दुखी होकर देश के भविष्य के बारे में सोचते हैं।
व्याख्या: हालदार साहब चिंतित होकर सोचते हैं कि उस देश या समाज का भविष्य क्या होगा, जहाँ के लोग देशभक्तों का सम्मान करने के बजाय उनका मजाक उड़ाते हैं। जो लोग (जैसे कैप्टन) देश के लिए अपना सब कुछ त्याग देते हैं, लोग उन पर हंसते हैं। दूसरी तरफ, लोग अपने छोटे-छोटे स्वार्थों के लिए अपना ईमान बेचने को तैयार रहते हैं। यह समाज के नैतिक पतन और देशभक्ति के अभाव का संकेत है।
संदर्भ: यह गद्यांश 'बालगोबिन भगत' पाठ से है, जिसके लेखक 'रामवृक्ष बेनीपुरी' हैं।
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि बालगोबिन भगत कबीर के सच्चे भक्त थे और हमेशा गाते रहते थे। लेकिन उनकी भक्ति और संगीत की असली परीक्षा उस दिन हुई जब उनका इकलौता बेटा मर गया। आम लोग ऐसे समय में रोते-बिलखते हैं, लेकिन भगत जी ने इसे 'आत्मा का परमात्मा से मिलन' माना। वे शोक मनाने के बजाय लीन होकर गीत गाते रहे और पतोहू को भी उत्सव मनाने को कहा। यह उनके मोह-मुक्त व्यक्तित्व की पराकाष्ठा थी।
"समय का सदुपयोग ही सफलता की कुंजी है। जो व्यक्ति समय के मूल्य को पहचानता है, वह जीवन में कभी असफल नहीं होता। विद्यार्थी जीवन में समय का महत्व और भी अधिक है..."
(क) गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
(ख) जीवन में कौन असफल नहीं होता?
(ग) 'कुंजी' शब्द का पर्यायवाची लिखिए।
(घ) गद्यांश का सारांश लिखिए।
"नर हो, न निराश करो मन को,
कुछ काम करो, कुछ काम करो,
जग में रह कर कुछ नाम करो..."
(क) शीर्षक लिखिए।
(ख) कवि मनुष्य को क्या संदेश दे रहा है?
(ग) 'जग' का अर्थ लिखिए।
(घ) भावार्थ लिखिए।
(क) शीर्षक: समय का महत्व / समय का सदुपयोग।
(ख) उत्तर: जो व्यक्ति समय के मूल्य को पहचानता है और उसका सदुपयोग करता है, वह कभी असफल नहीं होता।
(ग) पर्यायवाची: चाबी / उपाय।
(घ) सारांश: समय अनमोल है और सफलता का आधार है। विशेषकर विद्यार्थियों के लिए समय का पाबंद होना अनिवार्य है। बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता, इसलिए हमें हर क्षण का सही उपयोग करना चाहिए।
(क) शीर्षक: कर्मठता / कर्मवीर।
(ख) संदेश: कवि संदेश दे रहे हैं कि मनुष्य को कभी निराश नहीं होना चाहिए और निरंतर कर्म (काम) करते रहना चाहिए।
(ग) अर्थ: संसार / दुनिया।
(घ) भावार्थ: कवि मैथिलीशरण गुप्त कहते हैं कि मनुष्य जीवन दुर्लभ है, इसे निराशा में नहीं बिताना चाहिए। संसार में जन्म लिया है तो कुछ ऐसे अच्छे कार्य करो जिससे तुम्हारा नाम अमर हो जाए। कर्म करना ही जीवन का उद्देश्य है।
सेवा में,
श्रीमान प्राचार्य महोदय,
सांदीपनि विद्यालय, तलवाड़ा बुजुर्ग।
विषय: स्थानांतरण प्रमाण पत्र (T.C.) हेतु आवेदन।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय का कक्षा 10वीं का छात्र हूँ। मेरे पिताजी का स्थानांतरण यहाँ से इंदौर हो गया है। मेरा पूरा परिवार अब वहीं जा रहा है। इस कारण मैं अपनी आगे की पढ़ाई आपके विद्यालय में जारी रखने में असमर्थ हूँ।
अतः आपसे प्रार्थना है कि मुझे मेरा स्थानांतरण प्रमाण पत्र (T.C.) शीघ्र प्रदान करने की कृपा करें, ताकि मैं इंदौर के विद्यालय में प्रवेश ले सकूँ। मैंने विद्यालय का समस्त शुल्क जमा कर दिया है।
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
नाम: (क.ख.ग)
कक्षा: 10वीं
दिनांक: 20/02/2026
तलवाड़ा बुजुर्ग,
दिनांक: 20/02/2026
प्रिय मित्र रोहन,
सप्रेम नमस्ते।
