राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 हेतु ऑनलाइन नामांकन की प्रक्रिया एवं चयन के मापदंड
Online Nomination Process and Selection Criteria for National Teacher Award-2025
विभाग / कार्यालय का नाम – लोक शिक्षण संचालनालय, मध्यप्रदेश
आदेश क्रमांक तथा दिनांक – आदेश क्र. /राशिकप्र / राष्ट्रीय पुर. / 2025 / 1096 भोपाल दिनांक 26/06/2025
आदेश का विषय – “राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025” हेतु ऑनलाइन स्व-नामांकन की प्रक्रिया एवं चयन के मापदण्ड.
संदर्भ – भारत सरकार का पत्र क्रमांक 1-13 / 2025-NAT दिनांक 23 June 2025
आदेश का विवरण – लोक शिक्षण संचालनालय, मध्य प्रदेश द्वारा “राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025” हेतु ऑनलाइन स्व-नामांकन की प्रक्रिया एवं चयन के मापदण्ड के सम्बन्ध में दिशा निर्देश जारी किये हैं. जिसमें –
1. राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 हेतु नामांकन की पात्रता (Eligibility for nomination for National Teacher Award-2025)
2. राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 हेतु नामांकन एवं चयन की प्रक्रिया (Process of nomination and selection for National Teacher Award-2025)
3. राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 हेतु जिला चयन समिति का स्वरुप / कार्य (Nature / Function of District Selection Committee for National Teacher Award-2025)
4. राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 हेतु नामांकन समय सारणी (Nomination Time Table for National Teacher Award-2025)
5. राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 हेतु मूल्याङ्कन प्रक्रिया (Evaluation Process for National Teacher Award-2025)
आदि के बारे में दिशा निर्देश जारी किये गए हैं.
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 हेतु नामांकन के सम्बन्ध में DPI Order
B.Ed Admission 2025-26: सरकारी शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रवेश नियमों में बदलाव | MP B.Ed Entrance Age Limit Increased
B.Ed Admission 2025-26: आयु सीमा में छूट के साथ प्रवेश प्रक्रिया शुरू
(MP Government B.Ed College Admission 2025 Latest Update)
राज्य शिक्षा केंद्र, मध्य प्रदेश ने B.Ed Admission 2025-26 के लिए एक बड़ा और सराहनीय निर्णय लिया है। MP Government Teacher Training Institutes में B.Ed Course में प्रवेश हेतु Maximum Age Limit में महत्वपूर्ण छूट दी गई है। यह निर्णय अधिक से अधिक इच्छुक उम्मीदवारों, विशेषकर मध्यम आयु वर्ग के लोगों को Teaching Career में प्रवेश का अवसर देगा। जानकारी श्री दीपक हलवे प्राचार्य सर द्वारा.
MP B.Ed Admission 2025
Government B.Ed Colleges in MP
B.Ed Entrance Age Limit MP 2025
B.Ed प्रवेश प्रक्रिया मध्यप्रदेश
RSKMP B.Ed Admission Latest News
MP Online B.Ed Form 2025
B.Ed Application Form Date MP
राज्य शिक्षा केन्द्र, मध्यप्रदेश (RSKMP) द्वारा B.Ed प्रवेश प्रक्रिया सत्र 2025-26 हेतु एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। आदेश क्र./राशिके/शि.शि./2025/991 दिनांक 05 जून 2025 के अनुसार प्रदेश के सरकारी शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में B.Ed पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु नियमों में आंशिक संशोधन किया गया है।
प्रवेश संस्थान (B.Ed Colleges under MP Government):
प्रगत शैक्षिक अध्ययन संस्थान (IASE), जबलपुर, भोपाल
शासकीय अध्यापक शिक्षा महाविद्यालय: देवास, उज्जैन, खण्डवा, ग्वालियर, रीवा, छतरपुर
SISE जबलपुर
प्रवेश नियम अपडेट - अधिकतम आयु सीमा में वृद्धि:
Entry Rule Update – Maximum Age Limit Increased:
अब बी.एड. में प्रवेश के लिए अधिकतम आयु सीमा 1 जुलाई को 55 वर्ष या उससे कम कर दी गई है। पूर्व में यह सीमा 50 वर्ष थी। इससे वरिष्ठ अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिलेगी।
Other Admission Rules & Process:
अन्य सभी नियम और प्रवेश प्रक्रिया पूर्व की तरह ही लागू रहेंगे। B.Ed Entrance 2025 Schedule के अनुसार प्रवेश प्रक्रिया जल्द ही प्रारंभ की जाएगी।
उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे नियमित रूप से MP Online Portal या संबंधित संस्थानों की वेबसाइट पर प्रवेश तिथि, पात्रता, दस्तावेज़ और प्रक्रिया की जानकारी लेते रहें।
