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एमपी बोर्ड कक्षा 10वीं हिन्दी मॉडल पेपर सेट C – नवीनतम पैटर्न पर आधारित

एमपी बोर्ड कक्षा 10वीं हिन्दी मॉडल पेपर सेट C – नवीनतम पैटर्न पर आधारित

एमपी बोर्ड कक्षा 10वीं हिन्दी मॉडल पेपर सेट C – नवीनतम पैटर्न पर आधारित

 Class 10th Hindi Model Paper Set C

एमपी बोर्ड कक्षा 10वीं हिन्दी मॉडल पेपर – सेट C MP Board Class 10 Hindi Model Paper Set C 40 अंकों के पैटर्न पर आधारित अभ्यास पेपर है। यह छात्रों को कम अंक वाले प्रश्नपत्र प्रारूप में बेहतर तैयारी करने और महत्वपूर्ण प्रश्नों पर फोकस करने में सहायता करता है।

मुख्य जानकारी

  • विषय: हिन्दी
  • कक्षा: 10वीं (MP Board)
  • पेपर सेट: Set C
  • पूर्णांक: 75 अंक

मॉडल पेपर की विशेषताएँ

  • नवीनतम सिलेबस के अनुसार तैयार
  • बोर्ड परीक्षा पैटर्न पर आधारित
  • महत्वपूर्ण एवं संभावित प्रश्न शामिल
  • कम समय में अभ्यास के लिए उपयुक्त
  • पुनरावृत्ति (Revision) हेतु उपयोगी

विद्यार्थियों के लिए लाभ

  • त्वरित अभ्यास का अवसर
  • समय प्रबंधन में सुधार
  • प्रश्नों की संरचना समझने में सहायक
  • परीक्षा आत्मविश्वास बढ़ाने में मददगार

Class 10th Hindi Model Paper Set C

Hindi Model Paper 10th (Set-C) - Sandipani Vidyalaya

MP Board Class 10th Model Paper SET C

(मॉडल पेपर: सेट-C)

कक्षा 10वीं - हिन्दी

Created by : D. Septa | पूर्णांक: 75 | समय: 3 घंटे

खण्ड अ: वस्तुनिष्ठ प्रश्न (30 अंक)
प्र.1. सही विकल्प चुनकर लिखिए: (1×6 = 6 अंक)
(i) 'तुलसीदास' की रचना 'रामचरितमानस' की भाषा कौन सी है?
(अ) ब्रज (ब) बुंदेली (स) अवधी (द) खड़ी बोली
👉 (स) अवधी
विवरण: तुलसीदास ने अपना महाकाव्य 'रामचरितमानस' लोकभाषा अवधी में रचा है।

(ii) 'दंतुरित मुसकान' किस कवि की रचना है?
(अ) जयशंकर प्रसाद (ब) नागार्जुन (स) सूर्यकांत त्रिपाठी निराला (द) मंगलेश डबराल
👉 (ब) नागार्जुन
विवरण: 'यह दंतुरित मुसकान' कविता जनकवि नागार्जुन द्वारा रचित है।

(iii) 'बालगोबिन भगत' साहब किसे मानते थे?
(अ) नानक को (ब) कबीर को (स) सूरदास को (द) तुलसीदास को
👉 (ब) कबीर को
विवरण: बालगोबिन भगत कबीरपंथी थे और उन्हीं के पदों को गाते थे।

(iv) 'वह धीरे-धीरे चलता है' - इस वाक्य में क्रिया विशेषण का भेद है:
(अ) रीतिवाचक (ब) कालवाचक (स) स्थानवाचक (द) परिमाणवाचक
👉 (अ) रीतिवाचक
विवरण: 'धीरे-धीरे' क्रिया के होने के ढंग (रीति) को बता रहा है।

(v) कथन (A): भोलानाथ अपने पिता के साथ ही सोता था।
कारण (R): उसे अपनी माँ से डर लगता था। कथन-कारण
(अ) A और R दोनों सही हैं। (ब) A सही है, लेकिन R गलत है। (स) A गलत है, R सही है। (द) A और R दोनों गलत हैं।
👉 (ब) A सही है, लेकिन R गलत है।
विवरण: भोलानाथ पिता के साथ सोता था, लेकिन इसका कारण माँ से डरना नहीं, बल्कि पिता से अधिक लगाव था।

(vi) 'संचारी भावों' की संख्या कितनी मानी गई है?
(अ) 32 (ब) 33 (स) 34 (द) 35
👉 (ब) 33
विवरण: भारतीय काव्यशास्त्र में संचारी भावों की संख्या 33 निर्धारित की गई है।
प्र.2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए: (1×6 = 6 अंक)
(i) 'आत्मकथ्य' कविता के कवि ________ हैं। (जयशंकर प्रसाद / महादेवी वर्मा)
जयशंकर प्रसाद
विवरण: यह कविता हंस पत्रिका के आत्मकथा विशेषांक के लिए लिखी गई थी।

(ii) 'लय, ताल, तुक, यति, गति' से नियोजित रचना ________ कहलाती है। (छंद / रस)
छंद
विवरण: छंदबद्ध रचना ही पद्य कहलाती है, जिसमें लय और ताल का अनुशासन होता है।

(iii) 'नेताजी का चश्मा' गद्य की ________ विधा की रचना है। (कहानी / निबंध)
कहानी
विवरण: यह स्वयं प्रकाश द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध कहानी है।

(iv) 'भोलानाथ' का असली नाम ________ था। (तारकेश्वरनाथ / बैजनाथ)
तारकेश्वरनाथ
विवरण: 'माता का अँचल' पाठ में लेखक शिवपूजन सहाय ने अपने बचपन का नाम तारकेश्वरनाथ बताया है।

(v) 'अनेकार्थी शब्द' में एक ही शब्द के ________ अर्थ होते हैं। (एक / अनेक)
अनेक
विवरण: जैसे 'अंबर' का अर्थ 'आकाश' भी है और 'वस्त्र' भी।

(vi) 'जिन वाक्यों में किसी कार्य के न होने का बोध हो', उन्हें ________ वाक्य कहते हैं। (निषेधवाचक / प्रश्नवाचक)
निषेधवाचक
विवरण: इन्हें नकारात्मक वाक्य भी कहते हैं। जैसे: "राम नहीं पढ़ता है।"
प्र.3. सत्य/असत्य का चयन कीजिए: (1×6 = 6 अंक)
(i) 'परशुराम' के क्रोध को देखकर लक्ष्मण डर गए थे।
असत्य
विवरण: लक्ष्मण डरे नहीं थे, बल्कि उन्होंने परशुराम के क्रोध का व्यंग्यपूर्ण उत्तर दिया था।

(ii) प्रबंध काव्य के दो भेद हैं - महाकाव्य और खंडकाव्य।
सत्य
विवरण: प्रबंध काव्य (जिसमें कथा होती है) मुख्य रूप से महाकाव्य और खंडकाव्य में विभाजित होता है।

(iii) 'लखनवी अंदाज' पाठ में नवाब साहब ने खीरे खा लिए थे।
असत्य
विवरण: नवाब साहब ने खीरे की फाँकों को केवल सूंघा और खिड़की से बाहर फेंक दिया।

(iv) जिस क्रिया का प्रभाव कर्ता पर पड़ता है, वह अकर्मक क्रिया होती है।
सत्य
विवरण: अकर्मक क्रिया में कर्म नहीं होता, इसलिए क्रिया का फल सीधा कर्ता पर पड़ता है (जैसे - राम सोता है)।

(v) 'मैं क्यों लिखता हूँ' के लेखक अज्ञेय हैं।
सत्य
विवरण: यह पाठ सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' द्वारा लिखित है।

