🧬 MP Board Class 11 Biology Practice Paper 2025–26
आदर्श प्रश्न पत्र (SET-D) | कक्षा 11वीं – जीव विज्ञान
MP Board कक्षा 11वीं जीव विज्ञान Practice Paper 2025–26 (SET-D) अंतिम रिवीजन और स्पीड प्रैक्टिस को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह सेट परीक्षा से पहले त्वरित अभ्यास के लिए अत्यंत उपयोगी है।
- ✔️ फाइनल रिवीजन के लिए उपयुक्त
- ✔️ समय प्रबंधन और स्पीड बढ़ाने में सहायक
- ✔️ महत्वपूर्ण और बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न
- ✔️ बोर्ड परीक्षा आत्मविश्वास के लिए उपयोगी
आदर्श प्रश्न पत्र 2025-26 (SET-D)
कक्षा: 11वीं | विषय: जीव विज्ञान (Biology)
पूर्णांक: 70 | समय: 3:00 घंटे
यह कवक और उच्च पादपों की जड़ों के बीच का सहजीवी संबंध है। कवक पौधे को जल और खनिज (फास्फोरस) अवशोषण में मदद करता है।
दो भिन्न जीवों का ऐसा साथ जिसमें दोनों को लाभ होता है। उदाहरण: लाइकेन (शैवाल और कवक)।
पत्ती के फलक (Lamina) पर शिराओं और शिरिकाओं के विन्यास को शिराविन्यास कहते हैं। प्रकार: जालिकावत (Dicot) और समांतर (Monocot)।
⊕ : त्रिज्या सममित (Actinomorphic)
⚥ : द्विलिंगी (Bisexual - नर और मादा दोनों भाग उपस्थित)
1. विषाणु (Virus) - अकोशिकीय होते हैं।
2. स्तनधारियों की परिपक्व RBC (केन्द्रक विहीन)।
जब एक ही mRNA अणु पर कई राइबोसोम जुड़ जाते हैं और प्रोटीन संश्लेषण करते हैं, तो उस संरचना को पॉलीसोम कहते हैं।
होलोएंजाइम (पूर्ण एंजाइम) = एपोएंजाइम (प्रोटीन भाग) + सह-कारक (अप्रोटीन भाग)।
यह अचार, मुरब्बा आदि को संरक्षित रखने में मदद करता है (जीवाणु जीवद्रव्यकुंचन के कारण मर जाते हैं) और खरपतवार नष्ट करने में सहायक है।
1. एल्कोहल (शराब) और बियर निर्माण में।
2. बेकरी उद्योग (ब्रेड, बिस्किट) में CO₂ उत्पादन द्वारा फुलाने में।
निष्कासित CO₂ और अवशोषित O₂ का अनुपात। वसा का RQ एक से कम (लगभग 0.7) होता है।
यह हृदय की धड़कन (आवेग) उत्पन्न करने वाला ऊतक है। यह दाएं आलिंद की दीवार में स्थित होता है (इसे S.A. नोड भी कहते हैं)।
1. शरीर की प्रतिरक्षा (Immunity) में भाग लेना (लिम्फोसाइट्स द्वारा)।
2. वसा का अवशोषण और परिवहन करना।
रक्त में कैल्शियम आयनों (Ca⁺⁺) की कमी के कारण पेशियों में होने वाला अनैच्छिक और तीव्र संकुचन (ऐंठन)।
यह प्रमस्तिष्क (Cerebrum) के दोनों गोलार्द्धों को जोड़ने वाली तंत्रिका तंतुओं की पट्टी है जो उनके बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान करती है।
1. नाम लैटिन भाषा में और तिरछे (Italics) लिखे जाते हैं।
2. पहला शब्द वंश (Genus) और दूसरा जाति (Species) होता है।
3. वंश का पहला अक्षर बड़ा (Capital) और जाति का छोटा (small) होता है।
1. शरीर पर बाल (Hair) पाए जाते हैं।
2. मादा में दुग्ध ग्रंथियां (Mammary glands) विकसित होती हैं।
3. बाह्य कर्ण (Pinna) उपस्थित होते हैं।
1. अस्थि कठोर और अलचीली होती है, उपास्थि लचीली होती है।