मैं यहाँ सकुशल हूँ और आशा करता हूँ कि तुम भी ठीक होगे। हमारी वार्षिक परीक्षाएँ समाप्त होने वाली हैं। इस बार गर्मी की छुट्टियों में मेरा मन है कि तुम मेरे गाँव आओ। यहाँ का प्राकृतिक वातावरण, आम के बगीचे और नदी का किनारा तुम्हें बहुत पसंद आएगा। हम साथ में खूब मजे करेंगे और पढ़ाई की थकान दूर करेंगे।
माता-पिता जी से अनुमति लेकर अपने आने की सूचना देना। मैं तुम्हारा इंतजार करूँगा।
तुम्हारा मित्र,
समीर
1. कंप्यूटर: आज की आवश्यकता
रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. आधुनिक युग में महत्व, 3. विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग, 4. लाभ और हानि, 5. उपसंहार।
1. प्रस्तावना: आज का युग विज्ञान और तकनीक का युग है। कंप्यूटर विज्ञान का एक अद्भुत आविष्कार है जिसने मानव जीवन में क्रांति ला दी है। यह एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जो गणनाओं को तीव्र गति से और त्रुटिहीन करती है।
2. आधुनिक युग में महत्व: आज जीवन का कोई भी क्षेत्र कंप्यूटर से अछूता नहीं है। शिक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक, हर जगह इसकी जरूरत है। इंटरनेट ने इसे और अधिक शक्तिशाली बना दिया है, जिससे दुनिया 'ग्लोबल विलेज' बन गई है।
3. विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग:
- शिक्षा: ऑनलाइन क्लासेस, ई-बुक्स, और रिसर्च के लिए।
- बैंक और व्यापार: खातों का रखरखाव, ऑनलाइन बैंकिंग और ई-कॉमर्स।
- चिकित्सा: बीमारियों की जाँच (MRI, CT Scan) और ऑपरेशन में।
- संचार: ईमेल, वीडियो कॉल और सोशल मीडिया।
4. लाभ और हानि: कंप्यूटर ने काम को आसान, तेज और कागज-मुक्त (Paperless) बनाया है। इससे सूचनाओं का भंडार सुलभ हुआ है। लेकिन इसके अत्यधिक प्रयोग से स्वास्थ्य समस्याएं (आँखें कमजोर होना), साइबर अपराध और बेरोजगारी का खतरा भी बढ़ा है।
5. उपसंहार: कंप्यूटर आज की अनिवार्य आवश्यकता है। यदि हम इसका विवेकपूर्ण और सकारात्मक उपयोग करें, तो यह मानव विकास में मील का पत्थर साबित होगा।
2. स्वच्छ भारत अभियान
रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. अभियान का उद्देश्य, 3. समाज की भूमिका, 4. लाभ, 5. उपसंहार।
1. प्रस्तावना: "स्वच्छता ईश्वर की भक्ति के समान है।" इसी विचार को मूर्त रूप देने के लिए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को गाँधी जयंती पर 'स्वच्छ भारत अभियान' की शुरुआत की।
2. अभियान का उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य भारत को खुले में शौच से मुक्त (ODF) करना, हर घर में शौचालय बनाना, सड़कों और गलियों को साफ रखना तथा कचरा प्रबंधन की उचित व्यवस्था करना है। गाँधीजी का सपना था - स्वच्छ और स्वस्थ भारत।
3. समाज की भूमिका: यह केवल सरकार का काम नहीं है। हर नागरिक को इसमें योगदान देना चाहिए। हमें कचरा डस्टबिन में ही डालना चाहिए, प्लास्टिक का प्रयोग कम करना चाहिए और अपने आस-पास सफाई रखनी चाहिए।
4. लाभ: सफाई से बीमारियों (हैजा, डेंगू, मलेरिया) में कमी आती है। पर्यावरण शुद्ध होता है। स्वच्छ देश में पर्यटन बढ़ता है और देश की छवि सुधरती है। स्वस्थ नागरिक ही देश की प्रगति में योगदान दे सकते हैं।
5. उपसंहार: स्वच्छ भारत अभियान एक जन-आंदोलन बन चुका है। हमें इसे एक आदत बनाना होगा, न कि केवल एक कार्यक्रम। जब हर भारतीय सफाई के प्रति जागरूक होगा, तभी भारत वास्तव में स्वच्छ और सुंदर बनेगा।
3. नारी शिक्षा का महत्व
रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. नारी शिक्षा की आवश्यकता, 3. समाज पर प्रभाव, 4. वर्तमान स्थिति, 5. उपसंहार।