(vi) 'उत्साह' कविता में बादल शांति का प्रतीक है।
असत्य
विवरण: 'उत्साह' कविता में बादल 'क्रांति' और 'नवनिर्माण' का प्रतीक है, न कि शांति का।
प्र.4. सही जोड़ी मिलाइए: (1×6 = 6 अंक)
(i) छायावाद के प्रवर्तक   -> (क) चौपाई
(ii) 16-16 मात्राएं   -> (ख) जयशंकर प्रसाद
(iii) मन्नू भंडारी   -> (ग) यतीन्द्र मिश्र
(iv) नौबतखाने में इबादत   -> (घ) एक कहानी यह भी
(v) दांत खट्टे करना   -> (ङ) सिक्किम की राजधानी
(vi) गंगटोक   -> (च) परास्त करना
सही मिलान:
1. छायावाद के प्रवर्तक → (ख) जयशंकर प्रसाद
2. 16-16 मात्राएं → (क) चौपाई (सम मात्रिक छंद)
3. मन्नू भंडारी → (घ) एक कहानी यह भी (आत्मकथा)
4. नौबतखाने में इबादत → (ग) यतीन्द्र मिश्र (लेखक)
5. दांत खट्टे करना → (च) परास्त करना (मुहावरा)
6. गंगटोक → (ङ) सिक्किम की राजधानी
प्र.5. एक शब्द/वाक्य में उत्तर दीजिए: (1×6 = 6 अंक)
(i) 'सूरदास' के पदों की भाषा कौन सी है?
ब्रज भाषा

(ii) 'रामचरितमानस' का प्रमुख छंद कौन सा है?
चौपाई और दोहा

(iii) 'आत्मकथ्य' कविता किस पत्रिका में प्रकाशित हुई थी?
'हंस' पत्रिका (1932 में)

(iv) 'कहानी' के कितने तत्व माने गए हैं?
छह (कथानक, पात्र, संवाद, देशकाल, उद्देश्य, शैली)

(v) 'यथाशक्ति' में कौन सा समास है?
अव्ययीभाव समास

(vi) 'हिरोशिमा' नामक कविता किस काव्य संग्रह से ली गई है?
'अरी ओ करुणा प्रभामय'
खण्ड ब: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
प्र.6. 'भक्तिकाल' की दो प्रमुख प्रवृत्तियाँ लिखिए।
अथवा
प्रयोगवाद के किन्हीं दो कवियों के नाम और उनकी एक-एक रचना लिखिए।
उत्तर (मुख्य):
1. गुरु की महत्ता: भक्तिकाल में ईश्वर प्राप्ति के लिए गुरु को अनिवार्य माना गया है (जैसे कबीर और तुलसी ने गुरु वंदना की है)।
2. स्वांतः सुखाय रचना: कवियों ने लोकमंगल और आत्म-संतुष्टि के लिए काव्य रचना की, न कि केवल राजदरबारों के लिए।
उत्तर (अथवा):
1. अज्ञेय: 'हरी घास पर क्षण भर'।
2. धर्मवीर भारती: 'अंधा युग' (या 'कनुप्रिया')।
प्र.7. 'लक्ष्मण' ने वीर योद्धा की क्या विशेषताएँ बताई हैं?
अथवा
गोपियों ने उद्धव को 'बड़भागी' क्यों कहा है?
उत्तर (मुख्य):
लक्ष्मण के अनुसार:
1. वीर योद्धा युद्धभूमि में अपनी वीरता का प्रदर्शन करते हैं, शत्रुओं के सामने अपनी डींगें नहीं हांकते।
2. वे ब्राह्मणों, गायों, देवताओं और कमजोरों पर अपनी वीरता नहीं दिखाते। वे धैर्यवान और विनम्र होते हैं।
उत्तर (अथवा):
गोपियों ने उद्धव को व्यंग्य में 'बड़भागी' (भाग्यवान) कहा है। उनका आशय यह है कि उद्धव कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम रूपी सागर में डूबने से बचे रहे, जो कि एक दुर्भाग्य की बात है। वे उस कमल के पत्ते के समान हैं जो पानी में रहकर भी सूखा रहता है।
प्र.8. 'विभाव' किसे कहते हैं? इसके कितने भेद हैं?
अथवा
अतिशयोक्ति अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर (मुख्य):
परिभाषा: जो कारण (व्यक्ति, वस्तु या परिस्थिति) हृदय में स्थित स्थायी भाव को जागृत या उद्दीप्त करते हैं, उन्हें विभाव कहते हैं।
भेद: इसके दो भेद हैं - 1. आलंबन विभाव, 2. उद्दीपन विभाव।
उत्तर (अथवा):
जहाँ किसी वस्तु या स्थिति का वर्णन इतना बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए कि लोक सीमा का उल्लंघन हो जाए, वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है।
उदाहरण: "हनुमान की पूँछ में, लगन न पाई आग। लंका सिगरी जल गई, गए निसाचर भाग।"
प्र.9. कैप्टन बार-बार मूर्ति पर चश्मा क्यों लगा देता था?
अथवा
बालगोबिन भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेले क्यों नहीं छोड़ना चाहती थी?
उत्तर (मुख्य):
कैप्टन एक देशभक्त नागरिक था। उसे नेताजी की बिना चश्मे वाली मूर्ति अधूरी और आहत करती थी। इसलिए वह अपनी छोटी सी दुकान से एक चश्मा मूर्ति पर लगा देता था। जब कोई ग्राहक वह चश्मा मांग लेता, तो वह उसे बेचकर मूर्ति पर दूसरा चश्मा लगा देता था।
उत्तर (अथवा):
भगत के इकलौते बेटे की मृत्यु के बाद वे अकेले रह गए थे। पुत्रवधू को चिंता थी कि बुढ़ापे में भगत जी के लिए भोजन कौन बनाएगा और बीमार पड़ने पर उनकी देखभाल कौन करेगा। इसलिए सेवाभाव के कारण वह उन्हें छोड़कर नहीं जाना चाहती थी।
प्र.10. रिपोर्ताज (Reportage) किसे कहते हैं?
अथवा
रेखाचित्र और संस्मरण में दो अंतर लिखिए।
उत्तर (मुख्य):
रिपोर्ताज फ्रांसीसी भाषा का शब्द है। जब लेखक किसी घटना का आंखों देखा हाल इस प्रकार वर्णित करता है कि वह पाठक के हृदय को छू ले और उसका प्रभाव अमिट हो, तो उसे रिपोर्ताज कहते हैं।
उत्तर (अथवा):
1. विषय: रेखाचित्र किसी भी व्यक्ति (सामान्य या विशेष) का हो सकता है, संस्मरण प्रायः किसी महापुरुष या विशेष घटना का होता है।
2. तटस्थता: रेखाचित्र में लेखक तटस्थ रहकर चित्र खींचता है, संस्मरण में लेखक की आत्मीयता और निजी अनुभव जुड़े होते हैं।
प्र.11. 'रामवृक्ष बेनीपुरी' की भाषा-शैली की विशेषताएँ लिखिए।
अथवा
द्वंद्व समास किसे कहते हैं? उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर (मुख्य):
रामवृक्ष बेनीपुरी जी 'कलम के जादूगर' कहे जाते हैं। उनकी भाषा ओजस्वी, खड़ी बोली हिंदी है जिसमें तत्सम, तद्भव और देशज शब्दों का सुंदर समन्वय है। उनकी शैली चित्रात्मक है, जिससे वर्णन सजीव हो उठता है।
उत्तर (अथवा):
जिस समास में दोनों पद प्रधान हों और विग्रह करने पर 'और', 'या', 'अथवा' लगता हो, उसे द्वंद्व समास कहते हैं।
उदाहरण: माता-पिता (माता और पिता), सुख-दुख (सुख और दुख)।
प्र.12. 'माता का अँचल' पाठ में बच्चे की क्या विशेषता बताई गई है?
अथवा
जॉर्ज पंचम की नाक को पुनः लगाने के लिए मूर्तिकार ने क्या-क्या यत्न किए?
उत्तर (मुख्य):
इस पाठ में बताया गया है कि बच्चे का अपनी माँ के प्रति गहरा लगाव होता है। सुख के समय भले ही वह पिता के साथ खेले, लेकिन विपत्ति या डर के समय उसे माँ की गोद (अँचल) में ही सुरक्षा और शांति मिलती है।
उत्तर (अथवा):
1. उसने भारत के पहाड़ी प्रदेशों और पत्थरों की खानों का दौरा किया।
2. उसने देश के महापुरुषों की मूर्तियों की नाक टटोली।
3. उसने बिहार सेक्रेटेरिएट के सामने शहीद बच्चों की मूर्तियों की नाक देखी।
4. अंत में, उसने एक जीवित व्यक्ति की नाक काटकर मूर्ति पर लगा दी।
प्र.13. 'वाक्य' किसे कहते हैं? अर्थ के आधार पर वाक्य के कितने भेद होते हैं?
अथवा
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए:
1. आग बबूला होना
2. गागर में सागर भरना
उत्तर (मुख्य):
सार्थक शब्दों का वह व्यवस्थित समूह जिससे अपेक्षित अर्थ पूर्ण रूप से स्पष्ट हो जाए, वाक्य कहलाता है। अर्थ के आधार पर वाक्य के 8 भेद होते हैं (जैसे- विधानवाचक, निषेधवाचक, प्रश्नवाचक आदि)।
उत्तर (अथवा):
1. आग बबूला होना (बहुत क्रोधित होना): गृहकार्य पूरा न होने पर शिक्षक छात्र पर आग बबूला हो गए।
2. गागर में सागर भरना (थोड़े में बहुत कहना): बिहारी जी ने अपने दोहों में गागर में सागर भर दिया है।
खण्ड स: लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक)
प्र.18. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:
"मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,
मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।"
अथवा
पद्यांश का भावार्थ लिखिए:
"फसल क्या है?
और तो कुछ नहीं है वह
नदियों के पानी का जादू है वह..."
उत्तर (मुख्य):

