समग्र शिक्षा अभियान एवं पीएमश्री योजना के तहत् प्रदाय स्कूल ग्रांट के व्यय के सम्बन्ध में DPI निर्देश दिनांक 27-05-2025
Samagra Shiksha Abhiyan (समग्र शिक्षा अभियान)
PM SHRI Scheme (पीएमश्री योजना)
School Grant Utilization
Secondary Education (सेकेण्डरी एजुकेशन)
विभाग / कार्यालय का नाम - समग्र शिक्षा आभयान (सेकेण्ड़ी एजुकेशन) लोक शिक्षण संचालनालय मध्यप्रदेश भोपाल
आदेश क्रमांक तथा आदेश दिनांक - आदेश क्र./SSA/2025/1831 भोपाल, विनांक 27.05.2025
आदेश का विषय - समग्र शिक्षा अभियान एवं पीएमश्री योजना के तहत् प्रदाय स्कूल ग्रांट के व्यय विषयक ।
आदेश का विवरण - लोक शिक्षण संचालनालय मध्यप्रदेश भोपाल द्वारा समग्र शिक्षा अभियान एवं पीएमश्री योजना के तहत् वर्ष 2025-26 विभिन्न मदों में स्वीकृत राशि के व्यय हेतु निर्देश प्रसारित किए है.
स्कूल ग्रांट के व्यय के सम्बन्ध में DPI निर्देश दिनांक 2705-2025
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2. शोषक वर्ग (पूंजीपतियों) के प्रति आक्रोश व क्रांति की भावना।
भाव पक्ष: राम के प्रति दास्य भाव की भक्ति, लोक-मंगल की कामना और समन्वयवाद।
भाव पक्ष: छायावादी प्रवर्तक, प्रेम और सौंदर्य का चित्रण, करुणा और वेदना की प्रधानता।
अंग: स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव, संचारी भाव।
भेद: 1. श्रव्य काव्य, 2. दृश्य काव्य।
उदाहरण: "हनुमान की पूंछ में लगन न पाई आग, लंका सिगरी जल गई गए निसाचर भाग।"
उदाहरण: "रघुकुल रीत सदा चली आई। प्राण जाई पर वचन न जाई।"
2. कहानी में जीवन का एक अंश होता है, उपन्यास में संपूर्ण जीवन।
2. जीवनी सत्य घटनाओं पर आधारित (वस्तुनिष्ठ) होती है, आत्मकथा में भावनाएं (व्यक्तिनिष्ठ) होती हैं।
शैली: सरल, सहज खड़ी बोली और संवाद प्रधान शैली।
शैली: ओजपूर्ण, आलंकारिक भाषा। इन्हें 'कलम का जादूगर' कहते हैं।
2. जले पर नमक छिड़कना (दुखी को और दुखी करना): हार के बाद ताना मारना जले पर नमक छिड़कने जैसा है।
2. जिसकी उपमा न हो: अनुपम
अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी।
पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी।
जल माहँ तेल की गागरि, बूँद न ताकौं लागी।
प्रीति-नदी मैं पाऊँ न बोरयौ, दृष्टिन रूप परागी।
'सूरदास' अबला' हम भोरी, गुर चाँटी ज्यौं पागी ॥"
प्रसंग: इसमें गोपियाँ ऊधौ पर व्यंग्य कर रही हैं कि वे कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम से अछूते हैं।
भावार्थ: गोपियाँ कहती हैं - हे ऊधौ! तुम बड़े भाग्यशाली हो जो कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम बंधन में नहीं बंधे। तुम उस कमल के पत्ते के समान हो जो पानी में रहकर भी गीला नहीं होता, और उस तेल की मटकी के समान हो जिस पर पानी की बूँद नहीं ठहरती। तुमने प्रेम रूपी नदी में पैर ही नहीं डुबोया। लेकिन हम गोपियाँ भोली हैं जो कृष्ण प्रेम में गुड़ से लिपटी चींटियों की तरह जुड़ गई हैं।