1. प्रस्तावना: "एक बालक को पढ़ाना एक व्यक्ति को पढ़ाना है, लेकिन एक बालिका को पढ़ाना पूरे परिवार को पढ़ाना है।" नारी समाज का आधा हिस्सा है, इसलिए उसकी शिक्षा के बिना समाज का पूर्ण विकास असंभव है।
2. नारी शिक्षा की आवश्यकता: नारी परिवार की धुरी होती है। शिक्षित नारी अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दे सकती है, परिवार के स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकती है। वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती है और शोषण का विरोध कर सकती है।
3. समाज पर प्रभाव: शिक्षित महिलाएं अंधविश्वास और कुरीतियों (जैसे दहेज प्रथा) को मिटाने में सहायक होती हैं। वे देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देती हैं। इंदिरा गांधी, कल्पना चावला, और पी.वी. सिंधु जैसी महिलाओं ने देश का नाम रोशन किया है।
4. वर्तमान स्थिति: आज सरकार 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे अभियानों से नारी शिक्षा को बढ़ावा दे रही है। लड़कियां अब हर क्षेत्र (सेना, विज्ञान, राजनीति) में लड़कों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं।
5. उपसंहार: नारी शिक्षा राष्ट्र की प्रगति के लिए अनिवार्य है। हमें लड़कियों को बोझ नहीं, बल्कि शक्ति समझना चाहिए और उन्हें शिक्षा के समान अवसर देने चाहिए।
4. पुस्तकालय का महत्व
रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. ज्ञान का भंडार, 3. पुस्तकालय के प्रकार, 4. विद्यार्थियों के लिए उपयोगिता, 5. उपसंहार।
1. प्रस्तावना: पुस्तकालय का अर्थ है - 'पुस्तकों का घर' (पुस्तक + आलय)। यह वह स्थान है जहाँ विभिन्न विषयों, भाषाओं और लेखकों की पुस्तकें संग्रहित होती हैं और पाठक वहाँ बैठकर ज्ञानार्जन करते हैं।
2. ज्ञान का भंडार: पुस्तकालय ज्ञान का सागर है। यहाँ इतिहास, विज्ञान, साहित्य, और समसामयिक घटनाओं से जुड़ी पुस्तकें, पत्रिकाएँ और समाचार पत्र उपलब्ध होते हैं। यह हमें देश-दुनिया से जोड़ता है।
3. पुस्तकालय के प्रकार: व्यक्तिगत पुस्तकालय (घर पर), विद्यालय/कॉलेज पुस्तकालय (छात्रों के लिए), और सार्वजनिक पुस्तकालय (आम जनता के लिए)।
4. विद्यार्थियों के लिए उपयोगिता: गरीब छात्र जो महँगी किताबें नहीं खरीद सकते, वे पुस्तकालय से लाभ उठा सकते हैं। यहाँ का शांत वातावरण पढ़ाई के लिए उत्तम होता है। इससे स्वाध्याय (Self-study) की आदत विकसित होती है।
5. उपसंहार: पुस्तकालय हमारे सच्चे मित्र हैं। ये हमारा मानसिक विकास करते हैं और चरित्र निर्माण में सहायक होते हैं। हमें पुस्तकालयों का सदुपयोग करना चाहिए और पुस्तकों की रक्षा करनी चाहिए।
⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer)
इस पोस्ट में दिए गए प्रश्न एवं उत्तर केवल अभ्यास और शैक्षणिक उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। ये प्रश्न संभावित (Model) स्वरूप के हैं तथा बोर्ड परीक्षा में इन्हीं प्रश्नों के आने की कोई गारंटी नहीं है।
उत्तर संदर्भ सामग्री एवं पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किए गए हैं। छात्र अंतिम एवं प्रमाणिक जानकारी के लिए संबंधित पाठ्यपुस्तक, अधिकृत सिलेबस एवं बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का ही अनुसरण करें।
इस सामग्री का उद्देश्य विद्यार्थियों की तैयारी में सहयोग करना है, न कि किसी आधिकारिक प्रश्नपत्र का प्रतिनिधित्व करना।
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✍️ GYAN DEEP INFO विद्यार्थियों के लिए नियमित रूप से अध्ययन सामग्री एवं मॉडल पेपर उपलब्ध कराता है। नवीनतम अपडेट के लिए वेबसाइट विजिट करते रहें।