संदर्भ: पाठ्यपुस्तक क्षितिज भाग-2, कविता 'आत्मकथ्य', कवि 'जयशंकर प्रसाद' ।

प्रसंग: कवि अपनी आत्मकथा न लिखने का कारण बताते हुए जीवन की नश्वरता का वर्णन कर रहे हैं।

व्याख्या: कवि कहते हैं कि मेरा मन रूपी भौंरा गुनगुना कर न जाने अपनी कौन सी दुखभरी कहानी सुनाना चाहता है। जब मैं अपने जीवन की ओर देखता हूँ, तो पाता हूँ कि जीवन रूपी वृक्ष से खुशियों की पत्तियां मुरझा कर गिर रही हैं। अर्थात मेरा जीवन दुखों और अभावों से भरा है, इसमें सुख के पल बहुत कम और क्षणिक रहे हैं।

उत्तर (अथवा):

संदर्भ: कविता 'फसल', कवि 'नागार्जुन' ।

भावार्थ: कवि कहते हैं कि फसल केवल एक पौधा नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मनुष्य के सहयोग का परिणाम है। यह नदियों के जल का प्रभाव (जादू) है, करोड़ों इंसानों के हाथों की मेहनत (स्पर्श की महिमा) है, और विभिन्न प्रकार की मिट्टी का गुणधर्म है। साथ ही, इसमें सूरज की किरणों का रूपांतरण और हवा की थिरकन भी शामिल है।

प्र.19. गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:
"नवाब साहब ने खीरे की सब फाँकों को खिड़की के बाहर फेंककर तौलिये से हाथ और होंठ पोंछ लिए और गर्व से गुलाबी आँखों से हमारी ओर देख लिया, मानो कह रहे हों - यह है खानदानी रईसों का तरीका!"
अथवा
गद्यांश का आशय स्पष्ट करें:
"काशी में संगीत आयोजन की एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है... यह आयोजन पिछले कई वर्षों से संकटमोचन मंदिर में होता आया है।"
उत्तर (मुख्य):

संदर्भ: पाठ 'लखनवी अंदाज', लेखक 'यशपाल' ।

प्रसंग: नवाब साहब द्वारा खीरे को सूंघकर फेंकने के बाद के उनके हाव-भाव का वर्णन।

व्याख्या: लेखक बताते हैं कि नवाब साहब ने खीरे की सभी स्वादिष्ट फाँकों को बिना खाए ही खिड़की से बाहर फेंक दिया। इसके बाद उन्होंने बड़े इत्मीनान से हाथ-मुंह पोंछे और लेखक की ओर गर्व भरी नजरों से देखा। उनका यह व्यवहार यह जताने के लिए था कि हम रईस लोग हैं, हम खीरे जैसी तुच्छ चीज खाते नहीं, बस उसकी सुगंध लेते हैं। यह उनके झूठे अभिमान और बनावटीपन को दर्शाता है।

उत्तर (अथवा):

संदर्भ: पाठ 'नौबतखाने में इबादत', लेखक 'यतीन्द्र मिश्र' ।

आशय: लेखक काशी (बनारस) की सांस्कृतिक समृद्धि का वर्णन कर रहे हैं। काशी केवल धर्म की नगरी नहीं, बल्कि संगीत और कला का भी केंद्र है। यहाँ संकटमोचन मंदिर में हनुमान जयंती के अवसर पर शास्त्रीय संगीत और नृत्य का भव्य आयोजन होता है। बिस्मिल्ला खाँ जैसे महान कलाकार इसमें अपनी हाजिरी लगाना (शहनाई बजाना) अपना धर्म समझते थे।

प्र.20. 'अनुशासन का महत्व' विषय पर एक अनुच्छेद लिखिए।
अथवा
अपने शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर दो नागरिकों के बीच संवाद लिखिए।
उत्तर (अनुच्छेद - अनुशासन):

अनुशासन (अनु + शासन) का अर्थ है नियमों का पालन करना। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अनुशासन का अत्यधिक महत्व है। प्रकृति भी अनुशासन में रहकर कार्य करती है—सूरज का उगना, ऋतुओं का बदलना। विद्यार्थी जीवन में तो यह सफलता की कुंजी है। अनुशासित व्यक्ति अपने समय और ऊर्जा का सही उपयोग करता है। जिस देश के नागरिक अनुशासित होते हैं, वह देश निरंतर प्रगति करता है। अनुशासनहीनता जीवन को अस्त-व्यस्त कर देती है। अतः हमें बचपन से ही अनुशासन को अपने जीवन का अंग बनाना चाहिए।

उत्तर (संवाद):

नागरिक 1: भाई साहब, क्या हाल है हमारे शहर का? जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं।

नागरिक 2: सही कह रहे हैं आप। नगरपालिका की गाड़ी भी रोज नहीं आती। बदबू से जीना मुश्किल हो गया है।

नागरिक 1: लेकिन गलती हमारी भी तो है। हम लोग भी कचरा डस्टबिन में डालने के बजाय सड़क पर फेंक देते हैं।

नागरिक 2: यह तो है। अगर हम जागरूक नहीं होंगे, तो केवल सरकार को कोसने से कुछ नहीं होगा।

नागरिक 1: बिल्कुल! चलिए, आज से हम संकल्प लें कि हम न गंदगी करेंगे और न करने देंगे।

खण्ड द: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
प्र.21. अपठित गद्यांश:
"पुस्तकें हमारी सबसे अच्छी मित्र होती हैं। वे हमें ज्ञान देती हैं और हमारा मनोरंजन करती हैं। एक अच्छी पुस्तक सौ मित्रों के बराबर होती है..."
(क) शीर्षक लिखिए।
(ख) पुस्तकें हमारी मित्र क्यों हैं?
(ग) 'मनोरंजन' का संधि विच्छेद करें।
(घ) सारांश लिखिए।
अथवा
अपठित काव्यांश:
"जो बीत गई सो बात गई,
जीवन में एक सितारा था,
माना वह बेहद प्यारा था..."