यदि तुम्हारी माँ न माध्यम बनीं होती आज
मैं न सकता देख
मैं न पाता जान
तुम्हारी यह दन्तुरित मुस्कान"
प्रसंग: कवि बच्चे की मुस्कान और उसकी माँ के योगदान का वर्णन कर रहे हैं।
भावार्थ: कवि बच्चे से कहते हैं कि कोई बात नहीं अगर हम पहली बार में परिचित नहीं हो सके। लेकिन, यदि आज तुम्हारी माँ हम दोनों के बीच माध्यम न बनी होती, तो मैं तुम्हारी यह सुंदर छवि और नए-नए निकले दाँतों वाली मोहक मुस्कान न देख पाता। कवि माँ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं कि उन्हीं के कारण उन्हें यह सुख मिला है।
प्रसंग: भगत जी की कबीर के प्रति अगाध श्रद्धा और त्याग का वर्णन।
व्याख्या: बालगोबिन भगत गृहस्थ होते हुए भी साधु थे। वे अपनी हर वस्तु 'साहब' (कबीर) की मानते थे। वे अपनी मेहनत से पैदा हुई सारी फसल सिर पर लादकर 4 कोस दूर कबीर मठ ले जाते और भेंट कर देते। वहां से जो कुछ 'प्रसाद' के रूप में वापस मिलता, वे उसी में संतुष्ट रहते और साल भर अपना घर चलाते। यह उनके निस्वार्थ भाव और संतोषी स्वभाव को दर्शाता है।
प्रसंग: लेखक 'सभ्यता' और 'संस्कृति' में अंतर बताते हुए सुई-धागे के आविष्कार का उदाहरण देते हैं।
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि उस आदिम काल के बारे में सोचो जब कपड़े जोड़ने का ज्ञान नहीं था। जिस व्यक्ति ने पहली बार अपनी बुद्धि से लोहे को घिसकर, छेद करके सुई बनाई होगी और उसमें धागा पिरोकर कपड़े जोड़े होंगे, वह कितना महान आविष्कारक रहा होगा। उसका यह नया विचार ही 'संस्कृति' है, क्योंकि उसने मानवता को कुछ नया दिया।
जल है तो कल है
पानी की हर बूँद है सोना, इसे कभी नहीं खोना।
- नल खुला न छोड़ें।
- गाड़ी धोने में पाइप का प्रयोग न करें।
- वर्षा जल संचयन (Harvesting) अपनाएं।
माँ: हाँ बेटा, दीपावली आने वाली है न। यह रोशनी का त्यौहार है।
बेटा: माँ, हम दीये क्यों जलाते हैं?
माँ: बेटा, दीये अंधकार को मिटाकर प्रकाश लाते हैं। भगवान राम के लौटने की खुशी में भी जलाए जाते हैं।
बेटा: मैं इस बार पटाखे नहीं चलाऊँगा, प्रदूषण होता है।
माँ: शाबाश बेटा! यह बहुत अच्छी सोच है। हम मिठाई और दीयों से ही खुशियाँ मनाएंगे।
आ रही हिमालय से पुकार,
है उदधि गरजता बार-बार,
प्राची, पश्चिम, भू, नभ अपार,
सब पूछ रहे हैं दिग-दिगंत,
वीरों का कैसा हो वसंत ?"
उत्तर: वीरों का वसंत।
प्र.2. वीरों का वसंत कैसा होना चाहिए?
उत्तर: वीरों का वसंत उत्साह, त्याग, बलिदान और पराक्रम से भरा होना चाहिए।
प्र.3. उपर्युक्त काव्यांश का भावार्थ लिखिए।
उत्तर: कवयित्री पूछती हैं कि वीरों का वसंत कैसा होना चाहिए? यही प्रश्न हिमालय, गरजता हुआ समुद्र और धरती-आकाश (दसों दिशाएं) पूछ रहे हैं। भाव यह है कि वीरों के लिए वसंत केवल प्राकृतिक सौंदर्य नहीं, बल्कि देश के लिए बलिदान देने का अवसर है।
उत्तर: स्वास्थ्य का महत्त्व (या 'अनमोल शरीर')।
प्र.2. अनमोल क्या है?