B.Ed. प्रवेश हेतु आयु सीमा वृद्धि के सम्बन्ध में RSKMP Order
शैक्षणिक सत्र 2025-26 में रिक्त पदो के विरूद्ध अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था के संबंध में DPI आदेश जारी
Guest Teachers Recruitment DPI Order
विभाग / कार्यालय का नाम - लोक शिक्षण संचालनालय, मध्यप्रदेश
आदेश क्रमांक तथा दिनांक - आदेश क्रमांक/अति.शि./2025-26/199 भोपाल, दिनांक 26/06/2025 इस प्रकार है -
आदेश का विषय - शैक्षणिक सत्र 2025-26 में रिक्त पदो के विरूद्ध अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था के संबंध में।
आदेश का विवरण - आदेश में लोक शिक्षण संचालनालय, मध्यप्रदेश द्वारा शैक्षणिक सत्र 2025-26 में रिक्त पदों के विरुद्ध अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति हेतु निर्देश जारी किए गए हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और GFMS पोर्टल के माध्यम से संचालित की जाएगी। शाला प्रभारी को विद्यालय की कक्षाओं, समयसारणी और उपलब्ध शिक्षकों के आधार पर लॉन्ग टर्म रिक्तियों का प्रमाणीकरण करना होगा। वहीं संकुल प्राचार्य B.Ed/M.Ed में अध्ययनरत शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण उत्पन्न अतिरिक्त रिक्तियां दर्ज करेंगे।
अतिथि शिक्षक को स्कोर कार्ड पैनल के अनुसार उपस्थिति हेतु रिक्वेस्ट दर्ज करनी होगी और निर्धारित समय में “हमारे शिक्षक” ऐप के माध्यम से उपस्थिति देनी होगी। पहले चरण के बाद, शेष रिक्तियों हेतु मेरिट के आधार पर विद्यालय आवंटित होंगे। यह नियुक्ति पूर्णतः अस्थायी है और नियमित शिक्षक की उपलब्धता पर स्वतः समाप्त हो जाएगी। निर्देशों के अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
आदेश में -
अतिथि शिक्षक आमंत्रण हेतु रिक्तियों का प्रमाणीकरण
अतिथि शिक्षक आमंत्रण हेतु की जाने वाली कार्यवाही
अतिथि शिक्षक आमंत्रण हेतु समय-सारणी (प्रथम एवं द्वितीय चरण)
अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था के संबंध में DPI आदेश दिनांक 26-06-2025
अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था की सम्बन्ध में DPI आदेश दिनांक 04-07-2019 यहाँ देखिये
DPI order dated 04-07-2019 regarding arrangement of guest teachers
लोक शिक्षण संचालनालय, मध्यप्रदेश गौतम नगर भोपाल-462021 (दूरभाष-0755-2583659 फैक्स-0755-2583651 ई-मेल cpibhop@nic.in)
आदेश क्रमांक तथा दिनांक - आदेश क्र./रा.मा.शि.अ./अतिथि शिक्षक/2019/2013, भोपाल दिनांक 04.07.2019
प्रति,
1. समस्त संभागीय संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, मध्यप्रदेश
2. समस्त जिला शिक्षा अधिकारी, मध्यप्रदेश
3. समस्त विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी
4. समस्त प्राचार्य हाई/ हायर सेकैण्डरी स्कूल (स्कूल शिक्षा विभाग)
आदेश का विषय - शैक्षणिक सत्र 2019-20 में शासकीय विद्यालयों में रिक्त पदों के विरुद्ध अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था।
संदर्भ- 1. म.प्र. शासन स्कूल शिक्षा विभाग का पत्र क्र. 44-15/20/2010/20-2 भोपाल दि 09.11.16, 2. म.प्र. शासन स्कूल शिक्षा विभाग का पत्र क्र./एफ 44-13/17/20-2 भोपाल दि. 07.07.18
आदेश का विवरण - शासकीय विद्यालयों में रिक्त पदों के विरुद्ध अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था के सम्बन्ध में लोक शिक्षण संचालनालय, मध्यप्रदेश का आदेश क्र./2013 दिनांक 04.07.2019 पीडीएफ में देखिये, पीडीएफ के नीचे आदेश डाउनलोड की लिंक भी दी गई है.
शासकीय विद्यालयों में रिक्त पदों के विरुद्ध अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था की सम्बन्ध में DPI आदेश दिनांक 04/07/2019
एम.पी. बोर्ड प्रवेश एवं परीक्षा सम्बन्धी मार्गदर्शिका 2025-26
प्रवेश नीति 2025-26
विभाग / कार्यालय का नाम – माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश, भोपाल
आदेश क्रमांक व दिनांक – क्रमांक/3966/प.स./2025 भोपाल दिनांक 11/06/2025
आदेश का विषय – प्रवेश एवं परीक्षा सम्बन्धी मार्गदर्शिका 2025-26
(परीक्षा सम्बन्धी मार्गदर्शिका एवं ऑनलाइन आवेदन भरने के निर्देश, परीक्षा वर्ष 2025-26)
विवरण - माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश, भोपाल (mpbse) द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए कक्षा 9वी / 11वी नामांकन एवं कक्षा 10वी/12वी बोर्ड परीक्षा ऑनलाइन आवेदन के सम्बन्ध में निर्देश जारी किये हैं.