(क) शीर्षक लिखिए।
(ख) कवि क्या संदेश देना चाहता है?
(ग) 'सितारा' किसका प्रतीक है?
(घ) भावार्थ लिखिए।
उत्तर (गद्यांश):

(क) शीर्षक: पुस्तकों का महत्व / सच्ची मित्र: पुस्तकें।

(ख) उत्तर: क्योंकि वे हमें ज्ञान देती हैं, सही मार्ग दिखाती हैं, और कभी धोखा नहीं देतीं।

(ग) संधि विच्छेद: मनः + रंजन (विसर्ग संधि)।

(घ) सारांश: पुस्तकें मानव जीवन में सच्चे मित्र की भूमिका निभाती हैं। वे ज्ञान का भंडार हैं और एकांत में हमारी साथी हैं। अच्छी पुस्तकों का अध्ययन हमारे चरित्र निर्माण में सहायक होता है।

उत्तर (काव्यांश):

(क) शीर्षक: बीती ताहि बिसार दे / आशावाद।

(ख) उत्तर: कवि संदेश दे रहे हैं कि बीते हुए दुखों को भूलकर आगे बढ़ना चाहिए।

(ग) प्रतीक: सितारा किसी प्रियजन या प्रिय वस्तु का प्रतीक है।

(घ) भावार्थ: कवि हरिवंश राय बच्चन कहते हैं कि जीवन में असफलताएं और वियोग आते रहते हैं। जैसे आकाश अपने टूटे तारे का शोक नहीं मनाता, वैसे ही हमें भी जो बीत गया, उसे भूलकर भविष्य की ओर देखना चाहिए।

प्र.22. अपने शहर के नगर निगम अधिकारी को नियमित जलापूर्ति (Water Supply) के लिए शिकायती पत्र लिखिए।
अथवा
अपने छोटे भाई को समय के सदुपयोग की सलाह देते हुए पत्र लिखिए।
उत्तर (औपचारिक पत्र):

सेवा में,
स्वास्थ्य अधिकारी महोदय,
नगर निगम, इंदौर (म.प्र.)।
विषय: नियमित जलापूर्ति न होने की शिकायत हेतु।

मान्यवर,
मैं आपका ध्यान सुदामा नगर क्षेत्र की पेयजल समस्या की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। पिछले एक सप्ताह से हमारे क्षेत्र में नलों में पानी बहुत कम दबाव से आ रहा है और वह भी अनियमित समय पर। कभी-कभी गंदा पानी भी आता है। गर्मी के मौसम में इससे निवासियों को भारी परेशानी हो रही है।
अतः आपसे निवेदन है कि इस समस्या की जाँच करवाकर नियमित और स्वच्छ जलापूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

भवदीय,
रमेश कुमार,
सुदामा नगर, इंदौर।
दिनांक: 25/03/2026

उत्तर (अनौपचारिक पत्र):

परीक्षा भवन,
दिनांक: 25/03/2026

प्रिय अनुज आयुष,
शुभाशीष।

हम सब यहाँ कुशल हैं। पिताजी के पत्र से पता चला कि तुम आजकल पढ़ाई में ध्यान नहीं दे रहे हो और अपना ज्यादा समय खेलकूद या मोबाइल में बिता रहे हो। भाई, यह समय तुम्हारे जीवन की नींव है। 'गया वक्त फिर हाथ नहीं आता'। अगर तुम अभी समय का सदुपयोग करोगे, तो भविष्य में सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी। खेलकूद भी जरूरी है, लेकिन पढ़ाई पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
आशा है तुम मेरी सलाह मानोगे और एक समय-सारिणी बनाकर पढ़ाई करोगे।

तुम्हारा बड़ा भाई,
विवेक

प्र.23. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर सारगर्भित निबंध लिखिए: (4 अंक)

1. आत्मनिर्भर भारत

रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. आत्मनिर्भरता का अर्थ, 3. प्रमुख क्षेत्र, 4. चुनौतियाँ और समाधान, 5. उपसंहार।

1. प्रस्तावना: किसी भी राष्ट्र की प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपनी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर कितना निर्भर है। भारत को सशक्त बनाने के लिए 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान एक महत्वपूर्ण पहल है।

2. अर्थ: आत्मनिर्भरता का अर्थ है - अपनी जरूरतों का सामान खुद बनाना और आयात (Import) कम करके निर्यात (Export) बढ़ाना। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक विनिर्माण हब (Global Manufacturing Hub) बनाना है।

3. प्रमुख क्षेत्र: रक्षा, तकनीक, कृषि और ऊर्जा वे प्रमुख क्षेत्र हैं जहाँ भारत को आत्मनिर्भर होना है। 'मेक इन इंडिया' और 'वोकल फॉर लोकल' जैसे नारे इसी दिशा में कदम हैं।

4. लाभ: इससे देश का पैसा देश में रहेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। हम संकट के समय (जैसे महामारी) दूसरों का मुंह नहीं ताकेंगे।

5. उपसंहार: आत्मनिर्भर भारत केवल सरकार का नहीं, बल्कि हर नागरिक का सपना होना चाहिए। जब हम स्वदेशी अपनाएंगे, तभी देश स्वावलंबी और महाशक्ति बनेगा।

2. इंटरनेट: वरदान या अभिशाप

रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. संचार क्रांति, 3. शिक्षा और व्यापार में लाभ, 4. दुष्परिणाम (हानियाँ), 5. उपसंहार।

1. प्रस्तावना: विज्ञान ने हमें कई उपहार दिए हैं, उनमें 'इंटरनेट' सबसे अद्भुत है। इसने पूरी दुनिया को एक छोटे से गाँव (Global Village) में बदल दिया है।

2. वरदान के रूप में: इंटरनेट ज्ञान का सागर है। छात्र किसी भी विषय की जानकारी सेकंडों में प्राप्त कर सकते हैं। ऑनलाइन बैंकिंग, शॉपिंग और बिल जमा करने जैसी सुविधाओं ने जीवन आसान बना दिया है। कोरोना काल में वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लास इंटरनेट के कारण ही संभव हो पाई।

3. अभिशाप के रूप में: हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। इंटरनेट का अत्यधिक उपयोग समय की बर्बादी, आँखों की कमजोरी और मानसिक तनाव का कारण बन रहा है। साइबर अपराध (हैकिंग, ठगी) और अश्लीलता का प्रसार इसके नकारात्मक पक्ष हैं।

4. उपसंहार: इंटरनेट एक शक्तिशाली साधन है। यह हम पर निर्भर करता है कि हम इसका उपयोग अपने विकास के लिए करते हैं या विनाश के लिए। इसका विवेकपूर्ण उपयोग ही मानवता के हित में है।

3. मेरा प्रिय त्योहार: दीपावली

रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. मनाने का कारण, 3. तैयारी और उत्सव, 4. सामाजिक महत्व, 5. उपसंहार।

1. प्रस्तावना: भारत त्योहारों का देश है। यहाँ होली, ईद, क्रिसमस सब धूमधाम से मनाए जाते हैं, लेकिन मेरा प्रिय त्योहार 'दीपावली' है। यह दीपों का उत्सव है जो अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।

2. मनाने का कारण: माना जाता है कि इसी दिन भगवान राम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर और रावण का वध कर अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दिए जलाए थे।