2. अस्थि की मैट्रिक्स में ओसीन प्रोटीन, उपास्थि में कॉन्ड्रिन प्रोटीन होती है।
3. अस्थि में रक्त कणिकाएं बनती हैं, उपास्थि में नहीं।
चित्र में मुख, ग्रसनी, ग्रासनली, गिज़ार्ड (पेषणी), आमाशय, आंत और गुदा को प्रदर्शित करें।
जंतु कोशिका में यह 'कोशिका खांच' (Cell Furrow) विधि द्वारा (परिधि से केंद्र की ओर) होता है।
पादप कोशिका में यह 'कोशिका पट्ट' (Cell Plate) विधि द्वारा (केंद्र से परिधि की ओर) होता है।
1. क्रोमेटिन संघनित होकर गुणसूत्र बनाते हैं।
2. तारककाय (Centrioles) ध्रुवों की ओर गति करते हैं।
3. केन्द्रक झिल्ली और केन्द्रिका विलुप्त होने लगती हैं।
1. आनुवांशिक बौनेपन को दूर करना (तने की लंबाई बढ़ाना)।
2. बीजों की सुप्तावस्था (Dormancy) भंग करना।
3. अनिषेक फलन (Parthenocarpy) को प्रेरित करना।
1. C3 में प्रथम उत्पाद PGA (3C) है, C4 में OAA (4C) है।
2. C4 में क्रैन्ज शारीरिकी (Kranz Anatomy) पाई जाती है, C3 में नहीं।
3. C4 पौधे उच्च तापमान और तीव्रता पर अधिक दक्ष होते हैं।
चित्र में बाह्यत्वचा, कॉर्टेक्स, एंडोडर्मिस, पेरिसाइकिल, संवहन बंडल (वलय में), मज्जा दिखाएं। संवहन बंडल: संयुक्त, कोलेटरल और खुले (Open) होते हैं।
दिन में रक्षक कोशिकाओं में K⁺ आयन का प्रवेश होता है → जल विभव कम → जल का प्रवेश (अंतःपरासरण) → कोशिकाएं स्फीत → रंध्र खुलते हैं। रात में K⁺ बाहर निकलते हैं → रंध्र बंद।
तीन चरण: 1. कार्बोक्सीलेशन (Rubisco द्वारा CO₂ का स्थिरीकरण)। 2. अपचयन (ग्लूकोज निर्माण)। 3. पुनरुद्भवन (RuBP का पुनः निर्माण)। (चक्र का आरेख आवश्यक)।
यह माइटोकॉन्ड्रिया की भीतरी झिल्ली (क्रिस्टी) में होता है। इसमें NADH और FADH₂ के ऑक्सीकरण से मुक्त इलेक्ट्रॉन विभिन्न वाहकों से गुजरते हैं जिससे ऊर्जा मुक्त होती है और ATP का निर्माण (ऑक्सीडेटिव फॉस्फोरिलेशन) होता है।
चित्र में कॉर्निया, आइरिस, लेंस, सिलियरी बॉडी, रेटिना, अंध बिंदु, ऑप्टिक नर्व दिखाएं। रेटिना: इस पर वस्तु का प्रतिबिंब बनता है, इसमें शलाका और शंकु कोशिकाएं होती हैं।
अनैच्छिक, त्वरित अनुक्रिया। उद्दीपन → ग्राही अंग → संवेदी तंत्रिका → मेरुरज्जु (निर्णय) → प्रेरक तंत्रिका → अपवाही अंग (पेशी) → अनुक्रिया। (गर्म वस्तु छूने पर हाथ हटाना)।
इस सिद्धांत के अनुसार, पेशी संकुचन के दौरान पतले एक्टिन तंतु, मोटे मायोसिन तंतुओं के ऊपर सरकते हैं। जिससे सार्कोमेयर की लंबाई कम हो जाती है। इसमें ATP और Ca⁺⁺ की भूमिका महत्वपूर्ण है।
यह हेनले लूप और वासा रेक्टा में होती है। इसका मुख्य कार्य वृक्क के मेडुला भाग में उच्च परासरण सांद्रता बनाए रखना है, जिससे मूत्र को सांद्रित (Concentrated) किया जा सके और जल का संरक्षण हो सके।
⚠️ उत्तर सम्बन्धी डिस्क्लेमर
यहाँ दिए गए उत्तर केवल शैक्षणिक अभ्यास हेतु हैं। वास्तविक परीक्षा में मूल्यांकन MP Board के आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।
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