परीक्षा निर्देशिका में महत्वपूर्ण तिथियाँ, प्रवेश एवं परीक्षा आवेदन पत्र जमा करने की तिथि व प्रक्रिया, मण्डल की परीक्षाओ में नियमित रूप से सम्मिलित होने के लिये ऑनलाइन (Online) आवेदन भरने संबंधी निर्देश, स्वाध्यायी परीक्षार्थियों के लिये निर्देश, मण्डल की परीक्षाओ में स्वाध्यायी रूप से सम्मिलित होने संबंधी निर्देश, ऑनलाइन प्रवेश-पत्र / नामांकन कार्ड डाउनलोड करने के पूर्व की महत्वपूर्ण व अनिवार्य कार्यवाही, हाईस्कूल / हायर सेकेण्डरी परीक्षा नियमित एवं स्वाध्यायी परीक्षार्थियों के लिये सामान्य निर्देश.
विद्यालय पूर्व शिक्षा में डिप्लोमा (DPSE) के आवेदन की प्रक्रिया एवं पात्रता, परीक्षा आवेदन पत्र में संशोधन, परीक्षा आवेदन पत्रों का सूक्ष्म परीक्षण, संभागीय अधिकारी के दायित्व, बेस्ट फाइव सम्बन्धी निर्देश, पूरक प्राप्त छात्रों के निर्देश, विषय/माध्यम/समूह का चयन एवं परिवर्तन अन्य राज्य / मण्डलों के छात्रों का मध्यप्रदेश के मान्यता प्राप्त विद्यालयों में प्रवेश, श्रेणी सुधार के लिए प्रवेश लेने हेतु निर्देश, अतिरिक्त विषय/विषयों का चयन, नामांकन, अध्ययन अन्तराल आदि .
नियमित छात्रों की उपस्थिति, प्रायोगिक परीक्षायें, परीक्षा केन्द्र का निर्धारण, अनुचित साधन, परीक्षा शुल्क वापसी, स्थानांतरण प्रकरण, नियमित छात्रों को परीक्षा शुल्क में रियायत, संस्था/ परीक्षार्थी निम्न माध्यमों से परीक्षाओं की शुल्क जमा कर सकते है, मण्डल द्वारा निर्धारित शुल्क विवरण, प्रारूप, विषय कोड लिस्ट और ब्लॉक कोड लिस्ट दिए गए हैं.
प्रवेश एवं परीक्षा सम्बन्धी मार्गदर्शिका 2025-26 (MP Board Prawesh Niti 2025-26)
🏆 मध्यप्रदेश ओलम्पियाड सत्र 2025-26 की जानकारी: ऑनलाइन पंजीयन 5 जुलाई से शुरू!
ओलम्पियाड आयोजन के संबंध में राज्य शिक्षा केंद्र आदेश
राज्य शिक्षा केन्द्र (RSKMP), भोपाल ने ओलम्पियाड सत्र 2025-26 के आयोजन संबंधी आदेश जारी कर दिया है। कक्षा 2 से 8 तक के समस्त शासकीय विद्यार्थियों के लिए यह प्रतिभा खोज का महत्वपूर्ण मंच होगा।
📜 आदेश विवरण (Order Details):
आदेश क्रमांक: आदेश क्र./राशिके/पापु/2025/1182
दिनांक: 23 जून 2025
जारीकर्ता: राज्य शिक्षा केन्द्र (RSKMP), भोपाल
🎯 ओलम्पियाड किसके लिए? (Eligibility):
कक्षा 2 से 5 (प्राथमिक विद्यालय)
कक्षा 6 से 8 (माध्यमिक विद्यालय)
📅 आयोजन कार्यक्रम (Important Dates & Stages):
प्रथम चरण- जनशिक्षा केन्द्र स्तर
द्वितीय चरण - जिला स्तर (विकासखंड मुख्यालय)
🌐 ऑनलाइन पंजीयन (Online Registration):
पोर्टल: राज्य शिक्षा केन्द्र ऑनलाइन पोर्टल (RSKMP Portal)
शुरू होगा: 5 जुलाई 2025
अंतिम तिथि: 30 जुलाई 2025
कौन पंजीकरण करेगा? विद्यालय प्रमुख/शिक्षकगण विद्यार्थियों का पंजीयन करेंगे।
सुनिश्चित करें कि आपके विद्यालय के सभी पात्र विद्यार्थी 5 से 30 जुलाई 2025 के बीच RSKMP पोर्टल पर पंजीकृत (Registered) हों!