3. उत्सव: दीपावली से कई दिन पहले घरों की सफाई और पुताई शुरू हो जाती है। धनतेरस, छोटी दिवाली, और मुख्य दिवाली—यह पांच दिनों का उत्सव है। लोग नए कपड़े पहनते हैं, मिठाइयाँ बांटते हैं और रात में लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं। बच्चे पटाखे जलाते हैं।

4. संदेश: यह त्योहार हमें स्वच्छता, भाईचारे और सात्विकता का संदेश देता है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत की याद दिलाता है।

5. उपसंहार: दीपावली खुशियों का त्योहार है। हमें इसे प्रदूषण मुक्त (बिना तेज पटाखों के) और मिल-जुलकर मनाना चाहिए।

4. योग का महत्व

रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. योग का अर्थ, 3. शारीरिक और मानसिक लाभ, 4. अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, 5. उपसंहार।

1. प्रस्तावना: "शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्" - अर्थात शरीर ही सभी कर्तव्यों को पूरा करने का साधन है। स्वस्थ शरीर के लिए योग अत्यंत आवश्यक है। यह भारत की विश्व को दी गई प्राचीन धरोहर है।

2. योग का अर्थ: योग का अर्थ है 'जोड़ना'—आत्मा का परमात्मा से मिलन। यह केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक कला है।

3. लाभ: नियमित योग करने से शरीर लचीला और निरोगी रहता है। प्राणायाम से फेफड़े मजबूत होते हैं। ध्यान (Meditation) से मानसिक शांति मिलती है और तनाव (Stress) कम होता है। यह एकाग्रता बढ़ाने में विद्यार्थियों के लिए बहुत लाभकारी है।

4. विश्व स्तर पर पहचान: भारत के प्रयासों से 21 जून को 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' घोषित किया गया है। आज पूरी दुनिया योग की शक्ति को मान रही है।

5. उपसंहार: भागदौड़ भरी जिंदगी में योग संजीवनी बूटी के समान है। 'करो योग, रहो निरोग'—यही सुखी जीवन का मूलमंत्र है।

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⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer)

इस पोस्ट में दिए गए प्रश्न एवं उत्तर केवल अभ्यास और शैक्षणिक उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। ये प्रश्न संभावित (Model) स्वरूप के हैं तथा बोर्ड परीक्षा में इन्हीं प्रश्नों के आने की कोई गारंटी नहीं है।

उत्तर संदर्भ सामग्री एवं पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किए गए हैं। छात्र अंतिम एवं प्रमाणिक जानकारी के लिए संबंधित पाठ्यपुस्तक, अधिकृत सिलेबस एवं बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का ही अनुसरण करें।

इस सामग्री का उद्देश्य विद्यार्थियों की तैयारी में सहयोग करना है, न कि किसी आधिकारिक प्रश्नपत्र का प्रतिनिधित्व करना।

MP Education Gyan Deep किसी भी प्रकार की त्रुटि या परिवर्तन के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।

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एमपी बोर्ड कक्षा 10वीं हिन्दी मॉडल पेपर सेट B – नवीनतम पैटर्न पर आधारित

एमपी बोर्ड कक्षा 10वीं हिन्दी मॉडल पेपर सेट B – नवीनतम पैटर्न पर आधारित

एमपी बोर्ड कक्षा 10वीं हिन्दी मॉडल पेपर सेट B – नवीनतम पैटर्न पर आधारित

Class 10th Hindi Model Paper Set B 

MP Board कक्षा 10वीं हिन्दी मॉडल पेपर Set B विद्यार्थियों को परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए तैयार किया गया है। यह पेपर नवीनतम परीक्षा पैटर्न एवं संशोधित अंक योजना (75 अंक) पर आधारित है।

मुख्य जानकारी

  • 📚 विषय: हिन्दी
  • 🏫 कक्षा: 10वीं (MP Board)
  • 📝 पेपर सेट: Set B
  • 📊 पूर्णांक: 75 अंक
  • ⏳ समय: 3 घंटे

मॉडल पेपर की विशेषताएँ

  • नवीनतम सिलेबस के अनुसार तैयार
  • बोर्ड परीक्षा पैटर्न आधारित प्रश्न
  • महत्वपूर्ण एवं संभावित प्रश्नों का समावेश
  • लेखन कौशल (पत्र, निबंध, सूचना, संवाद) का अभ्यास
  • स्वमूल्यांकन (Self-Assessment) हेतु उपयोगी

विद्यार्थियों के लिए लाभ

  • परीक्षा से पहले अभ्यास का बेहतर अवसर
  • समय प्रबंधन में सुधार
  • प्रश्नों की संरचना की स्पष्ट समझ
  • आत्मविश्वास में वृद्धि

Hindi Model Paper 10th (Updated) - Sandipani Vidyalaya

Class 10th Hindi Model Paper

(मॉडल पेपर 2025-26 सेट - B)

कक्षा 10वीं - हिन्दी

Created By: D. Septa | पूर्णांक: 75 | समय: 3 घंटे

खण्ड अ: वस्तुनिष्ठ प्रश्न (30 अंक)
प्र.1. सही विकल्प चुनकर लिखिए: (1×6 = 6 अंक)
(i) 'उत्साह' कविता में कवि ने बादलों को 'अनंत के घन' क्यों कहा है? योग्यता आधारित
(अ) क्योंकि बादल बहुत काले हैं। (ब) क्योंकि उनका कोई अंत नहीं है। (स) क्योंकि वे ईश्वर (परमात्मा) की सृष्टि हैं जिसका आर-पार नहीं है। (द) क्योंकि वे समुद्र से आए हैं।
👉 (स) क्योंकि वे ईश्वर (परमात्मा) की सृष्टि हैं जिसका आर-पार नहीं है।
विवरण: यहाँ 'अनंत' शब्द ईश्वर/आकाश के लिए प्रयुक्त हुआ है और बादल उसी अज्ञात दिशा से आ रहे हैं।

(ii) कथन (A): कैप्टन चश्मेवाला नेताजी की मूर्ति पर बार-बार चश्मा बदल देता था।
कारण (R): उसे नेताजी का चेहरा पसंद नहीं था। कथन-कारण
(अ) A और R दोनों सही हैं, R सही व्याख्या है। (ब) A सही है, लेकिन R गलत है। (स) A गलत है, R सही है। (द) A और R दोनों गलत हैं।
👉 (ब) A सही है, लेकिन R गलत है।
विवरण: कैप्टन चश्मा इसलिए बदलता था क्योंकि कोई ग्राहक मूर्ति पर लगा चश्मा मांग लेता था, न कि उसे चेहरा नापसंद था।

(iii) 'जिस समास में पहला पद संख्यावाची हो', वह समास कहलाता है:
(अ) कर्मधारय (ब) द्वंद्व (स) द्विगु (द) तत्पुरुष
👉 (स) द्विगु
विवरण: जैसे 'चौराहा' (चार राहों का समूह), 'नवरत्न' (नौ रत्न)।

(iv) 'कन्यादान' कविता में माँ ने बेटी को क्या सीख दी?
(अ) भोजन बनाना सीखना (ब) वस्त्र-आभूषणों के मोह में न फँसना (स) ससुराल में चुप रहना (द) अधिक धन संचय करना
👉 (ब) वस्त्र-आभूषणों के मोह में न फँसना
विवरण: माँ ने कहा कि वस्त्र और आभूषण शाब्दिक भ्रम की तरह हैं जो स्त्री जीवन को बंधन में डाल देते हैं।