उत्तर: हमारा 'शरीर' अनमोल है।
प्र.3. शुद्ध एवं असली शब्द के विलोम शब्द लिखिए।
उत्तर:
शुद्ध का विलोम - अशुद्ध
असली का विलोम - नकली
श्रीमान प्राचार्य महोदय,
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,
भोपाल (मध्य प्रदेश)।
विषय: स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (TC) प्राप्त करने हेतु आवेदन।
मान्यवर,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय में कक्षा 10वीं 'अ' का नियमित छात्र हूँ। मेरे पिताजी, जो कि सरकारी सेवा में हैं, उनका स्थानांतरण भोपाल से इंदौर हो गया है। मेरा पूरा परिवार उनके साथ इंदौर जा रहा है, इसलिए मैं यहाँ अकेले रहकर अपना अध्ययन जारी रखने में असमर्थ हूँ।
अतः श्रीमान जी से विनम्र प्रार्थना है कि मुझे मेरा स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (School Leaving Certificate) शीघ्र प्रदान करने की कृपा करें, ताकि मैं इंदौर के विद्यालय में प्रवेश लेकर अपनी पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रख सकूँ। मैंने विद्यालय का समस्त शुल्क जमा कर दिया है।
दिनांक: 25/02/2026
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
अमित कुमार
कक्षा: 10वीं 'अ'
सादर चरण स्पर्श।
मैं यहाँ छात्रावास में सकुशल हूँ और आशा करता हूँ कि घर पर आप, माताजी और सभी कुशल-मंगल होंगे।
यह पत्र मैं आपको अपनी बोर्ड परीक्षा की तैयारी के विषय में जानकारी देने के लिए लिख रहा हूँ। मेरी वार्षिक परीक्षाएँ निकट हैं और मैंने अपनी तैयारी लगभग पूरी कर ली है। मैंने सभी विषयों का एक बार पुनराव्यास (revision) कर लिया है। विज्ञान और गणित में मैं विशेष ध्यान दे रहा हूँ और पुराने प्रश्न-पत्रों को हल कर रहा हूँ। मेरे प्री-बोर्ड में भी अच्छे अंक आए थे, जिससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपके और माताजी के आशीर्वाद से मैं बोर्ड परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होऊँगा। माताजी को मेरा प्रणाम कहिएगा और छोटी बहन को स्नेह।
आपका आज्ञाकारी पुत्र,
रोहित
दिनांक: 25/02/2026
2. प्रदूषण के प्रकार: प्रदूषण मुख्य रूप से चार प्रकार का होता है - वायु प्रदूषण (धुआं), जल प्रदूषण (गंदा पानी), ध्वनि प्रदूषण (शोर) और मृदा प्रदूषण (कचरा)।
3. कारण: वनों की अंधाधुंध कटाई, बढ़ते उद्योग, वाहनों का धुआं और प्लास्टिक का उपयोग प्रदूषण के मुख्य कारण हैं।
4. दुष्परिणाम: प्रदूषण से सांस की बीमारियाँ, ग्लोबल वार्मिंग और मौसम में बदलाव जैसी समस्याएं हो रही हैं।
5. उपसंहार: हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए और प्लास्टिक का उपयोग बंद करना चाहिए। 'स्वच्छ पर्यावरण, स्वस्थ जीवन' ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।
2. शारीरिक व मानसिक विकास: खेलों से शरीर चुस्त-दुरुस्त रहता है। इससे रक्त संचार बढ़ता है और पाचन तंत्र ठीक रहता है। खेल तनाव को दूर कर मन को प्रसन्न रखते हैं।
3. अनुशासन और सहयोग: खेल हमें नियमों का पालन करना, अनुशासन में रहना और टीम वर्क (सहयोग) सिखाते हैं। इससे नेतृत्व के गुण विकसित होते हैं।
4. उपसंहार: पढ़ाई के साथ-साथ खेल भी जरूरी हैं। आज खेल को करियर के रूप में भी अपनाया जा रहा है। अतः हमें प्रतिदिन खेलना चाहिए।
2. अनुशासन का महत्त्व: अनुशासित विद्यार्थी समय का पाबंद होता है। वह बड़ों का आदर करता है और अपनी पढ़ाई पर ध्यान देता है। बिना अनुशासन के कोई भी छात्र सफलता के शिखर पर नहीं पहुँच सकता।
3. सफलता की कुंजी: प्रकृति भी अनुशासन में काम करती है (सूर्य, चाँद का निकलना)। जो विद्यार्थी आलस्य त्यागकर अनुशासन में रहता है, उसका भविष्य उज्ज्वल होता है।
4. उपसंहार: अनुशासन देश और समाज की उन्नति के लिए जरूरी है। विद्यार्थियों को इसे अपने जीवन में उतारना चाहिए।
2. जल की उपयोगिता: जल पीने, भोजन पकाने, सफाई, सिंचाई और बिजली बनाने के काम आता है। पृथ्वी का 70% भाग जल है, पर पीने योग्य पानी बहुत कम है।
3. जल संकट: बढ़ती जनसंख्या और प्रदूषण के कारण पीने का पानी कम होता जा रहा है। नदियाँ सूख रही हैं।
4. उपसंहार: हमें पानी की एक-एक बूँद बचानी चाहिए। वर्षा जल संचयन करना चाहिए और जल को प्रदूषित होने से रोकना चाहिए, क्योंकि 'जल है तो कल है'।
2. वरदान: विज्ञान ने हमें बिजली, मोबाइल, इंटरनेट, कंप्यूटर और तेज यातायात के साधन दिए हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में विज्ञान ने असाध्य रोगों का इलाज ढूंढकर जीवन बचाया है।
3. अभिशाप: विज्ञान के दुरूपयोग से परमाणु बम जैसे विनाशकारी हथियार भी बने हैं। प्रदूषण भी बढ़ा है।
4. उपसंहार: विज्ञान एक अच्छा सेवक है पर बुरा मालिक। यदि हम इसका सदुपयोग करें तो यह मानव जाति के लिए वरदान है।









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