ओलम्पियाड सत्र 2025-26 के आयोजन के संबंध में राज्य शिक्षा केंद्र आदेश 23-06-2025
यह ओलम्पियाड विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता (Logical Reasoning), गणितीय योग्यता (Mathematical Aptitude), विज्ञान समझ (Scientific Temper), और भाषा कौशल (Language Skills - विशेषकर वर्ड पावर) को परखने और निखारने का शानदार अवसर है। कक्षा 2 से 5 के विद्यार्थी वर्ड पावर चैम्पियनशिप में भी भाग ले सकेंगे।
आंगनवाडी भर्ती प्रक्रिया विज्ञापन, भर्ती प्रक्रिया, चयन प्रक्रिया आदि की जानकारी के लिए आंगनवाडी भर्ती आदेश एवं नियम पुस्तिका यहाँ देखिये
MP anganwadi bharti niyam - Rule Book
विभाग / कार्यालय का नाम - संचालनालय महिला एवं बाल विकास, मध्यप्रदेश "विजयाराजे वात्सल्य भवन, 28A, अरेरा हिल्स, भोपाल (म०प्र०) -462011 (फोन: 2550909, फैक्स: 2550912, E-m-all directorate.wed@mp.gov.in/ Website www.mpwedmis.org)
आदेश क्रमांक तथा दिनांक - आदेश क्र./मबावि/SAP-2/2025/2106 भोपाल, दिनांकः 19/06/2025
आदेश का विषय - आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ता एवं सहायिका भर्ती हेतु विज्ञापन.
आदेश का विवरण - संचालनालय महिला एवं बाल विकास, मध्यप्रदेश द्वारा प्रदेश के आंगनवाड़ी के 19 हजार 503 पदों पर भर्ती हेतु विज्ञापन जारी किया है, इस बार विभाग द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ता / सहायिका भर्ती प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है.
MP Online Chayan Portal के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किये जा सकते हैं, ऑनलाइन आवेदन 20 जून से प्रारंभ हो चुके हैं त्तथा आवेदन की अंतिम तिथि 04 जुलाई 2025 है.
आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ता एवं सहायिका भर्ती हेतु विज्ञापन
समग्र शिक्षा अभियान एवं पीएमश्री योजना के तहत् प्रदाय स्कूल ग्रांट के व्यय के सम्बन्ध में DPI निर्देश दिनांक 27-05-2025
School Grant Expenditure DPI Instructions
Samagra Shiksha Abhiyan (समग्र शिक्षा अभियान)
PM SHRI Scheme (पीएमश्री योजना)
School Grant Utilization
Secondary Education (सेकेण्डरी एजुकेशन)
विभाग / कार्यालय का नाम - समग्र शिक्षा आभयान (सेकेण्ड़ी एजुकेशन) लोक शिक्षण संचालनालय मध्यप्रदेश भोपाल
आदेश क्रमांक तथा आदेश दिनांक - आदेश क्र./SSA/2025/1831 भोपाल, विनांक 27.05.2025
आदेश का विषय - समग्र शिक्षा अभियान एवं पीएमश्री योजना के तहत् प्रदाय स्कूल ग्रांट के व्यय विषयक ।
आदेश का विवरण - लोक शिक्षण संचालनालय मध्यप्रदेश भोपाल द्वारा समग्र शिक्षा अभियान एवं पीएमश्री योजना के तहत् वर्ष 2025-26 विभिन्न मदों में स्वीकृत राशि के व्यय हेतु निर्देश प्रसारित किए है.
स्कूल ग्रांट के व्यय के सम्बन्ध में DPI निर्देश दिनांक 2705-2025
Class 10 Hindi Pre-Board Solution | MP EDUCATION GYAN DEEP
MP EDUCATION GYAN DEEP
प्री-बोर्ड परीक्षा 2025-26 | कक्षा 10वीं हिन्दी | सम्पूर्ण हल
प्रश्न 1. सही विकल्प चुनकर लिखिए (1x6=6)
(स) सूरदास
(अ) संवत् 1900
(ब) छंद
(स) पतनशील नवाबों पर
(स) आठ
(स) कटाओ को
प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (1x6=6)
उज्ज्वल गाथा
उत्साह
अन्योक्ति अलंकार
प्रभु मिलन
द्विगु
धर्मचक्र
प्रश्न 3. सत्य/असत्य लिखिए (1x6=6)
सत्य
असत्य (यह अतिशयोक्ति में होता है)
सत्य
असत्य (शिक्षिका थीं)
असत्य
सत्य
प्रश्न 4. सही जोड़ी बनाइए (1x6=6)
-> (ग) झोंपड़ी में खिल रहे जलजात
-> (क) मानवीकरण अलंकार
-> (ख) पेट की ज्वाला शांत करने हेतु
-> (छ) वाक्य
-> (च) बहुत प्यारा
-> (घ) फिर मिलेंगे
प्रश्न 5. एक वाक्य में उत्तर (1x6=6)
मृतक (मुर्दे/पाषाण) में
33 (तैंतीस)
बालाजी मंदिर (काशी) में
अव्ययीभाव समास
माता के आँचल (माँ की गोद) में
चाँदनी रात में
विषयनिष्ठ प्रश्न (6 से 17) - 2 अंक
1. शोषितों के प्रति सहानुभूति। 2. शोषक वर्ग (पूंजीपतियों) के प्रति आक्रोश व क्रांति की भावना।
रीतिकाल में रचित काव्यों में श्रृंगार रस की प्रधानता थी। कवियों ने नख-शिख और नायक-नायिका भेद का अत्यधिक वर्णन किया, इसलिए इसे 'श्रृंगार काल' कहा जाता है।
रचनाएँ: रामचरितमानस, विनयपत्रिका। भाव पक्ष: राम के प्रति दास्य भाव की भक्ति, लोक-मंगल की कामना और समन्वयवाद।
रचनाएँ: कामायनी, आँसू। भाव पक्ष: छायावादी प्रवर्तक, प्रेम और सौंदर्य का चित्रण, करुणा और वेदना की प्रधानता।