(v) 'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ के आधार पर लेखक को लिखने की प्रेरणा कहाँ से मिलती है?
(अ) संपादकों के दबाव से (ब) धन कमाने की इच्छा से (स) आंतरिक विवशता (अनुभूति) से (द) प्रसिद्धि पाने के लिए
👉 (स) आंतरिक विवशता (अनुभूति) से
विवरण: लेखक अज्ञेय के अनुसार, सच्चा लेखन वही है जो आंतरिक दबाव या अनुभूति से पैदा हो।

(vi) 'संचारी भावों' की संख्या मानी गई है:
(अ) 9 (ब) 33 (स) 10 (द) 4
👉 (ब) 33
विवरण: मन में संचरण करने वाले (आने-जाने वाले) अस्थिर विकारों को संचारी भाव कहते हैं, ये 33 होते हैं।
प्र.2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए: (1×6 = 6 अंक)
(i) 'सूरदास' के गुरु ________ थे। (वल्लभाचार्य / नरहरिदास)
वल्लभाचार्य
विवरण: सूरदास अष्टछाप के प्रमुख कवि थे और महाप्रभु वल्लभाचार्य के शिष्य थे।

(ii) 'लखनवी अंदाज' पाठ में नवाब साहब ने खीरे की फाँकों पर ________ बुरका। (जीरा-नमक / चीनी)
जीरा-नमक
विवरण: नवाब साहब ने खीरे को स्वादिष्ट बनाने के लिए उस पर जीरा मिला नमक और लाल मिर्च की सुर्खी बुरकी थी।

(iii) 'वाच्य' के आधार पर वाक्यों का वर्गीकरण ________ प्रकार से होता है। (दो / तीन)
तीन
विवरण: कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य।

(iv) 'भोलानाथ' का वास्तविक नाम ________ था। (तारकेश्वरनाथ / अमरनाथ)
तारकेश्वरनाथ
विवरण: पिता प्यार से उन्हें भोलानाथ कहते थे क्योंकि उनके माथे पर भभूत का तिलक लगा होता था।

(v) 'प्रयोगवाद' के प्रवर्तक ________ माने जाते हैं। (अज्ञेय / निराला)
अज्ञेय
विवरण: 'तार सप्तक' (1943) के प्रकाशन के साथ अज्ञेय जी ने प्रयोगवाद की शुरुआत की।

(vi) 'काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्व' ________ कहलाते हैं। (रस / अलंकार)
अलंकार
विवरण: 'अलंकरोति इति अलंकारः' - जो अलंकृत करे (शोभा बढ़ाए) वह अलंकार है।
खण्ड ब: अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
प्र.6. रीतिकाल को 'श्रृंगार काल' क्यों कहा जाता है?
अथवा
नई कविता की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर (मुख्य):
रीतिकाल के अधिकांश कवियों ने अपनी रचनाओं में श्रृंगार रस (संयोग और वियोग) का अत्यधिक और विस्तृत वर्णन किया है। राजाओं को प्रसन्न करने के लिए विलासिता और सौंदर्य का चित्रण प्रधान रहा, इसलिए इसे 'श्रृंगार काल' कहा जाता है।
उत्तर (अथवा):
1. लघु मानववाद की प्रतिष्ठा: आम आदमी के जीवन और संघर्षों को महत्व दिया गया।
2. प्रयोगशीलता: नए बिम्बों, प्रतीकों और उपमानों का प्रयोग किया गया।
प्र.7. गोपियों ने उद्धव की तुलना किन-किन से की है?
अथवा
परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए क्या तर्क दिए?
उत्तर (मुख्य):
1. कमल के पत्ते से: जो पानी में रहकर भी पानी से अछूता रहता है (उस पर पानी की बूंद नहीं ठहरती)।
2. तेल की गागरी (मटकी) से: जिस पर पानी की एक भी बूंद नहीं टिकती।
उत्तर (अथवा):
लक्ष्मण ने तर्क दिया कि:
1. यह धनुष बहुत पुराना और कमजोर था।
2. राम ने इसे नया समझकर छुआ था, लेकिन यह छूते ही टूट गया।
3. बचपन में हमने ऐसे कई छोटे धनुष तोड़े हैं, तब तो आपने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया।
प्र.8. रस की परिभाषा और उसके चार अंगों के नाम लिखिए।
अथवा
मानवीकरण अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर (मुख्य):
परिभाषा: किसी काव्य को पढ़ने, सुनने या देखने से पाठक, श्रोता या दर्शक को जो आनंद प्राप्त होता है, उसे रस कहते हैं।
अंग (4): 1. स्थायी भाव, 2. विभाव, 3. अनुभाव, 4. संचारी भाव।
उत्तर (अथवा):
जहाँ जड़ प्रकृति (निर्जीव वस्तुओं) पर मानवीय भावनाओं या क्रियाओं का आरोप किया जाता है, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।
उदाहरण: "मेघ आए बड़े बन-ठन के, सँवर के।" (यहाँ बादलों का दामाद की तरह सजना-संवरना दिखाया गया है)।
प्र.9. बिस्मिल्ला खाँ को 'शहनाई की मंगलध्वनि' का नायक क्यों कहा गया है?
अथवा
फादर बुल्के भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग हैं, किस आधार पर ऐसा कहा गया है?
उत्तर (मुख्य):
शहनाई का प्रयोग शुभ कार्यों (विवाह, उत्सव) में किया जाता है और बिस्मिल्ला खाँ शहनाई वादन में सर्वश्रेष्ठ थे। वे 80 वर्षों तक काशी विश्वनाथ के दरबार में शहनाई बजाकर सुर की साधना करते रहे। उनकी शहनाई की धुन लोगों के मन में आनंद और मंगल कामना भर देती थी।
उत्तर (अथवा):
वे बेल्जियम से भारत आए थे, लेकिन उन्होंने भारत को ही अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए आंदोलन किया, रामकथा पर शोध किया (रामकथा: उत्पत्ति और विकास) और प्रसिद्ध अंग्रेजी-हिंदी शब्दकोश तैयार किया। उनका जीवन भारतीयता में पूरी तरह रचा-बसा था।
खण्ड स: लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक)
प्र.18. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:
"विकल विकल, उन्मन थे उन्मन,
विश्व के निदाघ के सकल जन,
आए अज्ञात दिशा से अनंत के घन!"
अथवा
निम्नलिखित पद्यांश का भावार्थ लिखिए:
"मधुप गुन-गुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,
मुरझाकर गिर रहीं पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी।"
उत्तर (मुख्य):

संदर्भ: यह पंक्तियाँ पाठ्यपुस्तक 'क्षितिज भाग-2' की कविता 'उत्साह' से ली गई हैं। इसके कवि 'सूर्यकांत त्रिपाठी निराला' हैं।

प्रसंग: कवि बादलों का आह्वान कर रहा है ताकि भीषण गर्मी से तपती धरती और व्याकुल जनमानस को राहत मिले।

व्याख्या: कवि कहते हैं कि भीषण गर्मी (निदाघ) के कारण संसार के सभी लोग व्याकुल और बेचैन थे। उनका मन कहीं टिक नहीं रहा था (उन्मन थे)। ऐसे कष्टप्रद समय में आकाश में न जाने किस अज्ञात दिशा से बादल घिर आए। यहाँ बादल 'क्रांति' और 'नवजीवन' के प्रतीक हैं जो दुखों को दूर करने आए हैं।

उत्तर (अथवा):

संदर्भ: यह पंक्तियाँ 'आत्मकथ्य' कविता से ली गई हैं, जिसके कवि 'जयशंकर प्रसाद' हैं।

भावार्थ: कवि कहते हैं कि उनका मन रूपी भौंरा गुनगुना कर न जाने अपनी कौन सी दुखभरी कहानी सुनाना चाहता है। वे जब अपने जीवन की ओर देखते हैं तो पाते हैं कि जीवन रूपी वृक्ष से खुशियों रूपी पत्तियां मुरझा कर गिर रही हैं। अर्थात उनका जीवन दुखों, अभावों और निराशा से भरा है। इसमें सुख के पल बहुत कम रहे हैं, इसलिए वे अपनी आत्मकथा लिखने में असमर्थता जताते हैं।

प्र.19. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:
"बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-जिंदगी सब कुछ होम देने वालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढ़ती है।"
अथवा
गद्यांश की व्याख्या:
"बालगोबिन भगत की संगीत साधना का चरम उत्कर्ष उस दिन देखा गया जिस दिन उनका बेटा मरा। इकलौता बेटा था वह।"
उत्तर (मुख्य):

संदर्भ: यह गद्यांश पाठ 'नेताजी का चश्मा' से लिया गया है। इसके लेखक 'स्वयं प्रकाश' हैं।

प्रसंग: हालदार साहब कैप्टन चश्मेवाले की मृत्यु और पानवाले की संवेदनहीनता पर दुखी होकर देश के भविष्य के बारे में सोचते हैं।

व्याख्या: हालदार साहब चिंतित होकर सोचते हैं कि उस देश या समाज का भविष्य क्या होगा, जहाँ के लोग देशभक्तों का सम्मान करने के बजाय उनका मजाक उड़ाते हैं। जो लोग (जैसे कैप्टन) देश के लिए अपना सब कुछ त्याग देते हैं, लोग उन पर हंसते हैं। दूसरी तरफ, लोग अपने छोटे-छोटे स्वार्थों के लिए अपना ईमान बेचने को तैयार रहते हैं। यह समाज के नैतिक पतन और देशभक्ति के अभाव का संकेत है।

उत्तर (अथवा):

संदर्भ: यह गद्यांश 'बालगोबिन भगत' पाठ से है, जिसके लेखक 'रामवृक्ष बेनीपुरी' हैं।

व्याख्या: लेखक कहते हैं कि बालगोबिन भगत कबीर के सच्चे भक्त थे और हमेशा गाते रहते थे। लेकिन उनकी भक्ति और संगीत की असली परीक्षा उस दिन हुई जब उनका इकलौता बेटा मर गया। आम लोग ऐसे समय में रोते-बिलखते हैं, लेकिन भगत जी ने इसे 'आत्मा का परमात्मा से मिलन' माना। वे शोक मनाने के बजाय लीन होकर गीत गाते रहे और पतोहू को भी उत्सव मनाने को कहा। यह उनके मोह-मुक्त व्यक्तित्व की पराकाष्ठा थी।

खण्ड द: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
प्र.21. निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
"समय का सदुपयोग ही सफलता की कुंजी है। जो व्यक्ति समय के मूल्य को पहचानता है, वह जीवन में कभी असफल नहीं होता। विद्यार्थी जीवन में समय का महत्व और भी अधिक है..."
(क) गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
(ख) जीवन में कौन असफल नहीं होता?
(ग) 'कुंजी' शब्द का पर्यायवाची लिखिए।
(घ) गद्यांश का सारांश लिखिए।
अथवा
अपठित काव्यांश के प्रश्न उत्तर:
"नर हो, न निराश करो मन को,
कुछ काम करो, कुछ काम करो,
जग में रह कर कुछ नाम करो..."

(क) शीर्षक लिखिए।
(ख) कवि मनुष्य को क्या संदेश दे रहा है?
(ग) 'जग' का अर्थ लिखिए।
(घ) भावार्थ लिखिए।
उत्तर (गद्यांश):

(क) शीर्षक: समय का महत्व / समय का सदुपयोग।

(ख) उत्तर: जो व्यक्ति समय के मूल्य को पहचानता है और उसका सदुपयोग करता है, वह कभी असफल नहीं होता।

(ग) पर्यायवाची: चाबी / उपाय।

(घ) सारांश: समय अनमोल है और सफलता का आधार है। विशेषकर विद्यार्थियों के लिए समय का पाबंद होना अनिवार्य है। बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता, इसलिए हमें हर क्षण का सही उपयोग करना चाहिए।

उत्तर (काव्यांश):

(क) शीर्षक: कर्मठता / कर्मवीर।

(ख) संदेश: कवि संदेश दे रहे हैं कि मनुष्य को कभी निराश नहीं होना चाहिए और निरंतर कर्म (काम) करते रहना चाहिए।

(ग) अर्थ: संसार / दुनिया।

(घ) भावार्थ: कवि मैथिलीशरण गुप्त कहते हैं कि मनुष्य जीवन दुर्लभ है, इसे निराशा में नहीं बिताना चाहिए। संसार में जन्म लिया है तो कुछ ऐसे अच्छे कार्य करो जिससे तुम्हारा नाम अमर हो जाए। कर्म करना ही जीवन का उद्देश्य है।

प्र.22. अपने विद्यालय के प्राचार्य को 'स्थानांतरण प्रमाण पत्र' (Transfer Certificate) हेतु आवेदन पत्र लिखिए।
अथवा
अपने मित्र को ग्रीष्मावकाश (गर्मी की छुट्टियों) में अपने गाँव आने का निमंत्रण देते हुए पत्र लिखिए।
उत्तर (औपचारिक पत्र):

सेवा में,
श्रीमान प्राचार्य महोदय,
सांदीपनि विद्यालय, तलवाड़ा बुजुर्ग।
विषय: स्थानांतरण प्रमाण पत्र (T.C.) हेतु आवेदन।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय का कक्षा 10वीं का छात्र हूँ। मेरे पिताजी का स्थानांतरण यहाँ से इंदौर हो गया है। मेरा पूरा परिवार अब वहीं जा रहा है। इस कारण मैं अपनी आगे की पढ़ाई आपके विद्यालय में जारी रखने में असमर्थ हूँ।
अतः आपसे प्रार्थना है कि मुझे मेरा स्थानांतरण प्रमाण पत्र (T.C.) शीघ्र प्रदान करने की कृपा करें, ताकि मैं इंदौर के विद्यालय में प्रवेश ले सकूँ। मैंने विद्यालय का समस्त शुल्क जमा कर दिया है।

आपका आज्ञाकारी शिष्य,
नाम: (क.ख.ग)
कक्षा: 10वीं
दिनांक: 20/02/2026

उत्तर (अनौपचारिक पत्र):

तलवाड़ा बुजुर्ग,
दिनांक: 20/02/2026

प्रिय मित्र रोहन,
सप्रेम नमस्ते।

मैं यहाँ सकुशल हूँ और आशा करता हूँ कि तुम भी ठीक होगे। हमारी वार्षिक परीक्षाएँ समाप्त होने वाली हैं। इस बार गर्मी की छुट्टियों में मेरा मन है कि तुम मेरे गाँव आओ। यहाँ का प्राकृतिक वातावरण, आम के बगीचे और नदी का किनारा तुम्हें बहुत पसंद आएगा। हम साथ में खूब मजे करेंगे और पढ़ाई की थकान दूर करेंगे।
माता-पिता जी से अनुमति लेकर अपने आने की सूचना देना। मैं तुम्हारा इंतजार करूँगा।

तुम्हारा मित्र,
समीर

प्र.23. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर सारगर्भित निबंध लिखिए: (4 अंक)

1. कंप्यूटर: आज की आवश्यकता

रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. आधुनिक युग में महत्व, 3. विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग, 4. लाभ और हानि, 5. उपसंहार।

1. प्रस्तावना: आज का युग विज्ञान और तकनीक का युग है। कंप्यूटर विज्ञान का एक अद्भुत आविष्कार है जिसने मानव जीवन में क्रांति ला दी है। यह एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जो गणनाओं को तीव्र गति से और त्रुटिहीन करती है।