लक्ष्मण के अनुसार, वीर योद्धा धैर्यवान और विनम्र होते हैं। वे युद्ध में वीरता दिखाते हैं, स्वयं अपनी प्रशंसा नहीं करते। वे ब्राह्मण, गाय और दुर्बल पर हथियार नहीं उठाते।
फाल्गुन में प्रकृति का सौंदर्य चरम पर होता है। चारों तरफ हरियाली, फूल और सुगंधित हवा होती है। वातावरण में एक नशा (मादकता) छा जाता है जो अन्य ऋतुओं में नहीं होता।
बच्चे की मुस्कान निश्छल, भोली और स्वाभाविक होती है। जबकि बड़ों की मुस्कान में स्वार्थ, बनावटीपन या शिष्टाचार छिपा हो सकता है।
कवि नागार्जुन के अनुसार, फसल नदियों के पानी का जादू, लाखों हाथों के स्पर्श की गरिमा, और विभिन्न मिट्टियों, धूप और हवा का रूपांतरित रूप है।
परिभाषा: काव्य को पढ़ने/सुनने से जो आनंद मिलता है, उसे रस कहते हैं। अंग: स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव, संचारी भाव।
परिभाषा: 'रसात्मकं वाक्यं काव्यम्' अर्थात रस युक्त वाक्य ही काव्य है। भेद: 1. श्रव्य काव्य, 2. दृश्य काव्य।
जहाँ किसी बात को लोक सीमा से बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहा जाए, वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है। उदाहरण: "हनुमान की पूंछ में लगन न पाई आग, लंका सिगरी जल गई गए निसाचर भाग।"
यह सम मात्रिक छंद है। चार चरण होते हैं, प्रत्येक में 16-16 मात्राएँ होती हैं। उदाहरण: "रघुकुल रीत सदा चली आई। प्राण जाई पर वचन न जाई।"
1. कहानी छोटी होती है, उपन्यास बड़ा होता है। 2. कहानी में जीवन का एक अंश होता है, उपन्यास में संपूर्ण जीवन।
1. जीवनी दूसरे व्यक्ति द्वारा लिखी जाती है, आत्मकथा स्वयं लेखक लिखता है। 2. जीवनी सत्य घटनाओं पर आधारित (वस्तुनिष्ठ) होती है, आत्मकथा में भावनाएं (व्यक्तिनिष्ठ) होती हैं।
रचनाएँ: आपका बंटी, महाभोज। शैली: सरल, सहज खड़ी बोली और संवाद प्रधान शैली।
रचनाएँ: माटी की मूरतें, गेहूँ और गुलाब। शैली: ओजपूर्ण, आलंकारिक भाषा। इन्हें 'कलम का जादूगर' कहते हैं।
डुमराँव उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ की जन्मभूमि है। शहनाई बजाने में प्रयुक्त होने वाली 'नरकट' (घास) वहाँ सोन नदी के किनारे मिलती है।
जो व्यक्ति अपनी बुद्धि-विवेक से नए तथ्य का दर्शन करता है या समाज कल्याण हेतु नया आविष्कार करता है, उसे 'संस्कृत व्यक्ति' कहते हैं।
मूर्ति संगमरमर की थी, पर नेताजी का चश्मा संगमरमर का नहीं था। उसकी जगह असली, काले फ्रेम का चश्मा लगा था, जो लेखक को खटकता था।
भगत जी वृद्ध थे। पुत्रवधु को चिंता थी कि उनके बुढ़ापे में भोजन कौन बनाएगा और बीमारी में पानी कौन देगा, इसलिए वह सेवा करना चाहती थी।
1. गागर में सागर भरना (थोड़े में बहुत कहना): बिहारी ने अपने दोहों में गागर में सागर भर दिया है。 2. जले पर नमक छिड़कना (दुखी को और दुखी करना): हार के बाद ताना मारना जले पर नमक छिड़कने जैसा है।
1. सब कुछ जानने वाला: सर्वज्ञ 2. जिसकी उपमा न हो: अनुपम
बच्चे माता-पिता की गोद में बैठकर, उनके साथ खेलकर, उनसे जिद्द करके और विपत्ति में केवल उनकी शरण लेकर अपना प्रेम व्यक्त करते हैं।
गंतोक के लोग पहाड़ों की कठिन परिस्थितियों में भी कड़ी मेहनत करके शहर को सुंदर और व्यवस्थित रखते हैं। उनकी मेहनत और स्वाभिमान के कारण इसे यह नाम दिया गया है।
प्रश्न 18. काव्यांश का भावार्थ (3 अंक - 75 शब्द)
"ऊधौ, तुम हौं अति बड़भागी।
अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी।
पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी।
जल माहँ तेल की गागरि, बूँद न ताकौं लागी।
प्रीति-नदी मैं पाऊँ न बोरयौ, दृष्टिन रूप परागी।
'सूरदास' अबला' हम भोरी, गुर चाँटी ज्यौं पागी ॥"
संदर्भ: प्रस्तुत पद हमारी पाठ्यपुस्तक 'क्षितिज भाग-2' के 'पद' पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता 'सूरदास' हैं। प्रसंग: इसमें गोपियाँ ऊधौ पर व्यंग्य कर रही हैं कि वे कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम से अछूते हैं। भावार्थ: गोपियाँ कहती हैं - हे ऊधौ! तुम बड़े भाग्यशाली हो जो कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम बंधन में नहीं बंधे। तुम उस कमल के पत्ते के समान हो जो पानी में रहकर भी गीला नहीं होता, और उस तेल की मटकी के समान हो जिस पर पानी की बूँद नहीं ठहरती। तुमने प्रेम रूपी नदी में पैर ही नहीं डुबोया। लेकिन हम गोपियाँ भोली हैं जो कृष्ण प्रेम में गुड़ से लिपटी चींटियों की तरह जुड़ गई हैं।
"क्या हुआ यदि हो सके परिचित न पहली बार ?