2. आधुनिक युग में महत्व: आज जीवन का कोई भी क्षेत्र कंप्यूटर से अछूता नहीं है। शिक्षा से लेकर अंतरिक्ष तक, हर जगह इसकी जरूरत है। इंटरनेट ने इसे और अधिक शक्तिशाली बना दिया है, जिससे दुनिया 'ग्लोबल विलेज' बन गई है।

3. विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग:
- शिक्षा: ऑनलाइन क्लासेस, ई-बुक्स, और रिसर्च के लिए।
- बैंक और व्यापार: खातों का रखरखाव, ऑनलाइन बैंकिंग और ई-कॉमर्स।
- चिकित्सा: बीमारियों की जाँच (MRI, CT Scan) और ऑपरेशन में।
- संचार: ईमेल, वीडियो कॉल और सोशल मीडिया।

4. लाभ और हानि: कंप्यूटर ने काम को आसान, तेज और कागज-मुक्त (Paperless) बनाया है। इससे सूचनाओं का भंडार सुलभ हुआ है। लेकिन इसके अत्यधिक प्रयोग से स्वास्थ्य समस्याएं (आँखें कमजोर होना), साइबर अपराध और बेरोजगारी का खतरा भी बढ़ा है।

5. उपसंहार: कंप्यूटर आज की अनिवार्य आवश्यकता है। यदि हम इसका विवेकपूर्ण और सकारात्मक उपयोग करें, तो यह मानव विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

2. स्वच्छ भारत अभियान

रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. अभियान का उद्देश्य, 3. समाज की भूमिका, 4. लाभ, 5. उपसंहार।

1. प्रस्तावना: "स्वच्छता ईश्वर की भक्ति के समान है।" इसी विचार को मूर्त रूप देने के लिए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को गाँधी जयंती पर 'स्वच्छ भारत अभियान' की शुरुआत की।

2. अभियान का उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य भारत को खुले में शौच से मुक्त (ODF) करना, हर घर में शौचालय बनाना, सड़कों और गलियों को साफ रखना तथा कचरा प्रबंधन की उचित व्यवस्था करना है। गाँधीजी का सपना था - स्वच्छ और स्वस्थ भारत।

3. समाज की भूमिका: यह केवल सरकार का काम नहीं है। हर नागरिक को इसमें योगदान देना चाहिए। हमें कचरा डस्टबिन में ही डालना चाहिए, प्लास्टिक का प्रयोग कम करना चाहिए और अपने आस-पास सफाई रखनी चाहिए।

4. लाभ: सफाई से बीमारियों (हैजा, डेंगू, मलेरिया) में कमी आती है। पर्यावरण शुद्ध होता है। स्वच्छ देश में पर्यटन बढ़ता है और देश की छवि सुधरती है। स्वस्थ नागरिक ही देश की प्रगति में योगदान दे सकते हैं।

5. उपसंहार: स्वच्छ भारत अभियान एक जन-आंदोलन बन चुका है। हमें इसे एक आदत बनाना होगा, न कि केवल एक कार्यक्रम। जब हर भारतीय सफाई के प्रति जागरूक होगा, तभी भारत वास्तव में स्वच्छ और सुंदर बनेगा।

3. नारी शिक्षा का महत्व

रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. नारी शिक्षा की आवश्यकता, 3. समाज पर प्रभाव, 4. वर्तमान स्थिति, 5. उपसंहार।

1. प्रस्तावना: "एक बालक को पढ़ाना एक व्यक्ति को पढ़ाना है, लेकिन एक बालिका को पढ़ाना पूरे परिवार को पढ़ाना है।" नारी समाज का आधा हिस्सा है, इसलिए उसकी शिक्षा के बिना समाज का पूर्ण विकास असंभव है।

2. नारी शिक्षा की आवश्यकता: नारी परिवार की धुरी होती है। शिक्षित नारी अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दे सकती है, परिवार के स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकती है। वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती है और शोषण का विरोध कर सकती है।

3. समाज पर प्रभाव: शिक्षित महिलाएं अंधविश्वास और कुरीतियों (जैसे दहेज प्रथा) को मिटाने में सहायक होती हैं। वे देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देती हैं। इंदिरा गांधी, कल्पना चावला, और पी.वी. सिंधु जैसी महिलाओं ने देश का नाम रोशन किया है।

4. वर्तमान स्थिति: आज सरकार 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे अभियानों से नारी शिक्षा को बढ़ावा दे रही है। लड़कियां अब हर क्षेत्र (सेना, विज्ञान, राजनीति) में लड़कों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं।

5. उपसंहार: नारी शिक्षा राष्ट्र की प्रगति के लिए अनिवार्य है। हमें लड़कियों को बोझ नहीं, बल्कि शक्ति समझना चाहिए और उन्हें शिक्षा के समान अवसर देने चाहिए।

4. पुस्तकालय का महत्व

रूपरेखा: 1. प्रस्तावना, 2. ज्ञान का भंडार, 3. पुस्तकालय के प्रकार, 4. विद्यार्थियों के लिए उपयोगिता, 5. उपसंहार।

1. प्रस्तावना: पुस्तकालय का अर्थ है - 'पुस्तकों का घर' (पुस्तक + आलय)। यह वह स्थान है जहाँ विभिन्न विषयों, भाषाओं और लेखकों की पुस्तकें संग्रहित होती हैं और पाठक वहाँ बैठकर ज्ञानार्जन करते हैं।

2. ज्ञान का भंडार: पुस्तकालय ज्ञान का सागर है। यहाँ इतिहास, विज्ञान, साहित्य, और समसामयिक घटनाओं से जुड़ी पुस्तकें, पत्रिकाएँ और समाचार पत्र उपलब्ध होते हैं। यह हमें देश-दुनिया से जोड़ता है।

3. पुस्तकालय के प्रकार: व्यक्तिगत पुस्तकालय (घर पर), विद्यालय/कॉलेज पुस्तकालय (छात्रों के लिए), और सार्वजनिक पुस्तकालय (आम जनता के लिए)।

4. विद्यार्थियों के लिए उपयोगिता: गरीब छात्र जो महँगी किताबें नहीं खरीद सकते, वे पुस्तकालय से लाभ उठा सकते हैं। यहाँ का शांत वातावरण पढ़ाई के लिए उत्तम होता है। इससे स्वाध्याय (Self-study) की आदत विकसित होती है।

5. उपसंहार: पुस्तकालय हमारे सच्चे मित्र हैं। ये हमारा मानसिक विकास करते हैं और चरित्र निर्माण में सहायक होते हैं। हमें पुस्तकालयों का सदुपयोग करना चाहिए और पुस्तकों की रक्षा करनी चाहिए।

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⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer)

इस पोस्ट में दिए गए प्रश्न एवं उत्तर केवल अभ्यास और शैक्षणिक उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। ये प्रश्न संभावित (Model) स्वरूप के हैं तथा बोर्ड परीक्षा में इन्हीं प्रश्नों के आने की कोई गारंटी नहीं है।

उत्तर संदर्भ सामग्री एवं पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किए गए हैं। छात्र अंतिम एवं प्रमाणिक जानकारी के लिए संबंधित पाठ्यपुस्तक, अधिकृत सिलेबस एवं बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का ही अनुसरण करें।

इस सामग्री का उद्देश्य विद्यार्थियों की तैयारी में सहयोग करना है, न कि किसी आधिकारिक प्रश्नपत्र का प्रतिनिधित्व करना।

MP Education Gyan Deep किसी भी प्रकार की त्रुटि या परिवर्तन के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।

✍️ GYAN DEEP INFO विद्यार्थियों के लिए नियमित रूप से अध्ययन सामग्री एवं मॉडल पेपर उपलब्ध कराता है। नवीनतम अपडेट के लिए वेबसाइट विजिट करते रहें।


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