यदि तुम्हारी माँ न माध्यम बनीं होती आज
मैं न सकता देख
मैं न पाता जान
तुम्हारी यह दन्तुरित मुस्कान"
संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश पाठ 'यह दंतुरित मुस्कान' से लिया गया है। कवि 'नागार्जुन' हैं। प्रसंग: कवि बच्चे की मुस्कान और उसकी माँ के योगदान का वर्णन कर रहे हैं। भावार्थ: कवि बच्चे से कहते हैं कि कोई बात नहीं अगर हम पहली बार में परिचित नहीं हो सके। लेकिन, यदि आज तुम्हारी माँ हम दोनों के बीच माध्यम न बनी होती, तो मैं तुम्हारी यह सुंदर छवि और नए-नए निकले दाँतों वाली मोहक मुस्कान न देख पाता। कवि माँ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं कि उन्हीं के कारण उन्हें यह सुख मिला है।
प्रश्न 19. गद्यांश की व्याख्या (3 अंक - 75 शब्द)
"वह गृहस्थ थे; लेकिन उनकी सब चीज 'साहब' की थीं। जो कुछ खेत में पैदा होता, सिर पर लादकर पहले उसे साहब के दरबार में ले जाते-जो उनके घर से चार कोस दूर पर था-एक कबीरपंथी मठ से मतलब ! वह दरबार में 'भेंट' रूप रख दिया जाकर 'प्रसाद' रूप में जो उन्हे मिलता, उसे घर वाले और उसी से गुजर चलाते।"
संदर्भ: पाठ 'बालगोबिन भगत', लेखक 'रामवृक्ष बेनीपुरी'। प्रसंग: भगत जी की कबीर के प्रति अगाध श्रद्धा और त्याग का वर्णन। व्याख्या: बालगोबिन भगत गृहस्थ होते हुए भी साधु थे। वे अपनी हर वस्तु 'साहब' (कबीर) की मानते थे। वे अपनी मेहनत से पैदा हुई सारी फसल सिर पर लादकर 4 कोस दूर कबीर मठ ले जाते और भेंट कर देते। वहां से जो कुछ 'प्रसाद' के रूप में वापस मिलता, वे उसी में संतुष्ट रहते और साल भर अपना घर चलाते। यह उनके निस्वार्थ भाव और संतोषी स्वभाव को दर्शाता है।
"कल्पना कीजिए उस समय की जब मानव को सुई-धागे का परिचय न था, जिस मनुष्य के दिमाग में पहले-पहल बात आई होगी कि लोहे के एक टुकड़े को घिसकर उसके एक सिरे को छेद कर और छेद में धागा पिरोकर कपड़े के दो टुकड़े एक साथ जोड़े जा सकते हैं, वह भी कितना बड़ा आविष्कर्ता रहा होगा!"
संदर्भ: पाठ 'संस्कृति', लेखक 'भदंत आनंद कौसल्यायन'। प्रसंग: लेखक 'सभ्यता' और 'संस्कृति' में अंतर बताते हुए सुई-धागे के आविष्कार का उदाहरण देते हैं। व्याख्या: लेखक कहते हैं कि उस आदिम काल के बारे में सोचो जब कपड़े जोड़ने का ज्ञान नहीं था। जिस व्यक्ति ने पहली बार अपनी बुद्धि से लोहे को घिसकर, छेद करके सुई बनाई होगी और उसमें धागा पिरोकर कपड़े जोड़े होंगे, वह कितना महान आविष्कारक रहा होगा। उसका यह नया विचार ही 'संस्कृति' है, क्योंकि उसने मानवता को कुछ नया दिया।
प्रश्न 20. विज्ञापन / संवाद (3 अंक)
जल है तो कल है
पानी की हर बूँद है सोना, इसे कभी नहीं खोना।
नल खुला न छोड़ें।
गाड़ी धोने में पाइप का प्रयोग न करें।
वर्षा जल संचयन (Harvesting) अपनाएं।
जनहित में जारी: जल संरक्षण विभाग, म.प्र. सरकार
बेटा: माँ, देखो बाजार कितना सुंदर सजा है! माँ: हाँ बेटा, दीपावली आने वाली है न। यह रोशनी का त्यौहार है। बेटा: माँ, हम दीये क्यों जलाते हैं? माँ: बेटा, दीये अंधकार को मिटाकर प्रकाश लाते हैं। भगवान राम के लौटने की खुशी में भी जलाए जाते हैं। बेटा: मैं इस बार पटाखे नहीं चलाऊँगा, प्रदूषण होता है। माँ: शाबाश बेटा! यह बहुत अच्छी सोच है। हम मिठाई और दीयों से ही खुशियाँ मनाएंगे।
प्रश्न 21. अपठित बोध (4 अंक)
"वीरों का कैसा हो वसंत ?
आ रही हिमालय से पुकार,
है उदधि गरजता बार-बार,
प्राची, पश्चिम, भू, नभ अपार,
सब पूछ रहे हैं दिग-दिगंत,
वीरों का कैसा हो वसंत ?"
प्र.1. उपर्युक्त काव्यांश का शीर्षक लिखिए।
उत्तर: वीरों का वसंत।
प्र.2. वीरों का वसंत कैसा होना चाहिए?
उत्तर: वीरों का वसंत उत्साह, त्याग, बलिदान और पराक्रम से भरा होना चाहिए।
प्र.3. उपर्युक्त काव्यांश का भावार्थ लिखिए।
उत्तर: कवयित्री पूछती हैं कि वीरों का वसंत कैसा होना चाहिए? यही प्रश्न हिमालय, गरजता हुआ समुद्र और धरती-आकाश (दसों दिशाएं) पूछ रहे हैं। भाव यह है कि वीरों के लिए वसंत केवल प्राकृतिक सौंदर्य नहीं, बल्कि देश के लिए बलिदान देने का अवसर है।
"आप हमेशा अच्छी जिन्दगी जीते जा रहे हैं। आप हमेशा बढ़िया कपडे बढ़िया जूते व मोबाइल जैसे दिखावों पर बहुत खर्च करते हैं। आप अपने शरीर पर कितना खर्च करते हैं? इसका मूल्यांकन जरूरी है। यह शरीर अनमोल है। अगर शरीर स्वस्थ नहीं होगा तो आप ये सारे सामान किस पर टांगेंगे? अतः स्वयं का स्वस्थ रहना सबसे जरूरी है एवं स्वस्थ रहने में हमारे खान-पान का सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान है।"
प्र.1. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: स्वास्थ्य का महत्त्व (या 'अनमोल शरीर')।
प्र.2. अनमोल क्या है?
उत्तर: हमारा 'शरीर' अनमोल है।
प्र.3. शुद्ध एवं असली शब्द के विलोम शब्द लिखिए।
उत्तर:
शुद्ध का विलोम - अशुद्ध
असली का विलोम - नकली
प्रश्न 22. पत्र लेखन (4 अंक - 120 शब्द)
सेवा में,
श्रीमान प्राचार्य महोदय,
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,
भोपाल (मध्य प्रदेश)।
विषय: स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (TC) प्राप्त करने हेतु आवेदन।
मान्यवर,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय में कक्षा 10वीं 'अ' का नियमित छात्र हूँ। मेरे पिताजी, जो कि सरकारी सेवा में हैं, उनका स्थानांतरण भोपाल से इंदौर हो गया है। मेरा पूरा परिवार उनके साथ इंदौर जा रहा है, इसलिए मैं यहाँ अकेले रहकर अपना अध्ययन जारी रखने में असमर्थ हूँ।
अतः श्रीमान जी से विनम्र प्रार्थना है कि मुझे मेरा स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (School Leaving Certificate) शीघ्र प्रदान करने की कृपा करें, ताकि मैं इंदौर के विद्यालय में प्रवेश लेकर अपनी पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रख सकूँ। मैंने विद्यालय का समस्त शुल्क जमा कर दिया है।
दिनांक: 25/02/2026
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
अमित कुमार
कक्षा: 10वीं 'अ'
पूज्य पिताजी,
सादर चरण स्पर्श।
मैं यहाँ छात्रावास में सकुशल हूँ और आशा करता हूँ कि घर पर आप, माताजी और सभी कुशल-मंगल होंगे।
यह पत्र मैं आपको अपनी बोर्ड परीक्षा की तैयारी के विषय में जानकारी देने के लिए लिख रहा हूँ। मेरी वार्षिक परीक्षाएँ निकट हैं और मैंने अपनी तैयारी लगभग पूरी कर ली है। मैंने सभी विषयों का एक बार पुनराव्यास (revision) कर लिया है। विज्ञान और गणित में मैं विशेष ध्यान दे रहा हूँ और पुराने प्रश्न-पत्रों को हल कर रहा हूँ। मेरे प्री-बोर्ड में भी अच्छे अंक आए थे, जिससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपके और माताजी के आशीर्वाद से मैं बोर्ड परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होऊँगा। माताजी को मेरा प्रणाम कहिएगा और छोटी बहन को स्नेह।
आपका आज्ञाकारी पुत्र,
रोहित
दिनांक: 25/02/2026
प्रश्न 23. निबंध लेखन (4 अंक - 120 शब्द)
पर्यावरण एवं प्रदूषण
1. प्रस्तावना: हमारे चारों ओर का वातावरण 'पर्यावरण' कहलाता है। आज पर्यावरण प्रदूषण मानव जाति के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। 2. प्रदूषण के प्रकार: प्रदूषण मुख्य रूप से चार प्रकार का होता है - वायु प्रदूषण (धुआं), जल प्रदूषण (गंदा पानी), ध्वनि प्रदूषण (शोर) और मृदा प्रदूषण (कचरा)। 3. कारण: वनों की अंधाधुंध कटाई, बढ़ते उद्योग, वाहनों का धुआं और प्लास्टिक का उपयोग प्रदूषण के मुख्य कारण हैं। 4. दुष्परिणाम: प्रदूषण से सांस की बीमारियाँ, ग्लोबल वार्मिंग और मौसम में बदलाव जैसी समस्याएं हो रही हैं। 5. उपसंहार: हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए और प्लास्टिक का उपयोग बंद करना चाहिए। 'स्वच्छ पर्यावरण, स्वस्थ जीवन' ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।
जीवन में खेलों का महत्त्व
1. प्रस्तावना: कहावत है - 'स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है।' खेल हमारे जीवन का अभिन्न अंग हैं। 2. शारीरिक व मानसिक विकास: खेलों से शरीर चुस्त-दुरुस्त रहता है। इससे रक्त संचार बढ़ता है और पाचन तंत्र ठीक रहता है। खेल तनाव को दूर कर मन को प्रसन्न रखते हैं। 3. अनुशासन और सहयोग: खेल हमें नियमों का पालन करना, अनुशासन में रहना और टीम वर्क (सहयोग) सिखाते हैं। इससे नेतृत्व के गुण विकसित होते हैं। 4. उपसंहार: पढ़ाई के साथ-साथ खेल भी जरूरी हैं। आज खेल को करियर के रूप में भी अपनाया जा रहा है। अतः हमें प्रतिदिन खेलना चाहिए।
विद्यार्थी जीवन और अनुशासन
1. प्रस्तावना: अनुशासन का अर्थ है - 'नियमों का पालन करना'। विद्यार्थी जीवन मनुष्य के जीवन की नींव है, इसलिए इसमें अनुशासन का होना अत्यंत आवश्यक है। 2. अनुशासन का महत्त्व: अनुशासित विद्यार्थी समय का पाबंद होता है। वह बड़ों का आदर करता है और अपनी पढ़ाई पर ध्यान देता है। बिना अनुशासन के कोई भी छात्र सफलता के शिखर पर नहीं पहुँच सकता। 3. सफलता की कुंजी: प्रकृति भी अनुशासन में काम करती है (सूर्य, चाँद का निकलना)। जो विद्यार्थी आलस्य त्यागकर अनुशासन में रहता है, उसका भविष्य उज्ज्वल होता है। 4. उपसंहार: अनुशासन देश और समाज की उन्नति के लिए जरूरी है। विद्यार्थियों को इसे अपने जीवन में उतारना चाहिए।
जल ही जीवन है
1. प्रस्तावना: जल के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। मनुष्य, पशु-पक्षी और पेड़-पौधे सभी को जीवित रहने के लिए जल की आवश्यकता होती है। 2. जल की उपयोगिता: जल पीने, भोजन पकाने, सफाई, सिंचाई और बिजली बनाने के काम आता है। पृथ्वी का 70% भाग जल है, पर पीने योग्य पानी बहुत कम है। 3. जल संकट: बढ़ती जनसंख्या और प्रदूषण के कारण पीने का पानी कम होता जा रहा है। नदियाँ सूख रही हैं। 4. उपसंहार: हमें पानी की एक-एक बूँद बचानी चाहिए। वर्षा जल संचयन करना चाहिए और जल को प्रदूषित होने से रोकना चाहिए, क्योंकि 'जल है तो कल है'।
विज्ञान की देन (चमत्कार)
1. प्रस्तावना: आज का युग विज्ञान का युग है। सुई से लेकर हवाई जहाज तक सब विज्ञान की देन है। इसने हमारे जीवन को बहुत सरल बना दिया है। 2. वरदान: विज्ञान ने हमें बिजली, मोबाइल, इंटरनेट, कंप्यूटर और तेज यातायात के साधन दिए हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में विज्ञान ने असाध्य रोगों का इलाज ढूंढकर जीवन बचाया है। 3. अभिशाप: विज्ञान के दुरूपयोग से परमाणु बम जैसे विनाशकारी हथियार भी बने हैं। प्रदूषण भी बढ़ा है। 4. उपसंहार: विज्ञान एक अच्छा सेवक है पर बुरा मालिक। यदि हम इसका सदुपयोग करें तो यह मानव जाति के लिए वरदान है।